How many Black Holes are there in our Universe? हमारे ब्रह्मांड में कितने ब्लैक होल हैं?

हमारा ब्रह्मांड बहुत ही विशाल है। हमारा ब्रह्मांड में मौजूद ब्लैक होल बहुत सी चीजों से भी पुरानी है और उनकी कुल संख्या भी बहुत बड़ी है। उनकी उत्पत्ति और गठन हमारे अतीत और भविष्य के बारे में जानकारी देते हैं। आज के हमारे इस लेख में हम इस बारे में जानकारी लेंगे की How many Black Holes are there in our Universe? हमारे ब्रह्मांड में कितने ब्लैक होल हैं?

ब्लैक होल के बारे में सबसे पहली बार स्टीफन हॉकिंस द्वारा बताया गया था। वह वह महान विज्ञानिक है जिन्होंने इस पूरी दुनिया को यहां बताया कि ब्लैक होल क्या है? इसकी संरचना कैसी है?

उनके द्वारा बताई गई धारणा और ब्लैक होल के आसपास के अनुमानों को मजबूत करने में उनकी मानव जाति के लिए अहम भूमिका रही है। ब्लॉक होल शब्द आपके दिमाग में विचारों की एक श्रंखला को ट्रिगर कर सकते हैं। यानी कि संभावित रूप से विनाशकारी लेकिन ब्लैक होल की असली सुंदरता और अनजानी शक्ति बहुत से लोगों को इसके बारे में जानकारी रखने के लिए मजबूर करती है। हमारे यूनिवर्स में कुल कितने ब्लैक होल है? इस बारे में जानकारी लेने से पहले हमें यह पता होना चाहिए कि ब्लैक होल होता क्या है?

What is Black Holes? ब्लैक होल क्या होता है?

ब्लैक होल (Black Hole ) को हिंदी में कृष्ण विवर कहते हैं। आप सब लोगों में से बहुत से लोगों ने इस शब्द को जरूर सुना होगा।

ब्लैक होल स्पेस में बहुत जगह होती है जहां आप भौतिकी का कोई नियम काम नहीं करता है। मतलब समय और स्थान का कोई मतलब नहीं है। यहां बस गुरुत्वाकर्षण और अंधकार है। इसका गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है जिसकी आप जरा भी कल्पना नहीं कर सकते हैं। यह अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण प्रकाश को भी अपने अंदर अवशोषित कर लेती है। मतलब यह है कि इसमें जो भी डाला वह बाहर नहीं निकल सकता है।

इसे साधारण एवं सरल शब्दों में समझे तो जब हम किसी और से प्रकार से डालते हैं तो वह प्रकाश रिफ्लेक्ट होकर के हमारी आंखों पर आता है तभी वह चीज हमें दिखाई देती है। लेकिन यदि मान लो कि प्रकाश वापस रिप्लाई तो कर के ना आए तो वह जगह ब्लैक होल हो सकता है। ऐसा ही जगह अंतरिक्ष मे होती है जिसे ब्लैक होल का नाम दिया गया है।

ब्लैक होल कैसे बनता है?

विज्ञान की मानी जाए तो ब्लैक होल एक बड़े तारे के अवशेष होते हैं जो सुपरनोवा विस्फोट के बाद मर जाते हैं। छोटे तारे घने न्यूट्रॉन तारे के बने हुए होते हैं, जो प्रकाश को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होते हैं।

तारों के कोर में हाइड्रोजन फ्यूल को करके हीलियम, हीलियम फ्यूज हो करके कार्बन, और कार्बन फ्यूज करके नियोन और आगे की क्रिया बढ़ती जाती है। एक समय ऐसा आता है जब उसका कोर लोहे जैसा भारी पदार्थ बन जाता है। जिसके बाद उसके अंदर मौजूद कोर और ज्यादा पदार्थों को यूज नहीं कर सकता। Fusion की क्रिया बंद होते ही, गुरुत्वाकर्षण बाहर की ओर दबाव देना शुरू कर देता है। जिसके बाद यहां आते ही गुरुत्वाकर्षण बल के कारण Gravitational Collapse होना शुरू कर देता है।

