Home Blog

Vijay Hazare Biography in Hindi – विजय हजारे की जीवनी

0

“Vijay Hazare” विजय हजारे इनका नाम तो आपने जरूर सुना होगा। अगर आप क्रिकेट खेल प्रेमी है, तो इनके नाम से “विजय हजारे ट्रॉफी” मैच भी आयोजित किया जाता है। आज हम अपने इस लेख में महान क्रिकेटर रहे विजय हजारे के जीवन के बारे में विस्तृत से जानकारी लेंगे। Vijay Hazare Biography in Hindi

विजय हजारे ने सबसे पहले महाराष्ट्र की तरफ से रणजी ट्रॉफी में 18 वर्ष की उम्र में हिस्सा लिया था। इन्हें उस समय एक सुरक्षात्मक बल्लेबाज की संज्ञा भी दी गई थी। इंग्लैंड, के लोग विजय हजारे की बल्लेबाजी इतने प्रभावित हैं कि उन्होंने यह धरना रखी थी कि “जो स्थान ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट में ब्रैडमैन को प्राप्त है इंग्लैंड में ग्रेस को प्राप्त है वही अस्थान भारत में क्रिकेट में हजारे को मिलना चाहिए”। विजय हजारे रोमन कैथोलिक परिवार में पैदा हुए थे। उन्होंने क्रिकेट में बल्लेबाजी करते हुए 2000 से भी अधिक रन बनाने के साथ साथ गेंदबाजी में भी 20 विकेट अपने नाम किए थे।इससे बढ़कर यह गौरवशाली बात है कि भारत ने सबसे पहले उन्हीं के नेतृत्व में अपनी पहली टेस्ट विजय प्राप्त की थी। उनके सम्मान में ही घरेलू मैदान पर आयोजित की जाने वाली एक ट्रॉफी का नाम “विजय हजारे ट्रॉफी” दिया गया है।

Vijay Hazare Biography in Hindi – विजय हजारे की जीवनी

महान क्रिकेटर विजय हजारे (Vijay Hazare) का जन्म 11 मार्च 1915 में हुआ था। इन्होंने महाराष्ट्र की तरफ से पहली रणजी ट्रॉफी मात्र 18 वर्ष की आयु में हिस्सा लेकर के खेला था। इनके बल्लेबाजी को देख कर के लोगों ने इन्हें सुरक्षात्मक बल्लेबाज की संज्ञा भी दी थी। एनी की कप्तानी में भारत ने पहली बार टेस्ट सीरीज में विजय प्राप्त की थी।

विजय हजारे, को टेस्ट क्रिकेट में प्रवेश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था। इस दौरान जुड़े विश्व युद्ध के कारण उनके क्रिकेट केरियर के 10 बेहतरीन वर्ष भी बर्बाद हो गए थे। लेकिन साल 1946 में उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ हो रहे मैच में फिर से एक बार मौका मिला। लेकिन इससे पहले साल 1937 से साल 1938 तक इंग्लैंड की लॉर्ड टेनिस की टीम के खिलाफ अनाधिकृत टेस्ट मैचों में खेलते रहे। वहीं साल 1945 विषय में ऑस्ट्रेलिया में हुई सीरीज के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों में पहली एवं तीसरी राष्ट्रीय मंडल टीमों के खिलाफ भी कुल मिलाकर के 17 अनाधिकृत टेस्ट मैच खेलते रहे।

साल 1946 में हुए इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैचों में विजय हजारे ने पहले टेस्ट मैच में क्रमांक 31 एवं 34 रन ही बनाए थे, इसके अलावा उन्होंने इस मैच में 2 विकेट भी लिए थे।

विजय हजारे (Vijay Hazare) का क्रिकेट कैरियर

विजय हजारे द्वारा एडिलेड ओवल में सबसे यादगार पारी खेली गई। भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ साल 1946 से 1947 की संखला का चौथा टेस्ट मैच खेलते हुए इस टेस्ट मैच में भारत के एक पारी तथा 16 रन से हारी हुई परंतु हजारे ने दोनों पारियों में शतक जमाया था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुए इस टेस्ट मैच में उन्होंने क्रमश 116 और 145 रन बनाए थे। इतने रन बनाकर के ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हजारे को काफी प्रशंसा भी मिली थी। उनके प्रदर्शन को देखकर के लोग यह कहते थे कि हजारे एक ऐसे बल्लेबाज है जो उस समय लिंडवाने और किथमिलर जैसे गेंदबाज के सामने पूरे विश्वास के साथ बल्लेबाजी कर सकते हैं।

उस मैच को आज भी याद किया जाता है। उस समय ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी डॉन ब्रैडमैन कर रहे थे। ऑस्ट्रेलिया ने अपनी प्रथम पारी में 674 रन का विशाल स्कोर बनाया था। दूसरी तरफ भारतीय टीम 5 विकेट पर मात्र 133 रन ही बना सकी थी। ऐसे में पढ़कर के साथ विजय हजारे ने 188 रन की मैराथन साझेदारी निभाई किंतु पूरे भारतीय टीम 381 रन पर ही बिखर गया।दूसरी पारी में हजारे एकमात्र प्रतिरोध के रूप में उभरे और भारतीय टीम ने 277 रन पर आउट हुई। भारत में दोनों पारियों में शतक बनाने का श्रेय हजारे को ही दिया जाता है।

विजय हजारे के आलोचक यह मानते थे कि विजय हजारे काफी धीमी गति से खेलते हैं।साल 1991 से साल 1992 तक उन्होंने अपने पहले दोनों टेस्ट मैचों में शतक बनाया लेकिन अत्यंत धीमी रफ्तार से। अपने जीवन का सर्वोच्च स्कोर 164 रनों का था जो उन्होंने 8 घंटे 35 मिनट बल्लेबाजी करके बनाए थे। वहीं मुंबई टेस्ट मैचों में 155 रन बनाए जो उन्होंने 5 घंटों में बनाए थे। वही तीज भी खेले लेकिन अपवाद स्वरूप 1946 में हुए हॉलर के खिलाफ बड़ौदा के तरफ से खेलते हुए उन्हें 288 रन बनाने में मात्र 140 मिनट का समय लगा था। कुछ खेल समीक्षा उनके खेल से काफी निराश थे। लेकिन कुल मिलाकर उनकी तकनीक पर किसी ने उंगली उठाने की हिम्मत नहीं की। इस चलते विजय हजारे अपनी क्रिकेट खेल की तकनीकी को लेकर के भारतीय क्रिकेटरों के बीच काफी लोकप्रिय भी हुए थे।

