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अंग्रेजी बोलना कैसे सीखें? – How to Learn speak English

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हमारे जीवन में शिक्षक का महत्व- Teacher Importance in Hindi 2020

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Biography मुकेश अंबानी

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Birsa Munda biography in Hindi बिरसा मुंडा की जीवनी, बिरसा आंदोलन

Birsa Munda biography in Hindi

ऐसा माना जाता है कि भारत में क्रांतिकारी और अंग्रेजो के खिलाफ ब्रिटिश सरकार का विरोध सबसे पहले बिरसा मुंडा द्वारा 1890 के आस-पास शुरू हुआ था। Birsa Munda biography in Hindi

बिरसा आंदोलन उन्नीसवीं सदी के आदिवासी आंदोलन में सर्वाधिक संगठित व व्यापक आंदोलन था जो वर्तमान झारखंड राज्य के खूंटी जिले के दक्षिणी भाग में 1899 से 1900 में हुआ था। इसे मुंडा उलगुलान जिसका हिंदी में शाब्दिक अर्थ होता है मुंडा महा विद्रोह जो सामूहिक भू स्वामित्व व्यवस्था का जमीन और जमींदार या व्यक्तिगत भू स्वामित्व व्यवस्था में परिवर्तन के विरुद्ध इस आंदोलन का उदय और बाद में बसा के धार्मिक राजनीतिक आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था। बिरसा मुंडा आंदोलन सामूहिक भू स्वामित्व व्यवस्था का जमीन दारी या व्यक्तिगत भूस्वामी तत्व व्यवस्था में परिवर्तन की विरोध मैं इस आंदोलन का उदय हुआ और बाद में बिरसा के धार्मिक राजनीतिक आंदोलन के रूप में इसका व्यापक स्वरूप देखा जाता है।

बिरसा मुंडा की जीवनी – Birsa Munda biography in Hindi

बिरसा आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य

★ बिरसा के पिता का नाम – सुगना मुंडा

★ बिरसा की माता का नाम- कदमी मुंडा

★ बिरसा मुंडा का नामकरण- बिरसा मुंडा का नामकरण बिरसा मुंडा इसलिए रखा गया क्योंकि बृहस्पतिवार के दिन जन्म लेने के कारण बिरसा नाम रखा गया।

★ बिरसा मुंडा का बचपन का नाम – बिरसा मुंडा का बचपन का नाम दाऊद मुंडा था

★ विरसा के सबसे बड़े भाई का नाम – कौनता मुंडा था

★ बिरसा के आरंभिक शिक्षक का नाम जयपाल नाग था

★ विरसा के धार्मिक गुरु का नाम आनंद पंडा/ पांडे बंद कहां के जमींदार जगमोहन सिंह का मुंशी एवं वैष्णवी धर्म को मानने वाला था।

बिरसा मुंडा के प्रमुख विचार एवं सूत्र

● अनेक देवी देवताओं के अस्थान पर सिर्फ सिंह बंगा की आराधना करना

● उपासना के लिए मंदिर जाना आवश्यक नहीं उपासना के लिए सबसे उपयुक्त स्थल के रूप में गांव के सरना को मान्यता

● हिंसा का परित्याग व पशु बलि का निषेध

● हड़िया समेत सभी प्रकार के मध्य पान का निषेध

● जनेऊ धारण करना

★ विरसाइत धर्म – बिरसा मुंडा द्वारा प्रतिपादित या धर्म वास्तव में या मुंडा जाति की धार्मिक भावनाओं के साथ हिंदू धर्म एवं ईसाई धर्म के तत्वों का मिश्रण था।

बिरसा मुंडा की जीवनी – Birsa Munda biography in Hindi

विरसा आभा, बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 ई मैं झारखंड राज्य के रांची जिले के खूंटी अनुमंडल के तमाड़ थाना अंतर्गत उलीहातू गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम सुगना मुंडा था, बाद में उनका संपूर्ण परिवार चलकद गांव में जाकर बस गया यह गांव बाद में जाकर विरसा मुंडा के अनुयायियों के तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाने लगा। बिरसा मुंडा ने ईसाई धर्म प्रचारकों से शिक्षा ग्रहण की तथा इसके बाद उन पर वैष्णवी संप्रदाय का प्रभाव पड़ा और उनसे भी उन्होंने कुछ शिक्षा ग्रहण की। Birsa Munda biography in Hindi

