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Mary Kom Biography in Hindi – भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम की जीवनी

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भारतीय महिला मुक्केबाज, Mary Kom (मैरी कॉम) का नाम तो आपने सुना ही होगा। इनके ऊपर बॉलीवुड में एक फिल्म भी बनी है। इस फिल्म में मुख्य किरदार में आपको प्रियंका चोपड़ा नजर आई थी। मैरी कॉम ने महिला मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीता है। मेरी कॉम का पूरा नाम मंगते चुगनेइजांग मैरी कॉम है। इसके अलावा भी मेरी कॉम को बहुत सारे नामों से जाना जाता है जैसे Magnificent Mary, boxing girl, golden boxing girl आदि।

मैरी कॉम को इन सारे नाम अपनी बॉक्सिंग की काबिलियत के चलते मिले हैं। मैरी कॉम का जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर के चुडचनपुर जिले के कंग थाई में हुआ था। इनमें ज्यादातर लोग मेरी कॉम नाम से ही इस जानते हैं। यह भारतीय महिला मुक्केबाज है। वह मणिपुर भारत की मूल निवासी है।मैरी कॉम ने 8 बार विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की विजेता भी रह चुकी है।

साल 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक जीता था।साल 2010 के एशियाई खेलों में कांस्य तथा 2015 के एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया है।

2 वर्षों के अध्ययन प्रोत्साहन अवकाश के बाद उन्होंने वापसी करके लगातार चौथी बार विश्व गैर व्यावसायिक बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक जीता है। उनकी इस उपलब्धि से प्रभावित होकर के AIBA (ALL INDIA BOXING ADMINISTRATION) ने उनका नाम “Magnificent Mary” से संबोधित किया है।

इनके जीवन के ऊपर एक फिल्म भी बनी जिसका प्रदर्शन साल 2015 में हुआ। इस फिल्म में मुख्य किरदार प्रियंका चोपड़ा ने निभाया है। आज मैरी कॉम हर भारतीय महिला के लिए एक प्रेरणा बन गई है। उन्होंने कड़ी मेहनत से अपनी यह सफलता पाई है।

मैरी कॉम की जीवनी – Biography of Mary Kom in Hindi

मैरी कॉम का प्रारंभिक जीवन

मैरी कॉम का जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर के चुराचंदपुर जिले में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा Loktak Christian model school में हुआ है। आगे की पढ़ाई उन्होंने St. Xavier school से की है। अपने विश्वविद्यालय की डिग्री उन्होंने आदिम जाति हाई स्कूल, इंफाल से की लेकिन परीक्षा में भी फेल होने के बाद उन्होंने स्कूल छोड़ दिया फिर राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से परीक्षा दी।।बचपन से ही मैरीकॉम की रुचि खेलकूद में काफी ज्यादा थी। इसलिए बचपन से ही वह एक एथलीट बनना चाहती थी। Mary Kom biography

उनके मन में बॉक्सिंग के लिए आकर्षण सबसे पहले साल 1999 में उस समय उत्पन्न हुआ जब उन्होंने खुमान लंपक स्पोर्ट्स कंपलेक्स में कुछ लड़कियों को बॉक्सिंग रिंग में लड़कों के साथ बॉक्सिंग के दांव पर आजमा के देखा था। मैरी कॉम एक इंटरव्यू में यह बताती है कि “मैं वह नजारा देखकर स्तब्ध रह गई, मुझे लगा कि जब वे लड़कियां बॉक्सिंग कर सकती है तो मैं क्यों नहीं?” इसके बाद मैरी कॉम बॉक्सिंग में अपना करियर बनाने के लिए लग गई।

साल 2000 में जब मणिपुर राज्य की बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती और उनकी फोटो अखबार में छपी तब ही पिता एवं अन्य परिवार के सदस्यों को पता चला कि उनकी बेटी मुक्केबाज है। इसी बीच उनका विवाह के आनलर कॉम से कर दी गई उनके दो जुड़वा बेटे भी हैं।

साल 2002 में टर्की में आयोजित 45 किलोग्राम श्रेणी में गोल्ड मेडल उन्होंने जीता है। साल 2003 में भारत में आयोजित एशिया ह्यूमन बॉक्सिंग में भी गोल्ड मेडल जीता है। इसके बाद तो मैरी कॉम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार नॉर्वे, ताइवान तथा रूस में गोल्ड मेडल जीती रही। डेनमार्क में हुई महिला बॉक्सिंग का में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीता।बच्चों को जन्म देने के बाद उन्होंने 2 साल का अंतराल लिया और साल 2008 में भारत में बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल प्राप्त किया। साल 2012 में प्रथम बार महिला बॉक्सिंग को स्थान मिला, मैरी कॉम ने भाग लिया तो ब्रॉन्ज मेडल ही जीत सकी। Mary Kom biography

उनके साथी मणिपुर बॉक्सर डिंगो सिंह की सफलता ने भी उन्हें बॉक्सिंग की और काफी ज्यादा आकर्षित किया।

मेरी कॉम की शादी ओन्लर कॉम से हुई है। उनके दो जुड़वा बच्चे भी हैं। उनके बच्चे होने के बाद भी उन्होंने बॉक्सिंग करने नहीं छोड़ी। मैरी कॉम ने साल 2001 में पहली बार नेशनल वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती है। अब तक उन्होंने 10 राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी है।बॉक्सिंग में देश का नाम रोशन करने के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया और साल 2006 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। साल 2001 में ही उन्हें भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रतन पुरस्कार के लिए चुना गया था। Mary Kom biography

लंदन में समर ओलंपिक्स में समापन समारोह में उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराया था। मणिपुर सरकार ने उन्हें ₹5000000 तथा 2 एकड़ जमीन इनाम में दी थी। अपने मुक्केबाजी के 2001 से 2012 के काल में मैरीकॉम द्वारा जीते गए मेडल्स की सूची बहुत लंबी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 18 मेडल जिनमें से 14 में फर्स्ट, तीन में सेकंड तथा एक में थर्ड स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने 10 मेडल जीतने का श्रेय प्राप्त है।

