How Do 3D Glasses Work? – 3D चश्मा कैसे काम करता है?

3D के बारे में ज्यादातर लोग तो जानते ही होंगे, 3D यानी कि त्रिआयामी तस्वीर जिसमें 3 कोनों से तस्वीर देखी जा सकती है। 3डी एक तरह की तस्वीर होती है हम 3 Dimensions तेरी तस्वीर देख पाते हैं। हमने अक्सर सिनेमाघरों में 3D मे बहुत सी फिल्में भी देखी है। वाकई 3डी में फिल्म देख कर के आपको भी काफी मजा आया होगा। आज के हमारे स्लिप में हम बात करने वाले हैं How Do 3D Glasses Work? – 3D चश्मा कैसे काम करता है?

चाहे वह किसी पुराने घर की छाया हो, या कोई कूदता हुआ भूत, या हरे-भरे जंगल या फिर कोई दौड़ता हुआ डायनासोर, 3D में हमेशा यह सारी चीजें असली और काफी डरावनी भी लगती है।

3D सिनेमैटोग्राफी ने हमारी फिल्म या मूवी देखने के अनुभव को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। आजकल ज्यादातर फिल्में जो कि एक्शन से भरपूर और क्राइम थिलर फिल्में आप को 3डी में देखने को मिल जाएगी। इस तरह की फिल्मों को 3डी में देखने पर यह फिल्में और भी अधिक मजेदार और चीजें हमें वास्तविक लगने लगती है।

3डी फिल्में और इस प्रकार 3D चश्मा का इस्तेमाल करते हुए हम 3डी फिल्में देख पाने में सक्षम होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किस तरह से 3D चश्मे काम करते हैं? आज हम अपने इस लेख में इसी बारे में बात करने वाले हैं How Do 3D Glasses Work? – 3D चश्मा कैसे काम करता है?

How Do 3D Glasses Work? – 3D चश्मा कैसे काम करता है?

3डी में देखना, ज्यादातर आपके दिमाग को धोखा देना होता है। हम 3डी फिल्में देखने के लिए चश्मा का इस्तेमाल करते हैं। जो हमारी दिमाग को धोखा देता है, और ऐसा प्रतीत होता है कि तस्वीरें जीवंत हो करके हमारे सामने आ गई हो।

हम जो कुछ भी देखते हैं वह हमारी आंखों के जरिए हमारे मस्तिष्क तक पहुंचती है। हमारा मस्तिष्क हमारी आंखों से दो अलग-अलग चित्र प्राप्त करता है। इन तस्वीरों को एक दूसरे से बहुत कम मात्रा में स्थानांतरित किया जाता है और हमारा मस्तिष्क उन्हें एक छवि देखने के लिए विलीन कर देता है। इस तरह हमें हमारे दोनों अलग-अलग आंखों से दो अलग-अलग तस्वीर या छवि मिलती है, जिससे हमारा मस्तिष्क दोनों ही तस्वीरों के बीच अंतर पैदा कर देता है। जिससे कि 3D में दिखने वाली, फिल्म हमें जीवंत हमारे आंखों के सामने नजर आने लगती है।

इस प्रकार सिनेमाघरों में दिखाई जाने वाली फिल्में भले ही हमें सपाट स्क्रीन पर दिखाई गई हो लेकिन मस्तिष्क को दो अलग-अलग छवियां नजर आने लगती है जो एक दूसरे से थोड़ी मात्रा में स्थानांतरित हो जाती है ताकि या उन्हें मर्ज (Merge) कर सके और गहराई का प्रभाव पैदा कर सके।

यह प्रभाव हम 3D चश्मा के द्वारा प्राप्त करते हैं, फ्लैट स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली 3D फिल्म में दो अलग-अलग छवियों को उनके दृष्टिकोण में थोड़ा बदलाव करके हमें दिखाया जाता है। 3D गोगल्स या चश्मा यह सुनिश्चित करता है कि हमारी दाहिनी आंख इनमें से एक छवि को देख सकें, जबकि हमारी बाईं आज दूसरी छवि को देख सकें।

इस तरह से इस इफ़ेक्ट के कारण हम 3D फिल्मों को जीवंत रूप में अपने आंखों के सामने देख पाते हैं। इस वजह से हमें यह ऐसा महसूस होता है कि फिल्मों में दिखाए जाने वाली संपूर्ण घटना जैसे हमारी आंखों के सामने हो रही हो।

3D चश्मा और फिल्में

3D तकनीक अब ना सिर्फ सिनेमा थिएटर तक सीमित है बल्कि यह हमारे मोबाइल फोन और घरों में भी आ चुका है। जैसे मार्केट में आज कई 3D टीवी और मोबाइल फोन उपलब्ध है। हम जब भी किसी थिएटर या सिनेमाघर में 3डी फिल्में देखने जाते हैं तो हमें 3D चश्मा दिया जाता है। जिसे पहनकर हम 3डी का मजा लेते हैं लेकिन कभी मूवी के बीच में 3डी चश्मा हटा करके आपने देखा है तो आपको सभी स्क्रीन धुंधला सा दिखाई देने लगता है क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों होता है?

