LED क्या है? LED का इतिहास और कैसे काम करता है?

LED को हिंदी में प्रकाश उत्सर्जन डायोड कहते हैं। LED का full form Light-emitting Device होता है। इसका आविष्कार हाल के ही कुछ दिनों में किया गया है। इसका उपयोग आप छोटी सी सामग्री जैसे स्मार्ट घड़ी, स्मार्टफोन की स्क्रीन, TV screen, home appliances, कार की स्क्रीन multimedia, home bulb LED आदि चीजों में देख सकते हैं।

आज के आधुनिक जमाने में मनुष्य की एक और बहुत बड़ी खोज LED के बारे में आपने तो सुना होगा। क्या आप जानते हैं की LED क्या है? (एलईडी क्या है? What is LED in Hindi). LED कैसे काम करता है?

एलईडी शब्द से आप थोड़े बहुत तो परिचित होंगे ही, आप में से बहुत सारे लोग LED के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी तो जरूर रखते होंगे। घरों में इस्तेमाल होने वाली बहुत सारी चीजों में LED का इस्तेमाल भी किया जाता है।

आज के हमारे इस लेख में हम लोग LED क्या है? कैसे काम करता है? और इसकी इतिहास के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

LED को हिंदी में प्रकाश उत्सर्जक डायोड कहा जाता है। वही English में इसे light emitting diode के नाम से जाना जाता है। यह एक प्रकार का अर्धचालक (semiconductor device) उपकरण होता है। जोकि प्रकाश का उत्सर्जन (emitting) करता है, जब इसके अंदर से विद्युत का प्रवह होता है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल देखने को मिलता है। LED के अविष्कार के लिए Nobel prize भी दिया गया है। इस चलते LED के बारे में जानना और भी अहम हो जाता है। तो चलिए जानते हैं एलइडी क्या है? What is LED in Hindi.

एलईडी क्या है? – What is LED in Hindi

जैसा कि हमने ऊपर बताया LED को हिंदी में प्रकाश उत्सर्जन डायोड कहते हैं। LED का full form Light-emitting Device होता है। इसका आविष्कार हाल के ही कुछ दिनों में किया गया है। इसका उपयोग आप छोटी सी सामग्री जैसे स्मार्ट घड़ी, स्मार्टफोन की स्क्रीन, TV screen, home appliances, कार की स्क्रीन multimedia, home bulb LED आदि चीजों में देख सकते हैं।

LED आकार में बहुत छोटे होते हैं। और बहुत ही कम electricity का इस्तेमाल करके प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं। इस चलते बिजली की काफी बचत भी होती है।LED को active semiconductor की category में भी रखा जाता है। इसकी तुलना आप साधारण diode के साथ भी कर सकते हैं। लेकिन दोनों में बस अंतर इतना रहता है कि दोनों की प्रकाश उत्सर्जन करने की क्षमता और उनका रंग अलग अलग होती है।

LED के terminal जिसे cathode और anode भी कहा जाता है, जब उससे किसी voltage source (electricity) से जोड़ा जाता है, तब यह अलग-अलग रंग की रोशनी पैदा करती है। इसकी रोशनी उत्सर्जन करने की क्षमता इस बात पर भी निर्भर करती है कि LED में किस प्रकार की semiconductor (अर्धचालक) substance का इस्तेमाल किया गया है।

LED के जलने पर जो प्रकाश उत्सर्जित होती है, यह प्रकाश monochromatic होती है। उत्सर्जित होने वाली प्रकाश का wavelength, सिंगल होता है। इस तरह से LED विद्युत ऊर्जा को (electric energy) प्रकाश ऊर्जा (light energy) में बदलने का कार्य करती है। इसकी विशेषता यह है कि आप इसे किसी भी plastic film में भी लगा सकते हैं। LED परंपरागत तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली प्रकाश उत्सर्जन यंत्र की तुलना में कम विद्युत खर्चा करता है। इसके साथ ही इसका जीवनकाल लंबा, उन्नत और आकार में काफी छोटा होता है। लेकिन इसको बनाने में काफी महंगी होती है। एक साधारण bulb लगभग 1000 घंटे तक प्रकाश दे सकती है, लेकिन LED 100000 घंटे तक प्रकाश देने में सक्षम होते हैं।

जैसा कि हमने ऊपर बताया LED एक अर्धचालक उपकरण (semiconductor device) होती है। जो electricity के साथ जोड़े जाने पर प्रकाश को उत्सर्जित करती है। इस से उत्सर्जित होने वाली रोशनी ज्यादा bright नहीं होती है, इसकी waveform की दूरी समांतर रहती है। LED को जलाने पर bright light उत्पन्न होता है। किसी भी LED की एक output range होती है जैसे red (wavelength लगभग 700 nanometer) से नीली-बैगनी blue-violet (की 400 nanometer) तक होती है। कुछ LED infrared energy भी उत्सर्जित करने में सक्षम होते हैं। इस तरह के एलईडी को IRED (INFRA EMITTING DIODE) कहा जाता है।