मैरी कॉम की उपलब्धियां

  1. साल 2013 में स्पोर्ट्स के लिए पदम विभूषण
  2. साल 2003 में अर्जुन अवॉर्ड
  3. साल 2005 में पदम श्री
  4. साल 2009 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड
  5. साल 2007 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स
  6. साल 2008 में CNN-IBN तथा रिलायंस का रियल हीरोज अवार्ड
  7. साल 2008 में Pepsi Youth Icon award
  8. साल 2010 में सहारा स्पोर्ट्स अवॉर्ड
  9. अपनी उपलब्धियों के लिए मणिपुर सरकार के अतिरिक्त राजस्थान, असम, अरुणाचल सरकारों ने भी पुष्कर राशियां प्रदान की है। मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स की ओर से उन्हें ₹1000000 तथा नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल की ओर से 40 लाख रुपए की राशि भी दी गई है।

बछेंद्री पाल की जीवनी। Biography of Bachendri Pal in Hindi

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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी (पर्वत श्रंखला) पर चढ़ने वाली पहली महिला “बछेंद्री पाल” है। आपने उनके बारे में किताबों में जरूर पढ़ा होगा। माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर साल 1984 में विजय पताका फहराने वाली प्रथम भारतीय पर्वतारोही महिला है। भारत के बचेंद्री पाल के पूर्व विश्व की केवल 4 महिलाएं ही माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त कर चुकी है। बचपन से ही साहसी रही बचेंद्री पाल को बचपन से ही गढ़वाल के हिमालय में घूमने में बड़ा आनंद आता था। बचपन से ही उनके सपने ऊंचे थे।

बचेंद्री पाल (Bachendri pal) का जन्म 24 मई 1954 को नाकुरी उत्तराखंड में हुआ था। उनके पिता का नाम किशन सिंह और मां का नाम हनसा देवी था। उनके पिता उत्तराखंड मे चावल, दाल, आटा जैसी चीजों को घोड़े में लादकर के तिब्बत ले जाया करते थे। इस प्रकार बॉर्डर में ही अपना व्यापार करते थे।बाद में उनके पिता उत्तरकाशी में बस गए और वहीं पर उनका विवाह हो गया। उनके 5 बच्चों में बछेंद्री पाल बीच की संतान थी।

बचेंद्री पाल का जन्म नाकुरी उत्तरकाशी, उत्तराखंड में हुआ था। उनके पिता एक साधारण व्यापारी थे। बचेंद्री पाल ने b.ed तक की पढ़ाई पूरी की है। मेधावी और प्रतिभाशाली होने के बावजूद उन्हें शुरुआती समय में कोई रोजगार नहीं मिला। जो भी रोजगार उन्हें मिला व अस्थाई, जूनियर स्तर का था और वेतन भी बहुत कम था। इससे बचेंद्री पाल को काफी निराशा हुई और उन्होंने नौकरी करने के बजाए ” Nehru Institute of Mountaineering” कोर्स के लिए आवेदन कर दिया। इसके बाद उन्हें कई सारे मौके मिले।
साल 1983 में एडवांस कैंप के तौर पर उन्होंने गंगोत्री और कई माउंटेंस पर चढ़ाई की।बचेंद्री पाल एक ठोस निश्चय वाली महिला है कि बर्फ में लिपटे जाने के बाद भी उनके एवरेस्ट फतह करने का इरादा खत्म नहीं हुआ और उन्होंने अपने पूरे जोश के साथ आखिरकार एवरेस्ट पर अपनी पढ़ाई पूरी की।

बछेंद्री पाल ना केवल पर्वतारोहियों और खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा रही है, ना केवल सामाजिक और महिला सशक्तिकरण में काम करने वाले लोगों के लिए, बल्कि एक सपने को पाने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देने वाली महिलाओं में से एक में गिनी जाती है।

बचेंद्री ने अपने अभियान के बारे में बात करते हुए बताया है कि, “मैंने पहाड़ों की पूजा की है”। सहयोग से, उसके परिवार द्वारा पूजा की किए जाने के बाद भी, पहाड़ों को बचपन में बछेंद्री के लिए मना किया गया था।पहाड़ों पर जाने के लिए उसे खुद के बहुत ही सहज विद्रोह आदमी को पूरा करना था।

बछेंद्री पाल का प्रारंभिक जीवन

बचेंद्री पाल का जन्म उत्तराखंड में गढ़वाल के एक सुदूर क्षेत्र नकुरी नामक गांव में हुआ था, बचेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को एक छोटे व्यापारी श्री किशन सिंह पाल के यहां हुआ था। उनके पिता एक छोटे व्यापारी थे, जो कि आटा, दाल चावल, इत्यादि चीजों को तिब्बत के बॉर्डर तक पहुंचाते थे।

बछेंद्री पाल ने अपने इंटरव्यू में यह बताया है कि उनके पिता की माली हालत इतनी अच्छी नहीं थी फिर भी उन्होंने उनकी अच्छी खासी देखभाल एवं परवरिश की है।

उनकी सात भाई बहन थे। जिनमें से बचेंद्री पाल मध्य थी। उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन में कई घटनाओं का सामना किया है। उन्होंने अपनी पढ़ाई लिखाई करने के लिए सिलाई कढ़ाई का काम भी किया। इन परिस्थितियों से गुजरने के बाद भी बचेंद्री पाल का विश्वास कभी नहीं डगमग आया है। उन्होंने अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा प्रकट की और अपने महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अपनी मां को एक प्रेरणा स्रोत के रूप में देखा।

बचेंद्री पाल ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि उनका पहला ट्रैकिंग का अनुभव तब हुआ था जब वह अपने स्कूल की पिकनिक के लिए गई थी। जिसमें उन्होंने 13000 फीट तक की ऊंचाई ट्रैक किया था। उनकी स्कूल के प्रिंसिपल ने शिक्षाविदों और पाठ्यतेर गतिविधियों में उनके अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें उच्च अध्ययन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया था।
अपने गांव की पहली स्नातक थी। उनके परिवार को इस उपलब्धि पर काफी गर्व था। वे चाहते थे कि बचेंद्री पाल शिक्षक के रूप में सरकारी नौकरी पकड़े और एक सामान्य जीवन जी सके।

पर्वतारोहण बचेंद्री पाल का जुनून और पैशा

उनका परिवार यह चाहता था कि बचेंद्री पाल अच्छी शिक्षा ग्रहण करके शिक्षक की नौकरी करें। इस चलते बछेंद्री पाल ने b.ed की डिग्री हासिल की। लेकिन वह सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर पाई। उन्हें जो भी नौकरी मिली वहां अस्थाई और जूनियर स्तर का था।

