Types of Mutual Fund – म्यूच्यूअल फंड के प्रकार विस्तृत जानकारी

Types of Mutual Fund Hindi

निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) सबसे बढ़िया निवेश का जरिया है। भारत जैसे देश में म्यूचुअल फंड आने वाले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से वृद्धि करने की संभावना है। म्यूच्यूअल फंड एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट है जिसमें आप कम पैसे लगाकर के अधिक लाभ कमा पाते हो। आज के हमारे इस लेख में हम म्युचुअल फंड से संबंधित जानकारी आप लोगों को उपलब्ध कराने वाले हैं। आज के हमारे इस लेख में Types of Mutual Fund – म्यूच्यूअल फंड के प्रकार विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

जब भी आप निवेश करने के बारे में सोचते हैं तो आपके मन में सबसे पहला सवाल म्यूच्यूअल फंड पर निवेश करने के बारे में आता है। आप लोगों में से बहुत से लोगों को म्यूच्यूअल फंड के बारे में पता है। लेकिन, म्यूच्यूअल फंड कितने प्रकार के होते हैं? एवं म्यूच्यूअल फंड से जुड़ी कुछ बेसिक जानकारी निवेश करने से पहले आपके मन में भी आते होंगे। आज हम म्यूच्यूअल फंड से संबंधित जानकारी आप लोगों को देंगे।

Types of Mutual Fund – म्यूच्यूअल फंड के प्रकार विस्तृत जानकारी

म्यूच्यूअल फंड के कितने प्रकार होते हैं या जाने से पहले आपको यह जान लेना अति आवश्यक है कि म्यूच्यूअल फंड क्या होता है?  What is Mutual Fund? तभी आपको यह समझ में आएगा कि म्यूचुअल फंड के कितने प्रकार होते हैं।

साधारण शब्दों में कहा जाए तो म्यूच्यूअल फंड बहुत सारे लोगों से उधार लिए गए पैसे का फंड होता है। इसके लिए एक AMC – Asset Management Company होती है जो आपके पैसों को प्रोफेशनली इन निवेश करती है और आपको बदले में ब्याज देती है। इस तरह से कोई भी कंपनी आपके किए गए पैसों के निवेश बदले में आपको पैसों का ब्याज का भुगतान करती है।

एक ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी एक फॉर्म हो सकती है, या एक ग्रुप हो सकता है। जो आप से लिए गए पैसों का एक फंड बनाकर के उन पैसों को इन्वेस्ट करती है। देश में कई सारी AMC कंपनियां मौजूद है जिसकी कुछ उदाहरण हम नीचे दे रहे हैं। जैसे कि – SBI Mutual Fund, ICICI Prudential, Motilal Oswal, UTI Mutual Fund इत्यादि।

यहां पर हमने आप लोगों को म्यूच्यूअल फंड से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा दी है। म्यूच्यूअल फंड क्या होता है? What is Mutual Fund? इसके बारे में आपको जानकारी मिल गई होगी। आगे हम लोग यह जानेंगे कि म्यूच्यूअल फंड के कितने प्रकार होते हैं? Types of Mutual Fund

Types of Mutual Fund – म्यूच्यूअल फंड के प्रकार

म्यूच्यूअल फंड के कई प्रकार होते हैं। पहले हम म्यूचुअल फंड के मुख्य प्रकार के बारे में जान लेते हैं। फिर हम एक-एक करके इसके बारे में विस्तार से जानकारी लेंगे।

Types of Mutual Fund

आप ऊपर दिए गए चित्र के अनुसार देख सकते हैं कि म्यूच्यूअल फंड को तीन प्रकार के आधार पर बांटा जा सकता है।

  1. ऐसेट (Asset) के आधापर
  2. ढांचा (Structure) के आधार पर
  3. फंड मैनेजर (Fund Manager) के आधार पर

म्यूच्यूअल फंड के प्रकार ऐसेट के आधार पर – Types of Mutual Fund bases of Asset

म्यूच्यूअल फंड को ऐसेट के आधार पर तीन भागों में बांटा जा सकता है।:-

  1. डेबिट म्यूच्यूअल फंड – Debit Mutual Fund
  2. इक्विटी म्युचुअल फंड – Equity Mutual Fund
  3. हाइब्रिड म्युचुअल फंड – Hybrid Mutual Fund

इनके बारे में हम नीचे विस्तार से जानेंगे। और साथ में हम लोग या बीच आने की कोशिश करेंगे कि तीनों ही तरह के म्यूच्यूअल फंड में क्या अंतर होता है?

