History of DNA: Who Discovered DNA? डीएनए का इतिहास, डीएनए की खोज किसने की?

DNA या डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) के अणुओं का समूह होता है, जो माता पिता से वंशानुगत गुणों या अनुवांशिक जानकारी को उनके संतानों तक ले जाने और स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। आज हम आपको अपनी इस पोस्ट में डीएनए से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने वाले हैं। आज के हमारे इस लेख में हम जानकारी लेंगे की History of DNA: Who Discovered DNA? डीएनए का इतिहास, डीएनए की खोज किसने की

हम सब लोगों में से बहुत से लोगों ने इस शब्द के बारे में अपनी कक्षाओं में तो जरूर पढ़ा होगा। या फिर इसके बारे में जानकारी तो जरूर रखते होंगे। हम सभी जानते हैं कि प्रत्येक जीव का शरीर बहुत सारी कोशिकाओं से मिलकर के बना होता है, डीएनए प्रत्येक जीव की कोशिका में मौजूद एक जैविक इकाई होती है।

डीएनए सभी जैविक जैसे मनुष्य, जानवर, पेड़ पौधे, आदि में होता है। आज के हमारे इस लेख में हम डीएनए के इतिहास एवं इसकी खोज किसने की इस बारे में जानकारी लेंगे। इसी के साथ ही हम अपने इस लेख में यह भी जानकारी लेंगे की डीएनए किस तरह से किसी भी व्यक्ति के स्वभाव का स्थानांतरित अपने माता-पिता द्वारा होता है।

What is DNA? – डीएनए क्या है?

DNA या डीएनए का विस्तृत रूप डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड ( Deoxyribonucleic Acid) होता है, जो माता-पिता से वंशानुगत गुणों या अनुवांशिक जानकारी को उनके संतानों तक ले जाने और स्थानांतरित करने के लिए जिम्मेदार होता है। डीएनए हर जैविक जीव एक कोशिकीय से लेकर के बहुकोशिकीय जीव मे उस जीव के लिए आवश्यक डीएनए का पूरा सेट होता है। यह सभी प्रकार के जीवो में अनुवांशिकता की प्राथमिक इकाई के रूप में कार्य करती है।

डीएनए की संरचना

डीएनए अणुओं का एक समूह है जो वंशानुगत जानकारियों को एक दूसरे में पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होता है। अगर हम इसे आसान एवं सरल शब्दों में समझें तो डीएनए एक लंबा अणु है जिसमें किसी व्यक्ति का अद्वितीय अनुवांशिक कोड मौजूद होता है। यह हमारे शरीर गुरुद्वारा कार्य करने के लिए जरूरी प्रोटीन की निर्माण के लिए निर्देश देते हैं। डीएनए, माता-पिता से एक बच्चे में आता है, जिसमें लगभग आधा बच्चे का डीएनए अपने पिता से और आधा मां से आता है।

डीएनए कोशिकाओं के माइटोकांड्रिया में उपस्थित होता है और इसे माइटोकांड्रियल डीएनए कहा जाता है। यह हर जैविक जीव को अपने माता-पिता से विरासत में मिलती है। एक इंसानी शरीर में माइटोकांड्रियल डीएनए के लगभग 16,000 आधारभूत जोडें होते हैं।

History of DNA: Who Discovered DNA? डीएनए का इतिहास, डीएनए की खोज किसने की?

डीएनए की खोज एक स्विस विज्ञानिक, जोहन फ्रेडरिक मिशर ने वर्ष 1869 में किया था। हालांकि, डीएनए की संरचना के बारे में जानकारी वर्ष 1953 में ही मिल गई थी। लेकिन जर्मनी के एक छोटे से प्रयोगशाला में जोहन फ्रेडरिक मिशर ने इसके संरचना के बारे में विस्तृत एवं सटीकता से जानकारी दी थी। इस वजह से इन्हें डीएनए के खोजकर्ता के रूप में जाना जाता है।

डीएनए के खोजकर्ता जोहन फ्रेडरिक मिशर जन्म 1844 बेसल मे हुआ था।

जोहन फ्रेडरिक मिशर का जन्म 13 अगस्त, 1844 को स्विट्जरलैंड में बेसल नामक स्थान में हुआ था। इनके परिवार में इनके पिता और चाचा जोहन एफ मिशर और विलियम हिज़ दोनों बेसल विश्वविद्यालय में प्रसिद्ध चिकित्सक, शारीरिक रचनाविद और प्रोफ़ेसर थे।

बचपन से ही , फ्रेडरिक मिशर को विज्ञान में खासी रुचि थी। और इन्होंने अपने पिता के ही कॉलेज जहां पर उनके पिता प्रोफ़ेसर थे वहीं से शिक्षा हासिल की।

डीएनए की खोज कैसे हुई?