उन्होंने संस्कृत में मास्टर डिग्री भी हासिल की है। उसके बाद उनके माता-पिता द्वारा एक स्कूल शिक्षक का कैरियर बनाने की मांग की गई। लेकिन बचेंद्री ने विद्रोह कर दिया।बछेंद्री पाल हमेशा से उन पूर्वाग्रहों का तिरस्कार करती थी जो लड़कों के साथ पेश किए जाते थे। लड़कियों की स्वतंत्रता इच्छा को दबा देते थे।

निश्चित रूप से इस मार्ग ने उन्हें मजबूत बनाया और अपनी मंजिल को पाना का इरादा और भी मजबूत हो गया। उन्होंने साल 1983 में एक खुद को नेहरू इंस्टीट्यूट आफ माउंटेनियरिंग में दाखिला दिलाया।इसी के कारण गंगोत्री पर्वतमाला और गढ़वाल पर्वतमाला में एक चोटी के पर्वतारोहण के लिए उनका मार्ग प्राप्त हुआ और उसने महिला पर्वतारोही के लिए एक साहसिक स्कूल, नेशनल एडवेंचर फाउंडेशन में पर शिक्षक के रूप में कार्य करना शुरू किया।

इसके बाद उन्होंने साल 1984 में माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए भारत की पहली मिश्रित लिंग टीम में चुने जाने से पहले कई एवरेस्ट अभियानों के लिए चुना गया था। इस खबर के बारे में पता चलने पर वह काफी उत्साह और रोमांच से भर गई थी। यहां से भारतीय महिलाओं की टीम थी, जिनमें अन्य 11 पुरुष भी शामिल थे। यह उनके लिए सपने सच होने जैसा था।

बछेंद्री पाल का माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई और पहली भारतीय महिला बनना

साल 1984 में ही, उनकी टीम ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई शुरू कर दी थी। हम सभी जानते हैं प्रकृति जितनी खूबसूरत दिखती है उतनी कठोर भी होती है। प्रकृति ने उनकी टीम के लोगों का कठिन से कठिन परीक्षा ली। जब अभियान के दौरान एक समय उनका टीम सो रहा था तो बर्फ का स्खलन हुआ जिससे उनका समूह वर्ग में दब गया।

इसमें बचेंद्री पाल बर्फ के नीचे दब गई थी, उनकी को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। तविक्षा गर्मी ने फुर्ती दिखा करके बर्फ से उन्हें निकाला। इस खतरनाक अनुभव ने अन्य 5 महिलाओं और अभियान दल के कुछ पुरुषों को चोटिया थकान के कारण अपनी यात्रा को छोड़ने के लिए मजबूर किया। अब,अभियान को जारी रखने के लिए कुछ पुरुष सहयोगियों के साथ वह अकेली माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए निकल पड़ी।

उन्होंने अपनी पुस्तक “एवरेस्ट माय जर्नी टू द टॉप” मैं बताया है कि किस तरह से उन्होंने अपने डर का सामना किया। और हनुमान चालीसा का जब किया और साहस जुटाया तब कठोर बर्फ में उन्हें लकवा भी हो गया था।

बचेंद्री पाल भारत की प्रथम ऐसी महिला है जिन्होंने एवरेस्ट पर्वत पर विजय प्राप्त की है। उनका स्थान विश्व में पांचवा है।उन्होंने महिलाओं के पर्वतारोही दल का एवरेस्ट अभियान पर नेतृत्व किया था। साल 1994 में उन्होंने गंगा राफ्टिंग की। यह रेफरिंग उन्होंने हरिद्वार से कोलकाता तक महिला दल का नेतृत्व करते हुए हिमालय पर्वतारोहण किया। बचेंद्री पाल का नाम साल 1990 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। साल 1985 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री देकर सम्मानित किया है। साल 1986 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार दिया गया। उन्होंने एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद एक किताब भी लिखी है ” Everest – My journey to Top” जो काफी लोकप्रिय भी हुई।बचेंद्री पाल एक अत्यंत लोकप्रिय खेल प्रेमी है जिन्होंने अपने क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

बछेंद्री पाल की अन्य उपलब्धि एवं अभियान

साल 1984 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की उपलब्धि हासिल करने के बाद भी बचेंद्री पाल नहीं रुकी। बल्कि, उन्होंने कई अभियानों में सफलतापूर्वक नेतृत्व किया और भाग लिया।
हमने नीचे बचेंद्री पाल के कुछ प्रमुख अभियानों का एक संक्षिप्त सारांश दिया है:-

  1. साल 1993 में, उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचने के लिए सभी महिलाओं के अभियान का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है। इस अभियान में 8 विश्व रिकॉर्ड बना करके भारतीय पर्वतारोहण के लिए एक नए मापदंड स्थापित किए हैं।
  2. साल 1994 में, बचेंद्री पाल ने फिर से इतिहास रचा,जब उन्होंने तीन रास्तों में 18 डॉक्टर्स की एक महिला टीम का नेतृत्व किया और हरिद्वार से कोलकाता तक गंगा नदी में, उन 40 दिनों में 2155 किलोमीटर की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की।
  3. 8 महिला ट्रैकर्स की एक टीम ने 225 दिनों में 4500 किलोमीटर की यात्रा की अरुणाचल प्रदेश में हिमालय के पूर्व भाग से सियाचिन ग्लेशियर पर हिमालय के पश्चिमी भाग तक की यात्रा की।
  4. साल 1999 में,“विजय रैली टू कारगिल” अभियान का नेतृत्व किया, जहां महिला पर्वतारोहियों के कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली से कारगिल तक मोटरसाइकिल से यात्रा की।
  5. साल 2008 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर चढ़ने के लिए भी महिलाओं के अभियान का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है।
  6. साल 1986 में यूरोप की सबसे ऊंची चोटियों में से एक क्लाइंबेड माउंट ब्लैंक पर भी चढ़ाई की है।
  7. साल 1988 में माउंट श्री क्लास में टाटा के अभियान का नेतृत्व किया।
  8. साल 1992 में अमाउंट मामोस्तंग कांगाडी और माउंट शिवलिंग के लिए भी महिलाओं के अभियान का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है।

उन्होंने वाकई ही कभी हार नहीं मानी है। उनकी इस सफलता को नेशनल बुक ट्रस्ट ने एक किताब के रूप में उनकी आत्मकथा माय जर्नी टू द टॉप नामक में प्रकाशित की है। बचेंद्री पाल की एवरेस्ट यात्रा को एनसीईआरटी की नवी कक्षा की हिंदी पाठ्यपुस्तक पर भी शामिल किया गया है।

Blogging शुरू करने के लिए किन चीजों पर खर्च करने होते हैं?

