हमारे जीवन में शिक्षक का महत्व- Teacher Importance in Hindi 2020

प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व रहा है. भारतीय संस्कृति में गुरु को ‘ गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु ही शंकर है, गुरु ही साक्षात परब्रह्मा है” माना गया है। इसी तरह से हमारे संस्कृति में गुरु को शिक्षा का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।

विना गुरुभ्यो गुणनीरधिभ्यो
जानाति तत्त्वं न विचक्षणोऽपि ।
आकर्णदीर्घायित लोचनोऽपि
दीपं विना पश्यति नान्धकारे ॥

संस्कृत में श्लोक का अर्थ होता है, जैसे कान तक की लंबाई आंखों वाला भी अंधकार में, बिना दिया के देख नहीं सकता, ठीक उसी तरह वीक्षण इंसान भी, गुन सागर ऐसे गुरु बिना, तत्व को जा नहीं सकता।

हमारे जीवन में शिक्षक का महत्व- Teacher Importance in Hindi 2020

केरियर और बिजनेस में सफल होने के लिए शिक्षक हमारे जीवन में बहुत ही अहम भूमिका निभाते हैं। एक अच्छा शिक्षक समाज में अच्छे इंसान बनने और देश के अच्छे नागरिक बनने में हमारी मदद करते हैं, क्योंकि अध्यापक जानते हैं कि विद्यार्थी किसी भी देश का भविष्य है। तो चलिए आज के हमारे इस लेख में जानते हैं कि हमारे जीवन में शिक्षक का क्या महत्व है? The Importance of Teacher in Student Life.

हमारे देश में शिक्षक को प्राचीन काल से ही एक गुरु के रूप में देखा जाता है, किसी भी देश के भविष्य का विकास शिक्षकों के हाथ में होता है। हम जीवन में क्या बनते हैं यह भी शिक्षक पर निर्भर करता है। शिक्षक विश्लेषण के लिए छात्रों के दिमाग में डाटा और जानकारी भरते हैं। हमारे जीवन में शिक्षक का महत्व बहुत ज्यादा होता है।

हमारे जीवन में शिक्षक का महत्व – Importance of Teacher in Life

किसी भी व्यक्ति के जीवन में शिक्षक उसके भविष्य का निर्माता होता है। वह अपने परिश्रम के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के जीवन को सवार सत्ता है। शिक्षक एक माली की भांति होता है और हम पुष्प की भांति होते हैं, वहीं विद्यालय एक बगीचे के समान होता है। झांसी क्षक अपने परिश्रम के द्वारा उस छात्र रूपी फूल को अपने सानिध्य में बड़ा करता है और हमारे जीवन के प्रत्येक मोड़ पर कोई ना कोई शिक्षक की भूमिका निभाता है। वह चाहे माता-पिता हो या फिर हमें कठिन समय में मार्गदर्शन करने वाला कोई भी व्यक्ति हो सकता है।

हमारे जीवन में शिक्षक का स्थान

हमारे जीवन का शिक्षक का बहुत ही बड़ा स्थान है। एक शिक्षक के लिए एक विद्यार्थी कोरे कागज की तरह होता है। जिसमें को किसी भी प्रकार से ढाल सकता है। एक शिक्षक के परिश्रम के द्वारा ही हममें से कई लोग वकील, डॉक्टर, अधिकारी या सैनिक या कोई वैज्ञानिक बनता है। शिक्षक हमेशा अपने अंदर की क्रोध और घृणा को किनारे कर सहनशीलता और अच्छे व्यवहार के माध्यम से हमारे जीवन में मार्गदर्शन करते हैं। शिक्षक को एक ईश्वर की भांति ही माना गया है। उसका पद हमेशा आदरणीय होता है। इसलिए हम इतना जरूर कर सकते हैं कि हम उनका सम्मान करें।

