How to Apply for Mudra Loan – मुद्रा लोन के लिए कैसे आवेदन दे?

देश में छोटे एवं मध्यम आकार के घरेलू बिजनेस को फाइनेंस करने के लिए और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना यानी PMMY की शुरुआत की थी। How to Apply for Mudra Loan – मुद्रा लोन के लिए कैसे आवेदन दे?

इस योजना का मुख्य उद्देश्य था कि छोटे एवं मध्य आकार के व्यवसाय को लाभ पहुंचाया जा सके। इस योजना के तहत ऐसे व्यवसाई जो लघु उद्योग या छोटे उद्योग से जुड़े हुए हैं उन्हें इस योजना के अंतर्गत ऋण मुहैया करवा करके उनके बिजनेस को मजबूती प्रदान करना था। साथ ही साथ इसका मुख्य उद्देश्य Business world मैं महिलाओं को सशक्त और उनका योगदान को बढ़ावा देने का है।

जो भी व्यक्ति बिजनेस शुरू करना चाहता है या फिर अपने वर्तमान के बिजनेस को और बढ़ाना चाहता है उसे मुद्रा योजना के तहत लोन दिया जाता है। यह मुद्रा लोन Micro Units Development Refinance Agency यानी कि MUDRA योजना के अंतर्गत ₹2000000 तक का बिजनेस लोन प्राप्त किया जा सकता है।

MUDRA Yojana की खास बातें

● मुद्रा योजना के अंतर्गत आपको बिना किसी क्रांति के लोन प्रदान किया जाता है।

● लोन प्रदान करने के लिए बैंक द्वारा किसी भी तरह की प्रोसेसिंग फी की वसूली नहीं की जाती।

● लोन का पुनः भुगतान अवधि को 5 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।

● working capital के लिए लोन को आपको सीसी अकाउंट के माध्यम से मुद्रा कार्ड के द्वारा प्रदान किया जाता है।

मुद्रा लोन लेने के लिए योग्यता

कोई भी भारतीय नागरिक या फॉर्म जो खेती छोड़ कर के किसी भी अन्य प्रकार के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और एक नया व्यवसाय या वर्तमान व्यवसाई को बढ़ाना चाहते हैं व्यापारी 20 लाख तक की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मुद्रा योजना के तहत लोन ले सकते हैं।

मुद्रा लोन के लिए आप कैसे अप्लाई कर सकते हैं?

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत लोन लेने के लिए कोई जरूरी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। मुद्रा योजना के तहत 3 तरह के लोन मिलते हैं। जिनके लिए अलग-अलग दस्तावेजों की जरूरत हो सकती है आमतौर पर मुद्रा लोन वेंडर, ट्रेडर, दुकानदार और अन्य कारोबारियों के लिए दिया जाता है।

देश में कुल 27 सरकारी बैंक, निजी क्षेत्र के 17 बैंक, 31 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, 4 सहकारी बैंक, 36 माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं, 25 गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां को मुद्रा लोन बांटने के लिए अधिकृत किया गया है। मुद्रा लोन लेने के लिए आप अपने नजदीकी बैंक जहां पर आपका खाता मौजूद है वहां पर आप अप्लाई कर सकते हैं।

मुद्रा लोन के प्रकार

1. शिशु ऋण – मुद्रा योजना के शिशु ऋण के तहत ₹50000 तक का लोन दिया जाता है।

2. किशोर लोन – किशोर लोन के तहत मुद्रा योजना में ₹50000 से लेकर ₹500000 तक का लोन दिया जाता है।

3. तरुण लोन – तरुण ऋण के तहत मुद्रा योजना में ₹500000 से लेकर के ₹2000000 तक का ऋण दिया जाता है।

मुद्रा योजना के तहत कम से कम 60% ऋण, शिशु ऋण के रूप में दिया जाता है।

मुद्रा लोन लेने के लिए फॉर्म के साथ लगाए जाने वाले दस्तावेज

1. दो फोटो

2. पहचान का प्रमाण पत्र, पहचान पत्र के रूप में निम्नलिखित संबंधित दस्तावेजों को आप जमा कर सकते हैं। दस्तावेजों में किसी एक की फोटो कॉपी आपको जमा करनी पड़ती है जिसमें आपका हस्ताक्षर भी होता है। मतदान पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट इत्यादि।

3. स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र, निवास संबंधी प्रमाण पत्र यानी कि आपके पते का प्रमाण के रूप में आपको सर्टिफिकेट जमा करना होता है इसके तहत आप निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा कर सकते हैं। टेलिफोन बिल, बिजली बिल, संपत्ति कर रसीद, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, पासपोर्ट, बैंक का 3 महीने का स्टेटमेंट, इत्यादि।

4. आरक्षित वर्ग का सर्टिफिकेट, अगर आप अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति मैं आते हैं तो उसका प्रमाण पत्र की फोटो कॉपी भी जमा कर सकते हैं।

5. कारोबार का पहचान व पते का प्रमाण, अपने कारोबार से संबंधित लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या अन्य कोई दस्तावेज जमा करना होगा। यह उस बात का प्रमाण है कि आप उस बिजनेस के मालिक हैं।

6. कोटेशन मशीनरी या सामान की आपूर्ति के लिए, अगर आप बिजनेस बढ़ाने के लिए मुद्रा लोन ले रहे हैं तो इसे कोटेशन में आप सब मान्या मशीनरी खरीदने की लागत आदि को दिखा सकते हैं।

7. आपूर्ति करने वाले का नाम, मशीन या सम्मान का विवरण, कारोबार बढ़ाने या नया कारोबार शुरू करने के लिए आपको मशीन या कच्चे माल आदि की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आप सामान किससे खरीद रहे हैं और किस कीमत पर खरीद रहा है इस बारे में बैंक को बताना पड़ता है।

मुद्रा लोन के अंतर्गत ब्याज दरें

मुद्रा योजना के अंतर्गत कोई निश्चित ब्याज दर सरकार द्वारा निर्धारित नहीं की गई है।

मुद्रा ऋण में ब्याज दर अलग-अलग बैंकों की कार्यप्रणाली और आवेदक के बिजनेस रिस्क के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। सामान्यता सभी बैंकों में मुद्रा ऋण की ब्याज दरें 12% प्रति वर्ष के आसपास होती है। इसमें एक बड़ी बात यह है कि मुद्रा योजना में सरकार की तरफ से किसी भी तरह की सब्सिडी नहीं दी जाती। अगर आप एक आवेदक है और आपने सरकार की दूसरी योजनाओं के अंतर्गत जैसे की सुकन्या योजना में सब्सिडी के लिए आवेदन किया है जिसमें सरकार कैपिटल सब्सिडी प्रदान करती है तो उस सब्सिडी को मुद्रा लोन से लिंक किया जा सकता है।

मुद्रा लोन के लिए एप्लीकेशन फॉर्म

मुद्रा लोन के लिए आप एप्लीकेशन फॉर्म बैंक से प्राप्त कर सकते हो या सीधे ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं। या फिर आप सीधे गूगल में जाकर के मुद्रा एप्लीकेशन फॉर्म पीडीएफ लिख करके सर्च कर सकते हैं। आपको सर्च रिजल्ट में सारे बैंकों के मुद्रा फॉर्म पीडीएफ में मिल जाएंगे।