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किसी भी व्यक्ति के लिए वेबसाइट या ब्लॉग होना उतना ही जरूरी है, जितना कि आप अपने लिए सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाते हैं। ब्लॉक बनाकर के ब्लॉगिंग करने से आप अपनी जानकारी लोगों के साथ में साझा करते हैं। भारत में से कई बड़े-बड़े ब्लॉगर है जो ब्लॉगिंग के माध्यम से अच्छी खासी कमाई भी करते हैं। इनमें से बहुत से ब्लॉगर full time blogger है, तो कई part time blogger आप दोनों में से किसी भी विकल्प का चुनाव कर सकते हैं और अपनी ब्लॉगिंग कैरियर की शुरुआत कर सकते हैं। लेकिन ब्लॉगिंग कैरियर की शुरुआत करने से पहले आपको इस बारे में जानकारी होनी चाहिए कि “Blogging शुरू करने के लिए आपको किन किन चीजों की जरूरत पड़ेगी”। How to start a blogging career in Hindi

अगर आप एक Newbie है, आपको यह जानकारी चाहिए कि आप किस तरह से ब्लॉगिंग कैरियर की शुरुआत कर सकते हैं। तो, हम आज अपने इस पोस्ट में इस बारे में चर्चा करेंगे कि आप किस तरह से अपने लिए ब्लॉग बना सकते हैं। ब्लॉग बनाने के लिए आपको किन-किन चीजों पर खर्चा करना पड़ता है।

Blogging शुरू करने के लिए किन चीजों पर खर्च करने होते हैं? – How to start a blogging career in Hindi

अपने लिए ब्लॉग या वेबसाइट बनाने से पहले आपको कुछ मूलभूत चीजों की आवश्यकता होती है। सबसे पहले आपको कंप्यूटर संबंधित थोड़ी बहुत जानकारी होना आवश्यक है। अगर आप कंप्यूटर से संबंधित अधिक नहीं जानते हैं तो भी आप अपने लिए आसानी से ब्लॉग बना सकते हो।

अपने लिए ब्लॉग बनाने के लिए आपको ज्यादा माथा पच्ची करने की जरूरत नहीं है। आप, दुनिया को कुछ बताना चाहते हो या दुनिया के साथ में अपनी जानकारियों को साझा करना चाहते हैं। ब्लॉगिंग एक अच्छा माध्यम साबित हो सकता है। जिससे आप अपनी जानकारी, अपनी बात दुनिया के सामने रख सकते हैं। या फिर अगर आप किसी विषय में अच्छी खासी जानकारी रखते हैं। उस जानकारी को आप दुनिया के साथ में साझा करना चाहते हैं या फिर आप इंटरनेट का इस्तेमाल करके कुछ पैसे कमाना चाहते हैं। तो भी आप अपने लिए ब्लॉग बना करके ऐसा कर सकते हैं।

अगर आप हमारा यह आर्टिकल पढ़ रहे हैं। तो आप जरूर ब्लॉग या अपने लिए वेबसाइट बनाने के बारे में सोच रहे होंगे। अगर आप एक Newbie है और आपको यह नहीं पता है कि आप किस तरह से अपने लिए blog बनाने की शुरुआत कर सकते हैं। तो हमारी यह सलाह रहेगी कि आप अपने लिए ब्लॉग बनाने की शुरुआत e-blogger या blogspot या WordPress से फ्री ब्लॉग बना करके शुरुआत कर सकते हैं।

अब ब्लॉगिंग की शुरुआत फ्री ब्लॉग जैसे कि गूगल ब्लॉगर या वर्डप्रेस शुरुआत कर सकते हैं। जब आपको यह लगे कि आप ब्लॉगिंग के क्षेत्र में अब काफी कुछ जानते हैं और custom domain name के साथ अपना एक अलग ब्लॉग को पहचान दिलाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले Domain name की आवश्यकता पड़ती है। जो आप फ्री ब्लॉगिंग जैसे कि गूगल ब्लॉगर जिसे blogspot या वर्डप्रेस पर आपको subdomains के साथ में ब्लॉग बनाने की अनुमति देता है।

लेकिन, custom domain आपको इंटरनेट पर एक पहचान और एक अलग प्लेटफार्म उपलब्ध कराती है। इसलिए अगर आप इंटरनेट पर ब्लॉक बना करके अपनी एक अलग पहचान और अपने आर्टिकल के लिए traffic लाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले top level domain खरीदना होगा।

जैसे कि हमने अपने इस डोमेन नेम को मात्र ₹200 में खरीदा था। इसके अलावा हमने बहुत सारे डोमेन नेम खरीदे हैं। लेकिन कोई खास डोमेन नेम आप अपने ब्लॉग के थीम यानी कि आपका ब्लॉग किस जानकारी से आधारित है। के आधार पर ही खरीदें।

आप Top level domain name , GoDaddy, Namecheap और बहुत से इंटरनेट पर ऐसी वेबसाइट है जो डोमेन नेम रजिस्टर करने की सुविधा देती है। आप वहां से सस्ते दामों पर डोमेन नेम खरीद सकते हैं। How to start a blogging career in Hindi

चलिए यह तो रही आप अपनी blog की शुरुआत कैसे करेंगे? और आप किस तरह से custom domain name खरीदेंगे। चलिए अब हम मुख्य बिंदु पर आते हैं। क्योंकि ब्लॉग की शुरुआत करने के लिए आपको केवल डोमेन नेम की आवश्यकता नहीं पड़ती इसके अलावा आपको और भी बहुत सारी चीजों की जरूरत होती है तभी आप जाकर के सफलतापूर्वक एक वेबसाइट या ब्लॉग को चला सकने में सक्षम होंगे।

Blog बनाने के लिए आपको निम्नलिखित चीजों की जरूरत होगी

जैसा कि हमने इस बात का पहले ही जिक्र कर लिया है कि आप अपने ब्लॉगिंग कैरियर की शुरुआत फ्री ब्लॉग जोकि blogspot, WordPress से शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आप इंटरनेट की दुनिया में अपनी एक अलग ही पहचान बनाना चाहते हैं तो आपको अपने लिए एक top level domain की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा भी आपको बहुत सारी चीजों की जरूरत पड़ती है जो कि हमने नीचे दिया है:-