LED का इतिहास – History of LED in Hindi

LED के बारे में सबसे पहली जानकारी साल 1907 में एक ब्रिटिश विज्ञानिक H.J ROUND की प्रयोगशाला में पता लगाया गया था। इसका अविष्कार साल 1920 के आसपास रूस में किया गया था। और साल 1962 में अमेरिका में एक व्यवहारिक electronic घटक के रूप में प्रस्तुत किया था। साल 1962 में ही विज्ञानिक Nick Holonyak ने ही LED पाठ पहला experiment किया था। जिसके चलते इन्हें LED का Godfather भी माना जाता है।

इससे पहले साल 1961 में दो विज्ञानिक Gary Pittman और Robert Biard जब वे एक प्रयोग कर रहे थे तब उन्होंने एक नया अविष्कार किया जिसमें gallium arsenides electric current के संपर्क पर आने पर LED, infrared radiation का उत्सर्जन करती थी। बाद में उन्होंने इसे infrared LED के नाम से इसका patent करवा लिया था।

इसके बाद साल 1972 में M. George Catford जो Holonyak के छात्र हुआ करते थे उन्होंने yellow LED को सबसे पहले बनाया था और उन्होंने red and red orange LED के रोशनी output को 10 गुना बढ़ा दिया। जो उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी एक उपलब्धि साबित हुई थी।

LED के लिए Nobel prize

साल 2014 में कम ऊर्जा में देश सफेद रोशनी देने वाली blue LED (light emitting diode) के लिए तीन विज्ञानिक को Nobel prize से सम्मानित किया गया है।

इन तीन वैज्ञानिकों में शामिल है Professor Isamu Akasaki, Hiroshi Amano और Shuji Nakamura. Blue LED light एक light spectrum की सीमा होती है जिसे 400 नैनोमीटर से 525 नैनोमीटर के wavelength के रूप में परिभाषित किया जाता है। इस spectrum में violet और cyan के wavelength भी मौजूद रहते हैं। Narrow spectrum bluelight ( a.k.a blue LED, या short wavelength light) एक तरह की high-energy visible प्रकाश होती है। जिसका wavelength 400 से 450 नैनोमीटर के बीच होता है।

LED कैसे काम करता है?- Working principle of LED in Hindi

किसी भी LED में दो तरह के अर्धचालक (semiconductor) light source का इस्तेमाल किया जाता है। जिसके चलते इसे p-n junction diode भी कहते हैं। दोनों junction को voltage source दिया जाता है तो यह प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं।

जिसके चलते कोई भी एलईडी ऊर्जा का उत्सर्जन photons के रूप में करते हैं। इस effect को Electroluminescence effect भी कहते हैं। फोटोन के रूप में निकलने वाली प्रकाश का color इस बात पर निर्भर करता है कि अर्धचालक के बीच energy band gap कितना है।

LED को बनाने के लिए जिस पदार्थ का इस्तेमाल किया जाता है वह एक तरीके से अर्धचालक होता है। जिसमें मुख्य द्वार पर alluminium-gallium arsenides (AlGaAs) होती है। इस पदार्थ के atom अपने दूसरे atom के साथ बहुत ही strongly bonded होते हैं। जिसके चलते free electrons के नहीं होने से electricity की conduction हो पाना ना के बराबर होता है।

इसमें कुछ अशुद पदार्थों (impurity) को भी मिलाया जाता है जिसे doping कहा जाता है। जिसके चलते इसमें कुछ extra atoms आ जाते हैं। जिससे मूल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है। Free electrons के चलते electron n-junction से p-junction की तरफ आगे बढ़ने लगते हैं। इसे आप नीचे इस चित्र में देख सकते हैं।

LED की working principle पूरी तरह से Quantum theory पर आधारित है। Quantum theory कहती है की जब इलेक्ट्रॉन high energy level से low energy lavel में आती है तो प्रकाश का उत्सर्जन photon के रूप में होता है। Photon energy दोनों ऊर्जा के बीच के अंतर के बराबर होता है। अगर PN junction diode forward biased होता है तो विद्युत का प्रवाह डायोड से होकर होती है।

विद्युत का प्रवाह semiconductor पर मौजूद holes (p-type and n-type) विद्युत के प्रवाह के विपरीत होता है। इसके साथ ही electron की दिशा electricity के direction की ओर होता है। जिसके चलते charge carrier के प्रवाह के कारण recombination होता है।

Recombination इस बात को निरूपित करता है कि conduction band पर मौजूद इलेक्ट्रॉन jump करके valence band पर चले जाते हैं। जब इलेक्ट्रॉन एक band से दूसरे band पर jump करते हैं तो electron उत्सर्जन के रूप में electromagnetic energy उत्सर्जित करता है जोकि photon के रूप में होता है।