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Birsa Munda biography in Hindi बिरसा मुंडा की जीवनी, बिरसा आंदोलन

Birsa Munda biography in Hindi

ऐसा माना जाता है कि भारत में क्रांतिकारी और अंग्रेजो के खिलाफ ब्रिटिश सरकार का विरोध सबसे पहले बिरसा मुंडा द्वारा 1890 के आस-पास शुरू हुआ था। Birsa Munda biography in Hindi

बिरसा आंदोलन उन्नीसवीं सदी के आदिवासी आंदोलन में सर्वाधिक संगठित व व्यापक आंदोलन था जो वर्तमान झारखंड राज्य के खूंटी जिले के दक्षिणी भाग में 1899 से 1900 में हुआ था। इसे मुंडा उलगुलान जिसका हिंदी में शाब्दिक अर्थ होता है मुंडा महा विद्रोह जो सामूहिक भू स्वामित्व व्यवस्था का जमीन और जमींदार या व्यक्तिगत भू स्वामित्व व्यवस्था में परिवर्तन के विरुद्ध इस आंदोलन का उदय और बाद में बसा के धार्मिक राजनीतिक आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था। बिरसा मुंडा आंदोलन सामूहिक भू स्वामित्व व्यवस्था का जमीन दारी या व्यक्तिगत भूस्वामी तत्व व्यवस्था में परिवर्तन की विरोध मैं इस आंदोलन का उदय हुआ और बाद में बिरसा के धार्मिक राजनीतिक आंदोलन के रूप में इसका व्यापक स्वरूप देखा जाता है।

बिरसा मुंडा की जीवनी – Birsa Munda biography in Hindi

बिरसा आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य

★ बिरसा के पिता का नाम – सुगना मुंडा

★ बिरसा की माता का नाम- कदमी मुंडा

★ बिरसा मुंडा का नामकरण- बिरसा मुंडा का नामकरण बिरसा मुंडा इसलिए रखा गया क्योंकि बृहस्पतिवार के दिन जन्म लेने के कारण बिरसा नाम रखा गया।

★ बिरसा मुंडा का बचपन का नाम – बिरसा मुंडा का बचपन का नाम दाऊद मुंडा था

★ विरसा के सबसे बड़े भाई का नाम – कौनता मुंडा था

★ बिरसा के आरंभिक शिक्षक का नाम जयपाल नाग था

★ विरसा के धार्मिक गुरु का नाम आनंद पंडा/ पांडे बंद कहां के जमींदार जगमोहन सिंह का मुंशी एवं वैष्णवी धर्म को मानने वाला था।

बिरसा मुंडा के प्रमुख विचार एवं सूत्र

● अनेक देवी देवताओं के अस्थान पर सिर्फ सिंह बंगा की आराधना करना

● उपासना के लिए मंदिर जाना आवश्यक नहीं उपासना के लिए सबसे उपयुक्त स्थल के रूप में गांव के सरना को मान्यता

● हिंसा का परित्याग व पशु बलि का निषेध

● हड़िया समेत सभी प्रकार के मध्य पान का निषेध

● जनेऊ धारण करना

★ विरसाइत धर्म – बिरसा मुंडा द्वारा प्रतिपादित या धर्म वास्तव में या मुंडा जाति की धार्मिक भावनाओं के साथ हिंदू धर्म एवं ईसाई धर्म के तत्वों का मिश्रण था।

बिरसा मुंडा की जीवनी – Birsa Munda biography in Hindi

विरसा आभा, बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 ई मैं झारखंड राज्य के रांची जिले के खूंटी अनुमंडल के तमाड़ थाना अंतर्गत उलीहातू गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम सुगना मुंडा था, बाद में उनका संपूर्ण परिवार चलकद गांव में जाकर बस गया यह गांव बाद में जाकर विरसा मुंडा के अनुयायियों के तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाने लगा। बिरसा मुंडा ने ईसाई धर्म प्रचारकों से शिक्षा ग्रहण की तथा इसके बाद उन पर वैष्णवी संप्रदाय का प्रभाव पड़ा और उनसे भी उन्होंने कुछ शिक्षा ग्रहण की। Birsa Munda biography in Hindi

1893-94 मैं बरसाने वन विभाग द्वारा ग्राम की बंजर जमीनों को अधिकृत करने के विरोध में आंदोलन में भाग लिया परंतु इस आंदोलन में वह मुंडा जनजाति को संगठित नहीं कर पाए, अगस्त 1895 में उसने एक नया धर्म सिंह बोंगा धर्म को शुरू किया जिससे वे धार्मिक स्तर पर लोगों को संगठित करना आरंभ कर दिया। उसने अनेक देवी-देवताओं को छोड़कर एक देवता सिंह बोंगा की आराधना करने का संदेश दिया। दूसरे शब्दों में एक ईश्वर बाद आत्मा शुद्ध हेतु उच्च स्तरीय नैतिक गुण विकसित करने के लिए कुछ सिद्धांत प्रस्तुत किए। साथ ही में उसने अपने आप को सिंह बोंगा का दूत घोषित किया और वह इस धर्म के प्रचार प्रसार में लग गए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सिंह बोंगा ने उन्हें किसी को निरोग करने की चमत्कारी शक्ति भी प्रदान की है। जिससे कि वे अनुयायियों को आवेद बना देंगे और शत्रुओं की बंदूक की गोलियों को पानी बना देंगे।

तत्कालीन परिस्थितियों एवं विभिन्न धर्मों के संपर्क नहीं बिरसा को भगवान बनाने में सहायता पहुंचाई, हजारों आदिवासी उसे देखने सुनने आने लगे। उसने अपने अनुयायियों को तीर और तलवार चलाने की शिक्षा की व्यवस्था भी की, अपने एक अनुयाई गया मुंडा को प्रशिक्षण का कार्य सौंपा तथा उसे सेना अध्यक्ष बनाया। बिरसा मुंडा ने बहुत ही जल्द लगभग 6000 समर्पित मुंडा ओं का दल तैयार कर लिया था। विरसा नेता बन गया और धार्मिक आंदोलन जल्दी खेती हारी मजदूरी के राजनीतिक आंदोलन में बदल गया। बिरसा मुंडा ने यह प्रचार किया कि जो भी मुंडा उनका साथ ना देंगे उनका नाश हो जाएगा। उसने ऐलान किया- अबुआ राज एटेजाना, महारानी राज टुंडू , यह मुंडारी में कहा गया उनका शब्द है। इसका हिंदी अर्थ यह होता है कि हम लोगों का राज शुरू हो गया है, और महारानी विक्टोरिया का राज समाप्त हो जाएगा।

इसके साथ ही बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों को लगाना देने का भी आदेश दिया। Birsa Munda biography in Hindi

बिरसा आंदोलन के उद्देश्य

आर्थिक उद्देश्य – सभी बाहरी तथा विदेशी तत्वों को बाहर निकालना विशेषकर मुंडा ओं की जमीन हथियाने वाले जमींदारों को भगाना एवं जमीन को मुंडा ओं के हाथ में वापस लाना।

