VPN क्या होती है? इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

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कई बार इंटरनेट का इस्तेमाल करते वक्त आपने इंटरनेट पर VPN शब्द को तो जरूर सुना होगा। आपके मन में यह बात भी जरूर आई होगी कि आखिर VPN क्या होती है? इसका इस्तेमाल इंटरनेट पर क्यों किया जाता है? ऐसे ही कई सारे सवाल आपके मन में जरूर आए होंगे।

बहुत बार हमें इंटरनेट पर अपनी जानकारी इत्यादि छुपाने के लिए VPN का इस्तेमाल भी करते हैं। VPN का इस्तेमाल मूल रूप से इंटरनेट पर access प्राप्त करने एवं निजी जानकारी और data को छुपाने के लिए भी किया जाता है। इसलिए इंटरनेट पर बहुत से कार्यों को करने के लिए हमें VPN का इस्तेमाल करना पड़ता है।

दोस्तों आज के हमारे इस article में हम आप लोगों को यह बताएंगे कि VPN kya hai? VPN क्या है? What is VPN in Hindi.

VPN क्या होता है? – What is VPN in Hindi

VPN का full form होता है – Virtual private network, इसकी सहायता से हम हमारे private details और data को इंटरनेट पर लीक होने से बचा सकते हैं। इसका इस्तेमाल ज्यादातर government office, shopping malls, private organisation, school, colleges, online trading इत्यादि चीजों में ज्यादातर देखने में मिलता है।

इसका इस्तेमाल इंचार्ज जगहों पर इसलिए भी किया जाता है क्योंकि इसकी सहायता से जानकारी और data को छुपा पाना आसान होता है। इंटरनेट पर information और data को लीक होने से रोकती है। आज के जमाने में data and information किसी भी संस्थान के लिए अति महत्वपूर्ण होती है। आज जहां Google report के अनुसार हर दिन 100000 से भी ज्यादा लोगों के data चोरी कर लिए जाते हैं।

जिसके चलते उन्हें कई सारी असुविधा का सामना भी करना पड़ता है। यहां तक कि यह सारी चीजें blackmailing, cyber crime इत्यादि चीजों को भी प्रोत्साहित करती है। इसके चलते विभिन्न क्षेत्रों में data and information को छुपाने के लिए virtual private network यानी कि VPN का इस्तेमाल किया जाता है।

VPN कैसे काम करती है? – How VPN works in Hindi

जैसा कि हमने ऊपर बताया है, VPN का संपूर्ण रूप virtual private network होता है। यह आपके लिए एक आभासी नेटवर्क बनाने का कार्य करती है। इसका मुख्य कार्य आपके internet कनेक्शन को सुरक्षित रखना होता है।

VPN क्या होती है

Internet पर इसका इस्तेमाल इसलिए भी किया जाता है क्योंकि बहुत सी website इत्यादि को आप अपने देश में बैठ कर के इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसे हम एक उदाहरण के जरिए समझाना चाहते हैं। जैसे कि चीन में Facebook का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। यानी कि कोई भी व्यक्ति अगर चीन में इंटरनेट के जरिए Facebook का इस्तेमाल साधारण कनेक्शन के द्वारा करना चाहता है तो वह उसका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

Internet पर चीन में Facebook का इस्तेमाल करने के लिए आपको VPN का इस्तेमाल करना पड़ेगा। चलिए अब भारत का ही बात कर लेते हैं। भारत में piracy law के अंतर्गत आप इंटरनेट से movies, video song, इत्यादि चीजें download नहीं कर सकते हैं। आप ऐसी वेबसाइट जहां से movies download किया जाता है। उस वेबसाइट को भारत में प्रतिबंधित किया गया है। लेकिन अगर आप virtual private network का इस्तेमाल करते हैं तो आप आसानी से movies download कर सकते हैं।

इस तरह VPN (virtual private network) आपकी personal detail और data को इंटरनेट पर छुपाती है। तभी जाकर के आप movies download कर पाते हैं।

