नेल्सन मंडेला की जीवनी – Nelson Mandela Biography Hindi

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नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) दक्षिणी अफ्रीका के प्रथम अश्वेत भूतपूर्व राष्ट्रपति थे।दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने से पहले दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रही रंगभेद का विरोध करने वाले अफ्रीकी नेल्सन मंडेला और नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुटों के अध्यक्ष रहे थे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्हें 27 वर्ष रोबिन द्वीप की जेल में भी रहना पड़ा था। यहां पर अन्य कैदियों की तरह कोयला खनिज का काम करते थे।साल 1990 में श्वेत सरकार से हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नए दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया था। इसके बाद वे दक्षिण अफ्रीका एवं समूचे विश्व में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गए थे। संयुक्त राष्ट्र संघ ने उनके जन्मदिन को नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। आज के हमारे इस लेख में हम लोग नेल्सन मंडेला के जीवन के बारे में विस्तार से जानेंगे। Nelson Mandela Biography in Hindi

नेल्सन मंडेला की जीवनी – Nelson Mandela Biography in Hindi

नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) का जन्म 18 जुलाई, 1918 को म्वेज़ो, स्टैंड कैप दक्षिण अफ्रीका मैं हुआ था। उनके पिता का नाम गेडला हेंनरी म्फ़ाकेनिस्वा था। उनकी तीन पत्नियां थी, उनकी तीसरी पत्नी जिनका नाम नेक्यूफी था, से नेलसन मंडेला का जन्म हुआ था। उनके पिता थेम्बु कबीले के मुखिया थे।

कभी लेकर लोग जिनके पुर के अनेक वर्षों से अफ्रीका में रहते आए थे, अश्वेत वर्ण के लोग थे। लेकिन इसके बावजूद अफ्रीका उनका ही देश था। वे गोरे विदेशी आगंतुक शासकों के दया पर निर्भर थे। इन गोरों ने, जो मुख्यतः इंग्लैंड और जर्मनी से आए थे, 1700 के दशक में उनकी धरती पर कब्जा कर लिया और उन लोगों पर प्रभुत्व जमा कर शासन करने लगे थे।

एक बार की बात है जब अंग्रेज न्यायाधीश ने नेल्सन मंडेला के पिता जो कि कबीले के मुखिया थे को एक बेल पर हुए विवाद के विषय पर पेश होने का आदेश दिया था। तो उसने जाने से इंकार कर दिया। उसके अनुसार एक थेम्बू कबीले का मुखिया दायित्व केवल शासक के आदेश का पालन करना था, ना की किसी अंग्रेज अफसर का। उसकी इस अवज्ञा के कारण हेंड्री को अपने पद से त्याग देना पड़ा था। अपने इस मत के कारण उसे अपनी जमीन, अपने मवेशियों और अपना सम्मानित पद भी खोना पड़ा था।

जब यह सारी घटना घटित हुई थी उस समय नेल्सन मंडेला एक शिशु ही थे। लेकिन वह इस आवाज के साथ बड़ा हुआ कि उसके पिता अपने संकल्पों पर मजबूत रहने वाले व्यक्ति थे। भले ही उन्हें इसकी बड़ी कीमत क्यों ना चुकानी पड़ी। Nelson Mandela Biography in Hindi

इस घटना के बाद भी नजदीक के गांव कुणों में जाकर के रहने लगे थे। जहां वह अपने रिश्तेदारों के एक फार्म हाउस में रहते थे। हालांकि या गांव बहुत छोटी सी जगह थी। लेकिन नेलसन मंडेला को यह जगह पसंद आई। उनके घर में तीन छोटी झोपड़ियां थी,जिन की दीवारें मिट्टी की ईट से बनाई गई थी और छत घास से बनाई गई थी। एक झोपड़ी खाना बनाने के लिए थी, एक सोने के लिए, और एक खाना पीने का सामान रखने के लिए। कुर्सियां भी मिट्टी की बनी थी, और चूल्हे के नाम पर मात्र जमीन में एक गड्ढा था।