विजय हजारे का क्रिकेट केरियर और व्यक्तिगत जानकारी

पूरा नामविजय सैमुअल हजारे (Vijay Samuel Hazare)
जन्म11 मार्च 1915, सगाली, मुंबई प्रेसिडेंसी ब्रितानी भारत
मृत्यु18 दिसंबर 2004, उम्र 89 वर्ष, बड़ौदा गुजरात भारत
बल्लेबाजी की शैलीदक्षिणी हस्थ
गेंदबाजी की शैलीदक्षिणी हस्थ मध्यम गेंदबाज
विजय हजारे
प्रतियोगिताटेस्ट मैचप्रथम श्रेणी
मैच30238
रन बनाए219218740
औसत बल्लेबाजी47.6558.38
शतक और अर्ध शतक7/960/73
उच्चतम स्कोर164 नाबाद316 नाबाद
गेंद की284038 हजार 447
विकेट20 विकेट595 विकेट
औसत गेंदबाजी24.61
एक पारी में 5 विकेट027 बार
मैच में 10 विकेट0तीन बार
श्रेष्ठ गेंदबाजी4/298/90
कैच/स्टांप11/-166/-
राष्ट्रीय पक्षभारतभारत
विजय हजारे क्रिकेट केरियर

विजय हजारे सरल और शर्मीले स्वभाव के व्यक्ति थे। जिसकी वजह से वह कप्तान होने के बावजूद भी अधिक चर्चित नहीं थे। भारत ने पहले टेस्ट विजय उन्हीं की कप्तानी में हासिल की थी। यद्यपि इस विजय का श्रेय वीनू मांकांड और गुलाम अहमद को उम्दा स्पिन गेंदबाजी के लिए दिया गया, विजय हजारे ने अपने क्रिकेट कैरियर में कई सारे कीर्तिमान स्थापित किए हैं। साल 1946 से साल 1947 के बीच में बड़ोदरा की ओर से खेल कर होलकर के खिलाफ चौथे विकेट की साझेदारी में 577 रन जोड़कर के विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। इसके साथ ही नववी विकेट हेतु नगरवाला के साथ में 245 रन का विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था। उन्होंने कुल मिलाकर 59 शतक बनाए हैं।

साल 1992 के टेस्ट श्रृंखला के अंतर्गत इंग्लैंड के विरुद्ध पहले टेस्ट मैच के दौरान चौथे विकेट के लिए उन्होंने 222 रन, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1947 में छठे विकेट के लिए 188 रन और पाकिस्तान के खिलाफ साल 1992 में उमर गिर के साथ 177 रन बनाए हैं। इस महान क्रिकेटर की मृत्यु 18 दिसंबर 2004 को हो गई। ऐसे तो क्रिकेट खेल में हजारों की संख्या में खिलाड़ी अपनी ख्याति तथा रिकॉर्ड हासिल कर चुके हैं। लेकिन भारतीय क्रिकेट इन्हें महान खेल और खिलाड़ी के रूप में सदा याद रखेगा।

Rummy online खेलो पैसा कमाओ – What is Rummy online Game?

0

लोगों के हाथों में इंटरनेट पहुंचने के बाद, दुनिया भर में कई तरह के बदलाव आए हैं। इंटरनेट ने लोगों को अपने कार्य को करने के लिए बहुत सी सुविधाएं दी है। जहां आप पहले बैंक से पैसा निकालने के लिए बैंकों की लंबी कतार में खड़े रहते थे। वही आज स्मार्टफोन की सहायता से किसी को भी पैसे भेज सकते हैं, यही नहीं आप अपने इंटरनेट की सहायता से ऑनलाइन खरीदारी भी घर बैठे भी कर सकते हैं। वाकई में इंटरनेट ने हमारी रोजमर्रा के जीवन में काफी बदलाव किया है। सरकार द्वारा बनाए गए कुछ नियम के अनुसार ऑनलाइन बेटींग, खेलो को भी, कानूनी तौर पर मान्यता दे दी गई है। ऐसे में आप अगर ताश (card playing) के शौकीन है, तो आप ऑनलाइन या गेम खेल करके पैसे कमा सकते हैं। आज हम लोग अपने इस लेख में आप लोगों को Rummy online खेलो पैसे कमाओ – What is Rummy online in Hindi के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने वाले हैं।

Rummy online खेलो पैसा कमाओ – What is Rummy online Game?

Rummy Online (रमी ऑनलाइन) एक तरह का खेल है। रमी ऑनलाइन आपको तास के पत्ते (card playing) खेलने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म देती है।

ऑनलाइन गेम में आपको कार्ड के पत्ते का एक अलग अलग शर्ट (Set) बनाना होता है। इस गेम में जिसका बड़े पत्तों का सेट बन गया, वह व्यक्ति जीत जाता है। अगर आप पहले से ही कार्ड खेलते हैं, तो ऑनलाइन आपको या गेम खेलने में कोई भी दिक्कत नहीं होगी।लेकिन फिर भी इस गेम को खेलने के लिए आपको थोड़ी बहुत गणित और लॉजिक लगानी होगी।

यानी कि सीधे शब्दों में कहें तो, आपको या गेम खेलने के लिए अपना दिमाग लगाना होगा। आज इंटरनेट पर ऐसे बहुत सारे वेबसाइट है जहां पर आप इस तरह के गेम खेल सकते हो। स्कीम को खेलने के लिए आपको अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड से कुछ पैसे अपने गेम अकाउंट पर डालने होते हैं। आप इसे एक तरह से जुआ भी मान सकते हैं। अगर आप इस गेम में जीते हैं तो सीधे आप अपने पैसे अपने बैंक खाते पर ट्रांसफर कर सकते हैं। कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने Rummy online गेम खेलकर के अच्छे खासे पैसे कमाए हैं। अगर आप भी कार्ड खेलने का शौक नहीं रखते हैं तो आप इसे एक बार जरूर फ्राई कर सकते हैं।

Rummy Online Game कैसे खेले? – How to Play Rummy Online Game

Rummy online game खेलने के लिए आपको सबसे पहले रमी ऑनलाइन गेम प्लेटफॉर्म पर जाना होगा। इंटरनेट पर ऐसे बहुत सारे वेबसाइट भी है, जिन्होंने गेम खेलने वाले लोगों को सुविधा देने के लिए एंड्राइड एप्लीकेशन (Android application) भी लॉन्च किया है।

आप ऐसे ऑनलाइन वेबसाइट पर गूगल सर्च करके पहुंच सकते हैं। आपको गूगल प्ले स्टोर पर यह एप्लीकेशन नहीं मिलेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि गूगल के निर्देश अनुसार कोई भी तरह की लॉटरी, सट्टेबाजी इत्यादि से संबंधित एप्लीकेशन को गूगल प्ले स्टोर पर नहीं रखती है।