राजनीतिक उद्देश्य- अंग्रेजों के राजनीतिक प्रभुत्व को समाप्त करना तथा स्वतंत्र मुंडा राजकीय स्थापना करना।

धार्मिक उद्देश- ईसाई धर्म का विरोध करना तथा ईसाई बन गए असंतुष्ट मुंडा ओं को अपने धर्म में वापस लाना।

बिरसा मुंडा एक ऐसे आदर्श और न्याय पूर्ण समाज की स्थापना करना चाहते थे जो यूरोपीय और भारतीय शासकों से मुक्त हो। 1895 के अंत में बिरसा को ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध यंत्र रचने के आरोप में 2 साल के लिए जेल भेज दिया गया। महारानी विक्टोरिया के शासन की हर एक जयंती के उपलक्ष में 30 नवंबर 1897 ई को बिरसा को हजारीबाग जेल से रिहा कर दिया गया रिहा होने के बाद उसके नेतृत्व को मुंडा राजनीति और जनजाति व सामाजिक स्वीकृति मिल गई। इसलिए उन्होंने और अधिक उत्साह के साथ अपनी गतिविधियों को और तेज कर दिया। विरसा गांव-गांव घूमकर मुंडा को हथियार बंद करने लगा खूंटी बिरसा के सैनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। 1899 ई मैं क्रिसमस की पूर्व संध्या यानी कि 24 दिसंबर के दिन बिरसा मुंडा जाति का शासन स्थापित करने के लिए बिरसा मुंडा द्वारा विद्रोह का ऐलान कर दिया गया था। उसने इसके लिए ठेकेदारों, जागीरदारों, राजा, हकीमा और ईसाईयों का कत्ल करने का भी आह्वान किया। बिरसा मुंडा ने यह घोषणा करवाई की – ‘दिकू से अब हमारी लड़ाई होगी और उनके खून से जमीन इस तरह लाल होगी जैसे कि लाल झंडा’

इसके बाद क्या था उनके अनुयायियों ने अपने परम पारीक तीर कमान उसे आक्रमक गतिविधियां जारी कर दी और गिरजा घरों में आग लगाना प्रारंभ कर दिया। इस आंदोलन में महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय देश की बड़े-बड़े अखबारों में भी इस बात की काफी चर्चा हुई। Birsa Munda biography in Hindi

बिरसा आंदोलनकारियों के ऊपर दमन

सन उन्नीस सौ के आसपास में आंदोलनकारियों ने पुलिस को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया था। इसके बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा इस पर कार्यवाही की गई और डोम बारी बुरु के पहाड़ों पर आदिवासियों द्वारा युद्ध हुआ। इस युद्ध में कमिश्नर फायरबेस व डिप्टी कमिश्नर स्ट्रीट फील्ड के हाथों आंदोलनकारियों की पराजय हुई।

ब्रिटिश सरकार द्वारा चलाए गए इस कार्यवाही में गया मुंडा इटकी में मारा गया। 3 फरवरी 1900 ई मैं बिरसा मुंडा सिंहभूम में पकड़ा गया। 9 जून 1900 ई को बिरसा मुंडा को रांची जेल में हैजा से मृत्यु हो गई। इसके पश्चात ब्रिटिश सरकार द्वारा लगभग 350 मुंडा आंदोलनकारियों पर मुकदमा चलाए गए जिनमें से तीन को फांसी की सजा और 44 को आजीवन कारावास की सजा तथा 47 को कड़ी सजा दी गई। सजा पाने वाले में मनकी मुंडा जो गया मुंडा की पत्नी थी का नाम उल्लेखनीय है। जिसे 2 साल की कड़ी सजा दी गई। बिरसा आंदोलन को ब्रिटिश सरकार ने पूरी तरह से कुचल दिया था पर आज भी भारत में बिरसा आंदोलन को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में जाना जाता है। और इस तरह बिरसा आंदोलन का दमन हुआ और भगवान बिरसा अमर हो गए।

बिरसा आंदोलन का परिणाम

हालांकि बिरसा आंदोलन स्वतंत्र मुंडा राजकीय स्थापना करने के लिए विफल साबित हुआ लेकिन 1902 में गुमला एवं 1903 में खूंटी को अनुमंडल के रूप में स्थापना किया गया। इसी के साथ ही 1908 में छोटानागपुर कस्तरी अधिनियम के द्वारा मुंडा ओं को कुछ राहत अवश्य मिली। वर्ष 1908 में पारित किया गया छोटानागपुर कस्तूरी अधिनियम द्वारा खुट खट्टी अधिकारों को पुनर्स्थापित किया गया। इसका परिणाम या देखने के लिए मिला कि बंधुआ मजदूरों पर प्रतिबंध लगाया गया साथ में लगान की दरें भी कम की गई। फादर हॉफ मैन नए 1908 के छोटानागपुर कस्तूरी कानून को मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए किया गया बहुत ही सराहनीय काम बताया है।

हालांकि बहुत सारे लोगों का कहना है कि बिरसा मुंडा एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभर कर के आए, लेकिन बिरसा मुंडा के आंदोलन को आदिम समाज विरोधी कहने से इंकार नहीं किया जा सकता। मुंडा समाज आज भी उन्हें बिरसा भगवान, धरती आबा, विश्व पिता, आदि शब्दों से संबोधित करता है। बिरसा मुंडा की पवित्र समिति मुंडा ओं के हृदय में बनी हुई है। विरसा की वीरता और बलिदान की गाथा अनेक लोक कथा लोक गीत में अमर बन चुके हैं। वर्तमान समय में भी आदिवासियों में नए युग का प्रेरणा पुंज का कार्य करती है। बिरसा आंदोलन से मुंडा राज्य का सपना भले ही पूरा ना हो सका हो लेकिन विद्रोह की आग अंदर ही अंदर सुलगती रही। यही विद्रोह की आग पृथक झारखंड राज्य बनाने की प्रेरणा बन गई।

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ पहली जंग

बिरसा मुंडा बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थे। इसलिए लोगों ने उनके पिता से उनको स्कूल में दाखिला देने की सलाह दी। बिरसा मुंडा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जर्मन स्कूल से की थी। उस दौरान ईसाई स्कूल में प्रवेश लेने के लिए ईसाई धर्म अपनाना जरूरी था। स्कूल में दाखिला लेने के लिए बिरसा मुंडा ने ईसाई धर्म अपनाया, उनका नाम बदल कर के “बिरसा डेविड” रख दिया गया था।

कुछ समय तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने जर्मन मिशन स्कूल छोड़ दिया। क्योंकि बसा के मन में बचपन से ही साहूकारों के साथ ब्रिटिश सरकार के अत्याचारों के खिलाफ विद्रोह की भावना पनप रही थी।

इसके बाद पैसा ने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ लोगों को जागृत किया तथा आदिवासियों की परंपराओं को जीवित रखने के कई सारे प्रयास किए थे।

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Education Loan क्या है? Education Loan कैसे ले?

