FATCA (Foreign Account Tax Compliance Act) क्या है?

FATCA (Foreign Account Tax Compliance Act) क्या है? टैक्स की चोरी को रोकने के लिए दुनिया भर की सरकारें और वित्तीय संस्थाएं हमेशा नए नए कानून और तरीके अपनाती रहती है। दुनिया भर में टैक्स की चोरी को रोकने के लिए अलग-अलग देश की अपनी अपनी नियम एवं कानून होते हैं। लेकिन कुछ नियम और कानून अंतरराष्ट्रीय तौर पर मानक माने जाते हैं और इन मानक कानून का पूरी दुनिया भर में पालन किया जाता है। इन्हीं में से एक कानून FATCA (Foreign account Tax Compliance Act) है। इस कानून को अमेरिका द्वारा अपने अमेरिकी करदाताओं के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत अमेरिकी करदाताओं की संपूर्ण जानकारी यह रखती है।

FATCA (Foreign Account Tax Compliance Act) क्या है?

FATCA का अर्थ Foreign Account Tax Compliance Act होता है जिसका अर्थ हिंदी में “विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम” है।

अमेरिका जैसे देशों में एक कर विभाग ने घर का अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए, और कर चोरी को रोकने के लिए साल 2010 में FATCA का गठन किया था। इसको गठन करने के पीछे मुख्य उद्देश्य टैक्स की चोरी से लड़ना और कर नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना था।

इस कानून के अनुसार सभी अमेरिकी करदाताओं को चाहे वह अपने देश में हो या फिर विदेश में उन्हें अपने संपूर्ण वार्षिक आय और बैंक खाते की जानकारी FACTA अधिनियम के अंतर्गत देनी होती है।

इस कानून को आप दूसरे शब्दों में भी परिभाषित कर सकते हैं। जैसे – अमेरिकी नागरिकों द्वारा विदेशी निवेश से कमाई हुई पूंजी को ट्रैक करने के लिए दूसरों देशों से संपत्ति को छुपाने की कोशिश करने वालों को पकड़ने के लिए इस अधिनियम का गठन किया गया है।

FATCA ACT 2010 का उद्देश :-

  1. इस अधिनियम के अंतर्गत सभी अमेरिकी नागरिकों को अपने सभी बैंक खातों की वार्षिक जानकारी अमेरिकी सरकार के साथ में साझा करनी होती है। अर्थात, FATCA अमेरिकी नागरिकों द्वारा विदेशों में किए गए निवेश से कमाई गई पूंजी और बैंक खातों की जानकारी सम्मिलित होती है। ताकि किसी भी तरह की टैक्स की चोरी को छुपाया ना जा सके।
  2. FATCA के गठन करने के पीछे मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों द्वारा विदेश से कमाई गई संपत्ति पर टैक्स की चोरी को बचाना है।

Foreign Account Tax Compliance Act (FATCA) और अमेरिका भारत समझौता

भारत में FATCA अधिनियम को लागू करने के लिए अंबिका और भारत के बीच में साल 2015 में दोनों सरकारों के बीच में एक समझौता हुआ था। जिसके तहत भारत में FATCA India अधिनियम को भी लागू किया गया है। इस समझौता के अंतर्गत दोनों ही सरकारों ने मिलकर के सरकारी समझौता IGA (Inter Government Agreement) पर हस्ताक्षर किया है।

इस समझौते के अनुसार, इस अधिनियम के तहत भारत और अमेरिका के बीच में वित्तीय सूचनाओं को साझा किया जाएगा। इस नियम के अनुसार भारत की वित्तीय संस्थान FATCA अधिनियम के अंतर्गत संबंधित जानकारी भारतीय कर अधिकारियों को भेजते हैं। जिसे इस अधिनियम के अंतर्गत अमेरिकी सरकार के साथ में है साझा किया जाता है। इस कानून के तहत भारत और अमेरिका एक दूसरे से वित्तीय संबंधी एवं कर संबंधी सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं।

Foreign Account Tax Compliance Act (FATCA) के तहत भारत ने अन्य कई देशों के साथ भी अंतर सरकारी समझौता किया है। अमेरिका के अलावा किसके अंतर्गत निम्नलिखित देश शामिल है। भारत और रूस, भारत और कनाडा, भारत और ब्राज़ील इत्यादि। इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी वित्तीय खाते को खोलते समय प्रत्येक निवेशक को KYC form के साथ-साथ उन्हें FATCA from अलग से भरना होता है।

FATCA फार्म कहां कहां पर भरना पड़ सकता है?

सेंट्रल केवाईसी या CKYC के अंतर्गत सरकार किया कोशिश है कि जिसके माध्यम से सभी विद्युत सेक्टर की केवाईसी यानी “Know Your Customer” (अपने ग्राहकों को जाने) को सिंगल विंडो में लाया जा सके।

इसके अंतर्गत सभी वित्तीय संस्थाएं जैसे कि बैंक, NBFC ( NON BANKING FINANCIAL COMPANY), DEMAT ACCOUNT, इत्यादि खोलते वक्त आपको FATCA form भरना पड़ता है। इसके अंतर्गत आपके द्वारा टैक्स संबंधी सभी जानकारी अन्य देशों के साथ साझा की जाती है।