NASA दोबारा भेजेगा चांद पर इंसान- चांद के बारे में रोचक जानकारी नासा

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चांद हमारी धरती का एकलौता प्राकृतिक उपग्रह है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आज से करीब 450 करोड साल पहले एक उल्का पिंड पृथ्वी से जा टकराया था जिसकी वजह से पृथ्वी का कुछ हिस्सा टूटकर अलग हो गया था। जो अलग होकर चांद बना, उस समय हमारी धरती दृव रूप में थी। चांद 27.3 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है और पृथ्वी के समुद्र पर आने वाले ज्वार और भाटा के लिए जिम्मेदार है।

हमारे विज्ञानिक हमेशा से चांद के बारे में जानकारी इकट्ठा करने में लगे हुए हैं। ऐसे में कई बड़े-बड़े देशों ने चांद पर अपने उपग्रह भी छोड़े हैं।मनुष्य का धरती से चांद तक का सफर काफी अविश्वसनीय रहा है। चांद पर सबसे पहला कदम रखने वाला शख्स नील आर्मस्ट्रांग को सब जानते हैं। चांद पर दोबारा एक नया कीर्तिमान स्थापित करने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक नए मून मिशन की तैयारी की है।

जिसमें वह दोबारा इंसान को चांद पर भेजेगा।चंद्रमा तक एस्ट्रोनॉट को पहुंचाने और वापस लाने के लिए नासा ने तीन कंपनियों का चयन किया है यह कंपनियां लैंडिंग सिस्टम तैयार करेगी।

यह तीन कंपनियां है नासा 

  • स्पेस एक्स (space x)
  • ब्लू ओरिजन (blue origin)
  • Dynetics (डायनेटिक्स)

नशा अपना यह मिशन 2024 में शुरू करेगा,ऐसा भी माना जा रहा है कि साल 2024 में नासा एक महिला एस्ट्रोनॉट को इस मिशन के तहत और एक पुरुष एस्ट्रोनॉट को चांद पर उतारे गा। स्पेस एक्स के मालिक अरबपति एलन मस्क और ब्लू ओरिजन के मालिक जेफ बेजोस है। तीनों कंपनियां नासा के साथ मिलकर काम करेगी। शुरुआती डिजाइन तैयार करने के लिए नासा ने तीनों कंपनियों को $1 अरब डॉलर यानी कि 7577 करोड रुपए देगी। कंपनी को 10 महीने में अपनी शुरुआती डिजाइन बना कर देना होगा।

नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्रिटेन स्टार ने बताया कि हम पहली बार किसी महिला और पुरुष को चांद पर भेज रहे हैं।अपोलो यू के बाद यह पहली बार है जब नासा के पास मानव लैंडिंग सिस्टम के लिए काफी पैसा खर्च कर रही है। ब्लू ओरिजिन इस डील के प्राथमिक कैंडिडेट है। टीम में लकहीड मार्टिन, नॉर्थ गृमेन, और डृपेर शामिल है। इनका लेंडर 3-stage का होगा। इसमें vi7 क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा। अब देखना है कि नासा 2024 में अपने इस मिशन में कितनी कामयाब होती है। चलिए आपको चांद के बारे में कुछ रोचक जानकारियां भी बता देते हैं।