Educational Loan kya hai

हमेशा से मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले लोग जब ऊंची पढ़ाई करना चाहते हैं तो उनके सामने सबसे पहला सवाल पैसों का आता है। ऐसे में उनके पास हायर एजुकेशन लेने के लिए बैंक से लोन लेकर के आगे पढ़ने का विकल्प उपलब्ध होता है। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने बैंक से लोन लेकर के अपनी पढ़ाई पूरी की और सही समय पर रीपेमेंट करके करके अपने एजुकेशन लोन को चुकाना है। अगर आप Educational Loan लोन लेना चाहते हैं।

Educational Loan के लिये कैसे apply करे?

अगर आप होनहार है और उच्च शिक्षा के लिए पैसे की कमी आपके आगे आड़े नहीं आएगी। आजकल सभी बड़े भाइयों आसान शर्तों पर एजुकेशन लोन मुहैया करवाते हैं इसके जरिए आप भी सपनों को पंख लगा सकते हैं।

आपको लोन की किस्त अपना पढ़ाई खत्म होने के बाद 1 साल बाद, या फिर आपकी नौकरी लगने के 6 महीने बाद शुरू करनी होती है। इस लोन को आपको 15 साल में चुकाना पड़ता है।

प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी प्रोग्राम लोन उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रों को ऑनलाइन एजुकेशन लोन प्रदान करती है। प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना या प्रोग्राम के अंतर्गत आप स्कॉलरशिप के लिए भी आवेदन दे सकते हैं। प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना के अधिकारिक वेबसाइट पर आपको ज्यादातर हर बैंक के एजुकेशनल लोन के बारे में जानकारी दी गई है। अगर आप एजुकेशन लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन देना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले विद्या लक्ष्मी पोर्टल के जरिए एजुकेशन लोन का आवेदन करना होगा और इसके लिए आपको विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है।

इस पोर्टल के जरिए आवेदन करने का फायदा यह है कि आप एक साथ कई बैंकों में अपना एजुकेशन लोन के लिए आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके लिए आपको अलग-अलग बैंक में जाकर के एजुकेशन लोन के लिए आवेदन देना नहीं पड़ता।

एजुकेशन लोन (Educational Loan) प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

विद्यालक्ष्मी प्रोग्राम या योजना के अंतर्गत अगर आप आवेदन करना चाहते हैं, तो किसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है जिसे हमने एक क्रमबद्ध तरीके से नीचे दिया है।

● इस पोर्टल में वही नाम भरना है आपको जो कि आपके हाई स्कूल के मार्कशीट में दर्ज किया गया है।

● विद्या लक्ष्मी पोर्टल में रजिस्ट्रेशन करवाते समय आपको इस बात का भी ध्यान रखना है कि आप सही मोबाइल नंबर यहां दर्ज करें।

● विद्या लक्ष्मी पोर्टल में आपको सही-सही ईमेल एड्रेस भी दर्ज करनी होगी, एक बार अगर आपका ईमेल एड्रेस दर्ज हो जाएगा तो उसे दोबारा बदला नहीं जा सकता।

● विद्या लक्ष्मी पोर्टल में सारी जानकारियां आपको ईमेल एड्रेस के जरिए ही भेजी जाती है।

इसके अलावा आप www.incred.com पर भी जाकर के रजिस्ट्रेशन करवाकर के एजुकेशनल लोन ले सकते हैं। यह वेबसाइट पर सरकारी वेबसाइट भी है जो कि एजुकेशन लोन दिलाने में सिंगल विंडो की तरह काम करती है। यह एजुकेशन पोर्टल भी आपको आपके आवेदन एक साथ कई बैंकों तक पहुंचा देती है इसके लिए आपको अलग-अलग बैंकों के लिए अलग-अलग आवेदन देने की जरूरत नहीं पड़ती।

कितने रुपए तक मिलेगा एजुकेशनल लोन?

अगर आप भारत में ही रहते हुए ऊंची शिक्षा प्राप्त करने के लिए एजुकेशन लोन (Educational Loan) के लिए आवेदन करते हैं तो बैंक आपको विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत ₹1000000 तक का लोन देती है। अगर वही आप विदेश में जाकर के पढ़ाई करना चाहते हैं तो इसके लिए विद्या लक्ष्मी योजना के अंतर्गत आपको ₹2000000 तक का लोन मिल सकता है।

इस लोन में आपकी फीस के साथ-साथ किताबें खरीदने, हॉस्टल फीस भरने, लाइब्रेरी फीस के लिए भी आप लोन ले सकते हैं। अगर आप सिर्फ ₹400000 तक का लोन लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको बैंक में अपनी तरफ से कोई धनराशि जुटाने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन यदि आप ₹400000 से अधिक की राशि बैंक से लोन के रूप में लेना चाहते हैं तो उसके लिए आपको 5% धनराशि मार्जिन के रूप में बैंक में जमा करना पड़ता है।

वहीं अगर आप विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको मार्जिन मनी के रूप में 15% रकम जमा करनी पड़ती है। मार्जिन मनी को आप ऐसे समझ सकते हैं यह वार कम होती है जो किसी भी विद्यार्थियों को एक तरह से डाउन पेमेंट के रूप में बैंक को अदा करना पड़ता है।

₹400000 तक के लोन में किसी तरह की सिक्योरिटी की जरूरत नहीं पड़ती

अगर आप 400000 या उससे कम रुपए का एजुकेशनल लोन लेना चाहते हैं या उसके लिए आवेदन करने का सोच रहे हैं तो हम आपको यह बता दें कि ₹400000 या उससे कम की राशि पर आपको किसी तरह की सिक्योरिटी की जरूरत नहीं पड़ती, और ना ही आपको इसके लिए किसी तरह का मार्जिन मनी जमा करना पड़ता है।

लेकिन अगर आप 400000 से लेकर के साडे ₹600000 के बीच में लोन लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको किसी तीसरे व्यक्ति की गारंटी भी देनी होगी। अगर आपकी लोन की राशि साडे ₹600000 से अधिक है तो बैंक आपको कोई संपत्ति बंधक रखने के लिए भी कह सकता है। इसके लिए आप प्रॉपर्टी के कागजात, फिक्स डिपाजिट की राशि, जीवन बीमा का बॉन्ड इत्यादि चीजों को जमा कर सकते हैं। एजुकेशनल लोन के लिए जरूरी बात यह भी है कि इसमें कमाने वाले माता-पिता या अभिभावक को आवेदक भी बनना पड़ता है।

एजुकेशनल लोन लेने के लिए किन किन कागजातों की जरूरत होती है?