उदाहरण के तौर पर आप Dream11 को ही देख लीजिए। यह विभिन्न खेलों जैसे कि क्रिकेट, फुटबॉल, एमपीएल, आईपीएल इत्यादि मैच पर अपनी ड्रीम टीम बनाकर के खेलों में सट्टेबाजी का मौका देता है। Dream11 ने साल 2020 में आईपीएल मैच के Title Sponsor भी ली है। इसका एंड्राइड एप्लीकेशन भी आपको गूगल प्ले स्टोर पर नहीं मिलेगा। इसके एंड्रॉयड एप्लिकेशन को डाउनलोड करने के लिए आपको इसके आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करना पड़ता है।

अगर आप Rummy Online खेलने के बारे में सोच रहे हैं तो, और आपको बेस्ट यूजर एक्सपीरियंस चाहिए। आप Rummy online के अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर के इसका एंड्राइड एप्लीकेशन डाउनलोड करके अपने स्मार्टफोन पर इनस्टॉल कर सकते हैं। खेलने के लिए आपको इस पर एक अकाउंट बनाना होता है। अकाउंट बनाकर के आप अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड या फिर इंटरनेट बैंकिंग की सहायता से कुछ पैसे अपने Rummy account पर डालने होते हैं। एक बार पैसे आपने डाल दिए तो आप online Rummy खेल सकते हैं।

ऑनलाइन रमी कैसे खेलते हैं? – How to Play online Rummy?

ऑनलाइन रमी (Online Rummy) खेलने के लिए आपको कोई भी रमी एप या ऑनलाइन वेबसाइट को खोलना होगा। जिसके बाद हमने पहले ही आपको बताया है कि आपको यहां पर अपने लिए एक अकाउंट बनाना होता है। अकाउंट बनाने के बाद आप क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की सहायता से कुछ पैसे अपने रमी अकाउंट पर डालने होते हैं।

बहुत सारे रमी ऑनलाइन गेम्स आपको डेमो अकाउंट के तौर पर उसमें कुछ पैसे भी देते हैं। आप रमी खेलने की शुरुआत उस रुपए से कर सकते हैं। इसमें आपको एक डेस्क दी जाती है। इस डेस्क पर आपको 13 पत्ते दिए जाते हैं और 13 पत्ते दूसरे व्यक्ति को दिए जाते हैं। जो आपका विरोधी होता है। जो 13 पत्ते आपको दी जाते हैं उससे आपको 4 तरह के पाटन बनाने होते हैं। यानी जो पता आपको मिला है आपको उससे 4 तरह के ग्रुप बनाना होगा। अगर आप इस ग्रुप को सही तरीके से बना लेते हैं तो आप इस गेम को जीत सकते हैं।

Rummy online game पर जो 4 तरह के पैटर्न या ग्रुप आपको बनाना होते हैं। उन्हें सीक्वेंस भी कहा जाता है। इन सीक्वेंस या ग्रुप को अलग-अलग नाम दिया गया है जो इस प्रकार है:-

  1. Pure Sequence (प्योर सीक्वेंस)
  2. Impure Sequence ( इंप्योर सिक्वेंस)
  3. Pure Sets (प्योर सेट)
  4. Sequences (सीक्वेंसेस)

आप को ऑनलाइन रमी गेम खेलते वक्त इन चार तरह के ग्रुप या सीक्वेंस को बनाना होता है। यह 4 तरह के सीक्वेंसेस ग्रुप आप किस तरह से बनाएंगे और यह क्या होता है? इसके बारे में हम नीचे विस्तार से जानेंगे

Pure Sequence (प्योर सीक्वेंस) क्या होता है?

रमी ऑनलाइन गेम खेलते वक्त आपको प्योर सीक्वेंस बनाने के लिए एक ही प्रकार के तीन पत्तों को चुनना होता है जो कि एक के बाद एक हो, यानी कि एक सीरीज में हो जैसे कि 5,6,7 इस तरह का सीक्वेंस बनाते वक्त आपको इस बात पर भी ध्यान रखना है कि तीनो के तीनो पत्ते एक ही सेट (SET) के होने चाहिए।

साधारण शब्दों में कहा जाए तो यदि आप ईटा के पत्तों का सीक्वेंस बना रहे हैं तो सारे के सारे पत्ते ईटा के पत्ते होने चाहिए। यानी व एक ही राग और एक ही प्रकार के हो तब जाकर के प्योर सीक्वेंस बनेगा।प्योर सीक्वेंस बनाते वक्त आप इस बात का भी ख्याल रखें कि आप प्योर सीक्वेंस बनाते वक्त जोकर का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

Impure Sequence क्या होता है?

इंप्योर सीक्वेंस बीपी और सिक्वेंस की तरह ही होता है पर इसमें थोड़ा सा अंतर है। आप impure sequence बनाते वक्त भी तीन पत्तों का इस्तेमाल करते हैं। आपको इसमें एक के बाद एक पत्तों का सेट बनाना होता है जिसमें तीन पत्ते होने चाहिए। जैसे कि 2,3,4 लेकिन अगर मान ले कि इसमें से कोई पत्ता आपके पास नहीं है तो आप उसकी जगह पर जो कर का इस्तेमाल करके उस सेट को पूरा कर सकते हैं। इस तरह के सेट को इंप्योर सेट कहते हैं। इस सेट को बनाने के लिए आपको यह बात ध्यान रखना है कि पत्ता एक ही सटका हो और एक ही रंग का होना चाहिए।

Pure Set क्या होता है?

प्योर सेट भी तीन पत्तों का बना होता है। इसमें आपके पास में एक जैसे तीन पत्ते होने चाहिए। जैसे तीन इक्के, 3 पंजे आदि। यह अलग-अलग सेट के होंगे एक सूट में एक जैसे तीन पत्ते होना संभव नहीं है। बस आपके पास अगर एक जैसे तीन पत्ते दिख रहे हैं तो आप इनका एक सेट बना सकते हैं। इसे प्योर सेट कहा जाता है। हर खेल में इनका एक शर्ट बनाना जरूरी होता है।

Sequence क्या होता है?

सीक्वेंस इस खेल का सबसे अहम हिस्सा होता है। सीक्वेंस में आप 4 पदों के द्वारा एक सेट या सीक्वेंस बनाते हैं। इसमें चार पत्ते एक के बाद एक नंबर के होने चाहिए। जैसे कि 2,3,4,5,6 इसमें भी आपको एक ही सूट के अलग-अलग पत्तों का प्रयोग करना होता है। इसमें आप जो कर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Online Rummy Game में जोकर की भूमिका क्या होती है?

