What is Cash Reserve Ratio (CRR)? कैश रिजर्व रेशों क्या है?

What is Cash Reserve Ratio (CRR)? कैश रिजर्व रेशों क्या है? रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बैंक के ऊपर नियंत्रण रखने के लिए विभिन्न प्रकार के नियम लागू करती है। किसी भी अर्थव्यवस्था कि वह नीति, जिसके द्वारा उस में होने वाले मुद्रा प्रवाह एवं प्रचलन की मात्रा विनियमित होती है। जिसे उसकी मौद्रिक एवं साख नीति कहते हैं। दुनिया भर में मौद्रिक एवं साख नीति वहां के केंद्रीय बैंक द्वारा बनाया जाता है।

तो कुछ देशों में इस तरह की नीति वहां की केंद्रीय बैंक ना बना करके वहां का वित्त मंत्रालय बनाता है। भारत जैसे देश में इस तरह की मौद्रिक नीति केंद्रीय बैंक आरबीआई द्वारा बनाकर के भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा आखरी अप्रूवल लेना होता है।

आज हम अपने इस लेख में, भारत की मौद्रिक नीति के साथ नीति में से नकद आरक्षण अनुपात (Cash Reserve Ratio) क्या होता है? इसके बारे में जानकारी लेंगे।

What is Cash Reserve Ratio (CRR)? कैश रिजर्व रेशों क्या है?

Cash Reserve Ratio (CRR) को हिंदी में नकद आरक्षण अनुपात भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत भारत में कार्य करने वाले अनुसूचित बैंक देशी एवं विदेशी के सकल जमाव का अनुपात है, जो उन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास ‘नकद’ रूप में जमा करके रखना अनिवार्य होता है।

इस जमा राशि को किस अनुपात में जमा करना है, इसका निर्णय भारत का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तय करती है। कैश रिजर्व रेशों का अनुपात ज्यादातर 3 से 15% के बीच होता है।

साल 2007 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सलाह से भारत सरकार ने इसका न्यूनतम सीमा समाप्त कर दिया है। इस चलते नकद आरक्षित अनुपात (CRR) अंत: अब यह शून्य से 15% के बीच रहता है।

वर्ष 2018 में नकद आरक्षण अनुपात लगभग 4% के आसपास था। उस दौरान इस अनुपात में 1% की वृद्धि की गई थी। जिससे भारतीय बैंकिंग उद्योग में RBI द्वारा लगभग 98,000 करोड़ रुपए प्रवाहित किए गए थे।

नकद आरक्षण अनुपात (Cash Reserve Ratio, CRR) की आवश्यकता क्यों है?

बैंकों के पास जो भी पैसा जमा होता है, उसे वे कारोबारियों और लोगों को ऋण के रूप में बांट देती है। जिसमें ब्याज के तौर पर बैंक लाभ कमाते हैं। इस प्रक्रिया में वे ज्यादा से ज्यादा रकम लोन के रूप में देना चाहते हैं। लेकिन किसी समय अगर बहुत से ग्राहक एक साथ अपना पैसा निकालने बैंक पहुंच जाए तो फिर उस बैंक को सब की रकम चुकता करने में समस्या आ सकती है।

ऐसी परिस्थिति भी पैदा हो सकती है कि बैंक अपने सभी ग्रहक को पैसा लोटा पाने की स्थिति मे ना हो, इस प्रकार की स्थिति से बचने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नकद आरक्षण अनुपात (CRR) की व्यवस्था की है।

नकद आरक्षण अनुपात (CRR) के अंतर्गत बैंकों को अपनी सारी जमा पैसों में से कुछ हिस्सा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास जमा करना अनिवार्य होता है। जिससे कि वह आकस्मिक मांग की पूर्ति करने में सक्षम हो सकें।

इस प्रकार जहां, CRR एक तरफ जमाव के मुकाबले पर्याप्त तरलता की स्थिति बनाए रखने में मददगार साबित होती है। वही या दूसरी तरफ ब्याज दर के माध्यम से अर्थव्यवस्था में तेजी या मंदी की स्थिति पर नियंत्रण रखने में भी मददगार होता है। अर्थव्यवस्था में नकदी की ज्यादा उपलब्धता, जहां अर्थव्यवस्था में ब्याज दर में गिरावट का कारण बनती है। वही नकद की कम उपलब्धता, अर्थव्यवस्था में ब्याज दर में बढ़ोतरी का कारण बनती है। उल्लेखनीय है कि ब्याज दरों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी या बहुत ज्यादा गिरावट, दोनों ही परिस्थितियां खतरनाक होती है।

इसलिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इन दोनों ही स्थितियों को दूरी रखने की कोशिश करती है। इसलिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अन्य उपायों के साथ साथ नकद आरक्षण अनुपात के जरिए ब्याज दरों में उथल-पुथल को वह तरलता पर नियंत्रण करके संभालने की कोशिश करता है।