VPN कैसे कैसे काम करती है? कार्यप्रणाली

जब आप अपने इंटरनेट कनेक्शन को VPN से जोड़ते हैं तो connection आपके द्वारा चुने गए VPN , private server से होकर के गुजरती है। ना की आपके internet service provider (ISP) के द्वारा।

VPN एक तरफ से आपके कंप्यूटर internet कनेक्शन और server के बीच में intermediary के रूप में कार्य करती है। जिसके चलते आप अपने IP address को छुपा पाने में सफल होते हैं। वहीं अगर आप साधारण कनेक्शन बिना VPN के connection का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी IP address, track कर ली जाती है। जिस वजह से आप unauthorised website को access नहीं कर पाते हैं।

VPN आप के internet connection को एक तरह से private tunnel मुहैया करवाती है। जो आपके internet connection को encrypt कर देती है जिसके चलते आपको secure connection मिलता है।

Encryption शब्द का इस्तेमाल इस बात पर जोर देता है कि VPN के इस्तेमाल से आपके इंटरनेट कनेक्शन पर डाटा private रहता है। Encryption आपकी information को छुपा देता है, जिसे बहुत ही strong password से सुरक्षित किया गया होता है। जिसे key भी कहते हैं। इस key को केवल आपका computer और VPN server ही जानता है। जो आपके data को decode करने के process को decryption कहते हैं। इस तरह से आपके कंप्यूटर से VPN server पर कनेक्शन स्थापित होता है।

VPN के प्रकार – Types of VPN in Hindi

VPN को उनके encryption के आधार पर विभिन्न प्रकार के category पर विभाजित किया जाता है। आपका VPN आपके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले device को कितना सुरक्षित रख सकता है इसके आधार पर भी इन्हें विभाजित किया जाता है। बहुत सारे VPN operating system की setting से भी काम करते हैं जैसे कि Mac, Windows,iOS, Android इत्यादि VPN के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-

  • Standalone VPN services
  • Browser extension
  • Router VPN
  • Corporate VPN

Standalone VPN services

इस इस तरह के VPN का इस्तेमाल घरेलू इस्तेमाल और छोटे-मोटे business के लिए किया जाता है। आप इसे software की मदद से अपने computer पर install करते हैं।

यह software या application का उपयोग करता है। जोकि निजी नेटवर्क के लिए encrypted virtual network के जरिए connection प्रदान करती है।

Browser extension VPN

इस तरह के VPN का इस्तेमाल browser पर extension के रूप में किया जाता है। ब्राउज़र जैसे कि Opera, Google Chrome, Firefox etc. यह ब्राउज़र के साथ ही जुड़ा रहता है यानी कि इनमें built-in होती है।

यह किसी भी browser पर add on plugin के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह के browser extension VPN पर आपको केवल browsing के समय ही केवल सुरक्षा मिलती है। लेकिन जब आप वही किसी दूसरे माध्यम से internet का इस्तेमाल करते हैं, तो यह सुरक्षा प्रदान नहीं करती। इसके साथ ही कई बार ऐसे मामले भी आए हैं कि browser extension VPN के इस्तेमाल के दौरान इसके leak और vulnerable समस्या आई है।

अगर आप अपने लिए browser extension VPN इस्तेमाल करने के बारे में सोचना है तो आप केवल बढ़िया reputable companies के ही browser extension का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Router VPN

इंटरनेट के इस्तेमाल करते वक्त VPN service पोस्ट माल करने का और एक तरीका है, VPN enable router का इस्तेमाल करना है। यह बहुत ही बढ़िया तरीका है अगर आप एक ही internet कनेक्शन के जरिए बहुत सारे device का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिन्हें आप सुरक्षित रखना चाहते हैं क्योंकि एक ही router से जुड़े होने के चलते, यह पूरे device की गोपनीयता जानकारी को सुरक्षित रख सकने में सक्षम होता है।

Router VPN के इस्तेमाल के दौरान आप को केवल एक ही बार router VPN service पर login या sign in का काम करना पड़ता है। इसके बाद सारे device जो कि उस इंटरनेट कनेक्शन से जुड़े हुए होते हैं, सभी पर VPN सुरक्षा प्रदान करने लगती है।