  1. Top Level Domain
  2. Web hosting
  3. Premium themes
  4. Premium tools and Plugins

Top Level Domain

ब्लॉग की शुरुआत करने के लिए, आप अपने लिए एक डोमेन खरीद सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आप इंटरनेट पर अपनी एक अलग पहचान बनाए तो आपको ब्लॉक की शुरुआत एक टॉप लेवल डोमेन से करनी चाहिए।

यह इंटरनेट पर आपको एक अलग पहचान देने के साथ-साथ आपके द्वारा लिखे गए कंटेंट को एक ब्रांड देता है।

इंटरनेट पर ऐसी बहुत सारी कंपनियां है जहां पर आप अपने हिसाब से Domain name, रजिस्टर करवा सकते हैं। यहां पर आपको डोमेन नेम ₹100 से लेकर के हजार 12 सो रुपए तक के मिल जाएंगे।

Web hosting

Domain name, के बाद जो सबसे जरूरी चीज Web hosting होती है। वैसे तो आप अपने द्वारा खरीदे गए डोमेन नेम का इस्तेमाल blogging platform जैसे कि e-blogger, और वर्डप्रेस के साथ भी कर सकते हैं। लेकिन इसमें बहुत सारी limitation होती है।

लेकिन अगर आप professional blogging करना चाहते हैं और ब्लॉगिंग के जरिए पैसे कमाना चाहते हैं तो हमारी याद सलाह रहेगी कि आप WordPress का premium platform का चुनाव करें।

हालांकि, WordPress फ्री प्लेटफार्म है, लेकिन ब्लॉगिंग के लिए आपको web hosting की आवश्यकता होती है। इसलिए डोमेन नेम खरीदने के बाद दूसरी चीज जो आपको सबसे ज्यादा जरूरी चीज है वह Web hosting ही है। How to start a blogging career in Hindi

Premium Themes

अगर आपने अपने लिए web hosting खरीदनी है तो दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज जो आपको अपने ब्लॉग चलाने के लिए जरूरी है। वह आपकी वेबसाइट की themes , यह आपके वेबसाइट को इंटरनेट पर एक अलग ही look प्रदान करता है।

वैसे तो अगर आपने वर्डप्रेस पर अपनी वेबसाइट बनाई है। आपको यहां पर फ्री में कई सारे थीम्स मिल जाएंगे। लेकिन इन थीम्स को आप एक हद तक ही customise कर सकते हैं।

अगर आपको अपने मन मुताबिक अपने तीन को कस्टमर्स करना है तो आप को premium theme की जरूरत पड़ती है। Premium theme के लिए आपको पैसे चुकाने पड़ते हैं। इंटरनेट पर ऐसे बहुत सारे वेबसाइट मौजूद हैं जो आपको प्रीमियम थीम खरीदने के लिए सुविधा प्रदान करती है।

Premium theme कहां से खरीदें?

इंटरनेट पर अगर आप गूगल सर्च करके “WordPress premium theme buy” लिख करके सर्च करेंगे तो आपको बहुत सारे ऐसे वेबसाइट मिल जाएंगी जहां पर आप अपने वर्डप्रेस के लिए एक प्रीमियम थीम खरीद सकते हैं। आपको मैं नीचे कुछ ऐसे ही प्रीमियम थीम Shop की लिस्ट बता रहा हूं:-

यह कुछ थीम्स है जिनका इस्तेमाल ज्यादातर ब्लॉगर अपने ब्लॉग के लिए करते हैं। यह सारे थीम SEO फ्रेंडली भी होते हैं। जो आपकी ही ब्लॉग या वेबसाइट की रैंक को बढ़ाने के लिए काफी मददगार होते हैं।

Premium Tools and Plugin

Premium tools and plugin, तो आपके वेबसाइट में इतना ही अहम भूमिका है झुकना की वेब होस्टिंग, थीम्स का होता है।

प्रीमियम टूल्स एंड प्लगइन आपके वेबसाइट को कस्टमाइज करने के साथ-साथ, आप अपनी वेबसाइट को लाइट और फास्ट बना सकते हैं। अपनी वेबसाइट की स्पीड बढ़ाने के लिए caching plugin का इस्तेमाल कर सकते हैं। अपनी वेबसाइट को SEO करने के लिए भी आप प्लगइन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर पैसों की दिक्कत ना हो तो आप अन्य चीजों पर भी investment कर सकते हैं?

इसके अलावा अगर आपको पैसों की कोई दिक्कत ना हो तो आप ब्लॉगिंग से संबंधित अन्य चीजों पर भी इन्वेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए आप अपने ब्लॉग को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर सकते हैं।इसके लिए आपको निम्नलिखित चीजों पर खर्च करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

  • Web developer – से आप अपने वेबसाइट को बनवा सकते हैं। और उसे एक अच्छा design करवा सकते हैं।
  • Premium themes and tools अपने वेबसाइट पर लगा सकते हैं।
  • Content writer को Hire कर सकते हैं। अपनी वेबसाइट या ब्लॉग के लिए SEO friendly कंटेंट और पोस्ट लिखवा सकते हैं।
  • SSL CERTIFICATE लगा कर के अपने वेबसाइट को अपने विजिटर के लिए और अधिक सिक्योर कर सकते हैं।

हम नहीं आ पाए आपको इस बारे में जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश की है कि किसी भी blog या website को बनाते वक्त आपको किन किन चीजों की जरूरत पड़ती है। उम्मीद करता हूं कि आपको हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी पसंद आई होगी। इससे संबंधित अगर आपकी कुछ सवाल है तो आप हमें comment box पर कॉमेंट करके सवाल पूछ सकते हैं।अगर आपको हमारे द्वारा दी गई है जानकारी ज्ञानवर्धक लगी तो आप इसे share करना मत भूलिए।

Net Banking (नेट बैंकिंग) क्या होता है? नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कैसे करें?

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इस आधुनिक जमाने में, हर क्षेत्र में काफी तरक्की हुई है। बैंकों में किया जाने वाला ट्रांजैक्शन डिजिटल तौर पर कहीं से भी कर सकते हैं। बैंकों ने अपने ग्राहकों को और अधिक सुविधा प्रदान किया है। नेट Net Banking एक ऐसा ही तरीका है जिसकी सहायता से आप अपने घर बैठे ही पैसों को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं। नेट बैंकिंग (Net Banking) क्या होता है?

