How X-rays work? – एक्स-रे कैसे काम करता है?

X-ray ( एक्स-रे) विज्ञान की एक ऐसी खोज, जिसने तकनीक को एकदम बदल कर के रख दिया है। एक्सरे किरण का इस्तेमाल हम आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों से लेकर के स्वास्थ्य संबंधी तकनीको मे भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। आपकी भी कभी हड्डियां टूटी होगी, तो डॉक्टर ने आपको एक्स-रे कराने की सलाह दी होगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक्स रे मशीन कैसे काम करती है? आज के हमारे इस लेख में हम इसी बारे में बात करने वाले हैं, How X-rays work? – एक्स-रे कैसे काम करता है?

आगे बढ़ने से पहले हम चलिए एक्स-रे किरणों के इतिहास के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी ले ले लेते हैं। जिससे कि इसके विकास एवं इसके उपयोग के बारे में समझने में सुलियत होगी।

X-ray किरणें या एक्स- रे एक प्रकार का विद्युत चुंबकीय विकिरण होता है जिसका वेवलेंथ या तरंग धैर्य 10 से 0.01 नैनोमीटर होती है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर हम चिकित्सा में निदान के लिए करते हैं। यह एक प्रकार का आयन कारी विक्रम है इसलिए खतरनाक भी है। कई भाषाओं में इसे रॉण्टजन के नाम पर आधारित विकरण जी कहते हैं।

जर्मनी के गुडवर्क विश्वविद्यालय के भौतिक के प्रधानाध्यापक विलहेल्म कोनराड रंटजन द्वारा एक्स-रे के 9 की खोज वर्ष 1895 में किया गया था। इन्होंने अपने प्रयोग में पाया कि कांच की नलिका में से वायु को पंप से क्रम से निकाला जाए और उसमें कुछ विभव का विद्युत उत्सर्जन किया जाए तो दाद के पर्याप्त अल्प होने पर वायु स्वयं प्रकाशित होने लगती है।

उन्होंने अपने इस शोध में पाया कि वायु का दाब अत्यंत कम होने पर कांच की नाली का में से जो किरण बाहर निकलती है उनसे बेरियम प्लटीनासायनाइड के मनीभ प्रकाश देने लगते हैं। बालिका को काले कागज से पूर्ण रूप से रखने पर भी पास में भी रखें मानीभ से प्रकाश उत्पन्न होता है। उन्होंने अपने शोध में पाया कि काले कागज को भी पार करने वाले किरणें अवश्य रूप से एक्स-रे किरण है।

What is X-ray? – एक्स-रे क्या होता है?

एक्स-रे मेडिकल क्षेत्र में सुरक्षित और दर्द रहित प्रक्रिया है जो शरीर के अंदर की इमेज निकालने के लिए इस्तेमाल की जाती है। यह टूटी हुई हड्डियों को देखने का बहुत असरदार तरीका है जैसे कि किसी एक्सीडेंट में किसी के हाथ या पैर की हड्डी टूट जाती है।

एक्सरे का इस्तेमाल शरीर की जांच और परेशानी का पता लगाने के लिए भी किया जाता है। एक्स-रे का प्रयोग फेफड़ों में होने वाले निमोनिया, छाती की हड्डी का टूटना, शरीर के किसी अंग का या हड्डी का टूटना के लिए भी किया जाता है।

एक्स-रे अक्सर थैरिपेडिक प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल होता है। जैसे कि coronary angioplasty जो सर्जन के उपकरण की उस क्षेत्र तक जाने में मदद करती है जिसका उपचार होना है।

Types of X-rays ? एक्स-रे के प्रकार?

चिकित्सा या मेडिकल के क्षेत्र में अलग-अलग तरह के एक्सरे का इस्तेमाल किया जाता रहा है। जोकि निम्नलिखित है।

एक्स-रे एक प्रकार का विद्युत चुंबकीय विकिरण है। एक्स रे मशीन शरीर के माध्यम से अलग-अलग एक्स-रे कर भेजती है। जिसे कंप्यूटर पर इमेजेस या फोटो के रूप में रिकॉर्ड किया जाता है।

  • घनीभूत संरचनाएं जैसी की हड्डी अधिकांश एक्स-रे कणों को अवरोध या रोक देती है। जिससे कि यह हड्डियां एक्स-रे इमेज में सफेद रंग की दिखाई देगी।
  • धातु और कंट्रास्ट मीडिया शरीर के क्षेत्रों को उजागर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला विशेष डाई भी एक्स-रे इमेजेस में सफेद दिखाई देगा।
  • शरीर के अंदर खाली या हवा वाली संरचनाएं काली दिखाई देगी और मांसपेशियां, वसा और तरल पदार्थ ग्रे रंग के दिखाई देंगे।

किसी भी अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में एक्सरे किया जाता है। आप की स्थिति कैसी है या इस बात पर निर्भर करता है कि किस प्रकार का एक्सरे किया जा रहा है। जब आप एक्स-रे करवा रहे हैं तो आपको स्थिर रहने की जरूरत है। जब आपका एक्स-रे लिया जा रहा है तो आप को कम से कम 2 सेकंड के लिए हिलना डुलना एवं सांस रोककर रखना है।

