Stock market क्यों गिरता है? स्टॉक मार्केट का भाव क्यों कम ज्यादा होता है?

Stock market क्यों गिरता है? स्टॉक मार्केट का भाव क्यों कम ज्यादा होता है?

अगर सेंसेक्स को देखेंगे तो अक्सर आपको यह देखने को मिलेंगे की शेयर मार्केट के भाव हर दिन अलग और हर घंटे में बदलते रहते हैं? ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि, Stock market क्यों गिरता है? स्टॉक मार्केट का भाव क्यों कम ज्यादा होता है? जाहिर सी बात है जरूर एक ना एक बार तो आपने जरूर सोचा होगा? लेकिन इसका जवाब शायद ही आपको मिल पाया होगा।

आज के हमारे इस लेख में हम इस बारे में चर्चा करेंगे कि स्टॉक मार्केट का भाव क्यों गिरता एवं चढ़ता है? स्टॉक मार्केट एका सा बाजार है जहां पर लोग शेयर की खरीद बिक्री करते हैं? कुछ लोग मुनाफा पाने के लिए शेयर को खरीदते हैं। तो कुछ लोग अपने मुनाफे के हिसाब से शेयर को बेचते हैं। स्टॉक मार्केट का मुख्य काम यही होता है कि वह बाजार को बनाए रखें। जहां पर लोग खरीदने वाले और बेचने वाले दोनों हमेशा मौजूद रहते हैं। लोग शेयर पर निवेश करते हैं।

Stock market कि जब भी बात आती है तो हमारे मन में दो स्टॉक एक्सचेंज BSE और NSE का नाम सबसे पहले आता है। दोनों ही स्टॉक एक्सचेंज भारत की मुख्य स्टॉक एक्सचेंज मानी जाती है। इन दोनों स्टॉक एक्सचेंज के अलावा भी पूरे भारत में और भी बहुत से स्टॉक एक्सचेंज मौजूद है। जहां पर भी शेयरों की खरीद बिक्री की जाती है। इसका असर पूरे शेयर बाजार पर पड़ता है। तो चलिए फटाफट जान लेते हैं कि Stock market क्यों गिरता है? स्टॉक मार्केट का भाव क्यों कम ज्यादा होता है?

Stock market क्यों गिरता है? स्टॉक मार्केट का भाव क्यों कम ज्यादा होता है?

किसी भी कंपनी के शेयर के उतार-चढ़ाव के पीछे बहुत सारे कारक होते हैं। यह कारक, कंपनी से संबंधित भी हो सकते हैं या उस विशेष क्षेत्र से जिस क्षेत्र में वह कंपनी काम कर रही है। उदाहरण के तौर पर आप कोविड-19 की महामारी को ही ले लीजिए। कोविड-19 महामारी के दौरान सभी क्षेत्रों में जैसे कि कृषि, बैंकिंग और वित्तीय, इत्यादि पर कोविड-19 का असर पड़ा था। आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि कोविड-19 महामारी के दौरान कोई भी ऐसा क्षेत्र अछूता नहीं था जिसके चलते उसे संबंधित कंपनियों पर असर ना पडा हो। यही वजह थी कि, बहुत से कंपनियों के शेयर कोविड-19 के दौरान काफी नीचे गिर गए थे।

यहां पर हमने बस एक प्राकृतिक आपदा के जरिए आपको यह समझाने की कोशिश की है कि शेयर बाजार जोखिम के अधीन होती है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि आप इससे अच्छी खासी कमाई ना कर पाव। किसी भी कंपनी के शेयर कि कि हमसे घटने और बढ़ने के लिए कई सारे कारक जिम्मेदार होते हैं। जो निम्नलिखित हो सकते हैं :-

  • शेयर के भाव में बदलाव – मांग एवं आपूर्ति – Demand and Supply
  • शेयर के प्रति नजरिया
  • समाचार पत्र
  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की नीतियां
  • विश्व की अर्थव्यवस्था – Global Economic Impact
  • केंद्र सरकार की नीतियां – Central Government policies
  • कंपनी की लाभ कमाने की क्षमता
  • कंपनी की अपनी रणनीति
  • कंपनी का प्रबंधन (Management)

यह कुछ कारक है, जो किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत को प्रभावित करता है। यही वजह है कि शेयर बाजार पर शेयर की कीमतें बढ़ती और घटती रहती है।

यह कारक किस तरह से किसी भी कंपनी के शेयर को प्रभावित करती है। इसके बारे में हम नीचे विस्तार से चर्चा करेंगे। और जाने की कोशिश करेंगे कि इसका असर स्टॉक मार्केट पर क्या होता है?