ऑनलाइन रमी में (online Rummy) जोकर (joker) बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।अगर आपके पास में जो कर एक से ज्यादा है तो आपके जीतने के चांसेस बढ़ जाते हैं। भाई अगर के आपके पास में जोकर नहीं है तो आपके हारने के चांस बढ़ जाते हैं। क्योंकि ऐसी स्थिति में दूसरे व्यक्ति के पास ज्यादा जोकर पैर होते हैं। जोकर का इस्तेमाल आप किसी भी पत्ते की जगह कर सकते हैं। अगर किसी सेट में आपको किसी पत्ते की कमी पड़ रही है तो आप जो कर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

रमी रमी खेलने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कौन-कौन से हैं? – Where to Play Rummy Game on-line

जैसा कि हम ने बताया कि आप गूगल सर्च करके या देख सकते हैं। आपको इंटरनेट पर ऐसे बहुत सारे वेबसाइट मिल जाएंगी जहां पर आप ऑनलाइन रमी गेम खेल सकते हो। लेकिन इसके बावजूद हम आपको कुछ ऐसे वेबसाइट की लिस्ट दे रहे हैं जो अपने यूजर इंटरफ्रेंस और बेहतरीन गेमिंग के लिए जाने जाते हैं। और इन प्लेटफार्म में आपको ऑनलाइन पत्ती खेलने में भी काफी आनंद आएगा। यहां पर आप Online Rummy खेल सकते हो।

  • Classic Rummy
  • Adda52
  • Junglee Rummy
  • Taj Rummy
  • Rummycircle
  • Khelplay Rummy
  • Ace2Three

हमने ऊपर कुछ ऐसे online Rummy खेलने के लिए प्लेटफार्म के बारे में बताया है। आप इन वेबसाइट पर जाकर के ऑनलाइन रमी खेल सकते हैं। इसे खेलने इसमें आपको काफी मजा भी आएगा। और यह सारे गेम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लीगल भी है।

P. T. Usha Biography in Hindi – पी.टी. उषा की जीवनी

0

पी.टी. उषा (P.T. Usha) (पिल्ळलकांदी थेक्केपरबिल उषा) का नाम तो आपने सुना ही होगा। इन्हें “उड़नपरी” नाम भी दिया गया है। पीटी उषा एक एथलीट है। जिन्होंने भारत के लिए कई सारे गोल्ड मेडल जीते हैं। इनके नाम कई सारे रिकॉर्ड भी है। यह भारत की पहली महिला तेज धावक जिन्होंने ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था, के नाम से जानी जाती है। इनका जीवन संघर्ष पूर्ण है। इन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से यहां तक कि सफलता प्राप्त की है। इस चलते कई लोग इन्हें अपना प्रेरणास्रोत भी मानते हैं। P. T. Usha Biography in Hindi

आज के हमारे इस लेख में हम लोग “उड़नपरी” पीटी उषा के जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करने वाले हैं। इन्होंने एथलीट में भारत का नाम रोशन किया है। बचपन में गरीबी, के बावजूद इस मुकाम तक पहुंच पाना हर किसी के बस में नहीं होता है। इसी चलते पीटी उषा कई सारी महिलाओं और लोगों के लिए एक प्रेरणा बन जाती है।

P. T. Usha Biography in Hindi – उड़नपरी पी.टी. उषा की जीवनी

पीटी उषा का जन्म 27 जून 1964 को केरल के कोंझीकोडे स्थान के पायोली गांव में हुआ है। उनके पिता का नाम श्री ई.पी.एम. पैठल था और मां का नाम लक्ष्मी था। इनकी दो बहने तथा एक भाई है।इनके पति का नाम श्रीनिवास तथा पुत्र का नाम उज्जवल है।

ओ.एम नांबियार ने पीटी उषा को नेशनल स्कूल गेम्स में दौड़ते हुए देखा था फिर उनके कैरियर को संवारा। उनके दौड़ने की शैली तथा प्रतिभा अद्भुत थी।

बचपन में बहुत ही खराब स्वास्थ्य तथा गरीबी से जूझने के बावजूद उन्होंने नांबियार तथा बालकृष्ण नैयर की प्रेरणा से अपने खिलाड़ी रूप में विकसित किया। यहां तक कि इस तेज धाविका को कभी “भारतीय ट्रैक की महारानी” तो “पायोली एक्सप्रेस” कहां गया। देश विदेश में अनेक स्वर्ण पदक जीतने के कारण उन्हें “Golden girl” के नाम से भी जाना जाता है। एक एक सीट के रूप में उनका कैरियर की शुरुआत साल 1979 से शुरू हुआ जब नेशनल स्कूल गेम्स में उन्होंने भाग लिया था। P. T. Usha Biography in Hindi

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार उन्होंने साल 1980 में मॉस्को ओलंपिक में भाग लिया पर भी कुछ हासिल नहीं कर पाई थी। 1 साल 1983 में नई दिल्ली एशियाड में 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में दो रजत पदक जीते हैं।वहीं साल 1983 में कुवैत में आयोजित एशिया ट्रैक एंड फील्ड चैंपियनशिप में एशिया का रिकॉर्ड तोड़ा तथा स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। लॉस एंजेलिस में आयोजित हुई ओलंपिक में उन्होंने 400 मीटर की दौड़ के फाइनल में पहुंचने वाली प्रथम भारतीय महिला होने का गौरव भी प्राप्त है।

वही जकार्ता में हुई छठी A.F.C, में पीटी उषा ने 5 स्वर्ण पदक जीते थे। सियोल में आयोजित 10 में एशियाई गेम में पीटी उषा को चार स्वर्ण तथा एक रजत पदक मिला था। ट्रैक एंड फील्ड की सभी प्रतियोगिता में पीटी उषा ने सब पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। साल 1986 में अटलांटा ओलंपिक में अंतिम बार भाग लिया। खेलों के प्रति अत्यधिक समर्पण होने के कारण पीटी उषा ने साल 1991 में विवाह के बाद केवल 1992 में ओलंपिक में भाग नहीं लिया अन्यथा यह सभी प्रतियोगिताओं में लगातार भाग लेती रही और स्वर्ण पदक दिलवा करके भारत को गौरव को बढ़ाती रही है। P. T. Usha Biography in Hindi

पीटी उषा ने अभी तक 101 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। उन्होंने दक्षिण रेलवे में अधिकारी पद पर कार्यरत हैं। साल 1995 में उन्हें पदम श्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