1893-94 मैं बरसाने वन विभाग द्वारा ग्राम की बंजर जमीनों को अधिकृत करने के विरोध में आंदोलन में भाग लिया परंतु इस आंदोलन में वह मुंडा जनजाति को संगठित नहीं कर पाए, अगस्त 1895 में उसने एक नया धर्म सिंह बोंगा धर्म को शुरू किया जिससे वे धार्मिक स्तर पर लोगों को संगठित करना आरंभ कर दिया। उसने अनेक देवी-देवताओं को छोड़कर एक देवता सिंह बोंगा की आराधना करने का संदेश दिया। दूसरे शब्दों में एक ईश्वर बाद आत्मा शुद्ध हेतु उच्च स्तरीय नैतिक गुण विकसित करने के लिए कुछ सिद्धांत प्रस्तुत किए। साथ ही में उसने अपने आप को सिंह बोंगा का दूत घोषित किया और वह इस धर्म के प्रचार प्रसार में लग गए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सिंह बोंगा ने उन्हें किसी को निरोग करने की चमत्कारी शक्ति भी प्रदान की है। जिससे कि वे अनुयायियों को आवेद बना देंगे और शत्रुओं की बंदूक की गोलियों को पानी बना देंगे।

तत्कालीन परिस्थितियों एवं विभिन्न धर्मों के संपर्क नहीं बिरसा को भगवान बनाने में सहायता पहुंचाई, हजारों आदिवासी उसे देखने सुनने आने लगे। उसने अपने अनुयायियों को तीर और तलवार चलाने की शिक्षा की व्यवस्था भी की, अपने एक अनुयाई गया मुंडा को प्रशिक्षण का कार्य सौंपा तथा उसे सेना अध्यक्ष बनाया। बिरसा मुंडा ने बहुत ही जल्द लगभग 6000 समर्पित मुंडा ओं का दल तैयार कर लिया था। विरसा नेता बन गया और धार्मिक आंदोलन जल्दी खेती हारी मजदूरी के राजनीतिक आंदोलन में बदल गया। बिरसा मुंडा ने यह प्रचार किया कि जो भी मुंडा उनका साथ ना देंगे उनका नाश हो जाएगा। उसने ऐलान किया- अबुआ राज एटेजाना, महारानी राज टुंडू , यह मुंडारी में कहा गया उनका शब्द है। इसका हिंदी अर्थ यह होता है कि हम लोगों का राज शुरू हो गया है, और महारानी विक्टोरिया का राज समाप्त हो जाएगा।

इसके साथ ही बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों को लगाना देने का भी आदेश दिया। Birsa Munda biography in Hindi

बिरसा आंदोलन के उद्देश्य

आर्थिक उद्देश्य – सभी बाहरी तथा विदेशी तत्वों को बाहर निकालना विशेषकर मुंडा ओं की जमीन हथियाने वाले जमींदारों को भगाना एवं जमीन को मुंडा ओं के हाथ में वापस लाना।

राजनीतिक उद्देश्य- अंग्रेजों के राजनीतिक प्रभुत्व को समाप्त करना तथा स्वतंत्र मुंडा राजकीय स्थापना करना।

धार्मिक उद्देश- ईसाई धर्म का विरोध करना तथा ईसाई बन गए असंतुष्ट मुंडा ओं को अपने धर्म में वापस लाना।

