Banking Ombudsman Scheme 2006 – बैंकिंग लोकपाल योजना क्या है?

Banking Ombudsman Scheme 2006 – बैंकिंग लोकपाल योजना क्या है? रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 को 26 दिसंबर, 2005 को आंशिक रूप से संशोधन करके बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 35(A) के तहत लोकपाल के अधिकारों और कार्यों की सीमा और दायरे को बढ़ाने के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। बैंकिंग लोकपाल योजना आधिकारिक रूप से 1 जनवरी 2006 से लागू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत सभी वाणिज्य बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और अनुसूचित प्राथमिक सहकारी बैंक को शामिल किया गया था।

Banking Ombudsman Scheme के अंतर्गत कोई भी ग्राहक बैंकिंग लोकपाल योजना 2016 बैंक द्वारा दी जा रही सेवाओं से संबंधित बैंक ग्राहकों की शिकायत के समाधान पर कार्रवाई करती है। यानी कि सीधे शब्दों में कह तो कोई भी ग्राहक बैंक द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से असंतुष्ट है तो वह बैंकिंग लोकपाल योजना के अंतर्गत इसकी शिकायत दर्ज कर सकता है।

आज के हमारे इस लेख में हम यह जाने की कोशिश करेंगे कि Banking Ombudsman Scheme 2006 – बैंकिंग लोकपाल योजना क्या है? इसके अंतर्गत कोई भी ग्राहक इस तरह से अपनी शिकायत दर्ज करेगा। इसके साथ ही बैंकिंग लोकपाल योजना किस तरह से कार्य करती है इसके बारे में भी हम अब तो इस लेख में जानकारी लेंगे।

Banking Ombudsman Scheme 2006 – बैंकिंग लोकपाल योजना क्या है?

बैंकिंग लोकपाल योजना को अंग्रेजी में आप Banking Ombudsman Scheme कह सकते हैं। बैंकिंग के क्षेत्र में इसका महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि इसका उपयोग बैंक के ग्राहक अपनी शिकायतों को लेकर के इसके पास जाते हैं और उनकी शिकायत का निवारण यही बैंकिंग लोकपाल योजना के अंतर्गत किया जाता है।

अगर बैंकिंग लोकपाल नहीं होता तो बैंक में शिकायतों का अंबार लग जाता। इसलिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इसे सुलझाने के लिए एक संगठन का गठन किया ताकि ग्राहक बैंक के किसी नियम का शिकायत या फिर अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं तो वह बैंकिंग लोकपाल योजना के अंतर्गत शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

बैंकिंग लोकपाल योजना (Banking Ombudsman Scheme ) की शुरुआत 1 जनवरी 2006 को पूरे भारत में लागू करके किया गया था। बैंकिंग लोकपाल योजना को लोकपाल योजना 2005 में आंशिक संशोधन एवं लोकपाल योजना 2002 में बदलाव करके संपूर्ण भारत में लागू किया गया था। इसके अंतर्गत सभी कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय बैंक, ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक शामिल है।

बैंकिंग लोकपाल योजना का उद्देश्य? :- बैकिंग लोकपाल योजना 2006 का मुख्य उद्देश्य यही है कि यह बैंक की संबंधी शिकायत का निपटारा करता है। कोई भी ग्राहक यदि अपनी बैंक द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से असंतुष्ट है तो वह अपने शिकायत का निवारण के लिए बैंकिंग लोकपाल योजना के अंतर्गत शिकायत दर्ज कर सकता है।

एक लोकपाल एक अधिकारी होता है, जिसे आमतौर पर सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। जो व्यवसायों, वित्तीय संस्थानों, विश्वविद्यालय, सरकारी विभाग या अन्य सार्वजनिक संस्थानों के खिलाफ शिकायतों ( आमतौर पर निजी नागरिकों द्वारा दर्ज) की जांच करता है। इसके अलावा उठाए गए संघर्षो या चिंताओं को हल करने का प्रयास करता है या तो मध्यस्था या सिफारिश करके।

Who Can File Complain Under Banking Ombudsman? – बैंकिंग लोकपाल के अंतर्गत कौन शिकायत दर्ज कर सकता है?