नेट नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने के लिए आप अपनी एक बैंक से संपर्क कर सकते हैं और इसे एक्टिवेट करवा सकते हो। तथा फिर किसी प्रकार की से आप नेट बैंकिंग की सुविधा के माध्यम से और भी बहुत सारी कार्य को करने में सक्षम हो जाते हैं। आज हम अपने इस पोस्ट में नेट बैंकिंग से जुड़ी चीजों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने वाले हैं। ताकि आप नेट बैंकिंग का पूरा लाभ उठा सके और घर बैठे ही अपने बैंक का सारा काम कंप्यूटर या अपने स्मार्टफोन के माध्यम से कर सकें।

Internet banking या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आपके पास में इंटरनेट की सुविधा होनी चाहिए। भारत में डिजिटल क्रांति के बाद हर व्यक्ति के हाथों में स्मार्टफोन के माध्यम से इंटरनेट की पहुंच आ चुकी है। ऐसे में लोग घर बैठे ही इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करके बैंकिंग संबंधी कार्यों को अपने घरों से ही कर लेते हैं। छोटी मोटी लेनदेन, या बैंक के सामान्य कार्यों को आप आसानी से इंटरनेट बैंकिंग की सहायता से कर सकते हैं। जैसे कि – पैसों का ट्रांजैक्शन, NEFT/RTGS , cheque Book यीशु करना, stop payment, monthly statement, FD (fixed deposit) and RD (recurring deposit) खाते आप आसानी से इंटरनेट बैंकिंग की सहायता से अपने लिए खोल सकते हैं। तो, चलिए जानते हैं कि नेट बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग क्या होती है?

Net Banking या Internet Banking क्या होता है?

Net Banking या Internet Banking बैंकों द्वारा अपने ग्राहक को दी जाने वाली एक ऐसी सुविधा है। जिसकी सहायता से आप अपने घर बैठे ही, बैंकिंग सेवाओं का आनंद उठा पाते हैं। यानी कि आप नेट बैंकिंग की सहायता से बहुत सारे बैंक संबंधित कार्यों को आप इंटरनेट के माध्यम से अपने घर में ही कर सकने में सक्षम होते हैं।

नेट बैंकिंग इंटरनेट बैंकिंग लेने के लिए आपको अपने बैंक से संपर्क करने की आवश्यकता होती है। एक बार जब आपका नेट बैंकिंग किया इंटरनेट बैंकिंग एक्टिवेट कर दिया जाता है। इसके बाद आप नेट बैंकिंग की सहायता से पैसों की लेनदेन, और मूलभूत बैंकिंग कार्य का निष्पादन अपने घर बैठे ही कर सकते हैं। इसके अलावा आप सीधे, बैंकिंग संबंधित कार्यों को करने के लिए बैंक जाने की आवश्यकता नहीं होती है।

नेट बैंकिंग इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से आप किसी को भी पैसे भेज सकते हैं। आपके खाते में कितने पैसे हैं इस बारे में जानकारी भी ले सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको अपने लिए एक नया फिक्स डिपॉजिट अकाउंट या रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट खोलना है तो भी इंटरनेट बैंकिंग की सहायता से खोल सकते हैं। इसके अलावा चेक बुक, पर आप स्टॉप पेमेंट (stop payment) लगा सकते हैं। आप अपने अकाउंट का monthly statement pdf फाइल के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। इन सारी चीजों के अलावा आप इंटरनेट पर ऑनलाइन खरीदारी करते वक्त इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करके, पैसों का भुगतान भी कर सकते हैं।

अब आपको यह, तो समझ में आ ही गया होगा इंटरनेट का इस्तेमाल आप किन किन चीजों पर करेंगे और कहां-कहां आपको इंटरनेट बैंकिंग की आवश्यकता पड़ती है।

Net Banking या Internet Banking के लाभ

हमने आपको ऊपर इस बारे में जानकारी दी है कि इंटरनेट बैंकिंग क्या होता है? Net Banking क्या है? नेट बैंकिंग का इस्तेमाल आप किन-किन कार्यों के लिए कर सकते हैं? बहुत सी छोटे-छोटे कार्यो के लिए भी आप और हम जैसे साधारण लोग बैंकों के भरोसे ही रहते हैं। लेकिन, इंटरनेट बैंकिंग के आ जाने के बाद आप छोटे छोटे कार्यों को अपने इंटरनेट के माध्यम से अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर पर भी आप करने के लिए सक्षम होते हैं। तो चलिए जानते हैं कि इंटरनेट बैंकिंग का क्या क्या लाभ है?

  • नेट बैंकिंग आपको सामान्य बैंकिंग कार्यों को घर बैठे करने में ही सहायता प्रदान करता है। जिसके चलते हमें बार-बार बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
  • हमें बैंकों की लंबी लाइन में खड़ा होना नहीं पड़ता।
  • हमें अपने खाते की जो भी जानकारी चाहिए हम इंटरनेट या नेट बैंकिंग की सहायता से अपने घर बैठे देख सकते हैं।
  • हम अपने बैंक खाते से कितना लेनदेन कर रहे हैं जो भी पासबुक में ब्यौरा होता है वह सारा आपका नेट बैंकिंग पर आ जाता है। यानी कि आप स्टेटमेंट (Monthly Statement) भी निकाल सकते हैं।
  • आप अपने सहूलियत के हिसाब से छोटे-मोटे लेनदेन नेट बैंकिंग की सहायता से कर सकते हैं।
  • आप कभी भी किसी वक्त किसी को भी पैसे भेज सकते हैं।
  • आपको कहीं पर भी शॉपिंग करनी है आपको पेमेंट करनी है तो आप नेट बैंकिंग की सहायता से कर सकते हैं।
  • नेट बैंकिंग (Net Banking) की सहायता से आप बिना बैंक जाए अपने लिए FD (fixed deposit), RD (recurring deposit) इत्यादि खातों को खोलने में भी सक्षम होते हैं।
  • फिक्स डिपाजिट खाते और रिकरिंग डिपॉजिट खाते में पैसे जमा करने के लिए भी हमें बैंकों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। आप नेट बैंकिंग की सहायता से auto cut payment या standing instruction दे सकते हैं। जिससे आपके पैसे हर महीने अपने आप कट करके खाते में जमा हो जाएंगे।

आपको यह जानकारी मिल चुकी है कि नेट बैंकिंग से आपको क्या क्या लाभ मिलता है। आप अपने बैंक से संपर्क करके नेट बैंकिंग की सुविधा ले सकते हैं। आज के आधुनिक युग में डिजिटल लेनदेन के लिए लोग नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं। जिसने, आप ग्राहकों के लिए बैंकिंग जैसी सुविधाओं को और भी आसान कर दिया है।

Net Banking कैसे ले?

