What is computer in Hindi – कंप्यूटर क्या है?

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दोस्तों आज के हमारे इस लेख में हम लोग कंप्यूटर सिस्टम के मूलभूत डिजाइन, और कंप्यूटर क्या है? What is computer? Computers का इस्तेमाल किन किन विशिष्ट कार्यों के लिए होता है? के बारे में हम लोग जानेंगे.

आज के समय में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जो कंप्यूटर शब्द से परिचित नहीं होगा। हमारे चारों तरफ कंप्यूटर है।कंप्यूटर आधुनिक जिंदगी का एक मुख्य हिस्सा है इनके अविष्कार से लेकर अब तक किए छोटे और तेज होते गए हैं। कंप्यूटर के बिना अब किसी भी काम की कल्पना कर पाना बहुत मुश्किल है।

हर कोई कंप्यूटर का उपयोग अपने हिसाब से अलग-अलग कार्यों के लिए करता है। शिक्षक, लेखक और वैज्ञानिक शोध के लिए कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। वही इंजिनियर्स,डिजाइनर्स अपने डिजाइन बनाने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। वहीं कई उद्योग जैसे कि, बैंकिंग, ऑडिट, फिल्म इंडस्ट्री, इत्यादि उद्योगों में भी कंप्यूटर का जमकर इस्तेमाल किया जाता है। वैसे तो कंप्यूटर का इस्तेमाल लगभग हर क्षेत्र में होने लगा है।लेकिन कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां कंप्यूटर का उपयोग अधिक होने लगा है।

कंप्यूटर का आविष्कार

सबसे पहले मैकेनिकल कंप्यूटर क्वेश्चन 1822 में Charles Babbage द्वारा आविष्कार किया गया था,लेकिन यह अभी के कंप्यूटर जैसा बिल्कुल भी नहीं दिखता था।

वही साल 1837 में, Charles Babbage ने पहला general mechanical computer, propose किया था जिसका नाम analytical engine रखा गया था। तो इस तरह से कंप्यूटर में हमारी जिंदगी में कदम रखा।

What is computer? – कंप्यूटर क्या है?

कंप्यूटर एक मशीन उपकरण है, जो डाटा को अर्थपूर्ण जानकारी में रूपांतरित करता है। डाटा कुछ भी हो सकता है,जैसे कि विभिन्न विषयों में आपके द्वारा प्राप्त किया गया अंक, या एक कक्षा में सभी विद्यार्थियों का नाम, आयु ,लिंग, वजन, ऊंचाई आदि हो सकता है।

कंप्यूटर जो कार्य करता है, उसके संदर्भ में भी कंप्यूटर को परिभाषित किया जा सकता है। कंप्यूटर डाटा को ग्रहण (aecept) कर सकता है, डाटा का भंडारण (Store) कर सकता है, डाटा या जानकारी को उचित रूप में संशोधित (प्रोसेस) कर सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर संग्रहित डाटा को पुनर प्राप्त कर सकता है और परिणाम को मनचाहे फॉर्मेट में प्रिंट कर सकता है।

 

कंप्यूटर की विशेषताएं :

उच्च गति, परिशुद्धता, बुद्धिमत्ता पूर्वक कार्यों की संपन्नता, बहुआयामी कार्यों को करने की शक्ति और भंडारण

कंप्यूटर की संरचना

कंप्यूटर की संरचना के बारे में हमने नीचे एक चित्र दिया है जिसे आप देख करके थोड़ा समझ लीजिए।

कंप्यूटर कंप्यूटर पांच बड़े कार्यो को संपन्न करता है, चाहे उसकी बनावट या आकार कुछ भी हो, यह पांच कार्य इस प्रकार है

  1. यह इनपुट द्वारा डाटा या निर्देश स्वीकार करता है।
  2. यह डाटा को संग्रहित करता है।
  3. यह उपयोगकर्ता की आवश्यकता अनुसार डाटा को संसाधित करता है।
  4. यह परिणामों को मनचाहे रूप में आउटपुट के द्वारा दर्शाता है।
  5. यह कंप्यूटर के भीतरी ऑपरेशन ओं को नियंत्रित करता है।