पीटी उषा को मिले सम्मान, पुरस्कार एवं उपलब्धियां

  1. साल 1980 मॉस्को ओलंपिक खेलों में भाग लिया कराची अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में पांच स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं।
  2. साल 1981 में अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते हैं।
  3. साल 1983 में विश्व कनिष्ठ प्रतियोगिता सियोल में एक स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता है। इसी साल नई दिल्ली में आयोजित हुई एशियाई खेलों में भी उन्होंने दो रजत पदक जीते हैं।
  4. साल 1983 में ही कुवैत में एशियाई खेलकूद प्रतियोगिता में एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता है।
  5. साल 1984 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए खेलों में दो स्वर्ण पदक प्राप्त किया। लॉस एंजेलिस ओलंपिक में 400 मीटर बाधा दौड़ में हिस्सा लिया और कांस्य पदक से कुछ सेकंडो के लिए वंचित रह गई।
  6. साल 1985 चेक गणराज्य में ओलोमक में विश्व रेलवे खेलों में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीते हैं। उन्हें सर्वोत्तम रेलवे खिलाड़ी घोषित किया गया है।
  7. साल 1985 में ही उन्होंने लंदन में हुई खेलों में 500 मीटर बाधा दौड़ में रजत पदक जीता।कैनबरा के विश्वकप खेलों में 500 मीटर बाधा दौड़ में पांचवा स्थान और 500 मीटर दौड़ में आठवां स्थान प्राप्त किया। जकार्ता में हुई एशियाड खेलों में उन्होंने पांच स्वर्ण और एक कांस्य पदक भी जीता है।
  8. साल 1986 में मॉस्को की गुडविल में हुए खेलों में उन्होंने 500 मीटर में छठवां स्थान प्राप्त किया। सियोल के एशियाई खेलों में पांच स्वर्ण और एक रजत पदक जीता है। सिंगापुर के लाइंस दौड़ प्रतियोगिता में 3 स्वर्ण पदक भी जीते हैं।
  9. साल 1987 में सिंगापुर की एशियाई दौड़ कूद प्रतियोगिता में 3 स्वर्ण और दो रजत पदक जीते हैं। इसके अलावा कोल आलमपुर की मलेशिया फ्रीस्टाइल दौड़ प्रतियोगिता में 2 स्वर्ण पदक भी लिए हैं।
  10. साल 1988 सिंगापुर में हुई फ्रीस्टाइल दौड़ प्रतियोगिता में 3 स्वर्ण पदक लिए हैं।
  11. साल 1989 नई दिल्ली की एशियाई दौड़ कूद प्रतियोगिता में 5 स्वर्ण दो रजत पदक प्राप्त किए हैं। कोलकाता में अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में तीन स्वर्ण पदक मिले हैं।
  12. साल 1990 बीजिंग एशियाई खेलों में तीन रजत पदक।
  13. साल 1994 हिरोशिमा एशियाई खेलों में एक रजत पदक और पुणे के अंतरराष्ट्रीय खेलों में एक कांस्य पदक जीता है।
  14. साल 1995 चेन्नई के दक्षिणी एशियाई खेलों में एक कांस्य पदक।
  15. साल 1997 और साल 1996 में अटलांटा ओलंपिक खेलों में भाग लिया और एक रजत पदक जीता है।
  16. साल 1999 काठमांडू के दक्षिणी एशियाई खेलों में 1 स्वर्ण और दो रजत पदक भी जीते हैं।

पीटी उषा को मिले पुरस्कार – P. T. Usha Biography in Hindi

पीटी उषा एक सफल एक सफल एथलीट रही है। एक एथलीट रहते हुए इन्होंने 101 से भी ज्यादा मेडल जीते हैं। साथ ही उन्होंने भारत को गौरवान्वित किया है। खेल के प्रति अपने समर्पण को देखते हुए, भारत सरकार ने उन्हें कई सारे सम्मान एवं उपलब्धियां दी है।

  • अर्जुन पुरस्कार साल 1983
  • इन्हें पदम श्री से भी सम्मानित किया गया है साल 1985।
  • सर्वश्रेष्ठ रेलवे खिलाड़ी के लिए मार्शल टीटो पुरस्कार साल 1983, से लेकर साल 1994 तक।
  • 30 अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार खेल में बेहतर प्रदर्शन के लिए।
  • केरल खेल पत्रकार इनाम साल 1999।।

Biography of Kapil Dev in Hindi – कपिल देव की जीवनी।

0

पूरी दुनिया में सबसे बेस्ट all rounder और अपनी तूफानी गेंदबाजी के लिए, तेज रन बनाने वाले हरफनमौला खिलाड़ी, Kapil Dev (कपिल देव) के बारे में आपने बचपन से ही सुना होगा। इन्होंने भारत को विश्व कप में पहली जीत दिलाने वाले कप्तान के रूप में भी जाना जाता है। Biography of Kapil Dev in Hindi

इस महान खिलाड़ी के जीवन के बारे में हम आज आप लोगों को विस्तार से अपने इस लेख में बताने वाले हैं। क्रिकेट जगत में, कपिल देव एक ऐसा नाम है, जिन्होंने भारत की तरफ से खेलते हुए ना सिर्फ बल्लेबाजी से, गेंदबाजी से भी काफी नाम कमाया है। इन्होंने भारत में पहली बार Cricket World Cup लाने का काम किया है। उन्होंने साल 1999 और साल 2000 के बीच में 10 महीनों तक भारत के कोच की भूमिका भी निभाई है। हरियाणा तूफान के नाम से जाने जाने वाले इस क्रिकेटर को क्रिकेट पिच पर कभी भी रन आउट होते हुए नहीं देखा गया था। इस खिलाड़ी ने अपनी फिटनेस पर इतना ध्यान दिया हुआ था कि सेहत की वजह से इन्हें कभी भी टेस्ट मैच से बाहर नहीं किया गया। कपिल देव दाएं हाथ के बल्लेबाज होने के साथ-साथ दाएं हाथ के तेज गेंदबाज भी थे, जो तेजी से रन बनाना पसंद करते थे। तो चलिए जानते हैं इस महान खिलाड़ी के बारे में।

Biography of Kapil Dev in Hindi – कपिल देव की जीवनी

भारत के महान क्रिकेटर में से एक कपिल देव का जन्म 6 जनवरी 1959 को, चंडीगढ़ भारत में हुआ है। इनके पिता चंडीगढ़ में बिल्डर और लकड़ी के व्यापारी राम लाल निखंज के छठवी संतान के रूप में जन्मे थे। इनकी माता राजकुमारी लाजवंती एक घरेलू महिला थी। कपिल देव सात भाई बहन है।

आजादी से पहले भारत पाक विभाजन से पहले उनका परिवार पहले पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहा करता था। लेकिन विभाजन के बाद उनका परिवार भारत में आकर रहने लगा था। कपिल देव जी ने अपने शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से की और रेशम की पढ़ाई उन्होंने St. Edward college से की है।

बचपन से ही कपिल देव को क्रिकेट और अन्य खेलों में काफी रुझान था। इस चलते क्रिकेट वह बचपन से ही प्रैक्टिस और खेलते थे। उस दौरान मसूर रहे भारत की खोज देश प्रेम आजाद से क्रिकेट खेलना शिखा। वहीं साल 1980 में जब कपिल देव केवल मात्र 21 साल के थे, तब उनकी शादी रोमी भाटिया से हो गई थी। शादी के बाद दोनों की एक बच्ची पैदा हुई जिसका नाम अमिया देव है। Biography of Kapil Dev in Hindi