  • पेट का एक्स-रे
  • बेरियम x-ray
  • हड्डी का एक्स-रे
  • छाती का एक्स-रे
  • दातों का एक्स-रे
  • चरम एक्स-रे
  • संयुक्त एक्स-रे
  • साइनस x-ray
  • गर्दन का एक्स-रे
  • थोरेसिक स्पाइन एक्सरे
  • कंकाल का एक्स-रे

मेडिकल क्षेत्र में किए जाने वाले एक्स-रे के यह कुछ प्रकार है जो सामान्य तौर पर किए जाते हैं। इनके अलावा भी एक्स-रे के बहुत से प्रकार हैं। जिन्हें रोगी की परेशानी के आधार पर किया जाता है।

How X-rays work? – एक्स-रे कैसे काम करता है?

X-rays एक प्रकार का रेडिएशन होता है। प्रकाश और एक्स-रे ऊर्जा के एक जैसे साधन है। हालांकि प्रकाश की आवृत्ति या फ्रीक्वेंसी एक्स-रे की तुलना में कम होती है। और यह आपकी त्वचा द्वारा आसानी से अवशोषित कर ली जाती है। जबकि एक्स-रे की फ्रीक्वेंसी या आवर्ती प्रकाश की तुलना में अधिक होती है और वह मानव शरीर के पार निकल जाती है।

जैसे ही एक्स-रे मानव शरीर से होकर गुजरता है, उनमें उर्जा के कण जिनमें फोटोन होता है, अलग-अलग धाराओं पर अवशोषित हो जाते हैं या पैटर्न एक्स-रे इमेजेस में आप आसानी से देख सकते हैं।

आपके शरीर के वह भाग जो ठोस पदार्थ से बने हैं जैसे कि आप की हड्डियां, एक्सरे इमेज या फोटो में सफेद रंग के क्षेत्र के रूप में दिखाई देते हैं। वही आपके शरीर के विभाग जो नर्म पदार्थ से बने होते हैं जैसे कि आपका ह्रदय और फेफड़ा, वसा, इत्यादि चीजें ग्रे (gray) रंग के दिखाई देते हैं।

बहुत सारे लोग, एक्स-रे को हानिकारक भी मानते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे हाई लेवल रेडिएशन का इस्तेमाल होता है जो कि शरीर के लिए हानिकारक होता है। हालांकि इलाज के उद्देश्य से उपयोग होने वाला एक्स-रे सुरक्षित होता है, क्योंकि रेडिएशन की मात्रा बहुत ही कम होती है।

लंबे समय के खतरे के संबंध में रेडिएशन की ताकत को मिलीसीवस (mSv) नामक इकाई का उपयोग करके मापा जाता है।

एक्स-रे से होने वाले खतरे

ज्यादातर लोग अक्सर एक्स-रे के दौरान उससे निकलने वाले रेडिएशन के संपर्क में आने से चिंतित रहते हैं, हालांकि हर कोई अपने जीवन में प्राकृतिक रेडिएशन के संपर्क में कभी ना कभी तो आता ही रहता है।

प्राकृतिक रेडिएशन को कभी-कभी बैकग्राउंड रेडिएशन के रूप में भी जाना जाता है। बैकग्राउंड रेडिएशन के स्रोत निम्नलिखित होते हैं।

  • रेडॉन (Radon) – एक साधारण रेडियो एक्टिव ज्ञात होता है जो हमारे वायुमंडल में निम्न स्तर पर पाई जाती है।
  • कॉस्मिक किरणें (Cosmic rays) – एक प्रकार का रेडिएशन जो अंतरिक्ष में सूर्य और तारों से पैदा होता है।
  • पृथ्वी की प्राकृतिक रेडिएशन – मिट्टी और चट्टानों में विभिन्न रेडियोएक्टिव पदार्थ होते हैं, यह हमारी धरती पर सबसे है जब पृथ्वी बनी ही नहीं थी। इन्हें हम पृथ्वी के प्राकृतिक रेडिएशन के रूप में जानते हैं। इनके जरिए भी हम प्राकृतिक रेडिएशन के संपर्क में आते हैं।
  • इन सबके अलावा खाना और पानी, बादाम, केला, लाल मांस मछली या आलू आदि चीजों में भी थोड़ी मात्रा में रेडिएशन मौजूद रहती है।
  • कैंसर का खतरा – एक्स-रे के संपर्क में आने के बाद कैंसर होने का सिद्धांत खतरा भी रहता है। या ठीक वैसे ही है जैसे कि आप बैकग्राउंड रेडिएशन के संपर्क में आने के बाद खतरा होता है।
  • आपके सीने दांत या गर्दन खोपड़ी इत्यादि चीजों के एक्स-रे के दौरान बैकग्राउंड रेडिएशन के बराबर होता है और कैंसर की संभावना 10 लाख में से एक में हो सकती है।