शेयर के भाव में बदलाव – मांग एवं पूर्ति – Demand and Supply

Stock market ( शेयर बाजार ) एक ऐसी जगह है जहां पर शेयर की खरीद बिक्री की जाती है। यहां पर एक खरीददार और विक्रेता दोनों इस जगह पर जुटते हैं। जोकि शेयर की खरीद-फरोख्त का कार्य करते हैं।

अर्थशास्त्र में आपने यह तो पढ़ा होगा “ मांग एवं पूर्ति” (Demand and Supply) किसी भी बाजार को चलाने के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। यहां पर भी यह चीज लागू होती है। अगर किसी कंपनी शेयर के भाव बढ़ते हैं तो मतलब यह है कि उस कंपनी की शेयर की मांग बढ़ गई है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब लोग उस कंपनी के शेयर काफी कम मार्केट पर बेचते हैं। और साथ में कंपनी अपनी रणनीतियों के चलते अपने निवेशकों को अच्छा लाभ कमा कर के दे रही हो।

जब मांग घट जाता है, तो किसी कंपनी की शेयर की कीमतें घट जाती है। ऐसा तभी होता है जब कंपनी की रणनीतियों, सरकारी रणनीतियों, या उस क्षेत्र में किसी तरह का उछाल आया हो। यह भी वजह हो सकती है कि उस क्षेत्र की कंपनी के शेयर की कीमतें लगातार घटती जाती है। निवेशकों को यह लगता है कि शेयर बाजार पर लगाए गए उनके पैसे डूब जाएंगे। इस वजह से वे उन कंपनियों के शेयर बेचने लगते हैं। जिससे कि कंपनियों के शेयर की कीमत घटने लगती है।

यही एक कारण हो सकता है कि शेयर की कीमतें मांग एवं पूर्ति (Demand and Supply) के नियम से ही शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

जब शेयर की मांग (Demand) ज्यादा होती है, तो शेयर के भाव बढ़ जाते हैं और जब मांग (Demand) कम होने लगती है तो शेयर के भाव घटने लगते हैं। शेयर के भाव घटने और बढ़ने से बाजार का सूचकांक जैसे कि BSE, NSE SENSEX में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

लोगों का शेयर के प्रति नजरिया

किसी भी शेयर की कीमतों का घटना और बढ़ना इस बात पर भी निर्भर करता है कि उन कंपनी के शेयर के प्रति लोगों का क्या नजरिया है। शेयर बाजार में सिर्फ आंकड़ों और पिछले तथ्यों के आधार पर अनुमान लगाया जाता है कि किसी शेयर के भाव आगे क्या रहेंगे, एक ही स्टॉक के बारे में हर किसी की अपनी अलग अलग राय हो सकती है।

यही वजह है कि कुछ लोग अपना अलग अलग नजरिया रखते हैं। कुछ लोग उनसे एयर को बेचना चाहते हैं तो कुछ लोग उन्हें खरीदना चाहते हैं। इस खरीदने और बेचने के अलग-अलग नजरियों को लेकर ही शेयर बाजार में किसी भी शेयर की खरीद और बेचने का आर्डर डालते हैं।

लोगों के इन अलग-अलग नजरिए और आर्डर के ऊपर मांग एवं पूर्ति के नियम से शेयर बाजार हमेशा घटता और बढ़ता रहता है। किसी भी कंपनी के शेयर की मांग बढ़ जाने पर भाव भी बढ़ जाता है और पूर्ति कम होने पर कम हो जाता है।