भारत को पहला वर्ल्ड कप दिलाने वाले कपिल देव जी का क्रिकेट केरियर – Cricket Career of Kapil Dev

भारत को पहला वर्ल्ड कप दिलाने वाले कपिल देव जी ने अपने क्रिकेट कैरियर की शुरूआत साल 1975 में हरियाणा टीम के लिए क्रिकेट खेलकर किया था। उन्होंने अपना पहला मैच पंजाब के खिलाफ खेला था और इस मैच में उन्होंने 6 विकेट लेकर के पंजाब की टीम को धूल चटा या था।

हरियाणा टीम के लिए उनकी शानदार जीत दर्ज करने के बाद साल 1976 और साल 1977 में उन्होंने जम्मू कश्मीर के खिलाफ शानदार प्रदर्शन मैच खेला इस मैच में उन्होंने 8 विकेट लेकर के 36 रन बनाकर बेहतरीन पारी खेली थी। इसके अलावा इसी साल कपिल देव जी ने बंगाल के खिलाफ भी एक मैच खेला था जिसमें उन्होंने अद्भुत क्रिकेट प्रतिभा का प्रदर्शन दिखाया था। उन्होंने इस मैच में 7 विकेट झटके थे और बैटिंग से भी उन्होंने लोगों को काफी प्रभावित किया था और 20 रन बनाए थे।

घरेलू मैदान में कपिल देव जी का प्रदर्शन काफी उम्दा रहा था। उन्होंने घरेलू मैदान में जितनी भी क्रिकेट मैच खेले उसमें उन्होंने औसतन 5 से 7 विकेट ली है। जाहिर सी बात है उनकी इस उम्दा प्रदर्शन के चलते उन्हें जल्द ही भारतीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का मौका भी मिल गया।

अंतरराष्ट्रीय मैचों में कपिल देव जी का प्रदर्शन

घरेलू मैदान में कपिल देव जी का उम्दा प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें जल्द ही भारत की अंतरराष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका भी मिला,कपिल देव जी के बेहतरीन खेल क्षमता के चलते उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला। उन्होंने साल 1978 में अपना पहला इंटरनेशनल मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। तो चलिए एक नजर डालते हैं उनके अंतरराष्ट्रीय मैच के कैरियर पर:- Biography of Kapil Dev in Hindi

  1. कपिल देव जी ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच साल 1978 में पाकिस्तान के खिलाफ खेला।
  2. साल 1979 और 80 के बीच में हरियाणा टीम की तरफ से दिल्ली के खिलाफ बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 193 रन बनाए यह उनके कैरियर का पहली सतक थी।
  3. इसके बाद साल 1979 में ही उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच शतक लगा कर के 124 गेंदों में 126 रन बनाए थे।
  4. उसके बाद साल 1983 से लेकर के साल 1983 के बीच में उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ हुई सीरीज में साल 1983 से 1983 के बीच में भारत क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे हैं।
  5. उन्होंने साल 1983 में ही वर्ल्ड कप अप निक कप्तानी में टीम इंडिया को पहली बार दिलवाया था।
  6. 1983 में ही वर्ल्ड कब के इस मैच में उन्होंने शानदार पारी खेलते हुए 175 रन बनाकर के भारत को ऐतिहासिक जीत दिलवाई थी। वही उनके इस मैच में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें कई पुरस्कार से भी नवाजा गया था। साल 1983 के इस मैच में कपिल देव के इस अद्भुत प्रदर्शन को लेकर के ऐसा भी कहा जाता है कि इस वर्ल्ड कप को जीतने के बाद भारत को क्रिकेट की दुनिया में एक अलग ही पहचान मिली है।
  7. अगले साल यानी कि साल 1984 को वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे टेस्ट मैच की सीरीज में भारत को बुरी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। जिसके चलते कपिल देव को अपनी कप्तानी खोनी पड़ी थी।
  8. साल 1984 को अपनी कप्तानी से हटने के बाद सुनील गावस्कर को इंडियन क्रिकेट टीम का कप्तान घोषित किया गया था।
  9. हालांकि इसके बाद फिर से उन्होंने कप्तानी करने का मौका मिला था।साल 1987 में हुए वर्ल्ड कप में जब भारत को इंग्लैंड से हार का सामना करना पड़ा तो लोगों ने कपिल देव पर खराब प्रदर्शन और हार का आरोप भी लगाया था। इसके बाद फिर से सुनील गावस्कर को भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान चुना गया।
  10. साल 1994 में उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संयास ले लिया।

Biography Mahendra Singh Dhoni – महेंद्र सिंह धोनी की जीवनी

कोच के रूप में कपिल देव – Kapil Dev as Coach

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन के बाद साल 1994 में उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया। इसके बाद साल 1999 में BCCI (BOARD OF CONTROL FOR CRICKET IN INDIA) द्वारा उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम की कोच के रूप में चुना गया था। लेकिन इस दौरान उनपर भारत – ऑस्ट्रेलिया के मैच में भारत की हार के बाद मैच फिक्सिंग के आरोप लगाए गए, इसके बाद उन्होंने महज 10 महीने के बाद ही कोच के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कपिल देव क्रिकेट के विशेषज्ञ के तौर पर कई सारे न्यूज़ चैनल पर दिखाई देने लगे। इसके अलावा वे कई बार बतौर कमेंटेटर भी नजर आते रहते हैं। Biography of Kapil Dev in Hindi

कपिल देव को मिले पुरस्कार एवं सम्मान – Kapil Kapil Dev Awards

कपिल देव जी को क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए, और भारत को पहले वर्ल्ड कप दिलाने के चलते कई सारे पुरस्कार एवं सम्मान भी दिए गए। तो चलिए एक नजर डालते हैं कपिल देव को मिले पुरस्कार एवं सम्मान के बारे में:- Biography of Kapil Dev in Hindi

  • इस महानतम क्रिकेट खिलाड़ी को सबसे श्रेष्ठतम क्रिकेटर और महत्वपूर्ण योगदान देने एवं उनके बेहतरीन प्रदर्शन से प्रभावित होकर भारत सरकार ने उन्हें साल 1979-1980 के बीच में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा है।
  • क्रिकेटर के ऑलराउंडर कपिल देव जी के क्रिकेट खेलने की हुनर को देखते हुए भारत सरकार ने साल 1983 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान एवं पद्मश्री से नवाजा है।
  • साल 1983 में वर्ल्ड कप में कपिल देव जी के शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर (Wisden Cricketer of the Year) से भी नवाजा गया है।
  • साल 1991 में कपिल देव को उनकी क्रिकेट खेलने की अद्भुत प्रतिभा को देखते हुए भारत के सर्वोच्च पुरस्कार पद्म विभूषण से भी नवाजा गया है।
  • इसके बाद साल 2002 में कपिल देव जी को शादी के विजडन क्रिकेटर ( Wisden Cricketer) का खिताब भी मिला है।
  • साल 2010 में कपिल देव जी को उनके क्रिकेट खेलने के हुनर को देखते हुए ICC क्रिकेट हॉल ऑफ फेम पुरस्कार देकर के सम्मानित किया गया।
  • साल 2013 में NDTV द्वारा उन्हें 25 ग्लोबल लिविंग लेजेंड में से एक का खिताब दिया गया।