डीएनए की खोज की कहानी साल 18 सो 68 में शुरू होती है जब फ्रेडरिक मिशर, फ्लेक्स हॉफ सीलर की प्रयोगशाला में शामिल हुए थे। वहां उन्हें कोशिकाओं की रासायनिक संरचना में काफी रूचि लगने लगी थी।

फ्लेक्स होफ सीलर एक ऐसी प्रयोगशाला थी जहां जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के विज्ञानिक दोनों ही साथ मिलकर के प्रयोगशाला में काम करते थे। इस प्रयोगशाला में काम करते हुए फ्रेडरिक मिशर को सही उपकरण भी मिले। उन्हें पास के एक क्लीनिक से ताजा सर्जिकल पटिया, ल्यूकोसाइट्स इत्यादि चीजें आसानी से मिल जाया करती थी।

फ्रेडरिक मिशर, एक होनहार छात्र और वैज्ञानिक होने के नाते वह हर एक रिकॉर्ड को लिख करके रखते थे और बड़ी सावधानी से काम करते थे। इस वजह से उन्हें अपने प्रयोग में पाया कि प्रोटीन और लिपिड के बीच कुछ अजीब सा है। अपने एक्सपेरिमेंट में उन्होंने पाया कि पदार्थ अम्लीय परिस्थिति में अवक्षेपित होता है। और इसी का पता लगाने के लिए उन्होंने और भी बहुत सी प्रयोग शुरू करना आरंभ कर दिया।

उन्होंने पदार्थ को घोल से बाहर निकालने के लिए कई सारे प्रयोग किए। यह अज्ञात अवक्षेप क्षारीय परिस्थितियों में आसानी से घुल जाता है, निष्प्रभावी होने पर अवक्षेपित हो जाता है। जब इस घोल को अम्लीय बना दिया गया तब भी पदार्थ वापस घोल में नहीं घुल पाया।

फ्रेडरिक मिशर द्वारा रासायनिक प्रयोग

प्रोटीन अपनी संरचना में पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों प्रकार के अनु ले जाते हैं। समाधान के PH के आधार पर संपूर्ण प्रोटीन या तो पॉजिटिव या तो नेगेटिव रूप से चार्ज हो सकता है।

पानी में आयन प्रोटीन को गोल में रखते हुए प्रोटीन पर अवशित प्रजाति के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। हालांकि एक विशेष PH वैल्यू पर प्रोटीन पर शुद्ध चार्ज शून्य होता है, जिसका मतलब है कि इसमें कोई चार्ज नहीं होता। इस PH पर प्रोटीन अणु आसपास के आयनो के बजाय एक-दूसरे के साथ प्रक्रिया करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में प्रोटीन को इकट्ठा करने का कारण बनता है और वह बाहर निकल जाते हैं। इस PH को आइसोइलेक्ट्रिक प्वाइंट या PI कहा जाता है।

फ्रेडरिक मिशर, ने अपने इस प्रयोग में यह पाया कि यह पदार्थ pH अम्लीय में नहीं घुलनशील था। तब इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यह प्रोटीन नहीं हो सकता है। इसे सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने और भी बहुत सारे प्रयोग किए। उन्होंने इसे लेकर के किस पदार्थ को जलाया भी और सभी सामान्य कार्बनिक तत्व जैसे ऑक्सीजन, कार्बन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन को पाया। उन्होंने जो पाया वह सल्फर नहीं था जो कि अधिकांश प्रोटीन में एक तत्व होता है।

इस तरह से उनके इस प्रयोग में उन्होंने पाया कि या किसी भी तरह का एंजाइम या प्रोटीन नहीं था। वे अपने पिछले प्रयोगों से इस अनुमान तक पहुंचे की पदार्थ नाभिक में पाया जाता है इसलिए उन्होंने इसे न्यूक्लिन का नाम दिया।

फ्रेडरिक मिशर, द्वारा किए गए इस प्रयोग पर प्रकाश डालने के लिए एक शोध पत्र 1871 में आया। इसके बाद भी फ्रेडरिक मिशर अपने प्रयोग में लगे रहे। उन्होंने अपने प्रयोग में पाया कि पोस्ट फास्फोरिक एसिड के रूप में कुछ पदार्थ इसमें पाए गए। बाद के वर्षों में मैं सर ने अपना शोध फोकस बदल दिया। प्रधानाध्यापक बनने के बाद वह अपने अन्य जिम्मेदारियों के बोझ तले दब गए थे। डीएनए के अध्ययन करने का दायित्व अब अन्य वैज्ञानिकों को दे दिया गया।