हम नीचे इन सारी चीजों के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे।

1.इनपुट

या डाटा और प्रोग्राम को कंप्यूटर सिस्टम में प्रविष्ट (enter) करने की प्रक्रिया है।

2. कंट्रोल यूनिट

इनपुट, आउटपुट, संसाधन और भंडारण की प्रक्रिया कंट्रोल यूनिट के निरीक्षण में की जाती है।यह निर्धारित करता है कि डाटा प्राप्त करना कब प्रारंभ किया जाए तथा डाटा प्राप्त करना कब बंद किया जाए, और डेटा का भंडारण कहां किया जाए इत्यादि।या ध्यान देता है कि क्रमबद्ध पद्धति द्वारा कंप्यूटर के आंतरिक कार्यों को किस प्रकार संपन्न किया जाए।

3. मेमोरी यूनिट

डाटा और निर्देशों को संग्रहित करने के लिए कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है।

4. अर्थमैटिक लॉजिक यूनिट (ALU)

ए एल यू द्वारा मुख्य रूप से जोड़ना,घटाना, गुणा करना, भागा, तार्किक और अतुल आत्मक कार्य किए जाते हैं।

5. आउटपुट

उपयोगी जानकारी प्राप्त करने के लिए डाटा द्वारा परिणामों को पेश करने की पद्धति को आउटपुट कहा जाता है।

कंप्यूटर के परिधीय उपकरण – Peripheral device of computer

परिधीय उपकरण ऐसे उपकरण है जो कंप्यूटर के बाहर में लगाए जाते हैं। इनके जरिए कुछ विशेष कार्य को किया जाता है। या फिर आप इन्हें output device और input device के रूप में जानते होंगे। जैसा कि हमने नीचे के चित्र में दिखाया है।

1. Input device – इनपुट उपकरण
इनपुट उपकरण उपयोगकर्ता से डाटा और निर्दोषों को स्वीकार करते हैं। नीचे विभिन्न इनपुट उपकरणों के उदाहरण दिया गया है जो इस उद्देश्य के लिए कंप्यूटर से जोड़ा जाता है।

  1. कीबोर्ड
  2. माउस
  3. लाइट पेन
  4. ऑप्टिकल स्कैनर
  5. टच स्क्रीन
  6. ध्वनि के लिए माइक्रोफोन
  7. ट्रैकबॉल

कीबोर्ड

कीबोर्ड सबसे सामान्य इनपुट उपकरण है। कीबोर्ड के कई प्रकार उपलब्ध है; इनमें कुछ अंतर भी होता है, अन्यथा वह सारे कीबोर्ड एक जैसे ही दिखते हैं। सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला कीबोर्ड QWERTY कीबोर्ड है। आमतौर पर आदर्श कीबोर्ड में 104 कुंजियां होती है। इन कीबोर्ड में, कसर को नियंत्रित करने वाली कुंजियां को दो जगह पर रखा गया है, ताकि न्यूमैरिक पैड का आसानी से उपयोग किया जा सके।

लाइट पेन

या एक इनपुट उपकरण है जो डिस्पले स्क्रीन पर ऑब्जेक्ट को चुनने के लिए प्रकाश संवेदी सूचकांक (light sensitivity detector) का प्रयोग करता है। लाइट पेन माउस के समान होता है,सिवाय इसके कि लाइट पेन द्वारा आप प्वाइंटर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकते हैं और पेन द्वारा ऑब्जेक्ट को इंगित डिस्प्ले स्क्रीन पर ऑब्जेक्ट को चुन सकते हैं।

ऑप्टिकल स्कैनर

इस उपकरण का उपयोग स्वचालित रूप से डाटा संग्रहण करने के लिए किया जाता है।इस श्रेणी के उपकरण मैन्युअल रूप से इनपुट के जाने वाला डाटा को पूर्णता से समाप्त कर देता है। उदाहरण के लिए, बारकोड रीडर (barcode reader) , वास्तव में विशेष प्रकार का इमेज स्केनर है।