अन्य लोन की तरह एजुकेशन लोन लेने के लिए भी आपको कुछ जरूरी कागजातों की जरूरत होती है। अगर आप इससे ऑनलाइन आवेदन द्वारा एजुकेशन लोन लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको निम्नलिखित कार्स यादों की जरूरत होगी:-

1. पहचान पत्र

2. फोटोयुक्त पहचान पत्र और फोटोग्राफ

3. स्थानीय प्रमाण पत्र

4. माता पिता का आय का प्रूफ या इसके बदले माता-पिता का इनकम टैक्स आइटीआर

5. 10th या 12th का मार्कशीट

6. जिस संस्थान में आप पढ़ाई करने जा रहे हैं उसका ऐडमिशन लेटर साथी साथ में उस पाठ्यक्रम की अवधि का प्रूफ जमा करना होगा।

7. एजुकेशनल लोन (Educational Loan) लेने के लिए उम्र सीमा 16 वर्ष से लेकर के 35 वर्ष के बीच किसी भी विद्यार्थी को एजुकेशन लोन दिया जा सकता है।

8. एजुकेशनल लोन लेने के लिए छात्र भारत का नागरिक हो, उसने भारत या भारत के बाहर किसी कुछ संस्थान में प्रवेश प्राप्त कर लिया हो तो उसे आसानी से लोन मिल जाता है।

9. अगर आप किसी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में नामांकन लेने में सफल हो जाते हैं तो आपको बैंक आसानी से एजुकेशन लोन दे देता है।

10. बैंक किसी भी व्यक्ति को लोन देने से पहले इस बात को सुनिश्चित करता है कि उसकी दी जाने वाली लोन की वसूली सुनिश्चित हो सके। इसलिए लोन ऐसे लोगों को ही दिया जाता है जो इसके पुनर भुगतान की क्षमता रखते हो, या फिर एजुकेशनल लोन का भुगतान छात्र के अभिभावक याने कि माता-पिता, या फिर अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र भी इसकी अदायगी की कर सकते हैं।

एजुकेशनल लोन चुकाने की शर्तें

अगर आप एजुकेशनल लोन (Educational Loan) ले लेते हैं तो जब आपका पढ़ाई खत्म होता है तो उसके 6 महीने से 1 साल तक एजुकेशनल लोन चुकाने की छूट देती है। अगर साधारण शब्दों में कहा जाए तो कि आपके पास 6 महीने से लेकर के 1 साल तक का छूट आपको रीपेमेंट करने की छूट मिलती है। एक बार लोन मिलने के बाद आपको हर महीने अपने एजुकेशनल लोन का रीपेमेंट करना पड़ता है। यह अवधि 5 साल से लेकर के 15 साल तक हो सकती है। अगर कोई विद्यार्थी सही समय पर अपना कोर्स पूरा नहीं कर पाता, तो बैंक लोन चुकाने की मियाद 2 साल तक बढ़ा देती है।

एजुकेशनल लोन ऑनलाइन आवेदन की खास बातें

1. देश में शिक्षा के लिए ₹1000000 तक का लोन और विदेश में पढ़ने के लिए ₹2000000 तक का लोन मिलता है

2. एजुकेशन लोन के भुगतान में धारा 80 (E) के तहत आयकर में छूट मिलती है

3. यह आयकर में छूट माता-पिता के आय में शामिल किया जाता है।

4. आप अपनी पसंद के बैंक से लोन लेने के लिए आवेदन दे सकते हैं।

5. ₹400000 या उससे कम तक के लोन में किसी तरह के गारंटर या मार्जिन मनी की आवश्यकता नहीं होती

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नागरिकता संशोधन बिल (CAB) चर्चा का विषय क्यों?

नागरिकता संशोधन बिल

भारत में नागरिकता संशोधन बिल को पास कर दिया गया है और पास करने के साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों में इसको लेकर के विरोध भी शुरू हो गया है। ऐसे में आप सब और हम लोगों को यह जानना जरूरी है कि नागरिकता संशोधन बिल क्या है? और इसके बारे में चर्चा इतनी ज्यादा क्यों … Read More

What is NPA? एनपीए क्या है?

What is NPA? एनपीए क्या है?

साल 2019 में एनपीए के कारण घाटे में चल रही कई बड़ी बैंकों को मर्जर या विलय करके दूसरे बैंकों के साथ मिला दिया गया। NPA शब्द जो लोगों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है। एनपीए के चलते बड़े बैंकों को अपने लाभ का अधिकतर कब आरबीआई के पास जमा करना पड़ा जिसके चलते बैंक घाटे में जा रहे हैं। कुछ बड़े बैंकों में हुई धोखाधड़ी के कारण उनके बड़े-बड़े लोन एनपीए हो गए, ऐसे में आपके मन में विजय माल्या, ललित मोदी और नीरव मोदी का नाम जरूर जहन में आया होगा। ऐसे में एनपीए क्या है? यह जानना हर सभी को जरूरी है। What is npa in Hindi

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What is NPA? एनपीए क्या है?

आइए जानते हैं एनपीए क्या होता है। पिछले कुछ सालों में ऐसे बहुत से ख़बरें आपने भी सुनी होगी जिसमें एनपीए के कारण बहुत बैंक की बैलेंस शीट बनाने की बात कही गई थी।

बैंकों में NPA के कारण होने वाले घोटालों के चलते अब आप भी जानना चाहेंगे कि आखिर यह एनपीए क्या होता है और किस तरह से बैंकों को प्रभावित करता है तो चलिए आज आपको बताते हैं बैंक से जुड़े ऐसे NPA के बारे में।

यह तो आप जानते हैं कि बैंक में निर्धारित समय में ही EMI जमा कराई जाती है लेकिन जब बैंक का कोई देनदार अपनी निर्धारित ईएमआई का भुगतान बैंक को नहीं कर पाता है तो उसका लोन अकाउंट नॉन पर्फोमिंग एसेट यानी कि NPA हो जाता है। एसेट ऐसी चीजें होती है जिसे कभी भी नकदी में बदला जा सकता है उदाहरण के तौर पर आप ऐसे समझे जैसे कोई प्रॉपर्टी, गहने, जमीन या फिर वह किसी तरह का वाहन हो।

बैंक के नियमों के अनुसार किसी लोन की ईएमआई प्रिंसिपल और इंटरेस्ट तय सीमा के अंदर चुकानी होती है और अगर यह राशि ड्यू डेट के 90 दिन के अंदर जमा नहीं कराई जाती तो वह अकाउंट एनपीए में डाल दिया जाता है। इस स्थिति में जब किसी लोन से बैंक को रिटर्न मिलना बंद हो जाता है तो बैंक के लिए इसे एनपीआई बैड लोन कहा जाता है। लोन पर डिफॉल्ट के कारण बैंक को ज्यादा नुकसान ना हो इसके लिए आरबीआई नए प्रोविजन करने का नियम बनाया है और बैंकों प्रोविजन के बराबर रकम बिज़नेस से अलग रखनी पड़ती है।

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आरबीआई के बैंकों के ऊपर प्रोविजन का प्रावधान

बैंक द्वारा जब किसी को लोन दिया जाता है तो उसके पहले दिन से ही उस रकम पर आरबीआई द्वारा कुछ निश्चित प्रोविजन रखा गया है। ताकि अगर वह लोन डिफॉल्ट हो जाए या फिर बैड लोन की गिनती में आ जाए तो उससे होने वाले घाटा का बैंकों पर ज्यादा प्रभाव ना पड़े।