बैंकिंग लोकपाल के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति ( वकील (advocate) को छोड़ कर के) जो भारत का नागरिक हो शिकायत दर्ज कर सकता है। वह अपना शिकायत किसी पेपर पर या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जैसे कि ईमेल के माध्यम से सीधे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) या केंद्र सरकार को अपना शिकायत दर्ज कर सकता है।

बैंकिंग संबंधी शिकायत कब दर्ज की जा सकती है? :- बैंकिंग संबंधित शिकायत आप तभी बैंकिंग लोकपाल पर दर्ज कर सकते हैं। जब बैंक द्वारा आपकी शिकायत का निपटारा नहीं किया जाता है। इस कारणवश बैंकिंग संबंधी शिकायत दर्ज करने के लिए निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जिसके बाद ही आप बैंकिंग लोकपाल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं:-

  1. अगर किसी बैंक को शिकायत दर्ज की गई है एवं बैंक ने उस शिकायत को खारिज (rejected) कर दिया है। या फिर 1 महीने के अंदर आपको अपने शिकायत का किसी भी तरह का निवारण ना हो या आप निवारण से संतुष्ट ना हो तभी आप बैंकिंग लोकपाल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  2. किसी भी बैंक पर शिकायत दर्ज करने के बाद अधिकतम 1 साल के अंदर ही आपको बैंकिंग लोकपाल के अंतर्गत शिकायत दर्ज करना होता है।
  3. अगर बैंक द्वारा आपका शिकायत का निवारण कर दिया गया है या आपका शिकायत कोट, ट्रिब्यूनल या आर्बिट्री पर पेंडिंग है तो भी आप इसकी शिकायत बैंकिंग लोकपाल पर नहीं कर सकते। जब तक की इसका फैसला नहीं हो जाता।
  4. आपके द्वारा की गई शिकायत एक निश्चित अवधि के अंतर्गत होना चाहिए। जो कि Indian Limitation Act 1963 के अंतर्गत आता हो।

Importance points of Banking Ombudsman – बैंकिंग लोकपाल योजना के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  1. बैंकिंग लोकपाल योजना के अंतर्गत ग्राहक द्वारा शिकायत किए गए तारीख से 30 दिनों के भीतर उसके शिकायत का निवारण करती है। यदि आप शिकायत के निवारण से खुश नहीं है तो आप उसके ऊपर के अथॉरिटी के पास जा सकते हैं।
  2. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की अधिसूचना के अनुसार सभी बैंक जिसके अंतर्गत कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय बैंक, ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक सभी इसके अंतर्गत आते हैं।
  3. कोई भी ग्राहक जिसकी सेवा संबंधी शिकायतों का निपटारा संतोषजनक तरीके से संबंधित बैंक शाखा तथा उसके शीर्ष प्रबंधन द्वारा 1 महीने के अंदर नहीं किया जाता तो वहां बैंकिंग लोकपाल पर इसकी शिकायत कर सकता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके अंतर्गत आपको 1 वर्ष के भीतर बैंक में शिकायत दर्ज करने के बाद करनी होती है। जोकि Banking Ombudsman Act और Indian Limitation Act 1963 के अंतर्गत आता है। अगर आप बैंक द्वारा किए गए निवारण के बाद 1 वर्षों के भीतर बैंकिंग लोकपाल पर शिकायत दर्ज नहीं करते तो यह शिकायत मान्य नहीं होगा।

बैंकिंग संबंधित शिकायतें कब कर सकते हैं?