वास्तव में देखा जाए तो गुरु को ईश्वर के समान ही दर्जा प्राप्त रहता है। उनका स्थान सदैव आदरणीय ही रहेगा। प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरुकुल से शिक्षा प्राप्त करके सभी प्रकार से सफल और परिपक्व होने के पश्चात गुरु दक्षिणा देकर गुरुकुल से लौटे थे। यह वही समय था जब इन विद्यार्थियों को वेद, शास्त्र पुराण, मानवीय मूल्य, सामाजिक जीवन का ज्ञान सिखाया जाता था। लेकिन समय के बदलने के साथ-साथ स्थिति में भी बदलाव आते गए। आज स्थिति बिल्कुल अलग है आज विद्यार्थी को केवल कुछ पाठ्यक्रम पर आधारित ज्ञान देकर परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात परिपक्व मान लिया जाता है। बाकी के कुछ नैतिक जीवन से संबंधित मूल्यों व अपने परिवार से भी सीखते हैं इस प्रकार माता-पिता भी उनके लिए एक शिक्षक के समान ही होते हैं।

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आज सब लोग शिक्षक दिवस पर केवल भाषण देते हैं लेकिन शिक्षकों के देय शिक्षा को भूल जाते हैं। सोशल मीडिया पर शिक्षकों के बारे में कुछ पोस्ट डालते हैं और भूल जाते हैं। लोग शिक्षकों से सीखने के बजे उन्हें भूलते जाते हैं।

स्कूल में छात्र शिक्षक दिवस के अवसर पर खूब जश्न मनाते हैं और शिक्षकों का सम्मान करते हैं, बहुत अच्छी बात है पर इसमें भी शिक्षक के पाठों का पालन नहीं करते। किसी भी शिक्षक को खुशी तभी मिलती है जब एक छात्र अच्छा इंसान बन जाता है और अपने कैरियर और बिजनेस में सफल हो जाता है। वैसे सभी शिक्षक शिक्षा में समान नहीं है और सभी छात्र भी आधुनिक युग में शिष्य और गुरु की तरह नहीं है। जोकि की कुछ शिक्षक महान होते हैं जो हमेशा अपने छात्रों के दिलों में कई सालों तक रहते हैं।

शिक्षक की भूमिका विद्यार्थी जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। इसी बात को समझते हुए अध्यापक की कुछ उत्तर दायित्व है जिन्हें निभाना उनकी एक आवश्यक जिम्मेवारी है।

जैसे – बच्चों का हृदय बहुत कोमल और नाजुक होता है। बिना केबल शिक्षक बल्कि अपने आसपास के वातावरण से भी काफी कुछ सीखते हैं।

वे इस बात का ध्यान देते हैं कि शिक्षक के हाव भाव किस प्रकार के होते हैं। उनके बोलने का लिहाज भी उन्हें प्रभावित करता है। उनका भाषा प्रयोग अपने बच्चों पर अमित प्रभाव छोड़ता है। उनकी मृदु बानी उन्हें सदैव आकर्षित करती है। अंतः अध्यापक को अपने क्रोध, अहंकार और लोग को बच्चों के समक्ष कभी प्रदर्शित नहीं करना चाहिए क्योंकि यह मानव के सबसे बड़े शत्रु कहलाते हैं।

आदर्श अध्यापक के गुण – Qualities of ideal teacher

आज हमारे समाज ऐसे अनेक उदाहरण है जो अध्यापक की परिभाषा को पूर्ण करने में भूमिका अदा करते हैं। हिना द पार्क में अच्छे और श्रेष्ठ गुणों का भंडार होता है। या समय का सदुपयोग करते हैं इनके लिए समय अमूल्य होता है और इसलिए समय का पालन करते हुए अपना प्रत्येक कार्य योजना अनुसार करते हैं। यह समय का पालन करते हुए अपने प्रत्येक कार्य को अपने योजना अनुसार ही करते हैं। यह समय की उपयोगिता को ध्यान में रख कर के अपना ज्ञान प्रदान करते हैं। इनमें नम्रता और श्रद्धा के भाव भरे होते हैं। क्रोध और घृणा इनके लिए उचित नहीं होता, एक अच्छा शिक्षक में सहनशीलता, सही व्यवहार को अपनाकर के बच्चों को सही शिक्षा प्रदान कर उनका मार्गदर्शन करना होता है। यह उनके भविष्य को उज्जवल बनाते हैं उन्हें बेहतर इंसान बनाते हैं यह अनुशासन प्रयोग बनते हुए बच्चों को अनुशासन का महत्व सिखाते हैं।