इसी चलते लोन को उसके ईएमआई के आधार पर लोन के विभिन्न कैटेगरी में बांटा जाता है, और उसी आधार पर उसके ऊपर आरबीआई द्वारा प्रोविजन किया गया है।

1. स्टैंडर्ड अकाउंट लोन NPA

जब लोन लेने वाले द्वारा लोन कारी पेमेंट बैंक को सही समय पर दिया जाता है तो उसका लोन अकाउंट स्टैंडर्ड कहलाता है। वित्तीय लेनदेन सुरक्षा के लिए आरबीआई के नियमों के अनुसार बैंक को स्टैंडर्ड लोन के लिए भी कुछ प्रोविजन रखना पड़ता है।

आरबीआई द्वारा बनाए गए नियम के अनुसार स्टैंडर्ड लोन अकाउंट पर 0.40 प्रतिशत की दर से राशि का प्रोविजन करना होता है। वही एमएसएमई सेक्टर यानी कि छोटे उद्योगों के लिए यह रकम 0.25% होती है, वही रिटेल सेक्टर के लिए यह बढ़कर के 1% तक होती है।

2. सब्सटेंडर्ड ऐसेट लोन अकाउंट

अगर किसी लोन अकाउंट में 90 दिनों के अंदर कोई भी पेमेंट नहीं होता और वह 12 महीनों तक उसी स्थिति में रहता है तो वह एनपीए हो जाता है तो उस सब स्टैंडर्ड ऐसेट कहते हैं। तो उस सब्सटेंडर्ड ऐसेट पर आरबीआई द्वारा भी कुछ प्रोविजन करनी के लिए 15 परसेंट के बराबर की प्रोविजनिंग करनी पड़ती है जिसमें बैंक उस पर 10% एक्स्ट्रा की प्रोविजनिंग करता है।

3. डाउटफुल ऐसेट NPA

अगर कोई आशिक 12 महीने तक सब्सटेंडर्ड में रहता है तो उसे डाउटफुल एसिड किस श्रेणी में डाल दिया जाता है ऐसे लोड की बकाया राशि की वसूली की गुंजाइश बहुत कम होती है। इसकी प्रोविजनिंग के दौरान यह देखा जाता है कि लोन कितने साल तक डाउटफुल केटेगरी में है अगर कोई लोन 1 साल से अधिक डाउटफुल कैटेगरी पर है। अगर कोई लोन 1 साल तक डाउटफुल रहता है तो उसकी 25% प्रोविजनिंग होगी, 3 साल तक डॉट फुल रहने पर 40 परसेंट और 3 साल के बाद 100% परसेंट प्रोविजनिंग होती है।

4. लोस्स asset

अगर सब्सटेंडर्ड के बाद भी 3 साल से ज्यादा समय तक मैं बैंक का लोन नहीं चुकाया जाता है तो बैंक इससे अनरिकवरेबल करार दे देता है और इसे लो सेट कहा जाता है लेकिन लॉस ऐसेट करार दिए जाने के लिए यह जरूरी है कि इनर और आउटर ऑडिट इसे Loss एसेट के तौर पर प्रमाणित करें।

दूसरे शब्दों में कहें तो जब भी किसी व्यक्ति को बैंक पैसा देती है तो कभी-कभी ऐसा होता है कि लोन लेने वाला इंसान बैंक को सही समय पर रीपेमेंट नहीं कर पाता। फिर बैंक उसे एक नोटिस भेजती है कि तुम अपना देख लो नहीं तो तुम्हारे खिलाफ लीगल एक्शन लिया जा सकता है। इसी के अंतर्गत बैंक द्वारा अपने एनपीए हुए लोन को रिकवर करने के लिए DBT या SARFAESI अधिनियम का सहारा लेना पड़ता है। हम नीचे के अपने इस आर्टिकल में आप लोगों को यह बताएंगे कि यह दोनों अधिनियम क्या है? और इन दोनों अधिनियम की आवश्यकता बैंक को क्यों पड़ी?

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DEBT Recovery Tribunals क्या है?

90 के दशक से पहले तक बैंक को अपने खराब हुए लोन को वापस रिकवर करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, ऐसे में ज्यादातर लोन देने वाले बैंकों की तरफ से कुछ प्रतिक्रिया आई, और जो ज्यादातर बैंक से लोन लेते थे वह उल्टा बैंक के ऊपर में केस ठोक देते थे कि मेरे साथ नाइंसाफी हुई और बैंक ने मुझे सही जानकारी ना उपलब्ध कराते हुए मुझे लोन दे दिया। इसी को ध्यान में रखकर के अपने खराब हुए लोन को वापस बैंक रिकवर कर सके इसके लिए सन 1993 में सरकार ने एनपीए मैटर को डील करने के लिए Debt Recovery Tribunal की स्थापना की। इसकी मदद से अब लेनदार सिविल कोर्ट में अपील नहीं कर सकते उनके जितने भी Case अब डेबिट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। NPA

अधिनियम के आने के बाद भले ही बैंकों को काफी सुविधा हुई हो लेकिन आज भी देखा जाए तो DRT के अंतर्गत 75000 से भी ज्यादा केस पेंडिंग पड़े हैं। 2002 में भारत सरकार द्वारा एक नया अधिनियम लाया गया जिसका नाम था SARFAESI ACT आइए जानते हैं इसके बारे में।

SARFAESI ACT क्या है?

SARFAESI Act में SARFAESI का फुल फॉर्म होता है Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act,

आइए इसको को एक उदाहरण द्वारा समझते हैं, कि किस तरह से बैंक सरफेसी एक्ट के जरिए आपके लिए गए लोन से वसूली कर सकता है।

उदाहरण

मान लीजिए कि मोहन नाम के किसी बंदे को 10000000 रुपए की जरूरत एक नई फैक्ट्री लगाने के लिए है। तो मोहन कहां-कहां से पैसे इसके लिए इकट्ठा कर सकता है यानी कि मोहन कौन से स्रोतों से पैसे इकट्ठा कर सकता है।

Equity (IPO-Share) इसके तहत मोहन खुद अपने पैसे मान लेते हैं 2000000 रुपए लगाता है, और बाकी पैसों के लिए IPO (initial public offering) या share के माध्यम से 3000000 रूपए और इकट्ठे करता है। अब यानी कि 10000000 रुपए में से उसने 5000000 रुपए इकट्ठे कर लिए हैं। या पैसा पब्लिक का और उसका हो सकता है।

Debt Loan, Bond अब बाकी बचे हुए 5000000 जमा करने के लिए वह बैंक से लोन लेता है तो इसे यूं हम समझते हैं, माना कि उसने बैंक से ₹4000000 का लोन लिया, साथ में Bond के माध्यम से उसने 1000000 रुपए और जमा की है।

मोहन के पास अब अपनी नई फैक्ट्री लगाने के लिए 10000000 रुपए मिल गया है। शुरुआत में मोहन भाई साहब की कंपनी बहुत बढ़िया से चल रही थी और वह काफी अच्छी प्रॉफिट भी कमा रहा था, लेकिन अचानक मोहन को अब अपनी कंपनी से घाटा होने लगा और वह बैंक का Repayment चुकाने में भी असमर्थ होने लगा। www.iob.in ने उसे नोटिस भी भेजा लेकिन इसके बावजूद मोहन बैंक की ईएमआई चुकाने में असमर्थ था। ऐसे तो ऊपर दिए गए उदाहरण में हमने आप लोगों को यह बताया है कि मोहन ने बैंक से ₹4000000 लोन के तौर पर लिए, और मोहन उसका ईएमआई बनने में असमर्थ है। ऐसे में बैंक उसके 4000000 रुपए को NPA घोषित कर देगा। ऐसी स्थिति में बैंक मोहन से अपनी बकाया रकम को Recover करने के लिए एक्शन लेगी, जोकि SARFAESI Act के अंतर्गत आने वाली चीजों से रिकवर किया जाएगा।

SARFAESI Act के अंतर्गत बैंक अपने लोन की रिकवरी किस तरह से करेगी?