Net Banking लेने के लिए आपको सबसे पहले अपने बैंक से संपर्क करना होगा। बैंक द्वारा आपके खाते पर नेट बैंकिंग को एक्टिवेट किया जाता है। इसके बाद आप खुद अपने बैंक की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर के Username and password बनाते हैं। यूजर नेम और पासवर्ड बनाने के बाद आप अपने बैंक से पुनः संपर्क करते हैं। इसके बाद बैंक अधिकारी आपके यूजर नेम और पासवर्ड को अप्रूव करेंगे। जिसके बाद आप इंटरनेट बैंकिंग या नेट बैंकिंग की सुविधा ले सकते हैं।

नेट बैंकिंग की सुविधा लेने के लिए, बैंकों के अपने-अपने Android app, Google Play Store पर भी मौजूद है। जहां से आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बस आपको यह android.app अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड करना पड़ेगा, या फिर आप सीधे अपने ब्राउज़र की सहायता से अपने बैंक की इंटरनेट बैंकिंग पर लॉगइन कर सकते हो। आप नेट बैंकिंग की सारी सुविधाओं का आनंद उठा सकते हैं।

Net Banking का का इस्तेमाल करते वक्त कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखें?

हर दिन अखबारों में आपको Cyber Crime की खबरें पढ़ने को जरूर मिल जाती है। इसलिए नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते वक्त आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होता है। नहीं तो, आपको धोखा या ठगा जा सकता है।

  • Net Banking का इस्तेमाल आप हमेशा अपने निजी कंप्यूटर या स्मार्टफोन पर ही करें। नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कभी भी आप public place जैसे कि cyber cafe में ना करें इससे आपकी details leak होने की chances रहते हैं ।
  • अब अपने नेट बैंकिंग के पासवर्ड को हमेशा चेंज करते रहें। जिससे कि आपका पासवर्ड hack होने का डर नहीं रहेगा।
  • Password बनाते वक्त आप इस बात का ध्यान रखें कि आपके पासवर्ड में Alphabet, special character (@,#,₹,:,(, etc) और numerals यानी कि नंबर जरूर हो। इस तरह के कंबीनेशन (combination) के पासवर्ड को strong password माना जाता है।
  • अपने पासवर्ड को किसी भी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा ना करें।
  • जिस भी device से आप नेट बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं उस पर आप एक अच्छा खासा antivirus जरूर इंस्टॉल करें।
  • इंटरनेट बैंकिंग या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते वक्त अगर आपको कोई परेशानी आती है तो आप तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें।

60 मजेदार रोचक तथ्य!

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दुनिया भर में ऐसे कई मजेदार रोचक तथ्य है, जिनके बारे में पढ़ करके काफी मजा तो आता ही है लेकिन इन मजेदार रोचक तथ्यों को के बारे में जानकर के आप अपनी जानकारी भी बढ़ा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं 60 मजेदार रोचक तथ्यों के बारे में:-