बिरसा मुंडा एक ऐसे आदर्श और न्याय पूर्ण समाज की स्थापना करना चाहते थे जो यूरोपीय और भारतीय शासकों से मुक्त हो। 1895 के अंत में बिरसा को ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध यंत्र रचने के आरोप में 2 साल के लिए जेल भेज दिया गया। महारानी विक्टोरिया के शासन की हर एक जयंती के उपलक्ष में 30 नवंबर 1897 ई को बिरसा को हजारीबाग जेल से रिहा कर दिया गया रिहा होने के बाद उसके नेतृत्व को मुंडा राजनीति और जनजाति व सामाजिक स्वीकृति मिल गई। इसलिए उन्होंने और अधिक उत्साह के साथ अपनी गतिविधियों को और तेज कर दिया। विरसा गांव-गांव घूमकर मुंडा को हथियार बंद करने लगा खूंटी बिरसा के सैनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। 1899 ई मैं क्रिसमस की पूर्व संध्या यानी कि 24 दिसंबर के दिन बिरसा मुंडा जाति का शासन स्थापित करने के लिए बिरसा मुंडा द्वारा विद्रोह का ऐलान कर दिया गया था। उसने इसके लिए ठेकेदारों, जागीरदारों, राजा, हकीमा और ईसाईयों का कत्ल करने का भी आह्वान किया। बिरसा मुंडा ने यह घोषणा करवाई की – ‘दिकू से अब हमारी लड़ाई होगी और उनके खून से जमीन इस तरह लाल होगी जैसे कि लाल झंडा’

इसके बाद क्या था उनके अनुयायियों ने अपने परम पारीक तीर कमान उसे आक्रमक गतिविधियां जारी कर दी और गिरजा घरों में आग लगाना प्रारंभ कर दिया। इस आंदोलन में महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय देश की बड़े-बड़े अखबारों में भी इस बात की काफी चर्चा हुई। Birsa Munda biography in Hindi

बिरसा आंदोलनकारियों के ऊपर दमन

सन उन्नीस सौ के आसपास में आंदोलनकारियों ने पुलिस को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया था। इसके बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा इस पर कार्यवाही की गई और डोम बारी बुरु के पहाड़ों पर आदिवासियों द्वारा युद्ध हुआ। इस युद्ध में कमिश्नर फायरबेस व डिप्टी कमिश्नर स्ट्रीट फील्ड के हाथों आंदोलनकारियों की पराजय हुई।

ब्रिटिश सरकार द्वारा चलाए गए इस कार्यवाही में गया मुंडा इटकी में मारा गया। 3 फरवरी 1900 ई मैं बिरसा मुंडा सिंहभूम में पकड़ा गया। 9 जून 1900 ई को बिरसा मुंडा को रांची जेल में हैजा से मृत्यु हो गई। इसके पश्चात ब्रिटिश सरकार द्वारा लगभग 350 मुंडा आंदोलनकारियों पर मुकदमा चलाए गए जिनमें से तीन को फांसी की सजा और 44 को आजीवन कारावास की सजा तथा 47 को कड़ी सजा दी गई। सजा पाने वाले में मनकी मुंडा जो गया मुंडा की पत्नी थी का नाम उल्लेखनीय है। जिसे 2 साल की कड़ी सजा दी गई। बिरसा आंदोलन को ब्रिटिश सरकार ने पूरी तरह से कुचल दिया था पर आज भी भारत में बिरसा आंदोलन को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में जाना जाता है। और इस तरह बिरसा आंदोलन का दमन हुआ और भगवान बिरसा अमर हो गए।

बिरसा आंदोलन का परिणाम

हालांकि बिरसा आंदोलन स्वतंत्र मुंडा राजकीय स्थापना करने के लिए विफल साबित हुआ लेकिन 1902 में गुमला एवं 1903 में खूंटी को अनुमंडल के रूप में स्थापना किया गया। इसी के साथ ही 1908 में छोटानागपुर कस्तरी अधिनियम के द्वारा मुंडा ओं को कुछ राहत अवश्य मिली। वर्ष 1908 में पारित किया गया छोटानागपुर कस्तूरी अधिनियम द्वारा खुट खट्टी अधिकारों को पुनर्स्थापित किया गया। इसका परिणाम या देखने के लिए मिला कि बंधुआ मजदूरों पर प्रतिबंध लगाया गया साथ में लगान की दरें भी कम की गई। फादर हॉफ मैन नए 1908 के छोटानागपुर कस्तूरी कानून को मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए किया गया बहुत ही सराहनीय काम बताया है।