दिन के समय में नेल्सन मंडेला मवेशी चराते थे और अपने सौतेले भाई बहनों और दोस्तों के साथ खेतों में खेलते थे। जैसा कि उन दिनों के अफ्रीका में रिवाज था, उसके पिता की 4 पत्नियां और 13 बच्चे थे। लड़के अपने खिलौना खुद बनाते थे। वे मिट्टी को तराश कर तरह तरह के जानवर और चिड़िया बनाते थे। और वे लुक्का चुप्पी और चोर सिपाही आदि प्रसिद्ध खेल भी खेलते थे।

नेल्सन मंडेला का जीवन इस छोटे से गांव में इसी तरह बीता था।सोने से पहले उसके माता-पिता उसी बड़ी रोचक कहानियां सुनाया करते थे उसकी पिता की सुनाई कहानियां अक्सर बहादुर योद्धाओं और उनकी लड़ाई यों के बारे में होती थी। उनकी माता उन्हें थेम्बु कबीले में चल रही पीढ़ी दर पीढ़ी रीति-रिवाजों एवं लोक कथाओं के बारे में बताती थी।

नेल्सन मंडेला का प्रारंभिक जीवन – Early Life of Nelson Mandela

जब नेल्सन मंडेला 7 वर्ष के हुए, तो उनके पिता हेंड्री को लगा कि उन्हें अब स्कूल भेजा जाना चाहिए। हालांकि खुद नेल्सन मंडेला के पिता कभी स्कूल नहीं गए थे। उन्होंने यह निश्चय किया कि वह अपने बेटे को जरूर या अवसर देंगे। इस तरह नेल्सन मंडेला अपने परिवार में पहले ऐसे शख्स बन गए जिसने स्कूल में दाखिला लिया था।

पहले ही दिन, अध्यापक ने सभी बच्चों को नया अंग्रेजी नाम दिया। नेल्सन मंडेला को उनके कबीले वालों ने बुती नाम दिया था। स्कूल में प्रवेश करने के बाद ही अध्यापक ने उनका नाम “नेल्सन” रखा था। क्योंकि स्कूल का प्रबंधन अंग्रेज आगंतुक द्वारा किया जाता था। छात्रों को बताया जाता था कि अंग्रेजों के तौर तरीके, यानी उनकी भाषा, इतिहास, संस्कृति और विश्वास अधिक श्रेष्ठ थे। उन्हें अपने स्वयं के रीति-रिवाज और संस्कृति का आदर करना नहीं सिखाया जाता था। Nelson Mandela biography in Hindi

लेकिन इसके बावजूद नेलसन मंडेला को स्कूल अच्छा लगता था। उसे रोजाना नई-नई बातें सीखने को मिलती थी और उसे एक तख्ती और खड़िया दी गई थी। जिससे कि वह उन बातों को लिख सके। जब नेल्सन मंडेला 9 वर्ष के थे उनके पिता का देहांत हो गया। अपने ऐसे पिता को खो कर उसे बहुत दुख हुआ, जिन्होंने अपने आदर्शों और मूल्यों पर सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया था।

उनकेउनके पिता की अंतिम इच्छा क्या थी कि नेल्सन मंडेला एक अच्छा शिक्षा प्राप्त करें।एक ऐसा व्यक्ति बने जो अपने लोगों के लिए एक मिसाल बन सके। इसलिए नेल्सन और उसकी मां कूनो उस उस छोटे स्कूल को छोड़ कर के चले गए। जो नेलसन मंडेला के लिए काफी नहीं था। दोनों राजधानी के लिए निकल पड़े। उस समय नेल्सन मंडेला के पास केवल टीना का एक बक्सा था। उसमें उन्होंने एक पुरानी कमीज पहनी हुई थी, उसका निकर उन्होंने पिता की पतलून को काटकर बनाया था। जिसे उसने एक रस्सी के नाडे से बांध रखा था। इस इलाके में रहने वाले अफ्रीकन लोग इस शहर को “बड़ा नगर” कह कर पुकारते थे। और नेल्सन को वहां मोटर गाड़ियां, विशाल घरों, सुंदर बगीचा, और फलों के पेड़ों से भरे बागानों को देखकर काफी अचंभित हुआ था।