नीचे हम आपको एक 3D वीडियो की तस्वीर दिखा रहे हैं। अगर आप बिना चश्मे के 3डी फिल्में देखेंगे तो आपको कुछ इस तरह से नजर आएगा।

अवतार 3D मूवी

अगर आपने बिना चश्मा के इस मूवी को देखने की कोशिश की होगी तो 3डी में यह मूवी आपको कुछ इस तरह दिखाई दी होगी। वही 3D चश्मा के साथ या मूवी कुछ इस तरह दिखाई देती है जिसे हम एक तस्वीर के द्वारा नीचे दिखा रहे हैं।

बिना चश्मे के अवतार 3D मूवी

3D चश्मा एक तरह से एक प्रभाव पैदा करता है जिसकी वजह से 3D वीडियो और तस्वीरें हमें अपने ज्यादा करीब दिखाई देती है। 3D मूवी की स्क्रीन साधारण स्क्रीन से थोड़ी अलग होती है इसमें एक साथ हमें दो तस्वीरें दिखाई जाती है। यानी हमारी आंखें दो तस्वीरें देखती है लेकिन इन्हें आपस में जोड़ नहीं पाती, जिससे वह तस्वीरें धुंधली हो जाती है।

3D ग्लास या चश्मा दो तरह के कलर गिलास के बने हुए होते हैं। पहला लाल और दूसरा ब्लू यानी नीला रंग का बना होता है। जब हम कोई 3D वीडियो या मूवी देखते हैं तो यह चश्मा इमेज को हमारी दोनों आंखों में एक साथ दिखाई देता है। यानी हमारे मस्तिष्क को दो अलग-अलग इमेज एक साथ दिखाई देती है। जिससे कि हमें यह महसूस होने लगता है कि दिखाई जाने वाली चीजें जीवंत या रियलिस्टिक है।

Types of 3D Glasses – 3D चश्मा के प्रकार

हमने ऊपर आप सभी लोगों को इस बारे में जानकारी दी कि 3D चश्मा कैसे काम करता है। लेकिन, वह ऐसा कैसे कर पाते हैं? यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार के 3d चश्मा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

3डी फिल्में देखने के लिए दो तरह के चश्मा या गिलास का इस्तेमाल किया जाता है। जोकि निम्नलिखित है :-

  1. एनाग्लिफ़ चश्मा (Anaglyph Glasses) इस तरह के चश्मे में नीला और लाल रंग का गिलास का इस्तेमाल होता है। इस चश्मे में एक तरफ नीला और दूसरी तरफ लाल गिलास होता है।
  2. ध्रुवीकृत चश्मा (Polarized Glasses) इस तरह के चश्मे में दोनों ही तरफ हल्का काला रंग या स्लेट रंग का गिलास होता है। इस तरह के चश्मों का इस्तेमाल हम आधुनिक 3डी फिल्में देखने के लिए करते हैं।

एनाग्लिफ़ चश्मा (Anaglyph Glasses) कैसे काम करता है?

इस तरह के चश्मे किससे काम करते हैं इसके बारे में हम पहले ही ऊपर आपको बता चुके हैं। जैसे कि पहले हमने उल्लेख किया है कि दो अलग-अलग इमेजेस जो कि एक दूसरे से थोड़ा सा स्थानांतरित दृष्टिकोण पर स्क्रीन पर दिखाई जाते हैं। एनाग्लिफ़ चश्मा (Anaglyph Glasses) के अंतर्गत दो तरह के गिलास लगे होते हैं जो कि नीला और लाल रंग का होता है। दो स्थानांतरित छवियां चश्मे के दो अलग-अलग रंगों में होनी चाहिए, यानी नीला और लाल। तभी हम किसी फिल्म को 3डी में देख पाने में सक्षम हो पाएंगे।

एनाग्लिफ़ चश्मा (Anaglyph Glasses)

इस ब्रा के 3डी चश्मे में, चश्मे का नीला हिस्सा केवल लाल रोशनी को अंदर आने देता है, जबकि चश्मे का लाल हिस्सा केवल नीली रोशनी को अंदर आने देता है।

इस तरह से इस चश्मे का इस्तेमाल करते हुए हमारे दिमाग को दो अलग-अलग इमेजेस मिलती है। जबकि बाकी प्रक्रिया हमारे मस्तिष्क द्वारा की जाती है। जिससे हमें ऐसा लगता है जैसे कि इस स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली चीजे वाकई में हमारे आंखों के सामने हो रही है।

ध्रुवीकृत चश्मा (Polarized Glasses) कैसे काम करता है?