इमेज स्कैनर छिपी हुई छवियों को एक इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में परिवर्तित करता है। जिसे कंप्यूटर की मेमोरी में संग्रहित किया जा सकता है।और एक उचित सॉफ्टवेयर की सहायता से संग्रहित छवि में बदलाव किया जा सकता है। स्केनर को एक अन्य उदाहरण, ऑप्टिकल कैरेक्टर recognition है, जिसका उपयोग बैंक द्वारा टाइप किए हुए मुद्रित पेज की स्कैनिंग छवि को टेक्स्ट में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है ताकि उसे कंप्यूटर पर संपादित किया जा सके।

टच स्क्रीन

टच पैनल डिस्प्ले और पैड्स (touch panel display and pads) आजकल कीबोर्ड के विकल्प के रूप में प्रदान किए जाते हैं। इनके द्वारा इनपुट कंप्यूटर की स्क्रीन द्वारा दिए जा सकते हैं, जो मॉनिटर से इनपुट को स्वीकार करता है। उपयोगकर्ता स्क्रीन पर प्रदर्शित किए गए इलेक्ट्रॉनिक बर्तनों को छूते हैं। या फिर वे लाइट पेन का उपयोग कर सकते हैं।

माइक्रोफोन

माइक्रोफोन एक इनपुट उपकरण है, जो ध्वनि को इनपुट के रूप में लेता है।कीबोर्ड से एंटर की गई जानकारी की तुलना में ध्वनि संचार में त्रुटि की संभावना अधिक होती है। दो प्रकार के माइक्रोफोन उपलब्ध है।

  1. डेक्सटॉप माइक्रोफोन
  2. हाथों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाला माइक्रोफोन

ट्रैक बॉल

ट्रैकबॉल 1 पॉइंट एक उपकरण है जो उल्टा रखे माउस जैसा होता है। प्वाइंटर को चलाने के लिए, आप अपने अंगूठे,अंगुलिया या हाथ की हथेली द्वारा बॉल को घुमाते हैं।

आमतौर पर बोल के निकट तीन बटन होते हैं, जिनका उपयोग आप माउस बटन की तरह कर सकते हैं। माउस की उपेक्षा ट्रक बॉल का एक लाभ यह है कि ट्रैकबॉल स्थिर रहता है। इसलिए इसका उपयोग करने के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता नहीं होती है। इन दोनों कारणों से ट्रैकबॉल पोर्टेबल कंप्यूटर के लिए अधिक लोकप्रिय pointing device डिवाइस है.

2. Output device – आउटपुट उपकरण

आउटपुट उपकरण डाटा को संसाधित कर उपयोगकर्ता को जानकारी वापस लौट आता है। कुछ आम तौर पर प्रयोग किए जाने वाले आउटपुट डिवाइस नीचे दिया गया है।

  1. मॉनिटर (visual display unit)
  2. प्रिंटर
  3. प्लॉटर
  4. स्पीकर

मॉनिटर

सभी आउटपुट उपकरणों में से मॉनिटर संभवत सबसे महत्वपूर्ण आउटपुट उपकरण माना जाता है, क्योंकि लोग दूसरे उपकरणों की तुलना में इसका प्रयोग अधिक करते हैं।वीडियो एडिटर कार्ड और मॉनिटर के द्वारा कंप्यूटर की जानकारी दृश्य मान रुप से प्रदर्शित की जाती है। सीपीयू के अंदर संसाधित जानकारी, जिसे प्रदर्शित करना आवश्यक है। वीडियो एडेप्टर जानकारी के पूरे ग्रुप को उसी प्रकार से परिवर्तित करता है।जैसे कि एक टेलीविजन जानकारी को प्रदर्शित करता है, जो उसे एक केबल सर्विस द्वारा भेजी जाती है। माइक्रोकंप्यूटर्स के साथ उपयोग किए जाने वाले मॉनिटर की 2 मूलभूत प्रकार हैं।

  1. सीआरटी ( CRT)
  2. एलसीडी (LCD)