बैंक द्वारा निम्नलिखित चीजों का निवारण नहीं करने पर आप इसकी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आपको अपने संबंधित बैंक पर ही शिकायत दर्ज करनी होती है। बैंक द्वारा आपके शिकायत का निवारण 1 महीने के भीतर किया जाता है। अगर आप बैंक द्वारा किया गया निवारण से असंतुष्ट है तभी आप बैंकिंग ओंबड्समैन पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। बैंक में शिकायत करने के 1 महीने के बाद ही आप बैंकिंग लोकपाल पर शिकायत दर्ज करते हैं।

  • Cheques, Draft, Bills आदि के भुगतान से संबंधित अनावश्यक रूप से विलंब होने पर आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • छोटे नोटों को बिना किसी उचित कारण बताएं स्वीकार ना करना। यहां ध्यान रहे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियम अनुसार कोई भी ग्राहक अधिकतम सिक्के बैंक में ₹1000 तक ही जमा कर सकता है।
  • Bank Draft निर्गत ना करने पर
  • बैंक द्वारा प्रचलित किसी भी खाते के परिचालन से संबंधित शिकायतें, विशेष रुप से ब्याज दर से संबंधित
  • भारत में कार्यरत किसी भी बैंक से संबंधित निर्यातकों तथा निवासी भारतीयों की शिकायत

उपयुक्त शिकायतों के संबंध में लोकपाल, पहले ही प्रयासों से शिकायतकर्ता तथा संबंधित बैंक के बीच समझौता करने का प्रयास करता है। लेकिन, इससे समाधान प्राप्त ना होने पर वह शिकायतकर्ता को हुई हानि की राशि का ( जो अधिकतम 1000000 रुपए तक हो सकती है) ‘Award’ घोषित कर सकता है। बैंक द्वारा Award का भुगतान न कर पाने पर बैंकिंग लोकपाल इसकी शिकायत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को कर सकता है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकिंग लोकपाल योजना के दायरे को बड़ा करके इसमें सभी बैंकिंग व्यवहार अब शामिल कर दिए हैं। क्रेडिट कार्ड से संबंधित शिकायतों, वायदा की कई सुविधाएं देने में विलंब, बैंक के सेल एजेंट द्वारा किए गए वायदे पूरा नहीं करने और ग्रह पर पूर्व सूचना के बिना सेवा प्रभार लगाने आदि को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है।

इसके अलावा बैंकिंग सेवाओं में विलंब, बैंक द्वारा छोटे मूल्य वर्ग के नोट और सिक्के स्वीकार नहीं करने अथवा इन पर कमीशन मांगने की शिकायतें भी बैंकिंग लोकपाल से की जा सकती है। (Note :- सिक्के के मामले में यह ध्यान रहे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार साधारण कार्य दिवस पर आप अधिकतम ₹1000 तक किसी भी मूल्य वर्ग के सिक्के अधिकतम जमा कर सकते हैं)

Frequently Asked Questions

1. बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 क्या है?

उत्तर:- बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 बैंक द्वारा दी जा रही सेवाओं से संबंधित बैंक ग्राहकों की शिकायतों के निवारण पर कार्यवाही करती है।

2. क्या बैंकिंग लोकपाल योजना लागू हो गई है?

उत्तर :- बैंकिंग लोकपाल योजना को 1 जनवरी साल 2006 को लागू किया गया है?

3. बैंकिंग लोकपाल कौन है?

उत्तर :- बैंकिंग लोकपाल एक अर्ध न्यायिक अधिकारी होता है। जिसके पास में विचार विमर्श के माध्यम से शिकायतों के समाधान को सुविधाजनक बनाने के लिए इससे दोनों पक्षों बैंक और ग्रहक को बुलाने का अधिकार है। बैंकिंग लोकपाल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त व्यक्ति है जो बैंकिंग सेवाओं में कमियों के संबंध में ग्राहक की शिकायतों का समाधान करता है।

4. बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 के अंतर्गत किन किन बैंकों को शामिल किया गया है?

उत्तर :- बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 के अंतर्गत सभी बैंक आते है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय बैंक, कमर्शियल बैंक, ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक इत्यादि आते हैं।

5. भारत में कितने बैंकिंग लोकपाल की नियुक्ति की गई है और वह कहां कहां स्थित है?