1.  डेबिट म्यूच्यूअल फंड क्या है? What is Debit Mutual Fund?

डेबिट म्यूच्यूअल फंड के अंतर्गत ऐसे मैचुअल फंड को रखा जाता है जो अपने पैसा को debenture, bonds, security, certificates of deposit, इत्यादि पर निवेश करती है।

डेबिट इंस्ट्रूमेंट के जरिए सरकार यह कंपनी पैसा उधार लेते हैं और फिर ब्याज के साथ वह वापस रिटर्न करते हैं। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड में जोखिम काफी कम होता है। इस तरह के फंड में आपको डिपाजिट की भांति ब्याज प्राप्त होता है।

डेबिट म्युचुअल फंड को आप चार भागों में बांट सकते हैं:-

  1. GILT Fund – गिल्ट फंड
  2. Junk Bond Schemes – जंक बॉन्ड स्कीम
  3. Fixed Maturity Plans – फिक्स्ड मेच्योरिटी प्लान
  4. Liquid Scheme – लिक्विड स्कीम

GILT Fund – गिल्ट फंड :- यह इस तरह का एक फंड होता है जो केवल सरकारी प्रतिभूतियों यानी कि सिक्योरिटी इस पर निवेश करती है। इसलिए इन्हें गिल्ट फंड कहा जाता है। सरकारी प्रतिभूतियां सरकार द्वारा जारी की जाती है इसलिए इसमें जोखिम बहुत कम होता है।

इस तरह के स्कीम में आपको नुकसान हो या फायदा पर आपको अवश्य रूप से रिटर्न मिलेगा, क्योंकि इसकी गारंटी केंद्र की सरकार लेती है। इससे ज्यादा भरोसेमंद स्कीम आपको म्यूचल फंड मार्केट में नहीं मिल सकती है। गिल्ट फंड के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके इसके बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं

What is GILT Fund? – गिल्ट फंड क्या होता है?

गिल्ट फंड को आप निवेश के आधार पर दो भागों में बांट सकते हैं। गिल्ट फंड को अल्प अवधि (Short Term) और लंबी अवधि (Long Term) के आधार पर दो अन्य स्कीम में बांटा जा सकता है।

( a.) JUNK BOND SCHEME :- इस स्कीम के अंतर्गत पैसों का निवेश कॉर्पोरेट बॉन्ड्स एवं प्रतिभूतियों पर किया जाता है। इसे आप जोखिम भरा मान सकते हैं। कॉरपोरेट बॉन्ड्स में आपको बहुत ज्यादा रिटर्न मिलता है। लेकिन इस तरह के बांड में उतनी ही ज्यादा जोखिम होती है।

( b.) FIXED MATURITY PLANS :- अगर आप अपने पैसों को बैंक में फिक्स डिपॉजिट करके रखना पसंद करते हैं। तो ठीक उसी तरह फिक्स्ड मेच्योरिटी प्लान में आपको फिक्स डिपाजिट से बेहतर ब्याज मिलता है। यह स्कीम Low Risk स्कीम है।

इस तरह की स्कीम में जोखिम काफी कम होता है और एक निश्चित अवधि यानी कि 3 साल, 5 साल जो स्कीम की अवधि होती है उसके अंतर्गत आपको ब्याज दिया जाता है।

लिक्विड फंड क्या होता है? What is Liquid Fund?

लिक्विड फंड को डेबिट फंड का ही एक प्रकार माना जाता है। लिक्विड फंड में आप अपने पैसों को कभी भी निकलवा सकते हैं। लिक्विड फंड में आप न्यूनतम 3 दिन के लिए भी निवेश कर सकते हो। लिक्विड फंड जिन प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं उनकी परिपक्वता यानी की मैच्योरिटी 91 दिन तक की होती है।

लिक्विड फंड डेबिट फंड की कैटेगरी में सबसे कम रिटर्न देने वाला स्कीम में गिना जाता है। लेकिन, लिक्विड फंड इसके साथ ही सुरक्षित भी माना जाता है। अगर आप एक नए निवेशक हैं और सेविंग अकाउंट और बैंक फिक्स डिपाजिट से अधिक ब्याज प्राप्त करना चाहते हैं। तो आप लिक्विड फंड में निवेश कर सकते हैं।

इक्विटी म्युचुअल फंड क्या होता है? What is Equity Mutual Fund ?