शेयर बाजार में कोई भी व्यक्ति अपने अनुमान के हिसाब से सही हो सकता है या फिर गलत भी हो सकता है। कोई भी हमेशा एकदम सही सही अनुमान नहीं लगा सकता कि शेयर बाजार कब ऊपर चढ़ेगी या नीचे गिरेगी।

इसी नजरिए के चलते, लोगों के बीच में किसी खास शेयर को लेकर के अलग अलग नजरिया रहता है। जिस वजह से लोग शेयर की खरीद बिक्री करने के लिए Stock market का सहारा लेते हैं। जहां पर खरीददार एवं विक्रेता दोनों ही मौजूद होते हैं। जिससे शेयर बाजार बनता है। यहीं पर अर्थशास्त्र के नियम अनुसार मांग एवं पूर्ति (Demand and Supply) का नियम लागू होता है। यह भी एक वजह हो सकती है जिस वजह से स्टॉक मार्केट पर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

शेयर बाजार पर समाचार पत्रों के समाचार का प्रभाव

समाचार पत्रों में छपे समाचार शेयर बाजार पर असर करते हैं। कई बार सरकार की नीतियों सुर्खियों में होती है। जिस वजह से इसका असर शेयर बाजार पर देखा जा सकता है। केंद्र सरकार अलग-अलग क्षेत्रों के विकास की योजना बनाती है, उससे संबंधित क्षेत्र की कंपनियों के शेयर के भाव में उतार-चढ़ाव आता है।

सरकार अगर किसी आमुख क्षेत्र में विकास की योजना बनाने वाली है तो उस क्षेत्र से संबंधित कंपनी के शेयर की खरीददारी बढ़ जाती है। क्योंकि, निवेशक ऐसा मानते हैं कि उस क्षेत्र से संबंधित कंपनी को ज्यादा लाभ होगा। ज्यादा लोगों के द्वारा शेयर खरीदने की वजह से उस कंपनी के शेयर के भाव बढ़ जाते हैं और ठीक इसके उल्टा अगर कभी समाचार पत्र पर नेगेटिव समाचार उस क्षेत्र से संबंधित है तो इसका असर उस क्षेत्र से संबंधित कंपनियों के शेयर पर पड़ता है तो परिस्थितियां अनुकूल ना होने की वजह प्रतिकूल हो जाती है। जिससे कि शेयर की कीमतें घटने लगती है।

यह सब कुछ मुख्य कारण है। जिनकी वजह से किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। और इसी के वजह से शेयर बाजार सूचकांक भी घटा एवं बढ़ता रहता है। इन कारकों को आप प्रत्यक्ष कारक मान सकते हैं। जिसके चलते शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इन कारकों के अलावा कुछ अप्रत्यक्ष कारक भी है जिनकी वजह से किसी भी कंपनी के शेयर में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

अप्रत्यक्ष रूप से शेयरों की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक

जैसा कि हमने ऊपर इस बारे में जिक्र किया है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कारक होते हैं जिनकी वजह से किसी भी कंपनी के शेयर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। अप्रत्यक्ष कारक जिनकी वजह से किसी भी शेयर की कीमत घटती और बढ़ती है वह निम्नलिखित है :-

  1. ब्याज दर
  2. आर्थिक नीतियों में परिवर्तन
  3. मुद्रास्फीति
  4. अपस्फीति
  5. बाजार भावना
  6. उद्योग व्यापार
  7. प्राकृतिक आपदा आदि

यह कुछ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कारक हैं जिनकी वजह से शेयर की कीमतें और शेयर बाजार सूचकांक जैसे कि BSE, NSE, SENSEX इत्यादि चीजों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

उम्मीद करता हूं कि आपको हमारे इस लेख से यह समझ में आ गया होगा कि Stock market क्यों गिरता है? स्टॉक मार्केट का भाव क्यों कम ज्यादा होता है? अगर आपको हमारा यह लेख पसंद आया है तो आप इसे अपने परिवार एवं दोस्तों के साथ शेयर अवश्य करें। इससे संबंधित अगर आप के कुछ सवाल एवं सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स पर कॉमेंट करके बता सकते हैं।


Published on जुलाई 21, 2021

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