  1. आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि औसतन कोई भी इंसान 1 साल में 50 लाख बार सांस लेता है।
  2. मानव शरीर की त्वचा से प्रतिदिन 10 बिलियन उत्तक/कोशिकाएं गिरती है.
  3. जन्म के समय मानवी शरीर में लगभग 300 हड्डियां होती है। इंसान जैसे जैसे बड़ा होता है यानी कि व्यस्क होने तक शरीर में 209 हड्डियां ही रह जाती है।
  4. बचपन में आपने पेंसिल से जरूर लिखा होगा लेकिन क्या आपको पता है आप एक औसत HB पेंसिल से लगभग 35 मील लंबी लाइन खींच सकते हैं। इसके साथ ही आप 50 हजार से भी ज्यादा शब्दों को लिख सकते हैं।
  5. आपके शरीर में मौजूद हड्डियों में से एक चौथाई हड्डियां आपके पैरों में होती है।
  6. औसतन आदमी अपनी पूरी जिंदगी के 2 हफ्ते अपने जीवन भर में रेड ट्रैफिक सिग्नल के ग्रीन होने का इंतजार करने में बिताता है।
  7. अजवाइन को खाने में कितनी कैलोरी लगती है जितनी की अजवाइन से आपको कैलोरी नहीं मिलती।
  8. एक गधा रेत के दलदल में डूब सकता है परंतु एक खच्चर नहीं रुक सकता है।
  9. सबसे बड़ा हिमपात खंड (बर्फ गिरते समय बर्फ का टुकड़ा) 15 इंच चौड़ा और 8 इंच मोटा हो सकता है।
  10. कोड़े (Bullwhip) तीनों की गति इतनी तेज होती है कि इसकी आवाज किसी छोटे सुपर सोनिक बूम जैसी होती है।
  11. अमेरिका के मूल निवासी अपने बच्चों का पहला नाम उस चीज के नाम पर रखते हैं जिस चीज को वह अपने घर से बाहर निकलते ही सबसे पहले देखता है।
  12. पश्चिमी अफ्रीका के माध्यमिक जनजाति के लोग मर चुके मानव की खोपड़ी का इस्तेमाल फुटबॉल खेलने में करते हैं।
  13. कोको कोला का रंग हरा होता है अगर इसमें फूड कलर नहीं मिलाया होता।
  14. 17 वी सदी में तुर्की के सुल्तान ने अपने सैनिकों को अजीब सा आदेश दिया था। उसने अपने आदेश मैं कहा था कि मेरी सारी पत्नियों को पानी में डूबा दो और उनकी जगह नई औरतों को लेकर आओ।
  15. सीखते समय आपका दिल एक सेकेंड के लिए रुक जाता है।
  16. “Almost” सबसे लंबा अंग्रेजी शब्द है जिसमें सारे शब्द अल्फाबेटिकली क्रम में आते हैं।
  17. मानव शरीर की झांकी हड्डी किसी कंक्रीट से भी ज्यादा मजबूत होती है।
  18. आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि अगर आप को कॉकरोच का सर काट दे तू भी वह हफ्तों तक जिंदा रह सकता है।
  19. आंख खोलकर की छींक लगाना नामुमकिन होता है।
  20. अंग्रेजी के सभी शब्दों में “SET” के सबसे ज्यादा अर्थ निकलते हैं।
  21. दुनिया का सबसे पुराना चिंगम 9000 साल पहले बना था।
  22. पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिसका नाम किसी देवता के नाम पर नहीं रखा गया है।
  23. एक अध्ययन में वैज्ञानिक ने 3000 मील तक तितली का पीछा किया था।
  24. पृथ्वी विकास आग्रह है जिसका नाम किसी देवता के नाम पर नहीं रखा गया है।
  25. रेशम का कीड़ा 56 दिनों में अपने भार का 86 हजार गुना भोजन खाता है।
  26. अगर आधुनिक दुनिया के तनाव को हटा दिया जाए तो आदमी औसतन दिन में 10 घंटे सोएगा।
  27. 500 चमगादड़ ओं की एक कॉलोनी 1 घंटे में 250000 कीड़े मकोड़ों को खा सकती है।
  28. हर पांच में से एक विक्की का मानना है कि एलियन मानव शरीर में हमारे साथ पृथ्वी पर रह रहे हैं।
  29. प्राचीन जापान में चलती फिरती मालिश करने वालों का अंधा होना कानूनी रूप से आवश्यक है।
  30. एक औसतन अमेरिकी अपनी जिंदगी का आधा समय टीवी देखने में बिताता है।
  31. प्राचीन ग्रीक में जन्म नियंत्रण के लिए औरत को पालथी मारकर, सांस रोककर ,छींक मारने को कहा जाता था। हैरानी नहीं है उपाय बेअसर रहा है।
  32. दुनिया में कोई भी नीले रंग का फल नहीं है, यहां तक कि ब्लूबेरिज भी पर्पल यानी कि बैगनी रंग की होती है।
  33. हाथी एकमात्र ऐसा स्थान पाई जीव है जो कूद नहीं सकता है।
  34. अंगुलियों की छाप की तरह जिब की छवि सबकी अलग-अलग होती है।
  35. मुर्गी की सबसे लंबी उड़ान अब तक सिर्फ 13 सेकंड की है।
  36. मनुष्य द्वारा गाए जाने वाले पदार्थ में शहद या हनी एकमात्र ऐसा पदार्थ है जो कभी खराब नहीं होता है।
  37. दुनिया भर में 11% लोग बाएं हाथ से खाना खाते हैं।
  38. रुकी हुई घड़ी दिन में दो बार सही समय दिखाती है।
  39. सूअरों के लिए आकाश की तरफ देखना संभव नहीं होता है।
  40. यदि हम पृथ्वी से 10 प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक विशाल शीशा लगा दें और फिर टेलिस्कोप से उसी से में देखे तो सिद्धांत के हिसाब से 20 साल पीछे देख सकेंगे।
  41. संपूर्ण पृथ्वी का मानव केवल 40% हिस्सा ही देख पाता है।
  42. शनि ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा ‘टाइटन’ पर गुरुत्वाकर्षण बल इतना कम है कि मनुष्य अपनी बाजुओं पर पंख बांधकर पक्षी की तरह उड़ सकता है।
  43. नेपाल स्थित माउंट एवरेस्ट पर 200 से अधिक ला से हैं जो चोटी पर पहुंचने के लिए लैंड मार्क बन गई है।
  44. धरती का सबसे मजबूत जीवित जीव ‘Gonorhea’ है या अपने वजन से 100000 गुना ज्यादा वजन खींच सकता है।
  45. आइसलैंड देश की लड़कियों से शादी करने पर ₹300000 प्रति महीने की सरकारी नौकरी और आइसलैंड देश की नागरिकता फ्री में दी जाती है।
  46. यदि आपके शरीर में मौजूद डीएनए को खोल दिया जाए तो इसकी लंबाई 10 अरब मिल होगी। मतलब प्लूटो ग्रह पर चले भी गए और वापस भी आ जाएंगे।
  47. केले को कभी भी फ्रिज में नहीं रखा जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि यह हमेशा गर्म वातावरण में ही उगता है इसलिए फ्रिज में रखने पर यह खराब हो जाता है।
  48. पूरी दुनिया भर में सेब (Apple) की इतनी सारी प्रजातियां पाई जाती है कि अगर आप प्रतिदिन एक एक पल भी खाएं तो आपको 20 साल लग जाएंगे।
  49. पूरी जिंदगी में हमारा दिमाग लगभग 1000000 जीबी डाटा स्टोर करता है।
  50. एक शोध के अनुसार उल्टे हाथ से लिखने वाले लोग 3 साल पहले जल्दी मर जाते हैं।
  51. 40 से 45 मिनट पढ़ने के बाद 10 मिनट का ब्रेक लेने से पढ़ा हुआ याद रखने का सबसे कारगर तरीका है।
  52. High heels जो कि महिलाओं के लिए नहीं बल्कि पुरुषों के लिए बनाया गया था लेकिन इसके बाद इसे महिलाओं ने अपना लिया।
  53. चाय, पानी के बाद पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पिए जाने वाला पेय पदार्थ है।
  54. शिरडी से 60 किलोमीटर की दूरी पर बसे शनि सिंगनापुर गांव के लोग अपने घर बिना दरवाजे के बनाते हैं।
  55. यदियदि आप पाइनएप्पल का एक टुकड़ा मुंह में रखेंगे तो यह आपको ही खाना शुरु कर देगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें एक ऐसा प्रोटीन होता है जो मांस को घटाता है।
  56. ब्लू ब्लू व्हेल अपने मुंह में कितना पानी भर सकती है जितना उसके पूरे शरीर का वजन होता है।
  57. अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा कचरा अमेरिका ने फैलाया है उनके कचरों की संख्या 6000 से भी ज्यादा है जबकि भारत के कदमों की संख्या 100 के करीब है।
  58. हमारे हमारे शरीर की सबसे कठोर हड्डी हमारे जबड़े में होती है।
  59. धनुष्कोड़ी धनुष्कोड़ी भारत की अंतिम सड़क है जो रामेश्वरम में स्थित है।
  60. केले का वैज्ञानिक नाम मूसा सेपिनटम होता है जिसका अर्थ होता है कि – बुद्धिमान व्यक्ति का फल।
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