नेल्सन मंडेला अपने पिता के एक रिश्तेदार के घर पर रहने लगे, जिन्होंने उसका अभिभावक बनना स्वीकार कर लिया था। जल्दी ही व्यवहार संकोची सा गांव का बालक इस नए जीवन का अभ्यस्त हो गया। नेल्सन मंडेला के पिता के रिश्तेदार के बच्चे और खुद नेलसन मंडेला गिरजा घर जाने लगे, जिससे वे आसपास के माहौल में काफी घुलमिल गए थे। नेल्सन मंडेला स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करने लगे। लेकिन उसने बाद में कहा था कि इसका कारण उसका तेज दिमाग नहीं बल्कि सफलता पाने की उसकी इच्छा थी। Nelson Mandela Biography in Hindi

बड़े नगर में रहने वाले नेल्सन को इसलिए भी बहुत अच्छा लगने लगा था, क्योंकि यहां बहुत से महत्वपूर्ण लोग उनके पिता के रिश्तेदार की मार्गदर्शन लेने आया करते थे, और नेल्सन को उन्हें देखने का मौका मिलता था। इन लोगों से नेल्सन ने अफ्रीका के इतिहास और वहां के महान पुरुषों के बारे में बहुत कुछ सीखा। उन लोगों से जो कहानियां उसने सुनी वे उसे लंबे समय तक याद रही थी। जब नेल्सन मंडेला 16 साल के हुए तो, उन्हें अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ युवा अवस्था में प्रवेश करना था। इसके लिए उसकी कभी लेकर लड़कों को मंबासा नदी के तट की यात्रा करनी होती थी। अपने गांव के बड़े बूढ़ों के मार्गदर्शन में वहां उन्हें एक घास का बना अंगोछा पहन कर अपने पूरे शरीर पर सफेद मिट्टी का लेप लगाना होता था। वह सब नाचते गाते, और कहानियां सुनाते। उनमें से एक वक्ता ने नेल्सन पर बहुत गहरा प्रभाव डाला था। उसने सभी लड़कों को बताया कि उनकी युवावस्था के सपने अधूरे ही रह गए,क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के अश्वेत लोग अपनी ही भूमि पर गुलाम बन कर रह रहे थे, और अपनी आजादी और अधिकारों से वंचित थे।

बहुत व्हाट्सएप बाद नेलसन मंडेला ने लिखा था कि इन शब्दों का उस पर उस छोटी उम्र में कितना प्रभाव पड़ा था। उसने कहा था कि उस समय उसके लिए इस विषय में कुछ भी कर पाना संभव नहीं था, लेकिन यह विचार उसके मन में घर कर गए थे, और इन्ही विचारों ने संसार के विषय में उसकी परिकल्पनाओं का सृजन किया था।

नेल्सन मंडेला ने अपनी शिक्षा जारी रखी, पहले क्लार्कबरी अवासीय संस्थान में, जोकि इंगकोबो जिले का एक महाविद्यालय था, और फिर फोर्ट हायर में, जो एलीज नगर पालिका में स्थित शिक्षण संस्थान था। जो ब्रिटिश मिशनरियों द्वारा पूरे अफ्रीका के अश्वेत निवासियों के लिए चलाया जाता था। नहीं पर उसने अपने देसी तौर तरीकों से हटना आरंभ कर दिया था। बजाय अपने दांतो को राख से मांजने के, उसने टूथपेस्ट और ब्रश का इस्तेमाल शुरू किया। पतलून पहनना, संयुक्त शौचालय का प्रयोग करना, और गर्म पानी के फव्वारे से नहाना, यह सारी सुख सुविधाएं उन्हें अच्छी लगने लगी थी।

