What is Bank Rate? बैंक दर क्या होता है?

What is Bank Rate? बैंक दर क्या होता है? भारत में बैंक दर काफी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि ज्यादातर कमर्शियल बैंक इसी आधार पर अपने ग्राहकों से ऋण के ऊपर ब्याज दर बटोर ते हैं। बैंकों से उनकी जमा का एक खास प्रतिशत रिजर्व के रूप में रखी जाती है।

किसी भी बैंक को दिन प्रतिदिन के कामकाज के लिए एक ऐसी बड़ी रकम की आवश्यकता होती है जिन की मियाद एक दिन से ज्यादा नहीं होती है। इसके लिए बैंक जो विकल्प अपनाते हैं उनमें से सबसे सामान्य है केंद्रीय बैंक ( रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) से रात भर के लिए कर्ज लेना। बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है उसे रेपो रेट (REPO Rate) कहते हैं।

वहीं अगर रेपो रेट कम हो जाती है तो बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और इसलिए बैंक ब्याज दरों में कमी करते हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम खर्च के तौर पर दी जा सके। रेपो दर में बढ़ोतरी या वृद्धि के साथ मतलब यह होता है कि बैंक के लिए रिजर्व बैंक से राजभर के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। साफ है कि बैंक दूसरे को कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करती है इसका प्रभाव उन पर पड़ता है। जिससे कि दूसरों को दी जाने वाली ऋण पर ब्याज बढ़ जाती है। आज के हमारे इस लेख में हम जानेंगे कि What is Bank Rate? बैंक दर क्या होता है?

What is Bank Rate? बैंक दर क्या होता है?

Bank Rate – बैंक दर एक ऐसा ब्याज दर होता है, जिस पर देश के केंद्रीय बैंक घरेलू बैंकों को अक्सर बहुत कम अवधि यह अवधि रात भर की हो सकती है, पर ऋण के रूप में पैसों को उधार देता है। जिस ब्याज दर पर केंद्रीय बैंक यानी कि भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) दूसरे बैंकों को (घरेलू बैंकों) ऋण ब्याज पर देता है उसे बैंक दर (Bank Rate) कहते हैं।

अगर बैंक दर कम होती है तो ऋण लेने वालों के लिए फंड की लागत कम करने के जरिए अर्थव्यवस्था को विस्तृत करने में सहायता मिलती है। वहीं अगर बैंक रेट बढ़ जाता है तो महंगाई दर की उम्मीद से अधिक रहने की सूरत में अर्थव्यवस्था को प्रगति करने में मदद कर सकती है।

साधारण शब्दों में समझे तो, जिस सामान्य ब्याज दर पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा घरेलू बैंकों को पैसे उधार पर दिया जाता है उसे बैंक दर (Bank Rate) कहते हैं। इसके जरिए भारतीय केंद्रीय बैंक द्वारा बैंकों को नियंत्रित किया जाता है। बैंक अपने दैनिक कामकाज के लिए उन्हें ऐसी बड़ी रकम की जरूरत होती है जिनकी मियाद एक दिन से ज्यादा नहीं होती है। इसके लिए बैंक जो विकल्प अपनाते हैं, उनमें सबसे सामान्य है केंद्रीय बैंक यानी कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया से रात भर के लिए (Overnight) ऋण लेना। इस कर्ज पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को जो ब्याज घरेलू बैंकों को देना पड़ता है, उसे रेपो रेट (Repo Rate) कहते हैं।

रेपो और रिवर्स रेपो रेट क्या है? What is Repo and Reserve Repo Rate?

Repo Rate – रेपो दर वह डर होता है जिस पर बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से लोन लेती है। रेपो दर में कटौती करके रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यह संदेश देती है कि उन्हें आम लोगों और कंपनियों के लिए लोन की दरों को आसान करना चाहिए।

जब भी बैंक के पास में धन की कमी हो जाती है। तब दैनिक कामकाज के लिए रकम की जरूरत होती है तो आरबीआई से कम अवधि के लिए कर्ज ले सकता है। इस कर्ज पर जब बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है उसे ही रेपो दर कहते हैं। रेपो दर में कमी से बैंक को सस्ती दर पर पैसे पाने के लिए मदद मिलेगी वहीं जब रेपो दर बढ़ती है तो इसका सीधा मतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कर्ज़ लेना नंगा हो जाएगा जिसका सर बैंक से लोन लेने वाले उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है।

Reserve Repo Rateरिजर्व रेपो दर रेपो रेट के ठीक उल्टे रिजर्व रेपो रेट होता है। यानी कि बैंक अपने कुछ धनराशि को रिजर्व बैंक में जमा कर देती है। जिस पर रिजर्व बैंक उन्हें ब्याज देता है। रिजर्व बैंक जिस दर पर ब्याज देता है उसे रिजर्व रेपो रेट कहते है।

रिजर्व रेपो रेट के अंतर्गत बैंक अपने पैसों को अपने पास रखने के बजाय केंद्रीय बैंक यानी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को पैसे दे देती है। जिस पर घरेलू बैंकों को ब्याज मिलता है। जिस घर से घरेलू बैंकों को ब्याज मिलता है उसे ही रिजर्व रेपो रेट (Reserve Repo Rate) कहते हैं।

बैंक दर कैसे काम करती है?

अमेरिका जैसे देश में बैंक दर को Federal Point Rate भी कहते हैं। दूसरे शब्दों में इसे डिस्काउंट रेट के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिका जैसे देश में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स डिस्काउंट रेट पर घरेलू और कमर्शियल बैंक को रिजर्व की आवश्यकता निर्धारित करता है। जिसके अंतर्गत ही मनी सप्लाई रेगुलेट करने के लिए ट्रेजरी सिक्योरिटी बीज की खरीद या बिक्री करता है। एक साथ मिलकर के डिस्काउंट रेट, ट्रेजरी बॉन्ड रिजर्व आवश्यकताओं का अर्थव्यवस्था पर भारी प्रभाव पड़ता है।

ठीक इसी तरह भारत में भी केंद्रीय रिजर्व बैंक यानी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए बैंकों पर नियंत्रण रखती है। जिसके लिए वह बैंक दर, रिवर्स रेपो रेट, रेपो रेट, एसएलआर इत्यादि विधि का प्रयोग करके बैंकों को के साख नियंत्रण (Credit Control) का काम करती है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी कि केंद्रीय बैंक द्वारा अपनाई गई इस पूरी नीति को केंद्रीय मौद्रिक नीति (Monetary Policy) भी कहा जाता है।

निष्कर्ष

आज के हमारे इस लेख में आप लोगों ने यह जाना कि What is Bank Rate? बैंक दर क्या होता है? साधारण एवं सीधे शब्दों में कहा जाए तो जिस सामान्य ब्याज दर पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को पैसा उधार पर देती है उसे बैंक दर कहते हैं। जिसकी सहायता से केंद्रीय बैंक या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया साख नियंत्रण (Credit Control) का काम करती है। उम्मीद करता हूं कि आज के इस लेख से आपको यह अच्छी तरह से समझ में आ गया होगा कि बैंक दर क्या होता है? इससे संबंधित अगर आपकी कुछ सवाल एवं सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स पर कमेंट करके बता सकते हैं।