जैसा कि हमने ऊपर यह जानकारी ली है कि Anaglyph चश्मा कैसे काम करता है? इस चश्मे के काम करने का तरीका सीधा और साधारण है। साथ में स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली इमेजेस एक निश्चित रंग की होनी चाहिए यह जरूरी होता है। इसलिए चित्र की गुणवत्ता और रंगों के साथ समझौता किया जाता है।

लेकिन, आधुनिक 3D चश्मा प्रकाश के ध्रुवीकरण के रूप में जानी जाने वाले किसी चीज का उपयोग करते हैं। आधुनिक 3D ध्रुवीकृत चश्मा (Polarized Glasses) एक तस्वीर आप नीचे देख सकते हैं।

ध्रुवीकृत चश्मा (Polarized Glasses)

प्रकाश का ध्रुवीकरण क्या होता है?

प्रकाश और कुछ नहीं बल्कि विद्युत चुंबकीय और विद्युत क्षेत्र की एक लहर होती है। यदि विद्युत घटक वर्टिकल डायरेक्शन (Vertical direction) मैं दोलन करती है तो तरंग का चुंबकीय घटक होरिजेंटल डायरेक्शन (Horizontal direction) के अंतर्गत चलेगी। जिसका मतलब यह होता है कि यह हमेशा एक दूसरे के लंबवत होते हैं।

जैसा कि आप नीचे दिए गए तस्वीर में देख सकते हैं।

प्रकाश का ध्रुवीकरण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंग

जैसा कि आप ऊपर दिए गए तस्वीर में देख सकते हैं कि विद्युतीय घटक किसी भी दिशा में हो सकता है। लेकिन चुंबकीय घटक इसके साथ लंबवत होता है। विद्युत एक घटक को केवल एक ही दिशा में दोलन करने की आवश्यकता होती है। अधिक सटीक होने के लिए प्रकाश के विद्युतीय घटक को केवल एक दिशा में दोलन करने का अर्थ है इससे रैखिक से ध्रुवीकरण करना, जिससे हम रैखिक ध्रुवीकरण कहते हैं।

अब मान लीजिए कि हम इस रैखिक रूप से ध्रुवित प्रकाश को मंडिलियों में घुमाना शुरू करते हैं तो यह एक वृत्ताकार ध्रुवीकृत प्रकाश बन जाएगा। इस प्रकार से बने प्रकाश में दो प्रकार के प्रकाश हो सकते हैं। एक जो दक्षिणावर्त घूमता है और दूसरा घड़ी की दिशा में घूमता है।

ध्रुवीकृत चश्मा (Polarized Glasses) के लिए वृत्ताकार ध्रुवीकरण का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

साधारण तौर पर हमें जहां 3D चश्मा Non-Polarized पर दो अलग-अलग रंगों में तस्वीरें दिखाई दे रही थी। अब गोल कार ध्रुवी कृत प्रकाश की विपरीत उन्मुखीकरण के साथ हम ध्रुवीकृत चश्मा (Polarized Glasses) की मदद से 3डी फिल्में देख पाते हैं। इस तकनीकी में हमें एक ही रंग में फिल्में दिखाई जाती है, फिर भी वे दो अलग-अलग छवियों के रूप में कार्य करते हैं।

ध्रुवीकृत 3D चश्मा, इन गोलकार ध्रुवीकृत इमेजेस के लिए काम करता है। चश्मे का एक भाग केवल गोलकार दक्षिणावर्त वृत्ताकार ध्रुवित प्रकाश से गुजरता है, जबकि दूसरा भाग केवल दक्षिणावर्त वृत्ताकार ध्रुवीकृत प्रकाश को अवशोषित कर के उस से गुजरता है।

इस तरह हमारी आंखें दो अलग-अलग इमेजेस प्राप्त करती है और हमारा मस्तिष्क एक बाद में फिर से बाकी काम गहराई का प्रभाव पैदा करने के लिए करता है। जिससे हमें 3डी फिल्में रियलिस्टिक रूप में दिखाई देने लगती है।

निष्कर्ष

आज के हमारे इस लेख में हमने आप सभी लोगों को इस बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है कि, How Do 3D Glasses Work? – 3D चश्मा कैसे काम करता है? थोड़ी स्थानांतरित छवियों का उपयोग करके गहराई का प्रभाव पैदा किया जाता है जो इसे हमारी आंखों से दो अलग-अलग छवि के रूप में हमारे मस्तिष्क तक भेजी जाती है। थ्रीडी चश्मा सिर्फ यह सुनिश्चित करता है कि हमारी आंखें फ्लैट स्क्रीन से इन दोनों इमेजेस को अलग-अलग तरह से प्राप्त करें और मस्तिष्क को एक गहरा प्रभाव बनाने के लिए छल करे जो वास्तव में स्क्रीन पर मौजूद नहीं होता है।

इस तरह से हम 3D चश्मे की मदद से किसी भी इमेजेस या मूवी को जीवंत या रियलिस्टिक रूप में देख पाने में सक्षम होते हैं। हमें उम्मीद है कि आपको आज का हमारा यह लेख पसंद आया होगा। इससे संबंधित अगर आपकी कुछ सवाल एवं सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बता सकते हैं।