Why is Urine Yellow in Color? पेशाब का रंग पीला क्यों होता है?

कई बार हमने जो गौर किया होगा कि सुबह के समय या कभी भी हम बाथरूम में पेशाब करने जाते हैं तो पेशाब का रंग पीला हो जाता है। लेकिन, ऐसा किस लिए होता है? क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है। आज के हमारे इस लेख में हम इस बारे में ही बात करने वाले हैं कि Why is Urine Yellow in Color? पेशाब का रंग पीला क्यों होता है? इसके अलावा आज के हमारे इस लेख में हम इस बारे में भी चर्चा करेंगे कि पेशाब का रंग हमारे शरीर में होने वाली समस्याओं के बारे में भी जानकारी देती है।

हमारा शरीर एक जटिल मशीन की तरह है। जो लगातार काम करती रहती है। इसके अंदर क्या चल रहा है इस बारे में जानकारी हमें लगभग ना के बराबर होती है। पेशाब का रंग शरीर में होने वाली कई तरह की समस्याओं एवं परेशानियों के बारे में भी बताता है।

आपका शरीर कितना हाइड्रेट है या नहीं इस बात का अंदाजा भी आप अपने हिसाब के रंग को देखकर के लगा सकते हैं। पेशाब का रंग जितना गहरा होता है शरीर के अंदर उतनी ही ज्यादा समस्या एवं खतरा बढ़ जाती है।

पेशाब रंग उसमें मौजूद एक केमिकल यूरोक्रोम की वजह से आता है। यूरोक्रोम प्राकृतिक रूप से एक पीले रंग का पिगमेंट होता है। इसकी वजह से आम तौर पर यूरो इन पीले रंग की और लगभग ट्रांसपेरेंट हो जाती है। आज के हमारे इस लेख में हम इसी बारे में जानकारी देने वाले हैं कि Why is Urine Yellow in Color? पेशाब का रंग पीला क्यों होता है?

Why is Urine Yellow in Color? पेशाब का रंग पीला क्यों होता है?

हमारे शरीर में कई सारे जैविक प्रक्रिया है चलती रहती है। जैसे कि मुख्य उत्सर्जन अंग द्वारा उर्जित होता है फेफड़े, गुर्दा और त्वचा। इन अंगों द्वारा कुछ अपीस्ड पदार्थ निकाले जाते हैं जिनमें मूत्र, मल और पसीना होता है। यहां तक कि इसमें कार्बन डाइऑक्साइड भी शामिल होता है। जिसे हम सांस लेने के दौरान छोड़ते हैं।

आगे बढ़ने से पहले हमें इस बारे में भी जानकारी होना चाहिए कि हमारे शरीर में पेशाब या मूत्र कैसे बनता है?

हमारे शरीर में मूत्र कैसे बनता है?

हमने अक्सर पेशाब करते हुए या गौर किया होगा कि हमारे पेशाब का रंग कभी हल्का पीला तो कभी हल्का भूरा भी हो जाता है। यह समझने के लिए कि हमारे मूत्र का रंग कहां से आता है, हमें पहले इसके गठन पर विचार करना होगा।

मूत्र हमारे शरीर में मौजूद उत्सर्जन तंत्र द्वारा निर्मित होता है। विशेष रुप से गुर्दा, मुत्राशय, मूत्र पथ और मूत्र मार्ग। यदि उत्सर्जन प्रणाली एक कारखाना होती तो, गुर्दे निर्माण क्षेत्र होते, जहां पर हमारा पेशाब मूत्राशय में जमा होता। वही मूत्र पथ द्वारा वितरण प्रणाली और मूत्र मार्ग द्वारा यह हमारे शरीर से बाहर निकलता है।

गुर्दा एक लाल सैबी के आकार का अंग होता है। जो कि हमारे रीड की हड्डी के दोनों तरफ आधे रास्ते से थोड़ा ऊपर उठा हुआ होता है। गुर्दा का मुख्य काम हमारे शरीर में मौजूद कचरे जो की पाचन प्रक्रिया से आते हैं उन्हें बाहर निकालने का काम करती है।