CRT monitor (cathode ray tube) -सीआरटी मॉनिटर

सीआरटी या कैथोड रे ट्यूब मॉनिटर एक प्रकार का मॉनिटर होता है जो आप एक डेक्सटॉप कंप्यूटर पर देखते हैं। यह एक टेलीविजन के स्क्रीन की तरह दिखता है, और उसी की तरह कार्य करता है। इस प्रकार के मॉनिटर बड़ी वेक्यूम ट्यूब का प्रयोग करते हैं। जिन्हें cathode ray tube कहा जाता है।

Liquid crystal display (LCD) – लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले

इस प्रकार के मॉनिटर को फ्लैट पैनल मॉनिटर भी कहा जाता है। इनमें से अधिकांश छवियों की प्रस्तुति के लिए लिक्विड क्रिस्टल डिस्पले (LCD) का उपयोग करते हैं। इन दिनों मार्केट में ज्यादातर इसी तरह के डिस्प्ले मिलते हैं। और कंप्यूटर में भी इसी तरह के डिस्प्ले का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

जब लोग विभिन्न मॉनिटर की क्षमताओं के बारे में बात करते हैं, तब यह मॉनिटर के रेजोल्यूशन की बात करते हैं। अधिकतर मॉनिटर का रिजर्वेशन 800×600 पिक्सल का होता है। उच्च कोटि के मॉनिटर का रिजर्वेशन 1024×768 पिक्सेल का होता है, या फिर 1280×1024 पिक्सेल का भी हो सकता है। आजकल बाजार में इससे भी अधिक पिक्सेल रेजोल्यूशन मॉनिटर उपलब्ध है।

प्रिंटर -printer

कंप्यूटर पर दस्तावेज बनाने के बाद उसकी हार्ड प्रति (hard copy print out) लेने के लिए उसे प्रिंटर पर भेजा जा सकता है। यानी कि उसे प्रिंटर की मदद से प्रिंट किया जा सकता है। जैसे कि रंगीन और विशाल पृष्ठ वाले प्रतियां। सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले कुछ प्रिंटर इस प्रकार है

  1. लेजर प्रिंटर
  2. इंकजेट प्रिंटर
  3. डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर
  4. लाइन प्रिंटर

लेजर प्रिंटर और इंकजेट प्रिंटर

लेजर प्रिंटर उच्च गुणवत्ता के प्रिंट का उत्पादन करता है। जिसका प्रयोग अधिकतर प्रकाशन क्षेत्र में किया जाता है। यह अत्यधिक स्पीड से प्रिंट करता है, और इस पर अत्यधिक आवाज नहीं होती, इसके अतिरिक्त लेजर प्रिंटर का संचालन करना बहुत आसान होता है।इनमें स्वचालित रूप से पेपर की लोडिंग होती है। सबसे तेज गति वाला लेजर प्रिंटर प्रति मिनट 200 मोनोक्रोम पेज और सो रंगीन पेज प्रिंट कर सकता है।

इंकजेट प्रिंटर :- इंकजेट प्रिंटर करीब 64 नोजल का उपयोग कर कागज पर सीधी इंक छिड़ककर छवि का निर्माण करता है। यद्यपि यह जिस छवि का निर्माण करता है,वह आमतौर पर लेजर प्रिंटर जितनी स्पष्ट नहीं होती है लेकिन उसकी गुणवत्ता काफी अच्छी होती है। आमतौर पर इंकजेट प्रिंटर, डॉट मैट्रिक्स और लेजर प्रिंटर के बीच एक अच्छा विकल्प है।

लेजर प्रिंटर की तरह ही इंकजेट प्रिंटर भी शांत और सुविधाजनक है, लेकिन इसकी गति बहुत तेज नहीं होती।

Memory system in computer – कंप्यूटर में मेमोरी सिस्टम

कंप्यूटर की मेमोरी दो प्रकार की होती है, प्राइमरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी।

प्राइमरी मेमोरी : – कंप्यूटर सिस्टम का आवश्यक भाग है और प्रोसेसिंग यूनिट द्वारा इस पर सीधे पहुंच प्राप्त की जाती है। रैम (RAM) primary memory का एक उदाहरण है।जैसे ही कंप्यूटर बंद किया जाता है प्राइमरी मेमोरी कार्ड डाटा लुप्त हो जाता है।