अपने router को VPN से जोड़ना इतना भी मुश्किल कार्य नहीं है जितना आप सोच रहे होंगे। सबसे पहले, आपको एक VPN सेवा की आवश्यकता होगी, फिर आपको एक router की जरूरत होती है। Router में VPN का इस्तेमाल शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको router की specification को देखना होगा, जोकि router VPN के लिए डिजाइन किया गया हो। इस तरह के router साधारण बाजार में मिलने वाले router से थोड़े महंगे भी हो सकते हैं। इन्हें set up करने के लिए आपको किसी भी प्रकार की technical setting की जरूरत नहीं पड़ती है।

Corporate VPN

Corporate VPN का इस्तेमाल ज्यादातर बड़ी-बड़ी कंपनियां करती है। यह अपने कर्मचारी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले device की जानकारियां जो कंपनी के हित के लिए इस्तेमाल होती है को सुरक्षित रखने का कार्य करती है।

इसकी मदद से कर्मचारियों के लिए remote access VPN का इस्तेमाल करते हुए, कंपनी के private intranet का इस्तेमाल सुरक्षित रूप से कर सकें। इसके लिए कर्मचारी को password या application का इस्तेमाल करने को कहा जाता है।

यह एक तरीका से custom VPN होती है, जिसकी डेवलपमेंट और रखरखाव के लिए ज्यादा IT resources की जरूरत पड़ती है। इसे घरेलू इस्तेमाल के लिए काम में नहीं लिया जा सकता है।

ऊपर में हमने इस बात पर चर्चा की है कि VPN क्या है? कैसे काम करती है? और VPN कितने प्रकार के होते हैं। What is VPN in Hindi. अब आपको यह समझ में आ ही गया होगा कि VPN की कार्यप्रणाली क्या है? किस लिए इस्तेमाल की जाती है।

VPN के इस्तेमाल के दौरान data कैसे ट्रांसफर होती है?

हम लोग online shopping, banking services, online payment इत्यादि चीजों का इस्तेमाल इस आधुनिक जमाने में बहुत तेजी से कर रहे हैं। इससे हम अपनी महत्वपूर्ण data and information जैसे कि credit card detail, debit card detail etc. संवेदनशील जानकारी को इंटरनेट के माध्यम से share करते हैं।

हालांकि यह सारी information किसी भी transaction के दौरान secure या encrypted रहती है। हम ज्यादातर online transaction करते वक्त भरोसेमंद सेवाओं को ही चुनते हैं। लेकिन कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि हम लोग बिना जाने किसी भी payment gateway का इस्तेमाल कर लेते हैं। जिससे आपकी निजी जानकारी hackers और sonoper तक आसानी से चली जाती है। यह ठीक वैसा ही है जैसे आप दरवाजा खोल देते हैं और आपकी जानकारी कोई व्यक्ति द्वारा चुरा ली जाती है।

इसलिए अपनी जानकारियों data and information को सुरक्षित रखने के लिए आप VPN का इस्तेमाल कर सकते हैं। जब आप इंटरनेट पर कुछ खोजते हैं तो आप अनगिनत वेबसाइट को संग्रहित करते हैं और लगातार एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं। जैसे ही आप अपने इंटरनेट ब्राउज़र का इस्तेमाल करेंगे वह आपके निजी डेटा तक पहुंच प्राप्त कर लेते हैं।

किसी भी website को browse करने से पहले उसके HTTPS, URL लिंक को जरूर देख लीजिए। अगर वह browser पर एक lock (ताले की तरह) या green colour के रंग में दिखा रहा है तो आपकी निजी जानकारी एवं data सुरक्षित है। अगर ऐसा नहीं है तो आप online transaction इन सारी website पर ना करें।

आजकल इस्तेमाल किए जाने वाले बहुत से web browser काफी smart हो गया है, जैसे ही आप किसी इस तरह के website पर पहुंचते हैं तो आपको browser द्वारा attention message देते हैं। इस website पर आपकी निजी जानकारियां सुरक्षित नहीं है।

वहीं अगर आप VPN services का इस्तेमाल करते हैं, तो आपका data उजागर नहीं होता है। आपका डाटा का मूल आपका VPN server होता है। आप VPN services का इस्तेमाल करके ISPs द्वारा आपकी login को track, hackers द्वारा संवेदनशील जानकारियों को बचा सकते हैं। इसे कोई भी decryption नहीं कर सकता है जब तक कि उसके पास encrypted key ना हो। यह encrypted key केवल आपका computer और VPN server को ही पता होता है।

VPN के advantages क्या है?