उत्तर :- आज की तारीख तक 15 बैंकिंग लोकपाल की नियुक्ति की गई है जिनके कार्यालय अधिकांश राज्यों की राजधानी में स्थित है। बैंकिंग लोकपाल कार्यालय के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर के देख सकते हैं।

7. नहीं बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006 पुरानी बैंकिंग लोकपाल योजना 2002 से किस तरह से अलग है?

उत्तर :- नई योजना का विस्तार और क्षेत्र 2002 के पूर्व योजना से व्यापक है। नई योजना में शिकायतों का ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण भी उपलब्ध है। नई योजना लोकपाल द्वारा पारित अधि निर्णय के विरुद्ध अपील हेतु बैंक तथा शिकायतकर्ता दोनों के लिए अतिरिक्त रूप से अपीलीय प्राधिकार नामक एक संस्थान भी उपलब्ध कराती है।

8. बैंकिंग लोकपाल किस प्रकार के मामलों पर विचार करता है?

उत्तर :- बैंकिंग लोकपाल बैंकिंग सेवाओं में निम्नलिखित कवियों के संबंध में किसी भी शिकायत को प्राप्त कर सकता है और उसके बारे में विचार कर सकता है।

  • यदि चेक, ड्राफ्ट, बिल आदि का भुगतान सही समय पर ना हो और भुगतान में असाधारण विलंब हो तो शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • किसी भी प्रयोजन हेतु यदि भुगतान के लिए प्रदत कम मूल्य वर्ग के नोटों का बिना पर्याप्त कारण के स्वीकार नहीं किया जाने पर भी आप बैंकिंग लोकपाल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • बैंक ड्राफ्ट, भुगतान आदेश अथवा बैंकर्स चेक जारी करने में अगर विलंब अथवा जारी ना करना इत्यादि बैंक करता है तो आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • बैंक अथवा उसके सीधे बिक्री एजेंट द्वारा लिखित रूप में वचन दी गई बैंकिंग सुविधाएं ( लोन और अग्रिमओं के अतिरिक्त) सेवाएं प्रदान करने में विलंब।
  • बिना प्राप्त सूचना अथवा बिना पर्याप्त कारण के जमा लेखों को जबरन बंद करना
  • बैंकिंग अथवा अन्य सेवाओं के संबंध में रिजर्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं एवं उसका उल्लंघन करना
  • इंटरनेट बैंकिंग सेवाओं में कमी
  • पेंशन के वितरण में विलंब अथवा वितरण ना करना ( कुछ हद तक इस शिकायत हेतु संबंधित बैंक द्वारा की गई कार्रवाई के लिए बैंक को उत्तरदाई ठहरा सकते हैं लेकिन उनके कर्मचारियों के मामले में नहीं)
  • सरकारी प्रतिभूतियां जारी करने से इनकार अथवा उस पर विलंब करना। इत्यादि

9. बैंकिंग लोकपाल पर कैसे शिकायत दर्ज कर सकते हैं?

उत्तर :- बैंकिंग लोकपाल पर कोई भी व्यक्ति तभी शिकायत दर्ज कर सकता है जब संबंधित बैंक उसके शिकायत का निवारण ना करें। इसके अलावा अगर संबंधित बैंक 1 महीने के भीतर शिकायत का निवारण नहीं करता तो वह बैंकिंग लोकपाल पर इसकी शिकायत दर्ज कर सकता है। इसके अलावा संबंधित बैंक पर शिकायत करने के 1 साल के भीतर उसे बैंकिंग लोकपाल पर शिकायत दर्ज करना होता है। अगर वह व्यक्ति संबंधित बैंक द्वारा दिए गए निवारण से संतुष्ट ना हो तो।

10. बैंकिंग लोकपाल पर ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

उत्तर :- बैंकिंग लोकपाल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए आपको उसकी अधिकारिक वेबसाइट www.bankingombudsman.rbi.org पर जाकर के ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके अलावा आप ईमेल भेजकर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज कराने के लिए एक निर्धारित फॉर्म भी है जो बैंक की सभी शाखाओं में उपलब्ध है।