चलिए इसे एक उदाहरण के जरिए समझते हैं, सबसे पहले हम Quantum theory के ऊपर विचार करते हैं। Photon की ऊर्जा, planck constant और electromagnetic radiation के frequency का गुणांक (product) होता है। जिसका गणितीय समीकरण (mathematical equation) हमने नीचे दिया है।

Eq=hf

यहां पर h = planck constant (प्लांक स्थिरांक) के रूप में जाना जाता है और electromagnetic radiation का स्पीड प्रकाश के गति के बराबर होती है। जिसे c से निरूपित किया जाता है। C=speed of light , frequency of light, speed of light से संबंधित है। जैसे कि

f=c/ᄼ/ᄼ

जिसे electromagnetic radiation के wave length के रूप में जोड़ करके देखा जाता है। जिसका समीकरण हमने नीचे दिया है।

Eq=he/ᄼ

ऊपर दिए गए समीकरण के हिसाब से हम यह कह सकते हैं कि electromagnetic radiation का wave length, विपरीत अनुपाती inversely proportional होती है forbidden gap के। सामान्य सिलिकॉन में germanium semiconductor इस निश्चित उर्जा की खाई की स्थिति के बीच है और valance band इस तरह के होते हैं कि recombination के दौरान electromagnetic wave का पूरा radiation अवरक्त विकिरण के रूप में होता है।

एलईडी के अनुप्रयोग – Advantages of LEDs

  1. जैसा कि हमने ऊपर बताया है LED प्रकाश का उत्सर्जन करने के लिए बहुत ही कम विद्युत का इस्तेमाल करती है। Voltage range 1 to 2 volte, current-5 to 20 Milli ampere.
  2. यहां total power output बहुत ही कम होता है। जो लगभग 150 milliwatts से भी कम है।
  3. इनका आकार बहुत ही छोटा होता है, जिसके चलते इनका इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है।
  4. जैसा कि हमने ऊपर बताया था normal bulb 1000 घंटे तक रोशनी दे सकते हैं वही LED light 100000 घंटे जिसके चलते आप ही ने 20 सालों से भी ज्यादा दिनों तक इस्तेमाल कर सकते हैं।
  5. घरों घरों और उद्योगों में LED का इस्तेमाल बल्ब के रूप में किया जाता है।
  6. इसके अलावा light emitting diode का इस्तेमाल मोटरसाइकिल और कारों में भी किया जाता है।
  7. इसका इस्तेमाल mobile phone screen, television screen बनाने के लिए भी किया जाता है।
  8. ट्रेफिक लाइट सिगनल पर भी LED का इस्तेमाल किया जाता है।
  9. LED bulb के इस्तेमाल से बिजली की खपत भी काफी कम होती है।
  10. LED की intensity को microcontroller की मदद से भिन्न होती है।जिसके चलते इसे अपने हिसाब से इस्तेमाल किया जाना संभव हो सकता है।

Disadvantages of LEDs

  1. इसके इस्तेमाल के दौरान अगर थोड़ा भी voltage या current बढ़ जाती है तो यह आसानी से खराब हो जाते हैं।
  2. LED की बहुत ही ज्यादा और wider band width होती है, अगर इसकी तुलना laser से की जाए तो।
  3. LED का तापमान इस बात पर निर्भर करता है कि radiant output power और wave length क्या है?

LED के के प्रकार – Types of light Emitting Diode

बाजार में बहुत सारे प्रकार के एलईडी मौजूद है। जिनका इस्तेमाल विभिन्न कामों के लिए किया जाता है। जिनकी एक सूची हमने नीचे दी है।

  1. Gallium arsenide (GaAs) – infrared
  2. Gallium arsenide phosphide (GaAsP) – Red to infrared, orange
  3. Aluminium gallium arsenide phosphide (AlGaAsp) – high brightness red, Orange red, orange and yellow
  4. Gallium phosphide (GaP) -red, yellow and green
  5. Aluminium gallium phosphide – (AlGaP) – green
  6. Gallium nitride (GaN) – green, emerald green
  7. Gallium indium nitride (GalnN) – near ultraviolet, bluish green and blue
  8. Silicon carbide (SiC) – blue as a substrate
  9. Zinc selenide (ZnSe) – blue
  10. Aluminium gallium nitride (AlGaN) – ultraviolet

निष्कर्ष

दोस्तों आशा करता हूं कि आपको आज के हमारे इस लेख से जरूर कुछ नया सीखने को मिला होगा। आज के हमारे इस लेख में हमने यह बताया है कि एलइडी क्या है? What is LED in Hindi. एलईडी का इतिहास, LED कैसे काम करता है?

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About the author

Sugan Siddhant Dodrai

दोस्तों में एक बैंकर हूं और इस ब्लॉग का संस्थापक मैंने M.sc (Physics & Electronics) में किया है। हम अपने इस ब्लॉग पर नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए मददगार एवं ज्ञानवर्धक पोस्ट लेकर आते हैं।

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