शिखर धवन की जीवनी – Biography of Shikhar Dhawan in Hindi

0

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी “शिखर धवन” बाएं हाथ के बल्लेबाज है। भारतीय सलामी बल्लेबाज के तौर पर भारत के लिए कई यादगार पारियां इन्होंने खेली है। शिखर धवन को आक्रामक बैट्समैन के तौर पर जाना जाता है। शिखर धवन के फैंस इन्हें “गब्बर” कहते हैं। Biography of Shikhar Dhawan in Hindi

इन्होंने मैदान पर कई यादगार पारियां खेली है। मैदान में फील्डिंग करते हुए जब भी या कोई कैच पकड़ते हैं तो ये किसी पहलवान की भांति अपनी जांघा पीटते हैं। जिस चलते इन्हें गब्बर कहते हैं।

शिखर धवन अच्छी फील्डिंग के लिए भी जाने जाते हैं। विकेट के बीच में तेजी से दौड़ना और ऊंची स्ट्राइक रेट से बैटिंग करना इस धुरंधर की खासियत है। शिखर धवन कई सारे ब्रांड की एंडोर्समेंट भी करते हैं जिसमें मुख्य है केनरा बैंक, जोली रोजर, रेडियो ड्राइव, एमआरएफ टायर, आरके ग्लोबल इत्यादि। उन्होंने क्रिकेट खेल जगत में अपनी बैटिंग और अपनी फील्डिंग से काफी ज्यादा प्रभावित किया है। तो चलिए जानते हैं इनकी जीवन के बारे में। Biography of Shikhar Dhawan in Hindi

Biography of Shikhar Dhawan in Hindi – शिखर धवन की जीवनी

शिखर धवन (Shikhar Dhawan) का जन्म 5 दिसंबर, 1985 के दिन हुआ है। उनका जन्म दिल्ली जो कि भारत का दिल है, में हुआ है। वह एक पंजाबी परिवार से आते हैं। शिखर धवन के पिता का नाम महेंद्र पाल धवन है और उनकी माता का नाम सुनैना धवन है। शिखर धवन के शुरुआती पढ़ाई दिल्ली में ही हुई है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा St. Marks Senior Secondary Public School, मीरा बाग, दिल्ली से पूरी की है। उन्होंने लवली पब्लिक स्कूल, प्रियदर्शनी विहार से अपनी स्कूली शिक्षा की, छोटी उम्र में ही क्रिकेट से काफी लगाव था इस चलते पर कम उम्र में ही क्रिकेट अकादमी में चले गए थे।

12 साल की उम्र में, उदयपुर सिद्ध चाचा तारक सिन्हा के तहत क्रिकेट प्रशिक्षित करने के लिए प्रतिष्ठित सोनेट क्लब (Sonnet club) मैं भाग लेने के लिए उनके चाचा ने सहारा दिया था। बड़े लड़कों के साथ कंधे को रगड़ने से कभी डरते नहीं थे, उन्होंने तुरंत स्कूल के टूर्नामेंट में under 15 team के लिए चुना गया। अंडर 15 टीम में उन्होंने शतक लगाकर अपने कोच को काफी प्रभावित किया था।

Cricket career of Shikhar Dhawan – शिखर धवन की क्रिकेट की यात्रा

शिखर धवन को पहली बार क्रिकेट खेलने का मौका अपनी स्कूल ही समय में मिला था। जिसमें उन्होंने अंडर 15 (Under-15) क्रिकेट खेल में शतक जमाया था। इससे उनके कोच तारक सिंहा (Tarak Sinha) काफी प्रभावित हुए। कोच तारक सिन्हा ने अब तक 12 ऐसे खिलाड़ी को ट्रेंड किया है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है। शिखर अपने कैरियर की शुरुआत में एक विकेटकीपर बल्लेबाज थे। पर समय बीतने के साथ-साथ उन्होंने अपना पूरा ध्यान betting, fielding और fitness पर लगाना शुरू कर दिया।

शिखर धवन ने साल 2004 में अंडर-19 विश्व कप में भारत के लिए खेला। भारत के लिए खेलते हुए अंडर-19 विश्व कप में 7 पारियों में 505 रन बनाए। उनके द्वारा बनाई गई और रन अंडर-19 विश्व कप में यह एक रिकॉर्ड है। उनकी बैटिंग एवरेज 84.6 के औसत से थी। उस दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी से भी नवाजा गया था। इसके बाद साल 2004 से साल 2005 तक उन्होंने दिल्ली के लिए खेला है। रणजी ट्रॉफी मैं उन्होंने दिल्ली की टीम में अपनी जगह बनाई। जहां उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी बहुत ही बेहतरीन प्रदर्शन किया है। दिल्ली के लिए खेलते हुए उन्होंने 8 मैचों में 570 रन बनाए। साल 2007 से साल 2008 में अपनी टीम की रणजी खिताब जिताने में अहम भूमिका भी निभाई है। कई वरिष्ठ खिलाड़ियों को विश्राम किया गया और अक्टूबर 2010 में विशाखापट्टनम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने पहले वनडे करियर की शुरुआत की। Biography of Shikhar Dhawan in Hindi

उन्होंने सुरेश रैना की कप्तानी में, क्वींस पार्क ओवल में जून 2011 के दौरान वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने T20 कैरियर की शुरुआत की और विकेटकीपर पार्थिव पटेल के साथ मैदान में सलामी बल्लेबाज के रूप में उतरे थे। टी-20 के इस मैच में उन्होंने 11 गेंदों में 5 रन बनाकर के विकेट के पीछे आउट हो गए थे।

14 मार्च 2013 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने टेस्ट कैरियर की शुरुआत की।उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर से टोपी प्राप्त किया। तीसरे दिन 85 गेंदों पर टेस्ट मैच में सबसे तेज शतक भी उन्होंने लगाया है।

आइए नजर डालते हैं उनके क्रिकेट कैरियर पर उनकी कौन-कौन सी उपलब्धियां है:- Biography of Shikhar Dhawan in Hindi