जब कोई बड़ा लोन जैसे कि हमने ऊपर उदाहरण में बताया है कि मोहन ने बैंक से ₹4000000 का लोन लिया एक नई फैक्ट्री लगाने के लिए, लेकिन मोहन बैंक का ईएमआई भरने में असमर्थ है। उसका ₹4000000 का लोन एनपीए हो चुका है। ऐसे में बैंक अपने लोन की रिकवरी किस तरह से करेगी, इसके लिए सरफैसी एक्ट के अंतर्गत निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं।

1. मोहन के असेट्स assets (Commercial, residential, fixed or Moving) को बैंक बिना कोर्ट के ऑर्डर की बिना जोत कर सकती है।

2. उसके assets को Auction/Sale यानी कि नीलामी कर सकती है या बेच सकती है।

3. अगर मोहन ने किसी तीसरे इंसान को अपने assets पहले से ही बेच दिया है तो बैंक तीसरे इंसान से वह सारे assets वापस ले सकती है।

4. अगर किसी तीसरे इंसान के पास मोहन के पैसे हैं तो बैंक उन पैसों को भी वापस ले सकती है।

ऐसे तो SARFAESI Act के अंतर्गत ₹1000000 तक का मामला ही निपटारा किया जाता है, साथ में इस अधिनियम के अंतर्गत उन परिसंपत्तियों पर भी लागू होती है जो लोन देने के वक्त गिरवी या सुरक्षित रखी गई हो। अगर मोहन ने बैंक से बिजनेस लोन लिया है तो बैंक उसे अपने कारखाने, मशीनें, वाहन, भूमि आदि को बंधक के रूप में (mortgage) के रूप में रखने को कहता है। इस नियम के अंतर्गत बैंक मोहन के निजी घर, फर्नीचर, महंगे सामान, agricultural land कृषि योग्य भूमि, आदि को सरफेसी एक्ट के अंतर्गत शामिल नहीं कर सकता। और ना ही बैंक इन सारी चीजों को नीलामी या बेच सकती है।

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Domain flipping अपने Website/Blog को sell कैसे करें? लाखों रुपए कैसे कमाए?

Domain flipping अपने Website/Blog को sell कैसे करें? लाखों रुपए कैसे कमाए?

अक्सर आपने इंटरनेट पर, या दूसरे समाचार पत्रों पर यह खबर तो जरूर सुनी होगी,फलन website या blog इतने लाखों में बिकी, या इतनी करोड़ रुपए में बिकी। Domain flipping . अपने Website/Blog को sell कैसे करें? लाखों रुपए कैसे कमाए?

हाल ही के दिनों में यह खबर तो आपने जरूर सुनी थी कि, facebook ने अपना एक website domain बेचा था। यह डोमेन था, fb.com जो ज्यादातर मोबाइल फोन पेज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आपको यह सुनकर हैरानी होगी कि फेसबुक में यह डोमेन नाम 8.5 million Dollar मे खरीदा था, जो कि facebook.com से 42 गुना अधिक दाम था।

आप सोच रहे होंगे कि क्या यह मुमकिन है? किसी भी वेबसाइट की कीमत कितनी हो सकती है, 8.5 million डॉलर बहुत होते हैं. अगर भारतीय रुपयों में देखा जाए तो 60,47,07,000 रुपए होते हैं. भारतीय रुपयों में याद कीमत देख कर के आप भी भोजक के हो गए होंगे। लेकिन यह सच है, वेबसाइट या ब्लॉग खरीद बिक्री की दुनिया में यह सब चीज मुमकिन है। रातों-रात यहां किसी वेबसाइट की कीमत लाखों करोड़ों तक पहुंच जाती है। आप भी इस buisness मैं जुड़कर के लाखों करोड़ों रुपए की कमाई कर सकते हैं.

लेकिन जब भी हम इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो हम ज्यादातर Video tutorials, Blogging, Affiliate marketing etc. और इंटरनेट से पैसे कमाने के तरीके के बारे में ही नए नए विकल्प तलाशते हैं। लेकिन आज यहां हम एक बेहतर Income Source ओर Marketplace के बारे में बात करेंगे जो पूरी तरह से इंटरनेट से जुड़ी हुई है जहां आप, Website ,Domain, Apps, Computer Software, application development और मार्केटिंग से जुड़े चीजों को बेच सकते हैं। इस जगह पर दुनिया भर से बोलियां लगाई जाती है, इसकी मदद से आप अच्छे खासे पैसे earn कर सकते हैं।

इंटरनेट की दुनिया में इस तरह के बिजनेस को Domain flipping भी कहा जाता है, इस तरह के बिजनेस में आप डोमेन खरीद कर उसे वापस भेज देते हैं। यह बिजनेस आपको अच्छी खासी इनकम और पैसे बनाने में काफी मदद करता है। इंटरनेट की दुनिया में डोमेन नाम सिर्फ एक एड्रेस नहीं है बल्कि एक प्रॉपर्टी है। जिस तरह से लोग जमीन घर खरीद और व्यस्त हैं उसी तरह से यहां पर लोग डोमेन खरीदते हैं और उसे ज्यादा दाम में बेचते हैं।

Domain flipping क्या होता है?

इंटरनेट की दुनिया में Domain flipping का मतलब domain को buy और sell करना होता है। पर किसी एक डोमेन की क्या वैल्यू होनी चाहिए? यह आपको पता होना चाहिए. डोमेन खरीदते वक्त आपको बहुत ही सूझबूझ के साथ किसी भी डोमेन को खरीदना चाहिए। आपको एक आशा डोमेन खरीदना चाहिए जिसकी कीमत आने वाले भविष्य में ज्यादा हो।

Domain flipping का बिजनेस ठीक उसी तरह काम करता है जैसे कि शेयर मार्केट का बिजनेस होता है। इस बिजनेस में आपको काफी कम जोखिम का सामना करना पड़ता है। इस बिजनेस में आपके ज्यादा फायदे नुकसान कम है।

Domain flipping के लिए एक अच्छा डोमेन नाम कैसे खरीद सकते हैं?