म्यूचुअल फंड में इक्विटी म्युचुअल फंड (Equity Mutual Fund) निवेशकों के बीच में काफी ज्यादा लोकप्रिय स्कीम है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इस स्कीम में आपको ज्यादा जोखिम उठाना पड़ता है। इस तरह की स्कीम में आपको रिटर्न भी ज्यादा मिलता है।

इक्विटी म्युचुअल फंड मैं फंड मैनेजर द्वारा लगभग पूरा निवेश स्टॉक मार्केट पर किया जाता है। इक्विटी फंड को अलग-अलग स्कीम के रूप में बांटा जा सकता है:-

  1. लार्ज कैप फंड – Large cap fund
  2. मिड कैप फंड – Midcap fund
  3. स्मॉल कैप फंडSmall cap fund
  4. मल्टी कैप फंड – Multicap fund
  5. फ्लेक्सी कैप फंडFlexi cap fund
  6. ELSS म्यूच्यूअल फंड – ELSS Mutual Fund

Large cap fund – लार्ज कैप फंड – यहां पर लार्ज कैप का मतलब उस मार्केट केपीटलाइजेशन से होता है जिसमें कोई कंपनी की कैपिटलाइजेशन बहुत बड़ी होती है। लार्ज कैप कंपनी की मुख्य विशेषता यह होती है, कि इस तरह की कंपनी भरोसेमंद, प्रतिष्ठित एवं उस सेक्टर में अग्रणी कंपनी होती है।

लार्ज कैप फंड व म्युचुअल फंड होता है जो अपना पैसा बड़े बाजार पूंजीकरण वाली कंपनी में लगाते हैं। लार्ज कैप कंपनी पहले से अपने ग्रोथ प्राप्त कर चुकी होती है अंतः या रिटर्न बाकी फंड की उपेक्षा कम मिलते हैं परंतु रिटर्न में निरंतर ज्यादा होती है।

लार्ज कैप फंड में स्माल एंड मिडकैप की जगह कम रिस्क होता है। जिन लोगों को कम रिस्क के साथ म्यूचुअल फंड में निवेश करना है उनके लिए लार्ज कैप म्युचुअल फंड सबसे बेहतर विकल्प होती है।

लार्ज कैप कंपनियां पहले से बेहतर तरीके से स्थापित होती है। जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि यह कंपनी अपने क्षेत्र की अग्रणी कंपनी होती है। उदाहरण के तौर पर Reliance, ब्रिटानिया, HCL, नेस्ले (Nestle) इत्यादि।

मिड कैप म्यूच्यूअल फंड – Mid Cap Mutual Fund – इस प्रकार की म्यूच्यूअल फंड में म्यूचुअल फंड के पैसों को मिड कैप वाली कंपनियों में निवेश किया जाता है। आप मिड कैप वाली कंपनियों को मध्यम श्रेणी की मार्केट की सूचीबद्ध कंपनी में रख सकते हैं। यह वह कंपनी होती है जिन्होंने अपने व्यापार को स्थापित कर लिया है एवं आगे ग्रोथ कर रही होती है।

इस प्रकार मिड कैप फंड लार्ज कैप फंड की तुलना में अधिक रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। वही मिड कैप म्यूच्यूअल फंड में आपको स्मॉल कैप फंड की तुलना में कम रिटर्न मिलता है। हालांकि मिडकैप मैचुअल फंड मध्यम श्रेणी की कंपनियां होती है और आगे की तरफ ग्रोथ कर रही होती है। इसलिए इस तरह के म्यूच्यूअल फंड में रिस्क फैक्टर (Risk Factor) लार्ज कैप कंपनी की तुलना में थोड़ा ज्यादा होता है।

स्मॉल कैप म्युचुअल फंड – Small Cap Mutual Fund – इस तरह के म्यूच्यूअल फंड के अंतर्गत पैसों का निवेश छोटी Capitalisation वाली कंपनियों पर किया जाता है। इनका कैपिटल काफी छोटा होता है इसलिए इन्हें स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फंड के अंतर्गत रखा जाता है।