शिखर धवन का क्रिकेट कैरियर

  1. स्कूल लेवल अंडर 15 टूर्नामेंट में शतक लगाकर कि उन्होंने अपने कोच को काफी प्रभावित किया।
  2. साल 1999 से 2000 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी में लीडिंग रन स्कोरर रहे।
  3. साल 2000 से लेकर 2001 में शिखर धवन ने 9 पारियां खेली जिनमें इन का औसत रन रेट 83.88 की औसत से 755 रन बनाए।
  4. 2001 में विजय हजारे ट्रॉफी में नॉर्थ जोन से फाइनल खेलते हुए पहली पारी में 30 और दूसरी पारी में 66 रन बनाए।
  5. साल 2001 में ही अंडर-17 टीम के लिए उन्हें चुना गया जिसमें उन्होंने तीन मैच खेले और औसत रन रेट 85 के आस पास था।
  6. साल 2001 में केवल 15 वर्ष की आयु में शिखर धवन को दिल्ली अंडर-19 टीम में जगह मिल गई थी।
  7. साल 2002 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी में 8 मिनट में 55.42 की औसत से उन्होंने 388 रन बनाए थे।
  8. घरेलू क्रिकेट खेलते हुए अंडर-19 क्रिकेट में उन्होंने छह पारियों में 74 के औसत से 444 रन बनाए, इसके बाद उन्हें टीम की कप्तान के रूप में चुना गया।
  9. साल 2004 में वर्ल्ड कप में तीन शतक और एक अर्धशतक लगाया, उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप में 84.16 की औसत से 555 रन बनाए हैं।
  10. साल 2004 में दिल्ली से खेलते हुए आंध्रप्रदेश के खिलाफ उन्होंने घरेलू क्रिकेट में डेब्यू किया।
  11. साल 2010 में 20 अक्टूबर के दिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विशाखापट्टनम में एकदिवसीय क्रिकेट मैच में डेब्यू किया।
  12. साल 2011 में 4 जून के दिन वेस्टइंडीज के खिलाफ T-20 क्रिकेट मैच में उन्होंने अपना पहला टी20 मैच के लिए डेब्यू किया।
  13. साल 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी मैच उन्होंने सबसे ज्यादा रन बनाएं। चैंपियंस ट्रॉफी में उन्होंने 338 रन बनाए जिसमें दो अर्धशतक और एक शतक था।
  14. शिखर धवन कि पसंदीदा जर्सी नंबर 25 है। तेज बल्लेबाज के अलावा विकेट कीपिंग और ऑफब्रेक गेंदबाजी भी कर लेते हैं।

Shikhar Dhawan आईपीएल (Indian Premier League) में

वर्तमान समय में शिखर धवन इंडियन प्रीमियर लीग, जोकि भारत की t20 मैचों की घरेलू लीग है, में दिल्ली डेयरडेविल्स (Delhi Daredevils) के लिए खेलते हैं।

आईपीएल की दूसरी और तीसरी सीजन में शिखर धवन ने मुंबई इंडियंस टीम के लिए खेला था। IPL के चौथे सीजन में उन्होंने Deccan chargers टीम ने $300000 में उन्हें अनुबंधित किया। इसके बाद वह सनराइज हैदराबाद के कप्तान बने। उसके बाद उन्हें हटाकर डेरेन सैमी को कप्तान बना दिया गया। साल 2016 में डेविड वॉर्नर की कप्तानी में शिखर धवन ने सनराइजर्स हैदराबाद में खेलते हुए 17 मैचों में 501 रन बनाए थे।

साल 2018 के ऑक्शन में सनराइजर्स हैदराबाद ने शिखर धवन को 5.2 कर रुपए में खरीदा, इसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद से वह दिल्ली कैपिटल्स में साल 2019 में अनुबंधित हो गए। वर्तमान समय में वे दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते हैं।

शिखर धवन का व्यक्तिगत जीवन

शिखर धवन ने साल 2012 में विवाह किया। उनकी पत्नी उन से 12 साल बड़ी है। उनकी पत्नी मूल रूप से Melbourne, Australia की निवासी है। उनकी पत्नी का नाम आयशा मुखर्जी है। वह पहले एक बॉक्सर रही है। ऐसा की मुलाकात शिखर धवन से पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने करवाई थी। आयशा मुखर्जी और शिखर ने जब विवाह किया तब आयशा मुखर्जी पहले से दो बेटियों की मां थी। इसके बाद साल 2014 में शिखर और आयशा को एक बेटा हुआ है। जिसका नाम उन्होंने ज़ोरावर धवन रखा है।

शिखर धवन को मिले पुरस्कार एवं सम्मान – Awards and Achievement

  • साल 2013 – CEAT इंटरनेशनल प्लेयर ऑफ द ईयर।
  • साल 2018 -CEAT बैट्समैन ऑफ द ईयर
  • साल 2013 – ICC world XI में चयन किया गया
  • साल 2015 – ICC World Cup सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ी बने
  • ICC Champions Trophy – दो बार लगातार Golden Bat जीता है
  • 100 एकदिवसीय मैचों के बाद 4309 रन बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज है।
  • साल 2014 में – Wisden Cricketer of the Year का खिताब भी मिला है।
  • टेस्ट मैचों में पहले दिन लंच से पहले 100 रन बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने हैं।
  • वनडे मैचों में तेजी से 1000 रन, 2000 रन और 3000 रन बनाने वाले पहले भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी है।
  • साल 2018 में एशिया कप में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी भी रहे हैं।
  • साल 2018 में ही सबसे अधिक T20 स्कोरर एक बैटमैन (Batsman) के तौर पर बनाया है।
17,865FansLike
5,686FollowersFollow
65,789SubscribersSubscribe

हमारे अन्य आर्टिकल

Vijay Hazare Biography in Hindi – विजय हजारे की जीवनी

0
"Vijay Hazare" विजय हजारे इनका नाम तो आपने जरूर सुना होगा। अगर आप क्रिकेट खेल प्रेमी है,...

Rummy online खेलो पैसा कमाओ – What is Rummy online Game?

0
लोगों के हाथों में इंटरनेट पहुंचने के बाद, दुनिया भर में कई तरह के बदलाव आए हैं।...

P. T. Usha Biography in Hindi – पी.टी. उषा की जीवनी

0
पी.टी. उषा (P.T. Usha) (पिल्ळलकांदी थेक्केपरबिल उषा) का नाम तो आपने सुना ही होगा। इन्हें "उड़नपरी" नाम...

Biography of Kapil Dev in Hindi – कपिल देव की जीवनी।

0
पूरी दुनिया में सबसे बेस्ट all rounder और अपनी तूफानी गेंदबाजी के लिए, तेज रन बनाने वाले...

शिखर धवन की जीवनी – Biography of Shikhar Dhawan in Hindi

0
भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी "शिखर धवन" बाएं हाथ के बल्लेबाज है। भारतीय सलामी बल्लेबाज के तौर पर भारत...