इसका मतलब यह है कि यहां अपने ही अंदर सिकुड़ना शुरू कर देता है। जिसके परिणाम स्वरुप यह बहुत ही कम समय में अरबों खरबों kg गैस को अपने अंदर समाने लगता है। जिसके परिणाम स्वरूप यह बहुत ही भयंकर धमाके के साथ फट जाता है। जो बहुत ही ज्यादा उर्जा उत्सर्जित करती है।

धमाके से 100 गुना ज्यादा उत्सर्जन करने वाली तारे के धमाके को ही सुपरनोवा धमाका कहते हैं। और पीछे छोड़ जाता है एक नया गुरुत्वाकर्षण बल वाला ब्लैक होल।

ब्लैक होल के लिए आकार विस्तृत श्रंखला बताना मूर्खतापूर्ण होगी। कम से कम आने के लिए, कुछ ब्लैक होल बहुत छोटे होते हैं एक परमाणु की तरह छोटे। जबकि अन्य इतने बड़े होते हैं कि वह एक ही बार में पूरी आकाशगंगा को निकल सकते हैं। और लगभग एक मिलियन सूर्य को एक साथ रखने में सक्षम होते हैं।

हम ब्लैक होल का पता कैसे लगाते हैं?

यह सवाल आपको पहली बार में बेतुका सा लग सकता है क्योंकि प्रकाश भी काले रंग के ब्लैक होल से भी नहीं बच सकते हैं। इसलिए हम किसी का पता कैसे लगा सकते हैं? लेकिन ब्लैक होल विशेषताओं पर करीब से नजर डालते हुए कुछ तरीके हैं जिनकी मदद से हम उन्हें दूर और ठीक स्थिति का पता लगा सकते हैं।

पहली विधि :- ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण पहलुओं पर पूरा ध्यान देना होगा। कोई भी चीज जो ब्लैक होल के करीब से गुजरती है वह अपने गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उसे अपने अंदर अवशोषित कर लेती है। लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं है जितना कि यह सुनने में लगता है। क्योंकि यह केवल संयोग पर निर्भर करता है यह एक परीक्षण और त्रुटि विधि हैं।

दूसरी विधि :- दूसरी विधि संभावित एक्सरे उत्सर्जन की तलाश के अंतर्गत शामिल है। जब कोई पदार्थ या ग्रह ब्लैक होल के अंदर गिरता है तो वह क्षितिज पर घने वलय जैसी संरचना में जमा हो जाते हैं और इस दौरान कुछ ऊर्जा प्रकाश के रूप में परिवर्तित हो जाती है। इस प्रक्रिया द्वारा ब्लैक होल का पता लगाना आसान हो जाता है।

हमारे ब्रह्मांड में कुल कितने ब्लैक होल है?

ब्लैक होल का घनत्व अंतरिक्ष के गुणों की एक विस्तृत संख्या पर अलग अलग हो सकते हैं। जैसे कि आकाशगंगा का प्रकार क्या है। इसमें मौजूद तारों का प्रकार क्या है? एक निश्चित आकाशगंगा में ब्लैक होल की संख्या का अनुमान लगाना धूल और गैस संरचनाओं की हो सकता होती है।

एक दूसरे के नजदीक मौजूद ब्लैक होल गुरुत्वाकर्षण बल के खिंचाव के कारण प्रभावित होते हैं। यही तथ्य दो ब्लैक होल की निकट तक को सीमित कर देता है।

केवल हम अपनी धरती से जितना दूर तक देख सकते हैं हम उतने ही दूरी तक ब्लैक होल का पता लगाने में सक्षम है। लगभग 100 ट्रिलियन ब्लैक होल के बारे में हमें ज्ञात है। हालांकि यह संख्या इससे भी अधिक और बड़ी हो सकती है यह संख्या 200 या 300 ट्रिलियन तक भी पहुंच सकती है।

ब्रह्मांड में ब्लैक होल की अनुमानित संख्या का पता लगाने की दिशा में पहला कदम कुछ विशेषताओं के अनुसार क्षेत्रों को अलग अलग करने से शुरू हुई थी। ब्लैक होल से संबंधित शोध का दायरा बहुत ही विशाल है और उनकी सारी महिमा में समझने में जीवन भर लग सकता है।