नेल्सन मंडेला एक अच्छे विद्यार्थी थे, और परिश्रम से पढ़ाई करते थे। लेकिन खेल कूद और इत्यादि मनोरंजन के लिए भी समय निकाल लेते थे। फोर्ट हेयर में उसके अंतिम वर्ष में उसे छात्र परिषद के लिए चुना गया।लेकिन साल 1950 में जब स्कूल के प्रधानाचार्य से उसकी किसी विषय पर असहमति हो गई, तो वह पढ़ाई पूरी होने से पहले ही फोर्ट हेयर छोड़ कर के चला गया।

वापस बड़े नगर पहुंचने पर एक अप्रत्याशित बात हुई। उसके अभिभावक, रहे सरदार जो कि नेल्सन मंडेला के पिता के रिश्तेदार थे उन्होंने अपने बेटे जस्टिस का विवाह कर दिया था। हालांकि परिवार वालों द्वारा इस प्रकार शादी तय किया जाना अफ्रीका का प्रचलित रीति रिवाज था। नेल्सन का सपना एक वकील बनने का था। नेल्सन और जस्टिस ने कुछ और ही सोच रखा था। दोनों साथ घर से भाग कर के जोहानेसबर्ग महानगर में पहुंच गए। नेल्सन मंडेला एक वकील बनना चाहते थे सौभाग्य से उन्हें एक गोरे वकील के यहां काम भी मिल गया था। वहीं पर वकील के यहां काम करते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। यहां रहते हुए उन्हें एक अन्य प्रकार की शिक्षा भी मिली। गांव से आने वाले एक नाव जवान किशोर के लिए महानगर का जीवन भीड़भाड़ के मुश्किलों और दूध से भरा था। जोहानसबर्ग में आकर के नेल्सन मंडेला ने देखा कि सत्तारूढ़ गोरे लोग अश्वेत अफ्रीकी से कितना दूर व्यवहार करते हैं। उन्हें केवल नियत स्थान पर ही रहने की इजाजत थी, उनके घर बहुत छोटे और बदहाल थे। जिसमें ना बिजली पानी था और ना गर्म रखने की सुविधा। उन्हें केवल उन्हें बसों में सवारी करनी और उन्हें भोजनालय में खाने की अनुमति थी, जो केवल अश्वेत अफ्रीकन लोगों के लिए नियत किया गया था।

लेकिन शायद सबसे खराब चीज थी पासबुक की प्रणाली। जब कोई अश्वेत व्यक्ति नगर के एक इससे दूसरे हिस्से में काम के लिए जाता, तो उसे एक छोटी पासबुक साथ रखनी होती थी। उचित पासबुक साधना होने पर उन्हें जेल भेजा जा सकता था। दक्षिणी अफ्रीका की सरकार ने इस व्यवस्था को अपार्टहाइड (Apartheid) या रंगभेद का नाम दिया था। जिसका अर्थ है अलग रखना। अमेरिका में भी इस प्रकार की व्यवस्था थी, जिससे सेग्रीगेशन (Segregation) कहा जाता था।

अपार्ट हाइड के अंतर्गत गोरे और अश्वेत लोगों के लिए एक साथ खाना पीना, घूमना फिरना, खरीदारी करना, एक ही घर में साथ रहना, एक ही स्कूल या गिरजाघर में जाना पूरी तरह से वर्जित था। नेल्सन ने यह सब देखा तो धीरे-धीरे उसके मन में इस व्यवस्था को बदलने की तेरी इच्छा जन्म ले लिया।

प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, नेल्सन मंडेला ने जोहानेसबर्ग मैं काफी तरक्की की। उसके पास एक अच्छी नौकरी थी, और उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी थी। फिर उसकी मुलाकात एवलिन मैस से हुई, जो उसके एक मित्र के चचेरी बहन थी, और दोनों में प्रेम हो गया और फिर विवाह भी। उन दोनों के दो पुत्र हुए, थेंमबेकिले और मकगाधो, और एक पुत्री मकाजिंव।