डोमेन नाम खरीदना बहुत ही आसान होता है, अगर आप डोमेन फ्लिपिंग का बिजनेस करना चाहते हैं तो आपको इस बारे में जरूर ध्यान रखना चाहिए कि आप किस तरह का डोमेन नाम खरीद रहे है। जब भी आप डोमेन नाम करते हैं तो आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

● आपके खरीदेगा डोमेन नाम spam ना हो

● खरीदा क्या डोमेन नाम छोटा या कम से कम 10 अक्षरों का होना चाहिए

● डोमेन नाम छोटा होने के साथ-साथ याद रखने में भी आसान हो साथ में उसमें कुछ नयापन भी हो

● डोमेन नेम गूगल द्वारा banned किया हुआ ना हो

● Domain flipping के बिजनेस के लिए आप जितना छोटा डोमेन नाम खरीदते हो भविष्य में उसकी कीमत उतनी ज्यादा होती है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्यादातर लोग छोटे और याद रखने लायक डोमेन नाम अपने वेबसाइट याद कंपनी के लिए खरीदते हैं, और इसके लिए वह मुंह मांगी कीमत भी अदा करते हैं।

Domain Name कहाँ से खरीदे?

अगर आप डोमेन फ्लिपिंग कि बिजनेस में आना चाहते हैं तो आप इस बात का ध्यान रखें कि आप जब भी डोमेन खरीदते हैं तो उसे कम दाम में खरीदें ताकि आप उसे बाद में ज्यादा दाम में बेच सकें। ऐसे तो इंटरनेट पर बहुत सारे ऐसे वेबसाइट आपको मिल जाएंगे जहां से आप डोमेन नाम खरीद सकते हैं। लेकिन फिर भी हमने नीचे कुछ ऐसे वेबसाइटों के नाम दिए हैं जहां से आप डोमेन नाम खरीद सकते हैं।

● Godaddy

● Bigrock

● Hostinger

इन सब कंपनियों में से गोडैडी और बिग्रॉक ऐसी कंपनी है जो सबसे पॉपुलर हैं और दोनों ही कंपनियां सबसे कम दामों में आपको डोमेन उपलब्ध करवाती है। इसके अलावा भी कई प्लेटफार्म है जहां से आप अपने लिए डोमेन खरीद सकते हो। अपने डोमेन खरीदने का काम तो पूरा कर लिया है लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि आप अपना डोमेन कहां पर बेचोगे।

Domain नाम कहाँ और कैसे बेच सकते हैं?

अगर आप डोमेन खरीद करके उन्हें रजिस्ट्रेशन करके उन्हें बेचना चाहते हैं और उनसे पैसे कमाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले उस डोमेन का मूल्य को पहचानना होगा। उदाहरण के तौर पर आपको डोमेन नाम कई तरह के एक्सटेंशन में मिल जाते हैं जैसे कि .Com,.In,.Net,.Org, etc इन सारे डोमेन एक्सटेंशन में से .com Top level domain, में गिना जाता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि यह कमर्शियल तौर पर इस्तेमाल किया जाता है और या डोमेन एक्सटेंशन दूसरे एक्सटेंशन से बेहतर होता है। अगर आपके पास में डॉट कॉम डोमेन है तो आप उसे ज्यादा दाम पर बेच सकते हैं और ज्यादा कमीशन भी कमा सकते हैं। लेकिन हम यहां पर आपको बताने वाले हैं कि आप अपने खरीदे हुए डोमेन को कहां पर बेच सकते हो, ऐसे तो इंटरनेट पर कई सारे अब से वेबसाइट उपलब्ध है जहां से आप इन्हें खरीद और बेच दोनों काम कर सकते हो, बस इसके लिए आपको उस वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होता है। ऐसे ही वेबसाइट की सूची हम दे नीचे दी है जहां पर आप डोमेन खरीद बिक्री का काम कर सकते हो

● sedo.com

● Godaddy Auction

● Flippa.Com
● Cax.Com
● Budomains.Com
● huntingmoon.com

● 4.cn etc.

इसके अलावा भी बहुत सारे वेबसाइट है वहां पर आप अपने रजिस्टर किए गए डोमेन की खरीद बिक्री कर सकते हैं, साथी में अगर आपकी कोई वेबसाइट है तो आप उस पर एक ad लगा कर के अपने डोमेन को भी बेच और खरीद सकते हैं। डोमेन नेम को खरीदने के बाद आपको और एक काम करना पड़ता है जिसे हम लोग तकनीकी भाषा में Domain parking भी कहते हैं। इसके बारे में भी आपको जानकारी होना आवश्यक है।

Domain Parking क्या होता है?

ऊपर के आर्टिकल में आपने यह तो जान गया कि आप किस तरह से Domain flipping का बिजनेस करोगे, उन्हें आप कहां पर बेच सकते हो, लेकिन आप उन्हें डोमेन खरीद लेने के बाद आप उसे बेचने के लिए कुछ इंतजार करना पड़ता है ऐसे मैं आपको अपना डोमेन Park, या redirect करना होता है। आप चाहे तो उसे इस्तेमाल भी कर सकते हैं, इससे आपकी डोमेन की वैल्यू और ज्यादा बढ़ जाती है।

डोमेन पार्किंग में आप अपने डोमेन को एक जगह पर पार करते हो ठीक उसी तरह जैसे कि आप अपनी गाड़ी को एक सुरक्षित स्थान पर पार्क कर रखते हो, डोमेन पार्किंग भी दो तरह की होती है।

● free domain Parking

● Cash parking

Free Domain Parking क्या होती है?

फ्री डोमेन पार्किंग के लिए बहुत सारी वेबसाइट उपलब्ध है जहां आप रजिस्ट्रेशन करवा करके अपने नए डोमेन को को park करके रख सकते हैं, इसके लिए आपको किसी भी तरह का शुल्क अदा करना नहीं पड़ता। इसलिए इसे फ्री डोमेन पार्किंग कहा जाता है।

Cash Parking क्या होती है?

अगर आप अपना डोमेन नेम को केस पार्किंग करवाते हैं तो इसके लिए आपको पैसे खर्च करने पड़ते हैं, डोमेन नेम को रजिस्टर करवा करके और उस डोमेन को कैश पार्क आप कर सकते हैं। एक उदाहरण के द्वारा आप इस तरह समझ सकते हैं, मान लीजिए कि आपके पास एक domain है और उसे आप अपने रजिस्ट्रार उदाहरण के तौर पर Godaddy पर कैश पार्किंग करना चाहते हैं, और जब आप अपने डोमेन को गोडैडी पर केस पार्क कर देंगे, कोई भी बंदा जब अपने सर्च बार पर या किसी दूसरे माध्यम से आपके द्वारा park किए गए, डोमेन पर पहुंचता है तो उसे गोडैडी की कुछ ads दिखाई देंगी। जिसे यह पता चलता है कि वह डोमेन रिजर्व किया गया है और साथ ही में वहां चलने वाले कुछ ads के कमीशन भी आपको प्राप्त होते हैं।

Cash Parking भी एक ऐड नेटवर्क की तरह काम करता है, लेकिन यह सेवाएं फ्री नहीं होती इसके लिए आपको पूरे साल या फिर महीने के हिसाब से पैसे देने होते हैं। ताकि आपको ऐड पर पैसे का हिस्सा मिल सके।

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