हालांकि बहुत सारे लोगों का कहना है कि बिरसा मुंडा एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभर कर के आए, लेकिन बिरसा मुंडा के आंदोलन को आदिम समाज विरोधी कहने से इंकार नहीं किया जा सकता। मुंडा समाज आज भी उन्हें बिरसा भगवान, धरती आबा, विश्व पिता, आदि शब्दों से संबोधित करता है। बिरसा मुंडा की पवित्र समिति मुंडा ओं के हृदय में बनी हुई है। विरसा की वीरता और बलिदान की गाथा अनेक लोक कथा लोक गीत में अमर बन चुके हैं। वर्तमान समय में भी आदिवासियों में नए युग का प्रेरणा पुंज का कार्य करती है। बिरसा आंदोलन से मुंडा राज्य का सपना भले ही पूरा ना हो सका हो लेकिन विद्रोह की आग अंदर ही अंदर सुलगती रही। यही विद्रोह की आग पृथक झारखंड राज्य बनाने की प्रेरणा बन गई।

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ पहली जंग

बिरसा मुंडा बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थे। इसलिए लोगों ने उनके पिता से उनको स्कूल में दाखिला देने की सलाह दी। बिरसा मुंडा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जर्मन स्कूल से की थी। उस दौरान ईसाई स्कूल में प्रवेश लेने के लिए ईसाई धर्म अपनाना जरूरी था। स्कूल में दाखिला लेने के लिए बिरसा मुंडा ने ईसाई धर्म अपनाया, उनका नाम बदल कर के “बिरसा डेविड” रख दिया गया था।

कुछ समय तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने जर्मन मिशन स्कूल छोड़ दिया। क्योंकि बसा के मन में बचपन से ही साहूकारों के साथ ब्रिटिश सरकार के अत्याचारों के खिलाफ विद्रोह की भावना पनप रही थी।

इसके बाद पैसा ने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ लोगों को जागृत किया तथा आदिवासियों की परंपराओं को जीवित रखने के कई सारे प्रयास किए थे।

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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना भारत सरकार की एक ऐसी योजना है जिससे साल 2015 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत साल 2020 तक एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देकर के उन्हें रोजगार देने मुहैया करवाने का काम शुरू किया गया है। जिससे कि कम पढ़े लिखे लोग भी इस योजना का लाभ उठा सकें और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत अपने अंदर में किसी विशेष काम को लेकर के प्रशिक्षण प्राप्त कर सके। जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त करने में आसानी हो।

इस योजना के अंतर्गत हुए सारे लोग आवेदन दे सकते हैं जिन्होंने अच्छी खासी पढ़ाई की है या फिर वह अनपढ़ हैं या कम पढ़े लिखे हैं या फिर उन्होंने बीच में ही स्कूल छोड़ दिया है। वह लोग प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की मदद से प्रशिक्षण प्राप्त करके रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 3 तरह के रजिस्ट्रेशन होते हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए अलग अलग महीनों में प्रशिक्षण होता है। उन संबंधित कार्यक्रमों के आधार पर आप यह रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

● 3 महीने का रजिस्ट्रेशन 3 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए होता है।

6 महीने का रजिस्ट्रेशन जो 6 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए होता है।

1 साल का रजिस्ट्रेशन जो कि 1 साल के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए होता है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 3 महीने, 6 महीने और 1 साल के लिए रजिस्ट्रेशन होता है। कोर्स पूरा करने के बाद सर्टिफिकेट दिया जाता है, यह सर्टिफिकेट या प्रमाण पत्र पूरे देश में माननीय होता है। इस प्रमाण पत्र के जरिए आप पूरे देश में कहीं पर भी रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।