अब धीरे-धीरे नेल्सन मंडेला इन सभाओं में जाने लगे,जहां लोग अश्वेत लोगों के प्रति गौरव के भेदभाव पूर्ण व्यवहार पर अपना रोष प्रकट करते थे। यह लोग, जिनमें कुछ अश्वेत थे और कुछ गोरे भी, अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस नामक संस्थान के सदस्य थे। वह सब एकजुट होकर के अश्वेत लोगों का दमन कर उन्हें गरीबी, अशिक्षा और भय की और धकेलने वाले रंगभेद कानून को बदलने की शपथ लेते थे। इस विषय में नेल्सन का मत थोड़ा उदारवादी था। उसका मानना था, की गोरे लोग, वह बाहर से आए अन्य जातियां, दक्षिण अफ्रीका में रहे तो सकते हैं, लेकिन उनकी तानाशाही समाप्त होनी चाहिए। Nelson Mandela Biography in Hindi

नेल्सन मंडेला का सपना पूरा हुआ, और वे एक वकील बन गया। उसने अपने एक सहयोगी, ओलिवर तंबो के साथ मिलकर के साल 1953 में जोहानसबर्ग का कानूनी सहायता का पहला ऐसा दफ्तर खोला जिसमें केवल अश्वेत वकील थे। जैसे-जैसे राजनीति से नल सन मंडेला का जुड़ाव बढ़ता गया, वैसे वैसे उनका वैवाहिक जीवन में दरार आना शुरू हो गई थी। अंत में उनकी पत्नी एल्विन उन्हें छोड़ कर के चली गई।

तलाक होने के बाद नेल्सन मंडेला का परिचय एक सुंदर और ओजस्वी नौजवान सामाजिक कार्यकर्ता विन्फ्रेड से हुआ। जल्द ही दोनों से प्रेम हो गया, और उन्होंने विवाह कर लिया। उनकी दो पुत्रियां हुई जैनी और जैन्दाजी ।

नेल्सन मंडेला अब विरोध सभाओं, हड़ताल और असहयोग आंदोलन का आयोजन करने लगे थे। वह “लिबरेशन” नामक पत्र के लिए लेख लिखते थे और “फाइटिंग टॉक” नामक पत्रिका के संचालन में भी सहयोग करने लगे थे। उन्हें उम्मीद थी कि इन गतिविधियों के द्वारा बराबरी का हक पाने के इस संघर्ष में लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा। नेल्सन मंडेला ने देखा की पासबुक का मसला और अधिक गहराता जा रहा था। हर वर्ष लाखों अश्वेत दक्षिणी अफ्रीकायों को उचित पासबुक साथ ना होने के कारण गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाया जाता था। कई बार तो लोग जो उनके घर के नजदीक ही गिरफ्तार कर लिए जाते, जबकि उनकी पासबुक घर के अंदर मौजूद होती थी।

साल 1960 में रंगभेद विरोध के लिए एक अन्य नेता ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।उसने अश्वेत लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे जानबूझकर अपनी पासबुक घर छोड़ आए और गिरफ्तारी दे। जोहानेसबर्ग के निकट सार्क वैली नगर में 15000 लोग बिना पासबुक के पुलिस स्टेशन के सामने इकट्ठे हो गए। इनमें निहत्थे पुरुष और महिलाओं पर पुलिस ने गोली चला दी, और काफी सारे लोग इसमें मारे गए। इन लोगों के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए नेलसन मंडेला ने अपना पासबुक स्वर जनिक रूप से आग के हवाले कर दिया था।

जल्दी ही नेल्सन मंडेला का नाम बहुतो ने सुना, अधिकांश गोरे लोग उनसे नाराज भी हो गए थे और भयभीत भी थे। नेल्सन मंडेला के कार्यकलाप में बिल्कुल अच्छे नहीं लग रहे थे। वे चाहते थे कि अश्वेत लोग उनके वश में रहे, और दक्षिणी अफ्रीका में सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहे।