वर्तमान समय में शिक्षक

वैसे तो शिक्षक हमेशा से ही सर्वोपरि रहे हैं। आज भी वह सभी लोगों के लिए आदर्श और माननीय है। उनका महत्व इसी बात से पता चलता है कि वह बच्चों के लिए ऐसे पथ प्रदर्शक होते हैं जो अपने परिश्रम और तप से बच्चों के चरित्र का निर्माण करते हैं। वह बच्चों के प्रेरक है जो उन्हें कुछ कर दिखाने की प्रेरणा देते हैं। उनमें श्रद्धा और विवेक की अखंड ज्योति होती है जो चारों और अपने प्रकाश से उजियारा फैलाती है। यही बच्चों को राम, लक्ष्मण और महान पुरुषों से अवगत करा करके उनके गुणों से अवगत कराते हैं और उनमें ज्ञान का संचार करते हैं। यह अपने छात्रों को अपमानित ना करके बल्कि उचित अनुचित का निर्णय करना सिखाते हैं।

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शिक्षक की लोकप्रियता का कारण

एक शिक्षक हमें बिना किसी स्वार्थ के सफलता का रास्ता दिखाता है। शिक्षक एक अच्छे व्यवहार और नैतिक के व्यक्ति के लिए बहुत ही अच्छी तरह से विद्यार्थी को शिक्षित करता है। शिक्षक विद्यार्थी को अकादमी रूप से बेहतरीन बनाते हैं और जीवन में हमेशा अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

एक शिक्षक कभी भी अपने अच्छे और बुरे विद्यार्थी में भेदभाव नहीं करता उसके लिए सभी विद्यार्थी एक समान होते हैं। एक शिक्षक अपने प्रयासों से कमजोर बच्चों को भी समझदार बना देता है और उसे प्रगति के मार्ग पर ले आता है। एक महान शिक्षक अपने विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए अपना पूरा जीवन व्यतीत कर देता है।

जो छात्र दूसरे छात्र से अलग होते हैं वह उन्हें अलग प्रकार से समझते हैं जिससे वह भी शिक्षा ग्रहण कर सके, एक शिक्षक निस्वार्थ भाव से अपने प्रत्येक छात्र को शिक्षा देता है और उसे अपने जीवन में प्रगति करने के योग्य बनाता है। अनेक समर्थ कार्य की तुलना किसी अन्य कार्य से नहीं की जा सकती है।

एक अच्छा शिक्षक ही अपने सभी विद्यार्थियों का ध्यान रखता है। एक अच्छा शिक्षक अपने विद्यार्थी के खाने की आदत, स्वच्छता का स्तर, दूसरों से व्यवहार और पढ़ाई लिखाई की ओर एकाग्रता के बारे में जानता है। शिक्षक कभी भी अपने धैर्य नहीं होता और हर विद्यार्थी को उसके अनुसार पढ़ाता है। एक शिक्षक हमेशा अपने विद्यार्थी को अच्छी और ज्ञान पूर्ण बातें ही बताता है।

जीवन में विजय और सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा एक बड़ी क्षति होती है इसीलिए देश के भविष्य को और युवाओं के जीवन की जिम्मेवारी शिक्षक को दी जाती है। एक शिक्षक ही बच्चों को बचपन से सामाजिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से का बिल बनाता है।