सेकेंडरी मेमोरी :- प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सेकेंडरी मेमोरी की गति अधिक तीव्र होती है। सेकेंडरी मेमोरी के उदाहरण है , CD ROM, pen drive इत्यादि।

Software in computer – कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल

जैसे कि आप जानते हैं, कंप्यूटर खुद कुछ भी नहीं कर सकता है। उपयोगकर्ता कंप्यूटर को निर्देश देता है कि क्या करना है, कैसे करना है और कब करना है। किसी भी कार्य को करने के लिए आपको कंप्यूटर को विशिष्ट अनुक्रम में निर्देशों को सेट देना पड़ता है। निर्देशों के इस सेट को प्रोग्राम कहा जाता है। सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का एक सेट होता है, जो हार्डवेयर को विशिष्ट कार्यों को विशिष्ट क्रम में करने का आदेश देता है। सॉफ्टवेयर का मुख्यत निम्नलिखित श्रेणियों और उप श्रेणियां में वर्गीकरण किया जा सकता है जैसा कि हमने नीचे चित्र में दिखाया है।

System software – सिस्टम सॉफ्टवेयर

जब आप अपने कंप्यूटर को ऑन करते हैं तो, ROM मैं मौजूद प्रोग्राम का निष्पादन होता है,जो कंप्यूटर को विभिन्न इकाइयों की सक्रिय कर देता है और आपके द्वारा काम करने के लिए उन्हें तैयार करता है। प्रोग्राम के इस सेट को सिस्टम सॉफ्टवेयर कहा जाता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के सेट है, जो कंप्यूटर को चलाने,कंप्यूटर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करने और कंप्यूटर के संसाधनों का प्रबंध करने के लिए जिम्मेदार होती है। हम इसे operating system (OS) भी कहते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सॉफ्टवेयर होता है,जो उपयोगकर्ता को कंप्यूटर के साथ संचार के लिए इंटरफ़ेस प्रदान करता है। हार्डवेयर यंत्रों (डिस्क ड्राइव, कीबोर्ड, मॉनिटर इत्यादि) का प्रबंध करता है, डिस्क फाइल सिस्टम का प्रबंधन और देखरेख करता है, साथ में एप्लीकेशन प्रोग्राम को सहयोग करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ लोकप्रिय उदाहरण इस तरह है, Unix, windows and Linux.

Operating system उपयोगकर्ता को वे सभी सुविधा प्रदान करता है, जो सिस्टम का उपयोग करने तथा उसका अनुरक्षण करने के लिए आवश्यक है। लेकिन यह सभी की अपेक्षाओं को पूर्ण नहीं कर पाता है। इसी कारण से एक भिन्न प्रकार का सिस्टम सॉफ्टवेयर जैसे कि utility software भी होता है। यह वह प्रोग्राम है जो एक ऑपरेटिंग सिस्टम की कार्यक्षमता और उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं के बीच के अंतर को मिटाता है। यूटिलिटी प्रोग्राम एक विस्तृत श्रेणी के सॉफ्टवेयर होते हैं, जैसे कि कंप्रेस zip file, uncompress unzip file software, antivirus software, split and join file software इत्यादि।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का एक ऐसा सेट होता है, जिसे विशेष कार्यों को संपन्न करने के लिए लिखा जाता है। उदाहरण के लिए एप्लीकेशन पैकेज जो पुस्तकालय को प्रबंधित करता है। उसे लाइब्रेरी इनफॉरमेशन सिस्टम कहते हैं। इसका उपयोग पुस्तकालय की जानकारी का प्रबंधन करने के लिए किया जाता है। जैसे कि किताबों की जानकारी रखना, लेखा धारकों की जानकारी, किताबों के वितरण की जानकारी, किताबों को वापस करने की जानकारी रखना इत्यादि। एक अन्य एप्लीकेशन पैकेज जो विद्यार्थी की जानकारी का प्रबंधन करता है, उसे स्टूडेंट इनफॉरमेशन सिस्टम कहते हैं। यह विद्यार्थी के रोल नंबर, नाम, माता पिता का नाम, पता, कक्षा, परीक्षा के परिणाम को संसाधित करने इत्यादि का प्रबंधन करता है। इसके अलावा भी कई सारे ऐसे software application package , पैकेज है। जिनका इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों में जैसे कि, banking, railway ticket booking, post office, इत्यादि जगहों पर किया जाता है।