एक रात जब नेल्सन मंडेला गहरी नींद में सो रहे थे,तब 4 पुलिसवाले उसके घर के अंदर घुस आए और उसे पकड़ कर के जेल खाने ले गए।अपने रंगभेद विरोधी विचार और गतिविधियों के कारण नेल्सन मंडेला कई बार जेल जा चुके थे। लेकिन हर बार बार छूट करके बाहर आ जाते। लेकिन साल 1963 में उन पर तोड़फोड़ की कार्रवाई आयोजित करके बिजली घरों एवं अन्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और गोरी सरकार के खिलाफ हिंसा प्रदर्शन करने का आरोप लगा। यह बहुत गंभीर आरोप थे, और इनकी के साबित होने पर नेल्सन मंडेला को मृत्युदंड भी मिल सकता था। हालांकि नेल्सन व अन्य लोगों को दोषी जरूर पाया गया, लेकिन उन्हें मौत की सजा नहीं हुई। बल्कि उन्हें आजीवन कारावास का दंड दिया गया था।

नेल्सन मंडेला को आजीवन कारावास

रोब्बेन द्वीप नाम की याद जेल केपटाउन के निकट थी। नेल्सन को जिस कोठरी में रखा गया था, उसमें एक छोटी खिड़की थी। जिससे जेल के आंगन का दृश्य दिखाई देता था। इस जेल की कोठरी की लंबाई मुश्किल से तीन कदम भर थी, और वह इतनी छोटी थी, कि जब वो लेटते तो उसका सर एक दीवार को छूता और पैर दूसरे दीवार को। दीवार है कम से कम 2 फीट मोटी थी। तब वह अकेले 46 वर्ष के थे, और एक राजनीतिक कैदी के रूप में उन्हें उस कोठरी में अगले 27 वर्ष तक रहना था।

इस दौरान उन्हें अपनी पत्नी विनी और दोनों बच्चों की बहुत याद आती थी। उनके कारावास के दौरान विनी को जोहानेसबर्ग से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी, और रात के समय वे सप्ताह में उस घर में ही सीमित रखा जाता था। अगर वह रोबिन दीप जाना चाहती तो उस से इजाजत लेनी पड़ती थी। यह एक 150 मील की यात्रा थी, और इसमें खर्च भी बहुत आता था। इसलिए, यदि उसे इजाजत मिल भी जाती, तो उसका बार बार वहां जाना संभव नहीं था। नेल्सन मंडेला को हर 6 महीनों में केवल एक आगंतुक से मिलने, वाह केवल एक चिट्ठी पाने की इजाजत थी।

नेल्सन मंडेला का कारावास का जीवन बहुत कठिन था। नेल्सन मंडेला को चूने की खदान में खुदाई करनी पड़ती थी। या फिर प्रतिदिन घंटों पत्थरों को तोड़कर गिट्टी बनानी होती थी। चट्टानों से गिरे इलाके में सूर्य की तेज रोशनी ने उनकी आंखों को काफी नुकसान पहुंचाया था, क्योंकि उसकी धूप के चश्मे की मांग पूरी होते होते 3 साल लग गए थे। किस द्वीप में किसी भी प्रकार की कोई घड़ियां रखने की इजाजत नहीं थी। कैदियों को समय का अनुमान पहरेदार ओं की सीटियां या आदेश से ही लगता था। Nelson Mandela Biography in Hindi