आपने ऊपर में यह जानकारी ली की VPN कैसे काम करती है? VPN kya hai? हम यहां बात करने वाले हैं की VPN का इस्तेमाल आपको क्या-क्या फायदा पहुंचा सकता है। तो चलिए जानते हैं VPN के क्या क्या advantages होते हैं

  1. Online security – जब भी आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, तो वहां आपकी निजी डेटा एवं जानकारी साझा ना किया जा सके इसलिए online safety बहुत ही जरूरी है। VPN के इस्तेमाल से आपकी online security बढ़ जाती है।
  2. Unauthorised website access – geographical restriction के चलते आप अपने मनपसंद के movies, Show’s नहीं देख पा रहे है तो आप VPN services की मदद से आसानी से इन्हें देख सकते हैं। geo-blocked website को access करने के लिए इसमें किसी भी तरह की रोक नहीं होती है।
  3. Online transaction – ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते वक्त यह आपकी निजी जानकारियों जैसे कि debit card, credit card के डिटेल्स को सुरक्षित रखते हैं।
  4. Download :- किन्ही कारणों से अगर आपका internet service provider आपको इंटरनेट पर मौजूद कुछ files को डाउनलोड करने से रोकता है तो आप इसकी सहायता से उसे डाउनलोड कर सकते हैं।

VPN के disadvantages क्या है?

जहां इसके कुछ फायदे हैं तो वहीं इसके कुछ नुकसान भी होते हैं। चलिए जान लेते हैं VPN के कौन-कौन से disadvantages है

  1. यह यह पूरी तरह से bandwidth पर टिका रहता है जिसके चलते इंटरनेट पर user की performance पर फर्क पड़ सकता है।
  2. ज्यादातर reliable VPN free नहीं होते हैं। ऐसे तो इंटरनेट पर बहुत सारे VPN मौजूद है। इनमें से बहुत से VPN आपको फ्री सेवा प्रदान करती है। लेकिन इसमें daily use limit होती है। जैसे कि 2GB से 5gb प्रतिदिन। इनके समाप्त हो जाने के बाद आपको monthly subscription लेनी पड़ती है।
  3. कुछ un-authorized website, VPN की सहायता से भी नहीं खुलते हैं। जिससे यूजर को परेशानी हो सकती है।
  4. इंटरनेट पर मौजूद बहुत से VPN पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत से VPN service देने वाली कंपनियां कभी-कभी user की जानकारियों को बेच देते हैं।
  5. Internet पर मौजूद बहुत से VPN service देने वाली कंपनियां unique IP address प्रदान नहीं करती है। इसका इस्तेमाल बहुत से लोगों द्वारा किया जा चुका होता है। जिसके चलते आपको security issue जैसे कि IP address blacklisting और IP spoofing जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

Conclusion

दोस्तों आज के हमारे इस post से आपको कुछ जरूर नया सीखने को मिला होगा। हमने अपने आज के हमारे इस post पर VPN kya hoti hai? VPN क्या है? कैसे काम करती है? के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश की है। VPN का इस्तेमाल करके हम अपनी निजी जानकारियां इंटरनेट पर छुपा सकते हैं। Online transaction इत्यादि चीजों को और ज्यादा safe और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।

उम्मीद करता हूं कि आपको हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी पसंद आई होगी। अगर आपको हमारा यह post पसंद आया है, तो आप इसे social media पर share करना मत भूलिए। इससे संबंधित अगर आपकी कुछ सवाल है तो आप उसे comment box पर comment करके हमें पूछ सकते हैं।

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