प्रोटीन के पाचन से अमीनो एसिड बनते हैं जो लीवर में टूटकर जरी ले अमीनो का उत्पादन करते हैं। अमोनिया और यूरिया में परिवर्तित हो जाते हैं जो कम विषैला स्वरूप होता है।

यूरिया हमारे रक्त प्रवाह में प्रवेश करता है। गुर्दा इज यूरिया को हमारे रक्त से तीन चरणों में हटाता है। filtration, reabsorption और secretion इन प्रक्रियाओं द्वारा हमारे शरीर में मौजूद किडनी या गुर्दा हमारे शरीर में मौजूद कचरे को बाहर निकालने का काम करती है।

निष्पादन का काम Glomerulus मे होता है, जो रक्त कोशिकाओं का एक जाल होती है जिसमें फिल्टर करने का काम चलता है। जैसे ही हमारा रक्त इस जाल से होकर के गुजरता है, इसमें मौजूद घटक जैसे लवण, ग्लूकोज और यूरिया को छान लिया जाता है।

हम यह जानते हैं कि यूरिया हमारे शरीर के लिए जहरीला होता है लेकिन ग्लूकोज और लवण जैसे सोडियम और पोटेशियम, जीवित रहने के लिए आवश्यक है और हमारा शरीर उन सभी को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता है।

यहां पर पुनः अवशोषण की प्रक्रिया चलती है। नेफ्रॉन मैं क्या प्रक्रिया होती है इस प्रक्रिया में पोषक तत्व और अधिकांश पानी शरीर में वापस अवशोषित कर लिए जाते हैं।

हालांकि, पुनः अवशोषण के दौरान अतिरिक्त पानी और नमक और यहां तक कि यूरिया भी पुनः अवशोषित हो जाते हैं। इन प्रक्रियाओं के बाद अंतिम रूप में पेशाब बनता है। जो मूत्र वाहनी के माध्यम से हमारे शरीर से बाहर निकल जाती है। हमारे मूत्राशय में 1000 मिलीलीटर तक मूत्र जमा होकर के रह सकता है। हालांकि, हमारे मूत्राशय में जब 300 से 400 मिलीलीटर मूत्र होता है तभी हम को मूत्र की आवश्यकता होती है। यह एक तौर पर देखा जाए तो प्रकृति की पुकार है कि हमें पेशाब लगने लगती है।

मूत्र का रंग तब पीला कैसे होता है?

हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं द्वारा एक हरे रंग के रंग द्रव्य का उत्पादन करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। जिसे बिलीवरडीन (Biliverdin) कहते हैं। जो की पीले रंग के वर्णक को जन्म देते हैं। जिसे Bilirubin कहा जाता है।

हमारे शरीर में मौजूद यहा Bilirubin हमारे शरीर से निकलने वाले कचरे जैसे कि मूत्र, मल और पसीना इत्यादि चीजों को पीला रंग देने के लिए जिम्मेदार होती है।

अन्य भाषा में इसे यूरोक्रोम भी कहते हैं। निष्पादन और पुनः अवशोषण की प्रक्रिया के दौरान हमारी किडनी खून से इस यूरोक्रोम को फिल्टर कर लेती है। इसे हमारे मूत्र के माध्यम से फिर कचरे के रूप में बाहर निकाल लिया जाता है। जिससे कि हमारे मूत्र का रंग पीला हो जाता है।

हालांकि, पेशाब का रंग मुख्य रूप से हमारे शरीर में मौजूद जल के स्तर पर निर्भर करता है। यदि हम बहुत सारा पानी पीते हैं तो हमारा मित्र में बहुत सारा पानी होगा। जो यूरोक्रोम के रंग को पतला कर देता है और हमारे मित्र को बहुत हल्का पीला या पूरी तरह से रंगहीन बना देता है। दूसरी ओर गंभीर रूप से डिहाइड्रेशन लोगों में शरीर में जल की मात्रा बहुत ही कम होती है। इस वजह से उनके पेशाब का रंग सोने के रंग या पीले रंग का हो जाता है। जो यूरोक्रोम की उच्च सांद्रता के कारण होता है।