फ्रेडरिक मिशर के बाद डीएनए के ऊपर प्रयोग

इसके बाद कई रासायनिक वैज्ञानिक, विशेष रुप से जो फ्रेडरिक मिशर के साथ प्रयोगशाला में काम करते थे उन्होंने न्यू क्लीन पर काम करना शुरू कर दिया। एक नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक शोधकर्ता अलब्रैकेट कोसेल ने अपने शोध में पाया कि न्यू क्लीन चार आधारों और सकरा से बना था। एडवर्ड जकरिया जो एक वनस्पति शास्त्री थे उन्होंने गुणसूत्रों की अवधारणा को न्यू क्लीन के साथ मिला दिया। यह प्रदर्शित करते हुए की न्यू क्लीन गुणसूत्रों का ही एक महत्वपूर्ण घटक था।

फिर भी उस समय वैज्ञानिक समुदाय से डीएनए को अभी भी बहुत कम ध्यान मिला। फ्रेडरिक मिशर, सहित अधिकांश विशेषज्ञों का मानना था कि प्रोटीन न्यूक्लिक एसिड के बजाय वंशानुगत घटक थे। वहीं कई लोगों ने तर्क दिया कि जीवन के बीच ऐसी गतिशील विविधता उत्पन्न करने के लिए न्यूक्लिक एसिड रासायनिक रूप से बहुत सरल थे। दूसरी ओर, प्रोटीन 20 अलग-अलग अमीनो एसिड से बने होते हैं और इतने जटिल होते हैं कि हम अपने आसपास दिखाई देने वाले जीवन की विविधता प्रदान कर सकते हैं।

इससे न्यूक्लिक एसिड की काफी हद तक उपेक्षा की गई। अणुओं पर काम करना लड़खड़ा गया और मुख्य रूप से प्रोटीन पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह सब तब बदल गया जब वर्ष 1928 में ग्रैफिथ द्वारा पहले, फिर वर्ष 1944 में एवरी, मैकलियोड और मैकाथी द्वारा और साल 1952 में हुए प्रयोग ने यह साबित कर दिया कि डीएनए कोशिकाओं में अनुवांशिक सामग्री होती है।

उनकी खोज और डीएनए संरचना के सत्यापन के बाद से, न्यूक्लिक एसिड की दुनिया कभी भी एक जैसी नहीं रही। अनु पर काम करना आसमान छूने लगा और अगले 3 दशकों में, इस क्षेत्र में कई सारे प्रयोग किए गए।

तपेदिक ( ट्यूबरक्लोसिस) फ्रेडरिक मिशर, की मौत 51 वर्ष की आयु में हो गई। उनके चाचा ने उनके द्वारा किए गए शोध पत्र एवं रिकॉर्ड को विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित किया। यह उन्हीं की देन है कि आज भी हम विकास, स्वास्थ्य और पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत के राशियों के लिए डीएनए और अन्य न्यूक्लिक एसिड की जांच कर रहे हैं। इसलिए आज के आधुनिक युग में डीएनए का स्थान काफी महत्वपूर्ण रखता है।

डीएनए की संरचना – Structure of DNA

डीएनए में सूचना को चार रसायनिका आधारों में बांटा गया है।

  1. एडेनिन
  2. ग्वानिन
  3. थाइमिन
  4. साइटोसिनसे

डीएनए में सूचना को चार रासायनिक आधार जो कि हमने ऊपर दिए हैं कि कोड के रूप में संग्रहित किया जाता है। मनुष्य के डीएनए में लगभग 3 बिलियन बेस होते हैं और 99% से अधिक आधार सभी लोगों में समान होते हैं। इन बेस का अनुक्रम या क्रम किसी जीव के निर्माण और बनाए रखने के लिए उपलब्ध जानकारी को तय करता है। यह ठीक उसी प्रकार होता है जिस प्रकार वर्णमाला के अक्षर एक निश्चित क्रम में शब्द और वाक्य बनाने के लिए दिखाई देते हैं।

डीएनए संरचना के 3 घटक में शुगर, डीएनए अणु का आधार बनाता है। इसे डीऑक्सिराइबोस भी कहा जाता है। इसके विपरीत स्टैंडर्ड के नाइट्रोजेनस बेस हाइड्रोजन बॉन्ड बनाते हैं। जिस से सीढी जैसी संरचना बनती है।

डीएनए की संरचना

डीएनए एक एजेंटिक पदार्थ के रूप में कार्य करती है, जो सभी वंशानुगत जानकारी को अपने अंदर समाए रहती है। जिसे उसके नाइट्रोजन आधारों की व्यवस्था में कोडिट किया जाता है। जीन, डीएनए का एक छोटा भाग होता है। जिसमें 250 से लेकर के 2 मिलियन बेस युग्म होते हैं।