हालांकि जेल के अफसरों और पहरेदार ओने नेल्सन की इच्छाशक्ति को तोड़ने का भरपूर कोशिश किया, लेकिन वह ऐसा ना कर सके। जेल में रहकर भी, वह दक्षिण अफ्रीका के अश्वेत लोगों की स्वतंत्रता के अपने लक्ष्य के लिए काम करते ही रहे। उन्होंने जेल के अंदर हो रहे अन्याय पूर्ण नियमों का, और कैदियों को मिलने वाले खराब भोजन का विरोध किया।कैदियों को अपमानित करने के लिए उन्हें पतलून के बजाय बहुत छोटे निक्कर पहनने के लिए बाध्य किया जाता था। जिसका भी उन्होंने विरोध किया था, और इस प्रकार व दूसरे कैदियों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत बन गए। जब नेल्सन मंडेला स्वतंत्र थे, तब वह एक जन नायक की तरह थे, और जेल में जाकर भी वह नायक बना रहा।

जेल में रहते हुए भी नेलसन मंडेला ने देश पर अपना प्रभाव डालना जारी रखा। जो गिने-चुने आगंतुक उनसे मिलने आते, उसके हौसले,दृढ़ निश्चय और बुद्धिमता से अत्यंत प्रभावित होते। वे सबसे उसके बारे में बातें करते, और उसके नाम और संघर्ष के चर्चा दक्षिणी अफ्रीका ही नहीं, सारे विश्व में होने लगी। अनेक देशों की सरकारें, राजनीतिक दल, अंतरराष्ट्रीय संगठन, वह साधारण नागरिक, सभी उसकी रिहाई की मांग करने लगे।

सरकार को यह महसूस होने लगा कि मंडेला को अब और बंदी बनाए रखना उनके हित में नहीं है। कई बार उन्होंने उससे बात करके कहा कि उसे छोड़ा जा सकता है, अगर वह देश से बाहर चले जाने का वादा करें तो। लेकिन हर बार उसने इंकार कर दिया। उसे कैद से आजादी केवल अपनी शर्तों पर ही मंजूर थी। वरना वह कारावास में रहने को तैयार था।

अब तक रंग भी दी नीतियों की देश और विदेश में कड़ी निंदा की गई।दक्षिण अफ्रीका के लोग लगातार इसके विरोध में प्रदर्शन करते रहे थे। हिंसा भी भड़क उठी थी। अन्य देशों ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया था,और उससे कोई भी सामान खरीदना या बेचने पर रोक लगा दी थी। रंगभेद नीति की इमारत अब देने को तैयार थी।

आखिरकार दक्षिण अफ्रीकी सरकार को यह महसूस होने लगा कि उनके पास नेल्सन मंडेला को रिहा करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। देश के नव निर्वाचित राष्ट्रपति विलियम डी क्लार्क ने साल 1990 में नेल्सन मंडेला को बिना शर्त रिहा कर दिया गया।

27 वर्ष के लंबे और कटुता पूर्ण अंतराल के बाद आखिर अब नेल्सन मंडेला एक स्वतंत्र व्यक्ति थे। उस सुहाने दिन उसने फिर उन शब्दों को दोहराया जो उसने अपने मुकदमे के दौरान कहे थे, “मैं अपनी आंखों में उच्च आदर्श लोकतांत्रिक और स्वतंत्र समाज का सपना सजाए हूं, जिसमें सभी नागरिक एक साथ रहेंगे, और जिसे पाने की आशा रखता हूं। लेकिन, यदि आवश्यकता हुई तो इस आदर्श के लिए मैं प्राण देने को भी तैयार हूं”। Nelson Mandela Biography in Hindi

नेल्सन मंडेला अपनी सरकार और लोगों को यह दिखाना चाहते थे कि इतने साल जेल में रहने के बाद भी वे टूटे और झुके नहीं थे। और वे अपने देश और लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहते थे। खासकर समानता और घोड़े और अश्वेत लोगों के बीच सौहार्द के लिए।