स्मॉल कैप फंड वाली कंपनी मार्केट में नए बिजनेस के साथ स्थिरता प्राप्त करने का प्रयास करती है। इनमें रिटर्न देने की अधिक क्षमता होती है परंतु उसके साथ ही स्मॉल कैप म्युचुअल फंड में रिस्क फैक्टर (Risk Factor) बहुत ज्यादा होता है। इसके साथ ही स्मॉल कैप म्युचुअल फंड में आपको लार्ज कैप म्युचुअल फंड और मिड कैप म्युचुअल फंड की तुलना में अधिक रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। लेकिन इसमें ज्यादा जोखिम होता है। यह म्यूच्यूअल फंड स्कीम सबसे ज्यादा परिवर्तनशील मानी जाती है।

मल्टीकैप म्युचुअल फंड – Multi Cap Mutual Fund – मल्टी कैप का मतलब यह होता है कि एक से अधिक कैपिटल पर म्यूच्यूअल फंड के पैसों का निवेश करना। इस तरह के मीटर पढ़ने में म्यूचुअल फंड के पैसों को एक से अधिक स्टॉप पर निवेश किया जाता है।

मल्टी कैप फंड स्कीम के अंतर्गत लार्ज कैप, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में एक निश्चित अनुपात पर निवेश किया जाता है। इस वजह से यह निवेशकों के बीच में काफी लोकप्रिय म्यूच्यूअल फंड है। मल्टीकैप म्युचुअल फंड मॉडरेट रिस्क और रिटर्न पर आधारित होती है।

फ्लेक्सी कैप फंड – Flexi Cap Fund – यह म्यूच्यूअल फंड की एक नई कैटेगरी मानी जाती है। यहां पर फ्लेक्सी का मतलब Flexibility से होता है। जिसका मतलब यह होता है कि इस तरह के मैचुअल फंड में अपना फंड चुनने के लिए कोई भी निवेशक स्वतंत्र होता है।

इस तरह के म्यूच्यूअल फंड में निवेशक अपने मन के मुताबिक, किसी भी म्यूच्यूअल फंड का चुनाव अपने पैसों के निवेश के लिए कर सकता है। फ्लेक्सी कैप फंड कैटेगरी में 65% हिस्सा (allocation) इक्विटी और इक्विटी ओरिएंटेड फंड में रहती है। इस 65% में बिना किसी पूर्व निर्धारित समय के लार्ज कैप, मिडकैप स्मॉलकैप में फंड मैनेजर की इच्छा अनुसार निवेश किया जा सकता है। फ्लेक्सी कैप म्यूच्यूअल फंड के अंतर्गत मल्टी कैप फंड जैसे फिक्स्ड एलोकेशन का नियम लागू नहीं होता है।

ELSS म्यूच्यूअल फंड – ELSS का फुल फॉर्म इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (Equity Linked Saving Scheme) होता है। इस तरह के स्कीम की खास बात यह होती है कि यह स्कीम इक्विटी ओरिएंटेड होती है। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड का इस्तेमाल ज्यादातर लोग अपने टैक्स सेविंग (TAX Saving) को करने के लिए करते हैं।

इस तरह के म्यूच्यूअल फंड में किया गया निवेश लगभग 3 सालों के लिए लॉकइन (Lock in) period मे होता है। जिसका मतलब यह है कि आप इसके पैसों को 3 साल से पहले नहीं निकाल सकते हैं। इस स्कीम में आपको इनकम टैक्स की धारा 80 C के अंतर्गत डेढ़ लाख रुपए तक की छूट दी जाती है।

हाइब्रिड म्युचुअल फंड क्या है? What is Hybrid Mutual Fund?