Types of application packages – एप्लीकेशन पैकेज के प्रकार

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है।

  1. Generalized package (जनरलाइज्ड पैकेज)
  2. Customised package (कस्टमाइज्ड पैकेज)

Generalized package of application

यह उपयोगकर्ता सहायक (user-friendly) software होता है, जो उपयोगकर्ता को सामान्य जरूरतों के लिए लिखे जाते हैं। जैसे कि दस्तावेज तैयार करना, चित्र बनाना,डाटा सूचना का प्रबंधन करने के लिए डाटा बेस तैयार करना, प्रेजेंटेशन बनाना, खेल खेलना इत्यादि।

यह प्रोग्राम का एक समूह है जो विशेष समस्याओं को हल करने के लिए सामान्य उद्देश्य टूल्स प्रदान करता है। कुछ जनरलाइज्ड पैकेज को नीचे सूचीबद्ध किया गया है।

  • वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर (दस्तावेजों को बनाने के लिए) :- वर्डपरफेक्ट, एमएस वर्ड, ओपन ऑफिस राइटर कुछ ऐसे ही सॉफ्टवेयर है।(word perfect, MS word, open office software)
  • स्प्रेडशीट (डेटा विश्लेषण के लिए) :- लोटस मार्ट सूट, एमएस एक्सल, ओपन ऑफिस क्लॉक, एप्पल नंबर इत्यादि।(Lotus smart suit, MS Excel, open office ,etc)
  • Presentation: – प्रेजेंटेशन ग्रैफिक्स, एम एस पावर प्वाइंट, ओपन ऑफिस इंप्रेस ( presentation graphics, MS PowerPoint and open office impress etc.)
  • Database management system:- एमएस एक्सल, ओपन ऑफिस बेस, एमएस एसक्यूएल सर्वर,(MS Excel, open office base, MS SQL server, Oracle)
  • Graphics tool:- पैंट शॉप प्रो, एडोब फोटोशॉप इत्यादि

Customise package of application

यह वह एप्लीकेशन होते हैं, जिनका विकास किसी संगठन संस्थान की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण के तौर पर विद्यार्थियों की जानकारी का विवरण, भुगतान पैकेज, माल सूची नियंत्रण, बैंकों में इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर इत्यादि।

यह पैकेज हाई लेवल कंप्यूटर लैंग्वेज का उपयोग करके विकसित की जाते हैं।

Computer languages – कंप्यूटर की भाषाएं

भाषा संचार का एक साधन है, सामान्यता लोग भाषा का उपयोग करके एक दूसरे के साथ बातचीत करते हैं। इसी आधार पर भाषा द्वारा कंप्यूटर के साथ संचार किया जाता है। यह भाषा उपयोगकर्ता और मशीन दोनों के द्वारा समझी जाती है। प्रत्येक भाषा की तरह जैसे कि अंग्रेजी, हिंदी के व्याकरण के नियम है, उसी प्रकार से प्रत्येक कंप्यूटर भाषा के नियमों द्वारा बंदी हुई है, जिन्हें उस भाषा का सिंटेक्स (syntax) कहा जाता है। कंप्यूटर से संचार करने के दौरान उपयोग करता के लिए वैसे टैक्स आवश्यक होते हैं।

 

कंप्यूटर भाषा के प्रकार – Types of computer language

1. Low level language

लो लेवल का अर्थ है उस मालिक तरीके से है जो मशीन को समझ में आती है, लो लेवल लैंग्वेज के उदाहरण नीचे दिया गया है,

Machine language

यह भाषा 0 और 1 के रूप में निरूपित होता है,जिसे बायनरी कहते हैं और जो सीधे कंप्यूटर द्वारा समझी जाती है। यह मशीन पर निर्भर होती है। या सीखते पर कठिन है और प्रोग्राम लिखने के लिए और भी कठिन है।