पेशाब के रंग का चार्ट

पेशाब का रंग शरीर में होने वाली बीमारियों के बारे में भी बताता है।

ट्रांसपेरेंट यूरिन

यदि आपका पेशाब का रंग ट्रांसपेरेंट है तो इसका मतलब है कि आप दिन भर में आपके शरीर को जितनी पानी की आवश्यकता है आप उतना पानी पी रहे होते हैं। पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है लेकिन ज्यादा पानी पीने से शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को भी बाहर निकाल देता है। अगर आप का पेशाब कभी कभार क्लियर या ट्रांसपेरेंट नजर आ रहा है तो घबराने की कोई बात नहीं है इसका मतलब है कि अंदर से आपका शरीर स्वच्छ किया जा रहा है।

हल्के पीले रंग का पेशाब

अगर आप का पेशाब हल्के पीले रंग का है तो इसका मतलब यह है कि आप ज्यादा पानी पी रहे हैं। जिससे कि आपके शरीर में मौजूद यूरोक्रोम केमिकल डाइल्यूट हो जाता है। जिस कारण से आप का हिसाब का रंग हल्का पीला हो जाता है।

पेशाब का रंग गाढ़ा पीला

ऐसी स्थिति तब पैदा होती है जब आप बेहद ही कम मात्रा में पानी पी रहे होते हैं। जिससे कि आपके शरीर में मौजूद यूरोक्रोम कंस्ट्रेंट्ड रहता है और पेशाब का रंग गाढ़ा पीला नजर आने लगता है।

आप के पेशाब का रंग अगर गाढ़ा पीला है तो भी आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप इसके लिए पानी की मात्रा बढ़ा सकते हैं। आप थोड़ा ज्यादा पानी पिया कीजिए तो आपका पेशाब का रंग ठीक हो जाएगा।

लाल रंग का पेशाब

अगर आपका पेशाब लाल रंग का हो रहा है तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में किसी तरह की गड़बड़ी है या किसी तरह की बीमारी है। यह दरअसल यूरिया में खून की उपस्थिति को बताता है। इसकी वजह बढ़ा हुआ प्रोस्टेट, किडनी स्टोन, ब्लेडर या किडनी में ट्यूमर आदि हो सकता है। लेकिन कई बार जब बार-बार लाल पिगमेंट वाली कोई चीज खाते हैं तो यूरीन लाल या गुलाबी रंग की नजर आने लगती है।

नारंगी रंग का पेशाब

अगर आप का पेशाब नारंगी रंग का नजर आ रहा है तो यह डिहाइड्रेशन की निशानी हो सकता है। अगर आप का पेशाब गाड़ी रंग की का है और मल का रंग हल्का हो गया है तो इसकी वजह बाइल जूस का ब्लड स्ट्रीम में जाना हो सकता है। जौंडिस लीवर की एक बीमारी है इसकी पहचान पेशाब, आंखों और नाखूनों के पीलेपन से लगाई जा सकती है।

निष्कर्ष

हम जो खा रहे हैं या दवा के आधार पर भी मूत्र का रंग बदल सकता है। जैसे कि विटामिन बी कैप्सूल लेने से पेशाब का रंग चमकीला नियन हरा हो सकता है। यदि आप गाजर और शकरकंद आदि जैसी चीजें खाते हैं तो इनमें लाल पिगमेंट रंग होता है जिस वजह से आपका पेशाब लाल रंग का हो सकता है। वही संतरा आपके प्रसाद को गहरा पीला रंग दे सकता है।

फिर भी हमारे पेशाब का प्रमुख रंग यूरोक्रोम की वजह से पीला होता है। और वही जब कोई व्यक्ति ज्यादा पानी पीता है तो वह अच्छी तरह से हाइड्रेट रहता है तो मूत्र का रंग हल्का हो जाता है।