हाइब्रिड म्युचुअल फंड दो से अधिक म्यूच्यूअल फंड का मिश्रण होता है। सीधे शब्दों में कहें तो हाइब्रिड (Hybrid) म्यूच्यूअल फंड के अंतर्गत इस म्यूच्यूअल फंड में लगा गए पैसों को इक्विटी (Equity) और डेबिट फंड (Debit Fund) दोनों ही जगहों पर लगाया जाता है। इसी वजह से यह हाइब्रिड म्युचुअल फंड (Hybrid Mutual Fund) कहलाती है।

हाइब्रिड म्युचुअल फंड का उद्देश्य एक बैलेंसड पोर्टफोलियो बना करके अपने निवेशकों को रेगुलर इनकम देना होता है। वही डेबिट फंड की तुलना में हाइब्रिड फंड ज्यादा जोखिम भरा होने के साथ-साथ इक्विटी फंड की तुलना में यह कम जोखिम वाला म्यूच्यूअल फंड होती है।

हाइब्रिड म्युचुअल फंड को भी आप अलग-अलग कैटेगरी में बांट सकते हो :-

  • इक्विटी ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड Equity oriented hybrid fund
  • डेबिट ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड Debit oriented hybrid fund
  • बैलेंसड फंड – Balanced hybrid fund
  • मंथली इनकम प्लान – Monthly income plans
  • आर्बिट्राज फंड – Arbitrage fund

इक्विटी ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड – Equity oriented hybrid fund के अंतर्गत म्यूच्यूअल फंड के हिस्से का लगभग 65% भाग इक्विटी में और बाकी हिस्सा डेबिट फंड में लगाया जाता है।

डेबिट ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड – Debit oriented hybrid fund इस फंड में म्यूच्यूअल फंड के हिस्से का लगभग 60% हिस्सा डेबिट फंड में और बाकी बचे हिस्से को इक्विटी फंड में रखा जाता है।

बैलेंसड फंड – इस फंड के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की ऐसेट क्लास पर निवेश किया जाता है, जिसमें इक्विटी डेबिट, bonds और सिक्योरिटीज आती है।

मंथली इनकम प्लान – Monthly income plans – इस तरह के म्यूच्यूअल फंड पर म्यूच्यूअल फंड के पैसों का 90% हिस्सा डेबिट फंड पर निवेश किया जाता है जबकि 10% हिस्से को इक्विटी फंड में निवेश किया जाता है। इस तरह से देखा जाए तो मंथली इनकम प्लान में आपको डेबिट मुचल फंड की तुलना में ज्यादा रिटर्न मिलता है। वहीं अगर हम डेबिट म्यूच्यूअल फंड से इसकी तुलना करें तो इसमें रिस्क फैक्टर डेबिट म्यूच्यूअल फंड से कम होता है।

आर्बिट्राज फंड – Arbitrage fund – इस तरह के म्यूच्यूअल फंड स्कीम में म्यूच्यूअल फंड मैनेजर एक स्टॉक मार्केट से कम मूल्य में स्टॉक खरीद करके दूसरे स्टॉक मार्केट पर ज्यादा मूल्य में बेचते हैं। उदाहरण के तौर पर इस तरह के म्यूचल फंड में म्यूचुअल फंड मैनेजर कैश मार्केट से स्टॉक खरीद करके उसे डेरिवेटिव (derivatives) मार्केट में ज्यादा दाम पर बेचते हैं।

ढांचे के आधार पर म्यूच्यूअल फंड के प्रकार – Types of Mutual Bases of Structure

ढांचे के आधार पर भी आप म्यूचल फंड को बांट सकते हैं। इसके अंतर्गत आप ऐसे म्युचुअल फंड को शामिल कर सकते हैं, जिसमें पाबंदी होती है। यानी कि एक सीमित अवधि पर ही आप buy और Sell करते हैं।

  1. ओपन एंडेड स्कीम – Open Ended Scheme
  2. क्लोज एंडेड स्कीम – Close Ended Scheme

ओपन एंडेड स्कीम – Open Ended Scheme :- जैसा किसके नाम से ही यह पता चलता है कि, ओपन एंडेड स्कीम कि निर्धारित समय अवधि नहीं होती है। सालों साल या स्कीम चलती रहती है, जब तक कि फंड खुद रेगुलेशन के अंतर्गत स्कीम को हटा देने या खत्म कर देने का निर्णय नहीं लेता।

आजकल बाजार में प्रयास सभी म्यूच्यूअल फंड को ओपन एंडेड स्कीम के अंतर्गत उपलब्ध कराया जाता है। इस स्कीम में निवेशक को यह सुविधा मिलती है कि वह किसी भी समय उसकी स्कीम में निवेश कर सकता है। प्रत्येक ओपन एंडेड स्कीम जब बाजार में पहली बार लांच की जाती है, तब उसका न्यू फंड ऑफर (NFO) बाजार में आता है। जिसमें निवेश करने के लिए इनिशियल ऑफर पीरियड निर्धारित होती है। Types of Mutual Fund

