पाइथागोरस की जीवनी – Pythagoras Biography Hindi

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आपने गणित बनाते वक्त कई बार पाइथागोरस Pythagoras Biography Hindi फार्मूले का इस्तेमाल तो किया होगा. आज हमारी इस लेख में हम महान गणितज्ञ एवं दर्शन शास्त्री पाइथागोरस (Pythagoras) की जीवन के बारे में बात करने वाले हैं. महान गणितज्ञ एवं दर्शन शास्त्री पाइथागोरस से सिकंदर जैसे महान सम्राट भी काफी प्रभावित हुए थे. पाइथागोरस फॉर्मूला जो हम अपनी गणित में अक्सर इस्तेमाल करते हैं इन्हीं की देन है. हम आपको यह बता देना चाहते हैं कि पाइथागोरस नहीं जो भी संदेश दिया है, गणित की जितनी भी गणना है उन्होंने बताई है वह सारे चीजें उन्होंने मौखिक बताई है. उन्होंने अपने हाथों से एक शब्द भी नहीं लिखा है. पाइथागोरस का लोकप्रिय प्रमेय ” किसी समकोण त्रिभुज में कर्क पर बना वर्ग सिर्फ दो भुजाओं पर बने वर्ग के योग के बराबर होता है” यहां प्रमेय बेबिलोना निवासियों का पाइथागोरस से 1000 वर्ष पहले ज्ञात थी. लेकिन पाइथागोरस वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इससे सिद्ध करके दिखाया था. आज हम अपने इस लेख में इस महान गणितज्ञ एवं दर्शन शास्त्री के जीवन के बारे में बात करने वाले हैं. Pythagoras Biography Hindi

Pythagoras Biography Hindi

पाइथागोरस की जीवनी – Pythagoras Biography Hindi

पाइथागोरस बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे. उन्हें वीणा बजाने का भी काफी शौक था, उनका यह शौक मरते दम तक जारी रहा था. उन्हें कविता, गणित, खगोल शास्त्र, संगीत, ज्योमेट्री इत्यादि पर काफी अच्छी पकड़ ली थी. वे अध्यापन करते थे बाद में उन्होंने दर्शन और धर्म से जुड़ कर के एक स्कूल भी खोला था. अनेक लोग उनके अनुयाई बन गए थे. उन्होंने पाइथागोरियन वाद नामक धार्मिक आंदोलन की स्थापना भी की थी. उन्हें महान गणितज्ञ, शुभा दी और विज्ञान के रूप में देखा जाता है.

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में धार्मिक शिक्षण और दर्शन में पाइथागोरस का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. पाइथागोरस का मानना था कि सबकुछ गणित से संबंधित है और संख्या ही वास्तविकता है जिनके माध्यम से हर चीज के बारे में भविष्यवाणी की जा सकती है. पाइथागोरस खुद एक दार्शनिक और तथ्य प्रेमी व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं. प्लूटो ने अपने विचारों का अनुसरण किया, उनकी जमेट्री एक मोटे अनुमान के अनुसार 560 ईसा पूर्व के आसपास की बताई जाती है. पाइथागोरस यूनान के समय के निवासी थे. उनकी मां का नाम पाइथाचास और पिता का नाम मेंसचार्यस था जो कि एक व्यापारी हुआ करते थे. युवावस्था में ही देश छोड़कर के दक्षिणी इटली में क्रोटन जाकर के रहने लगे. अपना कुछ समय उन्होंने मिस्र में पुजारियों के साथ भी गुजारा और उनसे विभिन्न ज्यामिति सिद्धांतों का अध्ययन भी किया था. इसी अध्ययन का परिणाम उनकी प्रमेय पाइथागोरस प्रमेय के रूप में सामने आई, जो दुनिया भर में आज भी पढ़ाई जाती है. Pythagoras Biography Hindi

पाइथागोरस मिश्र से वापस इटली लौट कर के उन्होंने एक गुप्त धार्मिक समाज की भी स्थापना की, उन्होंने क्रोटोन के संस्कृति जीवन में सुधार लाने का प्रयास किया. इस क्रम में लोगों को सदाचार का पालन करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने लड़के लड़कियों के लिए एक विद्यालय भी खोला. इस विद्यालय के नियम बहुत ही सख्त थे. इस विद्यालय के अंदरूनी हिस्से में रहने वाले लोग शाकाहारी भोजन करते थे और उनकी कोई निजी संपत्ति नहीं होती थी. वहीं विद्यालय के बाहरी हिस्से में रहने वाले लोग मांसाहार भोजन करते थे और निजी संपत्ति भी रखते थे. विद्यालय के उद्योग विभाग में रहने वाले लोगों का नाम दुनिया के पहले सन्यासी के रूप में इतिहास में दर्ज है.

पाइथागोरस ने साधा अनुशासित जीवन यापन किया है. अपने दर्शन में उन्होंने धर्म आचरण, सामान्य, भोजन, पठन-पाठन, संगीत के अनुसरण का उपदेश दिया है. जीवन के आखिरी दिनों में क्रोटोन की कुछ अभी चाची लोग उनके दुश्मन बन गए और उन्हें क्रोटोन छोड़ कर के मिटा पोटम पर शरण लेनी पड़ी थी. लगभग 90 साल की उम्र में 450 ईसा पूर्व के आसपास उनकी मृत्यु हो गई.

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