Assembly language

इस भाषा में मशीनी कोड 0 और 1को सांकेतिक कोर्ट द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। ताकि से अधिक अनुकूल बनाया जा सके। प्रोग्रामिंग संरचना को सुधारने के लिए यह प्रथम चरण होता है।

मशीन लेवल प्रोग्राम की तुलना में असेंबली लैंग्वेज प्रोग्रामिंग अधिक सरल होती है और इसमें कम समय लगता है। मशीन लैंग्वेज प्रोग्राम की तुलना में असेंबली लैंग्वेज में गलती को ढूंढना और उन्हें ठीक करना अधिक आसान होता है। यह भी मशीन पर निर्भर होती है।प्रोग्राम को उस मशीन के बारे में पता होना चाहिए जिस पर प्रोग्राम चलाना है।

High level language

आप जाते हैं कि लो लेवल लैंग्वेज के लिए हार्डवेयर के विस्तृत ज्ञान की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह मशीन पर निर्भर होती है। इन मुश्किलों को दूर करने के लिए हाई लेवल लैंग्वेज का विकास किया गया है,जो किसी भी समस्या को हल करने के लिए सामान्य और आसानी से समझे जाने योग अंग्रेजी के कदमों का उपयोग करती है। हाई लेवल लैंग्वेज कंप्यूटर के ऊपर निर्भर नहीं होती और इसमें प्रोग्रामिंग करना बहुत आसान होता है।

विभिन्न हाई लेवल लैंग्वेज के प्रकार नीचे दिए गए हैं

  • बेसिक (BASIC):- (beginners all paper symbol instruction code) यह व्यापक रूप से प्रयोग की जाती है एवं आसानी से सीखी जा सकने वाली समाज उपयोगी भाषा है। प्रारंभिक दिनों में मुख्यतः माइक्रो कंप्यूटर में इसका उपयोग किया जाता था।
  • कोबोल (cobol) (common business oriented language) व्यवसायिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग की जाने वाल भाषा है।
  • Photron (फार्मूला ट्रांसलेशन) – गणित संबंधी और वैज्ञानिक समस्याओं को हल करने के लिए इसका विकास किया गया था। यह वैज्ञानिक समुदाय में अत्यधिक लोकप्रिय भाषाओं में से एक है।
  • C : structured programming language, जिसका उपयोग सभी उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि वैज्ञानिक अनुप्रयोग, वाणिज्य अनुप्रयोग, गेम्स को विकसित करना आदि।
  • C++ : लोकप्रिय ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, जिसका उपयोग सामान्य उद्देश्य के लिए किया जाता है।

Compiler and Assembler – कंपाइलर असेंबलर

जैसे कि आप जानते हैं कि हाई लेवल लैंग्वेज मशीन पर निर्भर नहीं होती है और असेंबली लैंग्वेज टू की मशीन पर निर्भर होती है। इसमें फिर भी उन निर्दोषों के लिए निमोनिक्स का उपयोग किया जाता है जिससे मशीन नहीं समझती है। अंतत दोनों लैंग्वेज द्वारा प्रदान किया गया निर्देशों को मशीन समझ सके, इसके लिए कंपाइलर और असेंबलर की आवश्यकता होती है। ताकि वे इन निर्देशों को मशीनी लैंग्वेज में परिवर्तित कर सके।

प्रोग्राम द्वारा हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम को सोर्स प्रोग्राम कहा जाता है और कंपाइलर द्वारा अनुवाद के जाने के बाद उत्पन्न प्रोग्राम ऑब्जेक्ट प्रोग्राम कहलाता है।

Conclusion

यहां हमने ऊपर अपना आर्टिकल में कंप्यूटर किस तरह से काम करता है, और कंप्यूटर में कौन-कौन से इनपुट और आउटपुट उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में भी हमने या बताया है। दोस्तों अगर आपको हमारा यह आर्टिकल कंप्यूटर क्या है? What is computer in Hindi? यह लेख पसंद आया है तो आप इसे सोशल मीडिया पर, अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं।अगर आपके से संबंधित कुछ सवाल है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

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