उस समय यदि निवेशक उस फंड पर निवेश करना चाहता है तो उसे वहां पर फेस वैल्यू (Face Value) के आधार पर दी जाती है। जो इनिशियल पीरियड में ₹10 प्रति यूनिट्स होते हैं। यदि कोई निवेशक बाजार में फंड के सूचीबद्ध होने के बाद निवेश करता है तो उसे यूनिट को नेट ऐसेट वैल्यू पर निवेश कर रहा होता है।

उदाहरण के तौर पर जब रिलायंस ग्रोथ फंड पहली बार बाजार में लांच की गई थी तब ₹10 प्रति यूनिट के आधार पर निवेश को प्राप्त हुई, अगर कुछ ही वर्षों में यदि इस फंड की NAV ₹50 हो जाती है तो नए निवेशक को प्रति यूनिट ₹50 देकर कि इसके यूनिट को खरीदना होगा।

लगभग सभी प्रकार के म्यूच्यूअल फंड स्कीम ओपन एंडेड स्कीम – Open Ended Scheme के अंतर्गत आती है। इस तरह के स्कीम में कभी भी आप खरीद एवं बिक्री (Buy and Sell) कर सकते हैं। इसमें कंपनी बिना किसी सीमा के अपने निवेशक को शेयर यूनिट जारी कर सकती है।

क्लोज एंडेड स्कीम – Close Ended Scheme – क्लोज एंडेड से आप यहां अंदाजा लगा सकते हैं कि इस तरह के म्युचुअल फंड स्कीम में एक निश्चित समय अवधि होती है। इसका जिक्र उस फंड के इनिशियल ऑफर के समय कर दिया जाता है।

हालांकि ऐसा भी होता है कि फंड अपनी अवधि में परिवर्तन कर दें , लेकिन इसके लिए उसे निदेशकों की सहमति तथा नियम के आधार पर पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। क्लोज एंडेड स्कीम में निवेश सकता भी निवेश कर सकता है जब उसका इनिशियल ऑफर प्रेयर्स या उसके न्यू फंड ऑफर (NFO) बाजार में उपलब्ध हो।

एक बार ऑफर पीरियड की समय अवधि बीत जाने के बाद निवेशक उस फंड में निवेश नहीं कर सकता है। वह निवेशक को ऑफर प्रिय में निवेश करते हैं, उसे लंबी अवधि तक रखते हैं। इसीलिए फंड मैनेजर निवेशकों के पैसों को बेहतर ढंग से संचालित कर पाता है।

इस प्रकार की श्रेणी के बहुत ही कम फंड होते हैं। इनमें यूनिट या शेयर की संख्या काफी कम होती है। ओपन एंडेड स्कीम के अंतर्गत जहां पर आप खरीद पर्वत कभी भी कर सकते हैं, वही क्लोज फंड के अंतर्गत आप ऐसा नहीं कर सकते। आप खरीद पर उसकी प्रक्रिया मैच्योरिटी होने के बाद ही कर सकते हैं। लिक्विडिटी कम होने के कारण यह स्कीम उतनी ज्यादा लोकप्रिय भी नहीं है।

निष्कर्ष

आज के हमारे इस लेख में हमने आपको इस बारे में जानकारी दी है कि Types of Mutual Fund – म्यूच्यूअल फंड के प्रकार विस्तृत जानकारी और उन की क्या-क्या विशेषताएं हैं। आप अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से इन बातों का ध्यान करते हुए अपने लिए बेहतर से बेहतर म्यूच्यूअल फंड का चुनाव कर सकते हैं।

अगर आपको Types of Mutual Fund से संबंधित कुछ सवाल है तो आप हमें कमेंट बॉक्स पर कॉमेंट करके पूछ सकते हैं। म्यूच्यूअल फंड पर निवेश करते वक्त आप इस बात का भी ध्यान रखें कि म्यूचुअल फंड जोखिमों के अधीन होती है। इसलिए अपने जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए आप म्यूच्यूअल फंड पर निवेश करें।


Published on अगस्त 7, 2021

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