रिहाई के बाद नेलसन मंडेला और राष्ट्रपति डी क्लार्क दोनों को गोरे और अश्वेत को साथ लाने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 1995 में देश में पहला ऐसा स्वतंत्र चुनाव हुआ, जिसमें अंतः दक्षिण अफ्रीका की सभी जातियों का भाग लेने की अनुमति थी। उन्होंने नेलसन मंडेला को अपने इस नए लोकतांत्रिक देश का राष्ट्रपति चुना,और वह दक्षिण अफ्रीका के प्रथम निर्वाचित अश्वेत राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। बहुत सारे गोरे दक्षिण अफ्रीका असद किथे की शायद वह उनके साथ शत्रुओं का सा व्यवहार करें, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। नेल्सन मंडेला ना तो उन्हें देश से निकालना चाहते थे, और ना ही उनको अपमानित किया पीड़ित करना चाहते थे, जैसे कि गौरो ने अश्वेत के साथ किया था। बल्कि मंडेला ने एक सच्चे लोकतांत्रिक आदर्श की राह अपनाएं, जहां प्रत्येक जाति की स्त्री, पुरुष और बच्चे शांति और सौहार्द के साथ मिलकर रह सके। Nelson Mandela Biography in Hindi

साल 1999 में, जब उन्होंने अपने पद से अवकाश लिया, तो वह अपने बचपन के निवास स्थान चले गए। अपने बीते जीवन पर दृष्टि डालकर उन्होंने कहा था की, “स्वतंत्रता की ओर ले जाने वाली 1 लंबी राह पर में चला हूं”। उन्होंने बड़े हौसले और दृढ़ निश्चय के साथ अपने हजारों गोरे और अश्वेत देशवासियों की ओर अपना हाथ बढ़ा कर उन्हें अपने साथ आने का न्योता दिया।

नेल्सन मंडेला की मृत्यु

5 दिसंबर, 2013 को फेफड़ों में संक्रमण हो जाने के कारण नेल्सन मंडेला की मृत्यु हो गई। मृत्यु के समय नेलसन मंडेला 95 वर्ष के थे और उनका पूरा परिवार उनके साथ था। उनकी मृत्यु की घोषणा राष्ट्रपति जैकब जुमा ने की थी।

नेल्सन मंडेला को मिले पुरस्कार एवं सम्मान

दक्षिण अफ्रीका के लोग नेलसन मंडेला को व्यापक रूप से “राष्ट्रपिता”मानते थे, उन्हें लोकतंत्र के प्रथम संस्थापक “राष्ट्रीय मुक्तिदाता और उदारकरता” के रूप में देखा जाता था। साल 2004 में जोहानिसबर्ग में स्थित सेंट्रल स्क्वेयर शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ति स्थापित की गई और सेंटर का नाम बदलकर के नेल्सन मंडेला स्क्वायर रख दिया गया। दक्षिण अफ्रीका में प्राया उन्हें “मदीबा” कहकर बुलाया जाता था जो बुजुर्गों के लिए एक सम्मान सूचक शब्द है।

साल 2009 में,संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रंगभेद विरोधी संघर्ष में उनके योगदान के सम्मान में उनके जन्मदिन 18 जुलाई को “मंडेला दिवस” घोषित किया। 67 सालों तक मंडला के इस आंदोलन से जुड़े होने के उपलक्ष में लोगों से दिन के 24 घंटे में से 67 मिनट दूसरों की मदद करने में दान देने का आग्रह किया गया। नेल्सन मंडेला को विश्व के विभिन्न देशों और संस्थानों द्वारा 250 से भी अधिक सम्मान और पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। Nelson Mandela Biography in Hindi

  • साल 1993 में, दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति विलियम डी क्लार्क के साथ उन्हें संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया।
  • नेल्सन मंडेला को प्रेसिडेंट मेडल ऑफ फ्रीडम भी दिया गया है।
  • इसके अलावा नेल्सन मंडेला को ऑर्डर ऑफ लेनिन का सम्मान भी दिया गया है।
  • भारत की ओर से उन्हें भारत रतन सम्मान से सम्मानित किया गया है।
  • भारत सरकार की तरफ से 23 जुलाई 2018 को गांधी शांति पुरस्कार भी उन्हें दिया गया है।

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