कक्षा में आने से पहले ही शिक्षक अपने शिक्षा के विषय को सुनिश्चित कर लेते हैं। शिक्षकों को पढ़ाने की खासियत अलग होती है वह विषय के अनुसार अपने ज्ञान, कौशल और व्यवहार को बदल लेते हैं। वे अपने जीवन का सबसे बेहतरीन प्रयास करते हैं और हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

शिक्षक बनने के लिए परिश्रम

एक अच्छा शिक्षक बनने के लिए बहुत परिश्रम करनी पड़ती है। हमेशा अपने से बड़ों का आदर करो और उनकी हर बात मानो। माता-पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए और उनकी किसी भी बात को काटना नहीं चाहिए। माता-पिता और बड़ों का हमेशा सम्मान करना चाहिए। समाज के और अपनी शिक्षा के प्रति एकाग्रता को बढ़ाना चाहिए।

अपने शिक्षकों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा को ग्रहण करना चाहिए और परीक्षा के परिणाम अच्छे और मेहनत से करने चाहिए। एक अच्छा शिक्षक बनने के लिए हृदय में एकता का भाव होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति से भेदभाव नहीं करना चाहिए। हर किसी को एक नजर से देखना चाहिए और अपने से छोटों को हमेशा अच्छी बातें बताना चाहिए और सहपाठियों से हमेशा एकता बनाकर रखना चाहिए, अपने शिक्षकों से हमेशा प्रेरणा लेना चाहिए।

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शिक्षक के लिए संस्कृत श्लोक और दोहे

गुरु अमृत है जगत में, बाकी सब विषैला,

सतगुरु संत अनंत है, प्रभु से करदे मेल।

गुरु की महिमा आदिकाल से लेकर वर्तमान तक है और आगे भी यथावत ही रहेगी, गुरु समाज को शिक्षित कर किसी भी देश को बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस चलते गुरु को हमारे समाज में पूजनीय माना जाता है। हमारी संस्कृति में गुरु को पूजनीय और आदरणीय माना गया है इस चलते गुरु के ऊपर कई बड़े दोहे और संस्कृत में श्लोक भी हैं।

गुरु बिन ज्ञान ना होता है, गुरु बिन दिशा आज़ान,

गुरु बिन इंदिराना सांधे, ग्रुप बिन बड़ेन ना शान।

गुरु मन में बैठत सदा, गुरु है ब्रह्म का काल,

गुरु अवगुण को मेटत, मेट सभी भ्रम जाल।

वही जो सीख ले,

शिष्य वही जो सीख ले, गुरु का ज्ञान अगाध,
भक्तिभाव मन में रखे, चलता चले अबाध।

गुरु ग्रंथन का सार है, गुरु है प्रभु का नाम,
गुरु अध्यात्म की ज्योति है, गुरु हैं चारों धाम।

अंधकार से खींचकर

अंधकार से खींचकर, मन में भरे प्रकाश,
ज्यों मैली चुनरी धुले, सोहत तन के पास।

गुरु की कृपा हो शिष्य पर, पूरन हों सब काम,
गुरु की सेवा करत ही, मिले ब्रह्म का धाम।

गुरु अनंत तक जानिए, गुरु की ओर न छोर,
गुरु प्रकाश का पुंज है, निशा बाद का भोर।

हमारे जीवन में शिक्षक का महत्व और शिक्षक के जीवन को समझना आसान नहीं है लेकिन हम उन्हें एक अच्छा इंसान बनकर के उपहार देकर उनकी मदद कर सकते हैं।

आशा करता हूं कि आपको इस पोस्ट में शिक्षक का महत्व पता चला होगा, अगर आप एक विद्यार्थी है तो इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर जरूर साझा करें।

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Sugan Siddhant Dodrai

दोस्तों में एक बैंकर हूं और इस ब्लॉग का संस्थापक मैंने M.sc (Physics & Electronics) में किया है। हम अपने इस ब्लॉग पर नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए मददगार एवं ज्ञानवर्धक पोस्ट लेकर आते हैं।

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