इस योजना के अंतर्गत सरकार कम से कम देश के 24 लाख युवाओं को विभिन्न तरह के तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करके रोजगार देना चाहती है देश के युवाओं में कई ऐसे टैलेंट भी है जो कार कार है कि तू किसी वजह से लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है और लोग उसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य है ऐसे नौजवानों को अपने अंदर कौशल पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना जो दसवीं और बारहवीं करके पढ़ाई छोड़ चुके हैं। शादी में ऐसे लोगों को भी एकत्रित करना है जिनके पास हुनर तो है लेकिन उस हुनर का प्रमाण पत्र ना होने के कारण उन्हें काम ढूंढने और काम पाने में काफी मुसीबत का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोग जिन्हें अभी तक कुछ काम नहीं आता वह भी इस योजना के साथ जोड़कर अपने आप में कौशल पैदा करके उस कौशल प्रमाण पत्र को लेकर अपनी जीविका की तलाश या खुद कर सकते हैं या प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत उन्हें काम ढूंढने में सहायता भी प्रदान की जाती है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की विशेषताएं

● एक औसत मौद्रिक इनाम प्रदान किया जाता है अगर आप इस योजना के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। ₹8000 प्रति लाभार्थी को, जोकि उम्मीदवार को कौशल प्रशिक्षण के दौरान दिया जाता है।

● इस योजना के अंतर्गत कौशल विकास योजना में भी मौजूदा कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए और उन्हें प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरतों के अनुसार उन्हें परीक्षित किया जाता है और उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाता है।

● रोजगार क्षमता और युवाओं की उत्पादकता प्रोत्साहन कौशल प्रशिक्षण के लिए उनको बढ़ावा देना और कौशल प्रमाण के लिए मौद्रिक पुरस्कार प्रदान करना है।

● इस योजना के तहत कराए जाने वाले सभी तरह की प्रशिक्षण या ट्रेनिंग होती है। विभिन्न क्षेत्रों में ट्रेनिंग प्राप्त करने के लिए विभिन्न योग्यताओं की आवश्यकता होती है। अंता किसी भी तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षण लेने से पहले आप योग्यता की जांच अवश्य कर लें।

● इस योजना के अंतर्गत ऐसे लोग जो काम तो जाते हैं लेकिन उनके पास में उसका प्रमाण पत्र ना होना, की वजह से उनके काम को मान्यता नहीं मिलती। और अनौपचारिक कामों में लग जाते हैं वह भी अपने हुनर को बढ़ाने के लिए इस कार्यक्रम के तहत आवेदन दे सकते हैं और प्रशिक्षण प्राप्त करके प्रमाण पत्र हासिल कर सकते हैं।

● इस योजना के अंतर्गत विशेष तौर पर 10वीं और 12वीं के बाद स्कूल छोड़ चुके लोग और पूर्व उत्तरी एवं जम्मू कश्मीर राज्य के नौजवानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा क्योंकि बेरोजगार युवा गलत संगत में जल्दी आ जाते हैं।

● एक बार प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के बाद प्रशिक्षित युवाओं को ₹8000 प्रति और प्रशिक्षित प्रमाण पत्र दिया जाता है। यह प्रमाण पत्र संपूर्ण देश में मान्य है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में रजिस्ट्रेशन करना बहुत ही आसान है। जैसे कि आप सभी जानते हैं भारत को डिजिटल इंडिया बनाने की तैयारी की जा रही है। इसी के जरिए आप इसके लिए ऑनलाइन आवेदन देकर के रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए आपको PMVKY ( प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) के आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर के आवेदन दे सकते हैं। या फिर आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके सीधे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

https://pmvkyofficial.org/

सीधे आप प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर के रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। और आप अपनी योग्यता अनुसार कोर्स चुन सकते हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के लिए आपके पास में कुछ जरूरी दस्तावेज होने चाहिए जिन्हें हमने क्रमबद्ध नीचे दिया है।

आधार कार्ड

स्थानीय प्रमाण पत्र

पासपोर्ट साइज फोटो

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को पाठ्यक्रम की सूची/ पाठ्यक्रम की संख्या आदि आप प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर के डाउनलोड कर सकते हैं।

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