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  • अब तक सिर्फ 12 मनुष्य चांद पर गए हैं, 1972 के बाद से,यानी कि पिछले 40 साल में चांद पर कोई अंतरिक्ष यात्री नहीं गया है।
  • चांद धरती के आकार का केवल 27% है।
  • चांद का वजन लगभग 81 अरब टन है।
  • पूरा चांद आधे चांद से 9 गुना ज्यादा चमकदार होता है।
  • अगर चांद गायब हो जाए तो पृथ्वी पर दिन मात्र 6 घंटे का रह जाएगा।
  • जब अंतरिक्ष यात्री शेफर्ड चांद पर थे तब उन्होंने एक गोल्फ बॉल को हिट मारा था जो कि तकरीबन 800 मीटर दूर तक गई थी।
  • अगर आपका वजन पृथ्वी पर 60 किलो है तो चांद पर लो ग्रेविटी की वजह से आपका वजन केवल 10 किलो ही होगा। यही वजह है कि चांद पर अंतरिक्ष यात्री ज्यादा उछल कूद कर सकते हैं।
  • जब सारे अपोलो अंतरिक्ष यान चांद से वापस आए तब व कुल मिलाकर के 296 चट्टानों के टुकड़े लेकर आए थे जिनका द्रव्यमान 383 किलो था।
  • चांद का सिर्फ 59% हिस्सा ही पृथ्वी से देखा जा सकता है
  • चांद पृथ्वी के इर्द-गिर्द घूमते समय अपना सिर्फ एक ही सही पृथ्वी की तरफ रखता है। इसलिए चांद का दूसरा भाग आज तक पृथ्वी से किसी मनुष्य ने नहीं देखा। लेकिन अंतरिक्ष यान की सहायता से चांद के दूसरे हिस्से की तस्वीर ली जा चुकी है।
  • चांद का व्यास पृथ्वी के व्यास का सिर्फ चौथा हिस्सा है और लगभग 9 चांद पृथ्वी में समा सकते हैं।
  • क्या आपको पता है चांद हर साल पृथ्वी से 4 सेंटीमीटर दूर खिसक रहा है। अब से 50 साल बाद चांद धरती के इर्द-गिर्द एक चक्कर 27 दिन में पूरा करेगा जो कि अब 27.3 दिनों में कर रहा है।पर यह होगा नहीं क्योंकि अब से 5 अरब साल बाद ही पृथ्वी सूर्य के साथ नष्ट हो जाएगी।
  • नील आर्मस्ट्रांग के बाद उनके साथ आए बज एल्ड्रिन ने चांद पर जब अपना पहला कदम रखा था तो उससे जो निशान चांद की जमीन पर बना है, वह अब तक है और अगले कुछ लाख सालों तक ऐसा ही रहेगा। इसके पीछे कार्य किया है कि चांद पर हवा नहीं है, जो उनके पैरों के निशानों को मिटा सके।
  • आर्मस्ट्रांग चांद पर उतरने वाले पहले व्यक्ति होंगे इस बात का निर्णय मार्च 1969 की एक मीटिंग में लिया गया था।इस निर्णय में आर्मस्ट्रांग की प्रतिभा और अनुभव के साथ कुछ भूमिका इस बात की भी थी कि नासा प्रबंधन का यह मानना था कि आर्मस्ट्रांग एक विनम्र स्वभाव के व्यक्ति हैं।
  • नील आर्मस्ट्रांग जो पहली बार चांद पर चले थे तो उनके पास राइट ब्रदर्स के पहले हवाई जहाज का एक टुकड़ा था।
  • क्या आपको पता है कि साल 1950 के दशक के दौरान अमेरिका ने परमाणु बम से चांद को उड़ाने की योजना बनाई थी।
  • सौरमंडल के 181 उपग्रह में चांद का आकार पांचवे नंबर पर है।
  • चांद का क्षेत्रफल अफ्रीका के क्षेत्रफल के बराबर है।
  • चांद पर पानी भारत की खोज है।भारत से पहले भी कई वैज्ञानिकों का मानना था कि चांद पर पानी होगा परंतु किसी ने नहीं खोजा था।
  • चांद पर पानी भारत की खोज है।
  • अगर आप अपने इंटरनेट की स्पीड से खुश नहीं है तो आप चांद का रुख कर सकते हैं।जी हां नासा ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए चांद पर वाई फाई कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई है जिसकी स्पीड 19 Mbps की स्पीड से काम करता है।
  • चांद के रोशनी वाले हिस्से का तापमान लगभग 180 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है जबकि अंधेरे वाले भाग का तापमान -153 डिग्री सेल्सियस तक होता है।
  • चांद पर मनुष्य द्वारा छोड़े गए 96 बैग ऐसे हैं जिनमें चांद पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों कब मल मूत्र और उल्टी है।
  • जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के मध्य में आ जाता है तो इस स्थिति को चंद्रग्रहण कहते हैं। इस दौरान पृथ्वी के कुछ हिस्से में दिन में भी अंधेरा हो जाता है।
  • चंद्रमा की गुर्दा क्षण की शक्ति कम होने के कारण इसका कोई वायुमंडल नहीं है।वायुमंडल ना होने की वजह से सौर वायु और उल्कापिंड के आने का खतरा लगातार बना रहता है।
  • आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि चांद पर करीब 181400 किलो का मानव निर्मित मलबा पड़ा हुआ है, जिसमें 70 से अधिक अंतरिक्ष यान और दुर्घटनाग्रस्त कृत्रिम उपग्रह भी शामिल है।

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